2024 ने हमसे कई हस्तियों को छीन लिया। राजनीति से लेकर खेल के मैदान तक, मनोरंजन की दुनिया से लेकर बिलेनियर की दुनिया के कई लोग सिर्फ याद बनकर रह गए। गुजर रहे 2024 की 16 हस्तियों की कहानी, जिनकी कमी हमेशा खलेगी… रतन टाटा
9 अक्टूबर को रतन टाटा का 86 वर्ष की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में निधन। पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित रतन टाटा भारत के सबसे पुराने कारोबारी समूह टाटा संस के मानद चेयरमैन थे। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कोरस स्टील और जगुआर लैंड रोवर जैसी कंपनियों का अधिग्रहण किया। उन्होंने 1991 से 2012 तक टाटा समूह का नेतृत्व किया। आचार्य विद्यासागर
दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज ने शनिवार 17 फरवरी 2024 की देर रात 2:35 बजे शरीर त्याग दिया। वे 78 वर्ष के थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ में अंतिम सांस ली। उन्हें देह त्याग का आभास था, इसलिए 3 दिन से अन्न, जल त्याग दिया था। 6 फरवरी को उन्होंने आचार्य पद का त्याग कर दिया था। उन्होंने मुनि समय सागर जी महाराज को आचार्य पद देने की घोषणा भी कर दी थी। उस्ताद राशिद खान
9 जनवरी को प्रसिद्ध गायक और पद्म भूषण से सम्मानित उस्ताद राशिद खान का निधन 55 साल की उम्र में हुआ। उन्हें कैंसर था। साल 1968 में जन्मे राशिद खान को शुरुआती तालीम अपने नाना निसार हुसैन खान से मिली थी। बचपन में उनका मन गाने में नहीं लगता था, लेकिन फिर उनके मामा गुलाम मुस्तफ़ा ख़ान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और बाद में उन्हें ट्रेनिंग देकर निखारा। 11 साल की उम्र में पहली मंचीय प्रस्तुति देकर राशिद खान ने सबको चौंका दिया था। वो रामपुर-सहसवान घराने के गायक थे। फली सैम नरीमन
21 फरवरी को विधि विशेषज्ञ फली एस नरीमन का 95 की उम्र में निधन हुआ। इन्हें भारतीय न्यायपालिका का भीष्म पितामह कहा जाता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब जापान ने रंगून पर बम बरसाने शुरू कर दिए तो उनके परिजनों ने रंगून से निकलने का फैसला लिया और भाग कर भारत आ गए। तब फली की उम्र 12 साल थी। उन्होंने भारत में कानून की पढ़ाई की और फिर वकालत भी करने लगे। मई, 1972 में भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बनाए गए थे और इस पद पर वे जून, 1975 तक रहे। 26 जून, 1975 को जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया तो फली ने इसके विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। रामोजी राव रामोजी फिल्म सिटी के संस्थापक पद्म विभूषण चेरुकुरी रामोजी राव का 8 जून को हैदराबाद में 87 साल की उम्र में निधन हो गया। रामोजी राव मीडिया के क्षेत्र में बड़ा नाम थे। उन्होंने 1962 में रामोजी ग्रुप की नींव रखी थी, जिसमें हैदराबाद स्थित दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म स्टूडियो रामोजी फिल्म सिटी, उषा किरण मूवीज, मयूरी फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स, मार्गदर्शी चिट फंड और डॉल्फिन ग्रुप ऑफ होटल्स शामिल हैं। रामोजी ETV नेटवर्क के टेलीविजन चैनलों और तेलुगु न्यूजपेपर ईनाडु के भी प्रमुख थे। ओपी चौटाला हरियाणा के पांच बार मुख्यमंत्री रहे ओपी चाैटाला का 20 दिसंबर को कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। वे 89 साल के थे। एक बार सबसे कम समय मुख्यमंत्री रहने वाले ओम प्रकाश चौटाला प्रदेश की राजनीति में कार्यकर्ताओं के बीच काफ़ी लोकप्रिय रहे। हिसार और जिंद इलाकों से लगातार निर्वाचित होने वाले ओपी चौटाला पहले ऐसे सीएम थे जिन्हें जेल भी जाना पड़ा। वे लोकसभा चुनाव लड़ने के अलावा जींद ज़िले की नरवाना विधानसभा सीट से विधायक बनकर मुख्यमंत्री भी बने। उन्होंने जींद ज़िले की उचाना विधानसभा सीट से भी विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। उनके जेल जाने वाले मामले में ख़ास बात यह भी है कि इसमें शिकायतकर्ता को भी उतनी ही सजा हुई जितनी पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को। पंकज उधास मशहूर गजल गायक का 26 फरवरी को 72 साल की उम्र में निधन हो गया। चिट्ठी आई है- उनका सबसे पॉपुलर गीत रहा। गुजरात के सौराष्ट्र जेतपुर में जन्मे पंकज उधास के दादा भावनगर स्टेट के महाराज के डिप्टी दीवान थे। उनके पिता केशुभाई उधास को दिलरुबा (एक तरह का वाद्य यंत्र) बजाना पसंद था। दफ़्तर से लौटकर हर शाम वो दिलरुबा बजाया करते थे और वहीं से पंकज को गायकी और संगीत का चस्का लगा। पंकज के दोनों भाई मनहर उधास और निर्मल उधास गायकी की दुनिया में चले आए। मनहर उधास तो मुंबई आए और वो फिल्मी दुनिया में संघर्ष करने लगे। पढ़ाई खत्म करने के बाद पंकज भी मुंबई आए और उन्होंने सेंट ज़ेवियर्स में एडमिशन लिया। 