GST चोरी की पहली कहानी में आपने एक टैक्स कंसल्टेंट और एक फैक्ट्री ओनर की कहानी पढ़ी। दोनों ने GST चोरी के अलग-अलग रास्ते बताए। अब तक हमें GST चोरी के दो तरीके पता चले। अगली मुलाकात जाकिर नाम के एक प्राइवेट कॉन्ट्रेक्टर से होती है। लोकेशन : महिपालपुर, नई दिल्ली वक्त : दोपहर के 1 बजे जाकिर कंस्ट्रक्शन के बिजनेस में है। हमारी उससे फोन पर बात होती है। हम फिर वही एजेंडा दोहराते हैं और नकली बिलों का जिक्र छेड़ते हैं। जाकिर 10 अगस्त को नई दिल्ली के महीपालपुर में मिलने के लिए कहता है। यहीं पर जाकिर का एक बिल्डिंग बनाने का काम डिफेंस क्षेत्र में चल रहा था। भास्कर रिपोर्टर तय जगह पहुंचते हैं। बातचीत की शुरुआत फर्जी GST बिल और इनपुट क्रेडिट को लेकर होती है। इसी दौरान जाकिर एक नया फॉर्मूला बताता है, जिसके जरिए वो और उसके जैसे लोग टैक्स चोरी कर रहे हैं। जाकिर : मान लो एक करोड़ का बिल कटा, 18% का GST, एक करोड़ 18 लाख का बिल हो गया, हमने दे दिया उसके अकाउंट में। रिपोर्टर : कितना? जाकिर : एक करोड़ का बिल कटा, 18% GST हो गया, बिल हो गया 1 करोड़ 18 लाख का। 1 करोड़ 18 लाख आपको उसके अकाउंट में डालना है। 9 लाख वो अपना काटेगा, GST हमें 18 लाख की देगा, लेकिन वो काटेगा केवल 9 लाख। 9 लाख काट के 1 करोड़ 9 लाख हमें दिए। अब उसमें हमें क्या करना, कैसे करना, उसमें हमारे लिए क्या बेनिफिट है। रिपोर्टर : उसने 1 करोड़ 9 लाख दे दिया कैश में? जाकिर : कैश में दे दिया। रिपोर्टर : वो जो 9% ले रहा है, GST डिपेंड करता है कितना है, सीमेंट पर 28% है, सरिया पर 18% है, ये सही बोल रहा हूं न? जाकिर : हां। रिपोर्टर : उसमें कुछ कम कराइए न, तभी तो कुछ बचेगा, ऐसे थोड़ी न कुछ बचेगा। जाकिर : जैसे वो बंदा, उसके पास GST है, वो 18% हमको दे रहा है, ठीक है, और सिर्फ 9% ले रहा है, 9 दे रहा है न, जबकि 18% सरकार में भर रहा है, वो तो 9 लेगा। रिपोर्टर : बिल जहां से उसने चोरी की, वो तो पहले ही कमा चुका उसपे। जाकिर : तो पहले कमा चुका, इसलिए 9% वो रोक रहा है और 9% वो हमें दे रहा है। रिपोर्टर : अगर आप अपनी कंपनी का बिल काटेंगे तो आप उस पर भी कमीशन लेंगे? जाकिर : मैं हर महीने 4-5 बिल काट रहा हूं। मेरे पास आ भी रहा है और जा भी रहा है। हमारे यहां 9% में हो रहा है। रिपोर्टर :आपके जो बिल्डर साहब हैं, दोस्त-यार हैं आपके, वो जो हैं, इनकी अपनी कंपनी है या शेल कंपनी है? जाकिर : नहीं नहीं, अपनी फर्म से, मैं दूसरे का वो नहीं करूंगा। हमारा सिर्फ सोहना और नूह, दो जगह के बिल आपको मिलेंगे, सोहना गुरुग्राम में आता है और नूह जिला अलग पड़ जाता है, दोनों हरियाणा में हैं। रिपोर्टर : ट्रेंड मतलब 9% का चल रहा है? जाकिर : 9% का। रिपोर्टर : किस कंपनी के नाम से काम कर रहे हैं यहां ? जाकिर : सीएस। रिपोर्टर : सीएस कंस्ट्रक्शन? जाकिर : हूं। रिपोर्टर : आपकी अपनी कंपनी है या जॉब करते हैं ? जाकिर : नहीं नहीं, मेरी तो अपनी फर्म है। रिपोर्टर : सीएस? जाकिर : नहीं, मेरा तो जाकिर कंस्ट्रक्शन के नाम से है, सीएस का मैंने काम ले रखा है। रिपोर्टर : मतलब थर्ड पार्टी आप हैं? जाकिर : हां। रिपोर्टर : जो काम कर रहे हैं आप? जाकिर : हां। रिपोर्टर : तो हमें क्या-क्या फॉर्मेलिटीज करनी होगी ? जाकिर : पहले उसमें सिर्फ यह है, जितने का भी बिल कटवाओ, चाहे 50 लाख कटवाओ, एक करोड़ का कटवाओ, जो उसका GST बनेगा वो भरना है, बिल आपको जब मिलेगा, जब GST के ऊपर का आप दे दोगे और कुछ नहीं। रिपोर्टर : GST तो जमा हो जाएगी, उसमें दिक्कत नहीं है? जाकिर : उसे भी देने में कोई दिक्कत नहीं है। रिपोर्टर : हम लोग ये चाह रहे थे, उन्होंने पैसे ट्रांसफर किए, आपने पैसा कैश हाथों-हाथ दिया, ऐसी पॉसिबिलिटी