2019 में लाडली बहन थी, अब ‘इम्पोर्टेड माल’ हो गई:शाइना बोलीं- BJP से शिवसेना में जाना, जैसे एक घर से दूसरे में गई

1 year ago 6
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'वो (शाइना) जिंदगीभर BJP में रहीं और अब दूसरी पार्टी में चली गईं। यहां ‘इम्पोर्टेड माल‘ नहीं चलता। केवल ओरिजिनल माल चलता है।' शिवसेना (उद्धव गुट) से सांसद अरविंद सावंत का ये विवादित बयान 1 नवंबर को आया था, जब मुंबई की मुंबादेवी सीट से महायुति ने शाइना एनसी को उम्मीदवार बनाया। शाइना एनसी ने न सिर्फ इस पर एतराज जताया, बल्कि FIR भी दर्ज कराई। दैनिक भास्कर से बातचीत में शाइना ने कहा, 'ये वही अरविंद सावंत हैं, जिन्होंने 2014 और 2019 में हमसे अपना प्रचार करवाया था। उस वक्त मैं लाडकी (लाडली) बहन थी। अब 2024 में वो कहते हैं कि मैं इम्पोर्टेड माल हूं।' मुंबई की मुंबादेवी सीट शिवसेना (शिंदे गुट) के खाते में जाने के बाद शाइना ने BJP छोड़कर शिवसेना (शिंदे गुट) जॉइन कर ली। पार्टी ने उन्हें टिकट भी दे दिया। उनके सामने तीन बार से जीत रहे कांग्रेस कैंडिडेट अमीन पटेल चुनाव मैदान में हैं। शाइना एनसी पेशे से फैशन डिजाइनर हैं। वे मुंबई के ग्लैमर वर्ल्ड की चर्चित हस्ती हैं। चुनाव प्रचार के बीच वक्त निकालकर शाइना ने हमसे चुनावी मुद्दे, बाहरी होने के आरोप और अरविंद सावंत के बयान को लेकर बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: मुंबादेवी सीट पर चुनाव के क्या मुद्दे हैं? जवाब: साउथ मुंबई में मुंबादेवी का इलाका सबसे पिछड़ा हुआ है। पिछले 15 साल से आपने एक ही नेता को मौका दिया है। इसके बावजूद उस नेता ने वहां बदलाव लाने वाला कोई काम नहीं किया है। इलाके में कोई भी क्लस्टर रीडेवलपमेंट नहीं किया। इस इलाके में किसी भी योजना पर काम नहीं किया गया, जिससे यहां का डेवलपमेंट हो सके। मैं मानती हूं कि तीन बार एक ही पुरुष लीडर को मौका मिल चुका है। इसलिए अब वक्त आ गया है कि एक महिला लीडर को भी मौका दिया जाए। सवाल: महाराष्ट्र में माझी लाडकी बहन योजना की काफी चर्चा है। क्या महायुति को इसका फायदा मिलता दिख रहा है? जवाब: मैं बहुत ही गर्व के साथ कह सकती हूं कि मुख्यमंत्री लाडकी बहन योजना लाए। ये ऐसी योजना है, जिसका फायदा महाराष्ट्र में ढाई करोड़ महिलाओं को मिला है। सिर्फ मेरे मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र में ही 40 हजार महिलाओं को शिंदे सरकार की इस योजना का फायदा मिला है। इस 40 हजार में से 15 हजार मुस्लिम महिलाएं हैं। जब लोग कहते हैं कि महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर होना चाहिए, तब मुझे लगता है कि महिलाओं का सम्मान बढ़ाने वाली योजना के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को धन्यवाद देना चाहिए। सवाल: अरविंद सावंत के बयान पर विवाद हुआ। उन्होंने आपके बारे में सवाल पूछे जाने पर कहा ये 'इम्पोर्टेड माल' है। आपको क्यों लगता है कि ये आपत्तिजनक बयान है? जवाब: अरविंद सावंत 2014 और 2019 में मोदी जी का नाम लेकर चुनाव लड़े थे। हम सब नेता उनके समर्थन में प्रचार करने के लिए जाया करते थे। उस वक्त मैं एक लाडकी बहन थी। अब 2024 में वो कहते हैं कि मैं एक इम्पोर्टेड माल हूं। इस बयान से उनकी सोच और विचार साफ तौर पर दिखाई देते हैं। उनके बगल खड़े मुंबादेवी के मौजूदा विधायक अमीन अली पटेल हंस रहे थे। मुझे लगा कि मेरे पास दो रास्ते हैं। पहला ये कि मैं चुप रहूं और ये मुद्दा मीडिया में एक रात की डिबेट बने। फिर नेताओं के बीच मुद्दा बनकर रह जाए, लेकिन स्वाभिमानी महिला होने के नाते मैंने दूसरा रास्ता चुना। हम नागपाड़ा पुलिस थाने गए और BNS की धारा 79 और 356 (2) के तहत FIR दर्ज करवाई। ऐसा करने के पीछे हमारा मकसद यही था कि जो महिलाएं देख रही हैं और राजनीति में हैं, वो समझें कि उन्हें चुप रहने की जरूरत नहीं हैं। उन्हें जहां मर्जी है, वहां बोलना चाहिए। 30 घंटे बाद अरविंद सावंत ने माफी मांग ली, लेकिन संजय राउत कहते हैं कि माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है, तो शिवसेना (UBT) और ‘महाविनाश अघाड़ी’ का ऑफिशियल स्टैंड क्या है, उन्हें साफ करना चाहिए। सवाल: अरविंद सावंत का बयान देखें तो उन्होंने इम्पोर्टेड शब्द का इस्तेमाल किया। इससे उनका इशारा था कि आप एक बाहरी उम्मीदवार हैं, क्या ये बात आप मानती हैं? जवाब: हमारे परिवार की तीन पीढ़ियां साउथ मुंबई से ही हैं। मेरे ननिहाल मदनपुरा और नागपाड़ा में मेरी मां की परवरिश हुई। मेरे पिता जी गोंडल के राजपूत हैं, मेरे पति मारवाड़ी जैन राजस्थानी हैं और मेरी मां बोहरा मुस्लिम हैं। मैं इससे ज्यादा मुंबईकर नहीं हो सकती हूं। आदित्य ठाकरे जो कलानगर में रहते हैं और चुनाव वर्ली से लड़ रहे हैं। हालांकि हमें इस पर भी कोई आपत्ति नहीं है। फिर उन्हें क्या आपत्ति हो सकती है कि साउथ मुंबई की बेटी साउथ मुंबई से चुनाव लड़ रही है। ये अफवाहें फैलाना विपक्ष का काम है। सवाल: आप साउथ मुंबई की वर्ली सीट से आदित्य ठाकरे के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन मुंबादेवी सीट से चुनाव लड़ रही हैं। आपको वहां से टिकट क्यों नहीं मिल पाया? जवाब: मैं वर्ली सीट पर लंबे वक्त तक काम कर चुकी हूं, इसलिए वहां से टिकट भी चाहती थी, लेकिन महायुति का नेतृत्व ही तय करता है कि किस सीट से किसे टिकट देना चाहिए। महायुति गठबंधन की ये खूबी है कि कोई भी फैसला चर्चा के बाद ही होता है। वहां से हमारे उम्मीदवार मिलिंद देवड़ा जी को शुभकामनाएं, उन्होंने साउथ मुंबई में सांसद के तौर पर काफी काम किया है। सवाल: कुछ दिन पहले तक आप BJP में थीं। BJP छोड़ने की क्या वजह थी? जवाब: ये सीट BJP के खाते में नहीं थी, ये सीट शिंदे जी की शिवसेना के खाते में थी। महायुति के नेतृत्व ने तय किया, इस सीट पर मुझे चुनाव लड़ना चाहिए। मैं लड़ूंगी तो झांसी की रानी की तरह लड़ूंगी। मां मुंबादेवी का आशीर्वाद मेरे साथ है और यहां की महिलाओं का आशीर्वाद भी मेरे साथ है। सवाल: मतलब BJP से आपकी कोई नाराजगी नहीं है? जवाब: बिल्कुल, मेरी BJP से कोई नाराजगी नहीं है। पार्टी के नेता मेरी हर तरह से मदद भी कर रहे हैं। BJP और शिवसेना को मिला दें तो ये हमारा बड़ा परिवार है। सवाल: भले ही आप महायुति गठबंधन की कैंडिडेट हों, लेकिन अचानक BJP छोड़कर शिवसेना (शिंदे) गुट जॉइन करना और कैंडिडेट बन जाना, आपको नहीं लगता कि ये राजनीति में गलत ट्रेंड सेट करेगा? जवाब: कोई गलत ट्रेंड नहीं है। आप एक परिवार में एक घर से दूसरे घर में जाते हैं। तब भी परिवार एक ही रहता है। विचारधारा एक ही है, लक्ष्य एक ही है, प्रधानमंत्री भी एक ही हैं। हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री ने महिलाओं के लिए जो काम किया, उनको आभार और अभिनंदन। सवाल: आप महिलाओं और उनके मुद्दों का जिक्र कर रही हैं, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स के डेटा के मुताबिक BJP के सबसे ज्यादा उम्मीदवार हैं, जिन पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं? जवाब: कोई भी नेता किसी भी पार्टी का हो, अगर वो महिलाओं के प्रति गलत टिप्पणी करता है, उनका अपमान करता है और उनके खिलाफ अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करे, तो कार्रवाई होनी चाहिए। पार्टी लाइन पर इसे लेकर कोई सोच नहीं है। अगर महिलाओं के साथ कोई गलत करता या बोलता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सवाल: महायुति गठबंधन की सरकार में अभी तो CM एकनाथ शिंदे हैं। अगर महायुति को इस बार भी बहुमत मिला तो क्या फिर सीएम शिंदे ही होंगे या फिर BJP से होगा? जवाब: मैं एक कार्यकर्ता हूं, एकनाथ शिंदे जी ने मुझे एक मौका दिया है। एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता के बारे में पूरी पार्टी और आम लोग जानते हैं। ये फैसला नेतृत्व और वोटर्स लेंगे। सवाल: महाराष्ट्र चुनाव में वैसे तो दो गठबंधनों के बीच लड़ाई है, लेकिन बड़ी पार्टियां कुल 6 हैं। क्या आपको नहीं लगता कि इतनी सारी पार्टियों की वजह से वोटर कन्फ्यूज हो जाएगा? जवाब: कोई कनफ्यूजन नहीं होगा। वोटर जानता है कि कौन कौम के आधार पर वोट मांगता है और कौन काम के आधार पर वोट मांगता है। जो लोग तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं, वो कौम के आधार पर वोट मांगते हैं। मुंबादेवी पर बारी-बारी कांग्रेस-BJP ने दर्ज की जीत साउथ मुंबई की मुंबादेवी विधानसभा सीट का नाम मुंबई की आदि देवी मुंबादेवी के नाम पर पड़ा है। 55% मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर माइनॉरिटी वोटर्स की बड़ी भूमिका है। इस सीट पर बारी-बारी से कांग्रेस और BJP का कब्जा रहा। 1978 में इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव हुआ, जो जनता पार्टी के मोहनलाल पारीख ने जीता। इसके बाद 1980 में BJP के ननुभाई पटेल ने इस सीट से जीत दर्ज की। 1985 में ये सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। इसके बाद 1990 से लेकर 2004 तक BJP के राज के. पुरोहित ने इस सीट पर लगातार चार बार जीत दर्ज की। हालांकि 2009 में सियासी समीकरण बदले और कांग्रेस के अमीन पटेल ने ये सीट जीतकर BJP के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को खत्म कर दिया। 2014 और 2019 में भी कांग्रेस के अमीन पटेल ने ही इस सीट पर अपनी जीत को बरकरार रखा। उन्होंने शिवसेना (शिंदे गुट) कैंडिडेट पांडुरंग सकपाल को 23,655 वोटों से हराया था। अमीन पटेल को 58,952 वोट मिले थे। ...................................... स्टोरी में सहयोग: सृष्टि मिश्रा, भास्कर फेलो ...................................... महाराष्ट्र इलेक्शन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... 1. मिलिंद देवड़ा बोले- सरकार बनी तो 100% शिंदे होंगे CM, कांग्रेस-शिवसेना का गठबंधन ही गलत ‘कांग्रेस और शिवसेना (UBT) का साथ आना ठीक नहीं था। मुझे 2019 में भी पता था कि कन्फ्यूजन होने वाला है। मैंने सलाह दी थी कि ये पूरी तरह गलत गठबंधन है।’ महाराष्ट्र में कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के गठबंधन को गलत बता रहे मिलिंद देवड़ा कभी कांग्रेस का हिस्सा थे। अब शिवसेना (शिंदे गुट) में हैं। इस बार साउथ मुंबई की वर्ली सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। पढ़िए और देखिए पूरा इंटरव्यू... 2. जीशान सिद्दीकी बोले- शिवसेना सेक्युलर नहीं, इसलिए कांग्रेस छोड़ी 'शिवसेना बहुत सारी चीजें कहती है कि हमने बाबरी मस्जिद को गिराया है और दूसरे दिन सेक्युलर बन जाती है। कांग्रेस और शिवसेना में कोई मेल नहीं है।' ये बात कहने वाले जीशान सिद्दीकी NCP (अजित पवार) की टिकट पर बांद्रा ईस्ट से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछला चुनाव इसी सीट से कांग्रेस में रहते हुए जीता था। जीशान के पिता बाबा सिद्दीकी का 12 अक्टूबर को मर्डर हो गया था। पढ़िए और देखिए पूरा इंटरव्यू...
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