1972 के ज़माने में उन्होंने संघर्ष के दिनों में अपना पहला फिल्मी गीत उषा खन्ना के संगीत निर्देशन में फ़िल्म ‘कामना’ में गाया था, पर इसके बाद की राह आसान नहीं रही। श्याम बेनेगल फिल्म निर्माता और निर्देशक श्याम बेनेगल का 23 दिसंबर को 90 की उम्र में निधन हो गया। वे किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित थे। 14 दिसंबर 1934 को हैदराबाद में जन्मे बेनेगल ने अर्थशास्त्र में पढ़ाई की। बाद में फोटोग्राफी शुरू कर दी। बॉलीवुड में उन्हें आर्ट सिनेमा का जनक भी माना जाता है। जब वे बारह साल के थे, तब उन्होंने अपने फोटोग्राफर पिता श्रीधर बी. बेनेगल के दिए गए कैमरे पर अपनी पहली फिल्म बनाई थी। उनके परिवार में पत्नी नीरा बेनेगल और बेटी पिया बेनेगल हैं। श्याय बेनेगल ने जुबैदा, द मेकिंग ऑफ द महात्मा, नेताजी सुभाष चंद्र बोसः द फॉरगॉटेन हीरो, मंडी, आरोहन, वेलकम टु सज्जनपुर जैसी दर्जनों बेहतरीन फिल्मों को डायरेक्ट किया। उस्ताद जाकिर हुसैन 16 दिसंबर को महान तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन का 73 साल की उम्र में अमेरिका में निधन हो गया। इसी साल उन्होंने तीन ग्रैमी अवॉर्ड जीते थे। 1951 में जन्मे ज़ाकिर हुसैन की गिनती महान तबला वादकों में की जाती है। उन्हें 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से नवाज़ा गया था। द बीटल्स सहित कई पश्चिमी संगीतकारों के साथ प्रस्तुति के लिए भी उनकी ख्याति रही है। हुसैन को अपने करियर में चार ग्रैमी पुरस्कार मिले हैं, जिनमें इस साल की शुरुआत में 66वें ग्रैमी समारोह में मिले तीन पुरस्कार भी शामिल हैं। सीताराम येचुरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी का 19 अगस्त को 72 साल की उम्र में निधन हो गया। निमोनिया की शिकायत होने के बाद उन्हें 19 अगस्त को AIIMS दिल्ली में भर्ती कराया गया था। 25 दिन से उनका इलाज चल रहा था। परिवार ने अस्पताल को CPI(M) नेता की बॉडी डोनेट की है। वे तीन बार पार्टी के महासचिव रहे थे। शारदा सिन्हा 5 नवंबर को लोक गायिका शारदा सिन्हा का 72 की उम्र में निधन हुआ। 1974 में शारदा सिन्हा ने पहली बार भोजपुरी गीत गाया था। 1991 में उन्हें पद्मश्री और 2018 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। शारदा सिन्हा ने कई भाषाओं में गाने गाए। वे भोजपुरी, मैथिली, और मगही गीतों के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने छठ, शादी, मुंडन, जनेऊ, विदाई, और श्रद्धांजलि जैसे कई तरह के गीत गाए। मुनव्वर राणा 14 जनवरी को दिल का दौरा पड़ने से मुनव्वर राणा का निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे। मुनव्वर राणा का जन्म 26 नवंबर 1952 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के एक गांव में हुआ था। विभाजन के दौरान उनके परिवार के ज्यादातर लोग पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन उनके पिता ने भारत में रहने का फैसला किया था। नटवर सिंह
10 अगस्त को पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। नटवर सिंह ने पाकिस्तान में राजदूत के रूप में भी काम किया और 1966 से 1971 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यालय से जुड़े रहे। अंशुमान गायकवाड़
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीम इंडिया के हेड कोच रहे अंशुमान गायकवाड़ का 31 जुलाई को 71 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। अंशुमान गायकवाड़ दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर के ओपनिंग पार्टनर थे। उन्हें सुनील गावस्कर का 'राइट हैंड' कहा जाता था। गायकवाड़ डिफेंसिव तकनीक के बैटर थे। उन्हें 'द ग्रेट वॉल' भी कहा जाता था। बुद्धदेव भट्टाचार्य
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और CPI (M) नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य का 8 अगस्त 2024 को निधन हो गया। पूर्व CM बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थे। उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत थी। उन्होंने 80 साल की उम्र में कोलकाता स्थित घर पर अंतिम सांस ली। भट्टाचार्य ने CPI (M) की सरकार में 2000 से 2011 तक, 11 साल बंगाल CM का पद संभाला। सुशील कुमार मोदी
बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी का 13 मई को निधन हो गया। वे 72 साल के थे। सुशील ने गले में दर्द की शिकायत पर जांच कराई थी, जिसमें कैंसर का पता चला था। इसके बाद से दिल्ली एम्स में उनका इलाज चल रहा था। सुशील मोदी बिहार में 70 के दशक के जेपी आंदोलन से राजनीति में आए थे। इसके बाद RSS से जुड़े रहे।