है? जाकिर : हाथों-हाथ नहीं, एक हफ्ते का टाइम लगेगा, कोई भी कैश देने में समय लगेगा, कुछ पड़ा हुआ है तो अलग बात है। अभी तक की हमारी पड़ताल में सामने आया कि जाकिर का तरीका पहले सुने गए दोनों तरीकों से बिल्कुल अलग है। इस बार खेल सिर्फ बिलों का हेरफेर नहीं था। फॉर्मूला कुछ यूं है— मान लीजिए ₹1 करोड़ का बिल 18% GST के साथ काटा गया। खरीदार सप्लायर के बैंक अकाउंट में ₹1.18 करोड़ डाल देता है। कुछ दिनों बाद सप्लायर कैश में करीब ₹1.09 करोड़ वापस लौटा देता है। बीच का ₹9 लाख (करीब 9%) उसका कमीशन होता है। यानी न कोई माल, न कोई असली सप्लाई, बस कागज़ी खेल। खरीदार इस फर्जी बिल से ₹18 लाख का ITC यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट ले लेता है और यही उसकी “कमाई” है। जाकिर ने यहां तक कहा कि कभी-कभी यह सौदा 8% कमीशन पर भी हो जाता है और कैश वापसी में 7–10 दिन का समय लगता है। बिल खरीदने वाले को पैसा कैश में ही मिलेगा… हमारी अब तक की मुलाकातें तीन लोगों से हुई हैं, जिन्होंने अलग-अलग तरीके से GST चोरी के रास्ते बताए। तीनों में एक बात कॉमन है कि, बिल खरीदने वाले को पैसे कैश में वापस मिलेंगे। तीनों मामलों को देखें तो साफ होता है कि यह केवल करोड़ों के टैक्स चोरी का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा कैश फ्लो भी चल रहा है। जैसे, करण ने बताया कि बिल खरीदने वाला पूरे बिल की राशि अकाउंट में ट्रांसफर करेगा और फिर कुछ प्रतिशत काटकर लगभग पूरा पैसा कैश में लौटाया जाएगा। राजीव ने समझाया कि कैश एडजस्ट करने के खर्चे को भी कमीशन के अलावा अलग से देना पड़ता है। आखिर में जाकिर ने बताया कि बिल खरीदने वाला RTGS करेगा और बदले में उसे कैश मिलेगा। सवाल ये है कि अगर 20 करोड़ या 50 करोड़ के फर्जी बिल बन रहे हैं, तो क्या सच में इतना बड़ा कैश ट्रांसफर हो रहा है, या फिर इसके पीछे हवाला रैकेट भी एक्टिव है। रजिस्ट्रेशन वाले दिन से GST चोरी की शुरुआत GST के जानकार सतेंदर अग्रवाल कहते हैं, 'GST चोरी की शुरुआत रजिस्ट्रेशन वाले दिन से होती है। जब कोई बंदा रजिस्ट्रेशन अप्लाई करता है, तो डॉक्यूमेंट प्रॉपर नहीं लगाता। पैन कार्ड किसी और का, बिजली का बिल किसी और का, आधार किसी और का। चोरी यहीं से शुरू होती है।' 'रजिस्ट्रेशन के बाद तैयारी होती है कि बिलिंग कैसे करूं। फेक बिलिंग यहीं से शुरू होती है। फेक इनपुट एडजस्ट करके, आगे बिल काटता है और टैक्स सरकार को जमा नहीं करता। इसके बाद, साल डेढ़ साल या दो साल में बिल काटकर गायब हो जाता है, रिटर्न फाइल नहीं करता। फिर सरकार उसे खोजती रहती है।' राज्य से ज्यादा केंद्र के GST में चोरी होती है वहीं, जीएसटी के पूर्व अधिकारी सैयद हसन मेहदी नकली कहते हैं, 'जब हम कोई चीज खरीदते हैं, तो उसमें इनपुट टैक्स की चोरी के लिए, जिसे GST चोरी भी कहते हैं, बहुत सी फर्जी खरीद–बिक्री दिखाई जाती है, जिसे डिपार्टमेंट में घोषित नहीं किया जाता।' 'नतीजा यह होता है कि जिन लोगों को उन्होंने खरीद दिखाई थी, उन्होंने आईटीसी ले लिया, लेकिन सरकारी खजाने में उसका पैसा नहीं गया। यानी जहां से खरीदा वहां चोरी हुई, और जहां बेचा वहां चोरी हुई। इस तरह से सरकार को दोनों ओर से चूना लगाया गया।' 'ऐसा देखा जाता है कि SGST में कम चोरी होती है और CGST में ज्यादा चोरी होती है। CGST में बारीकी से फॉर्म की जांच नहीं होती, ज्यादातर मामले चोरी के CGST से ही आते हैं।' बिना सप्लाई इनवॉइस काटना अपराध है 7.08 लाख करोड़ रुपए की GST चोरी पकड़ी गई 2020 से 2025 के बीच GST चोरी के कई मामले सामने आए। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि, इन पांच सालों में कुल 7.08 लाख करोड़ रुपए की GST चोरी पकड़ी गई। इसमें से लगभग 1.79 लाख करोड़ रुपए केवल इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की धोखाधड़ी से जुड़े थे। हाल ही में आए GST चोरी के तीन मामले केस स्टडी 1: अंकित बंसल – 704 करोड़ का स्कैम मई 2024, जयपुर की DGGI टीम जब एक छोटी-सी कंपनी "Om Sai Traders" का रिटर्न चेक कर रही थी, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वे भारत के सबसे बड़े GST घोटालों में से एक की परत खोलने जा रहे हैं। जांच में अंकित बंसल का नाम सामने आया। हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला अंकित लोकल स्क्रैप ट्रेडिंग करता था। सिस्टम की कमजोरियों समझने के बाद उसने फर्जी कंपनियों का एक ऐसा जाल बुन दिया जो पूरे देश में फैला हुआ था। बिल तो बनते थे, लेकिन माल कभी भेजा नहीं जाता। A कंपनी से B, B से C और फिर D तक। इन फर्जी इनवॉइस के दम पर 353 कंपनियों ने GST सिस्टम से 704 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले लिया। केस स्टडी 2: विनोद सहाय – 512 करोड़ का फ्रॉड मध्यप्रदेश के जबलपुर के गांव टिबरी के विनोद सहाय ने भी जीएसटी चोरी के जरिए सरकार को करोड़ों की चपत लगाई। लोगों को लोन का झांसा देकर उनके आधार, पैन और बैंक स्टेटमेंट इकट्ठा किए और फिर उन्हीं के नाम पर 23 फर्जी कंपनियां बना डालीं। इन कंपनियों के जरिए विनोद ने 512 करोड़ रुपए का टैक्स क्रेडिट ले लिया। भोपाल, इंदौर, जबलपुर में फैला उसका नेटवर्क इतना मजबूत था कि सालों तक किसी को भनक नहीं लगी। GST नंबर, इनवॉइस सब कुछ फर्जी, पर सिस्टम से पैसे असली निकलते रहे। केस स्टडी 3: तुषार गुप्ता - 15,000 करोड़ का रैकेट दिल्ली का 39 साल का युवक तुषार गुप्ता, देश के सबसे संगठित GST रैकेट का हिस्सा था। तुषार ने 35 फर्जी कंपनियां बनाईं और उनके जरिए सरकार को ₹24 करोड़ का नुकसान पहुंचाया। ये अकेले तुषार का खेल नहीं था, ये एक ₹15,000 करोड़ के महाघोटाले का हिस्सा था, जिसमें अब तक 33 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। तुषार ने फर्जी आधार, पैन और बिलों के जरिए इतनी सफाई से टैक्स क्रेडिट लिया कि सालों तक किसी को शक तक नहीं हुआ। कन्क्लूजन : GST चोरी अब केवल टैक्स सिस्टम की कमजोरी भर नहीं रह गई है, बल्कि यह एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है। हर फर्जी बिल और हर नकली कंपनी के पीछे करोड़ों रुपए का कैश फ्लो छिपा होता है। सवाल यही है कि जब सरकार हर साल हजारों करोड़ की चोरी का पता लगाती है, तो फिर इस पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रही ? भास्कर ने इस मामले में सरकार का पक्ष जानने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस को सवाल ईमेल किए हैं। अभी तक मिनिस्ट्री की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। जैसे ही रिप्लाई आएगा, हम खबर में अपडेट करेंगे। नोट : GST की दरें अब बदल चुकी हैं। 12% और 28% की पुरानी दरों को हटाकर 5% और 18% की दो नई दरें बनाई गई हैं। ये 22 सितंबर से लागू होंगी। ............................................................ इस सीरीज की पहली स्टोरी आप यहां पढ़ सकते हैं 5% कमीशन पर 20 करोड़ का फर्जी GST बिल:न माल, न सप्लाई और लाखों की कमाई; GST माफिया कैमरे पर एक्सपोज दिल्ली का वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया। एक पुरानी और जर्जर सी फैक्ट्री। दीवारों पर जमी धूल, टूटी खिड़कियां और जंग लगी चादरें। बाहर से देखने पर यह किसी बंद पड़े गोदाम जैसी लगती है, जैसे बरसों से यहां कोई काम नहीं हुआ हो, लेकिन जैसे ही टीम अंदर दाखिल होती है, नजारा बदल जाता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें...