35 दिन, 12 राज्य; 30 BLO की मौत, मुआवजा जीरो:800 फॉर्म का टारगेट, अबतक 9 सुसाइड; परिवार बोले- चुनाव आयोग ‘डांस’ देख रहा

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'उस दिन लगा मैं जिंदा नहीं लौट पाऊंगी। मैं रायबरेली के पाल्हीपुर गांव में SIR फॉर्म भरवाने गई थी। गांव के प्रधान दीपक यादव और उनके पिता कृष्णा यादव आए और फॉर्म छीन लिए। बोले कि तुम लोग गांव के वोट काट रहे हो।' 'प्रधान ने फॉर्म फाड़ दिया, गालियां दीं और मुझे मारने के लिए दौड़े। गांव वाले मुझे बचाने लगे। इससे प्रधान और भड़क गया। घर से बंदूक लाया और मेरे ऊपर तान दी। मैं डर से कांप रही थी। लोगों की मदद से जान बचाकर निकल पाई।' 35 साल की बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ आरती यादव खुद को खुशकिस्मत मानती हैं कि जान बच गई। राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 4 नवंबर से SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चल रहा है। लगातार फील्ड वर्क, देर रात तक डेटा अपलोड करना और प्रेशर की वजह से देशभर में 8 दिसंबर तक 30 बीएलओ की मौत हो चुकी है। इनमें 9 सुसाइड हैं। सबसे ज्यादा 9 बीएलओ की मौत मध्यप्रदेश में हुई है। यूपी में 7, गुजरात में 6, बंगाल में 4, राजस्थान में 2 और तमिलनाडु-केरल में एक-एक मौत हुई है। मौत की वजह सुसाइड, ब्रेन हेमरेज और हार्ट अटैक सामने आई हैं। आरती यादव के मामले ने सिक्योरिटी का मसला उजागर कर दिया। दैनिक भास्कर ने SIR के दौरान मरने वाले बीएलओ के परिवारों से बात की। उनसे जाना कि वे किस तरह का प्रेशर झेल रहे थे। परिवार के लोग इससे भी नाराज हैं कि बीएलओ प्रेशर में सुसाइड कर रहे हैं और चुनाव आयोग डांस के वीडियो पोस्ट कर रहा है। सर्वेश सिंह भगतपुर टांडा इलाके के गांव जाहिदपुर-सिकंदरपुर कंपोजिट स्कूल में सहायक अध्यापक थे। बहेड़ी गांव में पत्नी बबली और चार बेटियों कनिष्का, नैंसी, माही और रूही के साथ रहते थे। सर्वेश 7 अक्टूबर को BLO बनाए गए थे। 29 नवंबर की रात सर्वेश ने परिवार के साथ खाना खाया और सोने चले गए। सुबह पत्नी बबली की आंख खुली, तो सर्वेश घर पर नहीं थे। उनकी डेडबॉडी भूसे की कोठरी में फंदे से लटकती मिली। एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें लिखा था, 'मैं जीना तो चाहता हूं, पर क्या करता, मुझे बहुत बेचैनी और घुटन हो रही है। डरा महसूस कर रहा हूं। मेरी बेटियां बहुत मासूम हैं, उनका ख्याल रखना। मैं पहली बार BLO बना था। अगर समय ज्यादा होता तो शायद इस काम को पूरा कर देता।' सर्वेश की पत्नी बबली कहती हैं, ‘मेरे पति स्कूल के हेड मास्टर थे, लेकिन उन्हें BLO बना दिया गया। उन पर SIR के काम का बहुत लोड था। वे देर रात तक काम करते थे। फिर भी अधिकारी लगातार प्रेशर बना रहे थे।’ 4 नवंबर से SIR की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यूपी में अब तक 7 BLO की मौत हो चुकी है। इनमें 3 सुसाइड, तीन हार्ट अटैक और एक ब्रेन हेमरेज की वजह से हुई है। जाहिदा बेगम 19 नवंबर की शाम दिनभर डोर-टु-डोर SIR वेरिफिकेशन का काम करके घर लौटीं। पति मुबारक के साथ खाना खाया। थोड़ी देर बाद फॉर्म अपलोडिंग का काम शुरू किया। इसी बीच मुबारक काम से बाहर चले गए। लौटे तो जाहिदा की डेडबॉडी छत से लटकी थी। कमरे में SIR फॉर्म बिखरे पड़े थे। मुबारक बताते हैं, ‘जाहिदा को फंदे पर लटका देख मैंने रिश्तेदारों और पुलिस को खबर दी। जाहिदा नवंबर की शुरुआत से SIR वेरिफिकेशन का काम कर रही थी। उसे 4 दिसंबर तक 800 फॉर्म अपलोड करने का टारगेट मिला था। घर पर स्लो इंटरनेट की वजह से सिर्फ 80 फॉर्म जमा कर पाई थी।’ मुबारक के मुताबिक, जाहिदा ने बताया था कि वो इस काम से परेशान हो चुकी है। उस पर इतना प्रेशर था कि वो न ठीक से खाना खा पा रही थी, न सो पा रही थी। दो से तीन घंटे ही सो पाती थी। अधिकारी काम में तेजी लाने का दबाव बना रहे थे। इससे परेशान होकर उसने सुसाइड कर लिया। पश्चिम बंगाल में SIR प्रोसेस शुरू होने के बाद रिंकू तरफदार को BLO का काम दिया गया था। परिवार का आरोप है कि रिंकू पर काम समय से पूरा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इससे वे परेशान रहने लगी थीं। इसी दबाव के कारण उन्होंने फांसी लगा ली। सुसाइड नोट में रिंकू ने मौत के लिए इलेक्शन कमीशन को जिम्मेदार बताया है। रिंकू के बेटे अरिक्तो कहते हैं, ‘मम्मी 2 महीने पहले ही बीएलओ बनी थीं। ये काम पढ़ने-पढ़ाने से एकदम अलग था। वे परेशान रहती थीं। इलेक्शन कमीशन की ओर से कोई भी नया नोटिफिकेशन आने पर घबरा जाती थीं। मम्मी ने इतने साल एक सेट पैटर्न में बच्चों को पढ़ाया था। इस उम्र में आकर कुछ नया सीखना थोड़ा मुश्किल था। उन्होंने फील्ड का सारा काम लगभग कर लिया था। उन्हें बस डेटा अपलोड करने में परेशानी हो रही थी।' ‘SIR के काम के लिए मम्मी को रोज 18 किमी दूर जाना पड़ता था। उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म अपलोडिंग में आ रही दिक्कत के बारे में BDO से शिकायत की थी, ताकि उन्हें काम से हटा दिया जाए। वे नहीं माने और नौकरी छोड़ने के लिए कहने लगे।' 'मम्मी इतना थक चुकी थीं कि उन्होंने तुरंत नौकरी छोड़ने के लिए हामी भर दी, लेकिन उन्हें कहा गया कि नौकरी छोड़ने से पहले काम पूरा करके देना पड़ेगा।’ अनीश जॉर्ज केरल के 25 हजार से ज्यादा BLO में से थे, जिन पर SIR के फॉर्म भरवाने और उनका डेटा फीड करने की जिम्मेदारी थी। कन्नूर जिले के एट्टुकुडुक्का गांव में रहने वाले 41 साल के अनीश जॉर्ज पय्यान्नूर के एक स्कूल में हेल्पर थे। 16 नवंबर को घर में उनकी डेडबॉडी मिली थी। अनीश के पिता जॉर्ज बताते हैं, ‘मेरे बेटे ने BLO का काम अच्छी तरह से किया। वो सुबह-सुबह फॉर्म भरवाने के लिए निकल जाता और देर शाम तक घर आता। उसे हर दिन 100 फॉर्म भरवाने के लिए कहा गया था। इसके लिए दूर-दूर गांवों में जाकर लोगों को ढूंढने में दिक्कत हो रही थी। इसी तनाव में उसने खुद को खत्म कर लिया।’ अनीश की मौत के अगले दिन 17 नवंबर को केरल के सभी BLO ने काम बंद कर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के ऑफिस के सामने धरना दिया। उनकी मांग थी कि डेली टारगेट 100 फॉर्म से घटाया जाए, ताकि काम का बोझ कम हो। SIR प्रक्रिया के दौरान BLO की मौत का पहला मामला मध्यप्रदेश में हुआ था। 6 नवंबर को BLO श्याम सुंदर शर्मा फील्ड विजिट पर निकले थे। सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। अब तक राज्य में 9 मौतें हो चुकी हैं। श्याम सुंदर शर्मा की मौत के कुछ दिन बाद 23 नवंबर को नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में गर्ल्स स्कूल में सहायक अध्यापक सुजान सिंह रघुवंशी ट्रेन की चपेट में आ गए। वे SIR सर्वे करके घर लौट रहे थे। उनके दोनों पैर जख्मी हो गए। घायल हालत में उन्हें भोपाल के बंसल हॉस्पिटल ले जाया गया। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सुजान सिंह के परिवार का आरोप है कि SIR का काम करते हुए सुजान काफी परेशान रहते थे। हर दिन टारगेट पूरा करने का दबाव रहता था। काम अधूरा रह जाता था तो BDO और सीनियर अधिकारी सस्पेंड करने की धमकी देते थे। चुनाव आयोग मौतों और मुआवजे पर चुप, डांस करते BLO के वीडियो पोस्ट किए नवंबर के पहले हफ्ते से 12 राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया में देशभर से 5,32,828 BLO और 12,43,201 BLA यानी बूथ लेवल एजेंट काम कर रहे हैं। 30 BLO की मौत और राज्यों में हो रहे विरोध-प्रदर्शन पर अब तक चुनाव आयोग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। आयोग ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो जारी किए हैं, जिसमें BLO अपने बिजी शेड्यूल में डांस ब्रेक लेते दिख रहे हैं। केरल का एक वीडियो 30 नवंबर को शेयर किया गया था। इस वीडियो पर बीएलओ आरती यादव के पति दीप सिंह यादव कहते हैं, ‘चुनाव आयोग SIR में लगे बीएलओ के मौज-मस्ती वाले वीडियो डाल रहा है। ये अच्छी बात है, लेकिन उसे दूसरे पक्ष को भी समझना होगा।' बीएलओ किस तरह डिप्रेशन से गुजर रहे हैं। लोगों से फॉर्म भरवाने के लिए घरों से लेकर खेतों तक जाना पड़ता है। इतना ज्यादा काम है कि घर लौटते-लौटते रात के 11 बज जाते हैं। 2 अगस्त 2025 को चुनाव आयोग ने नोटिफिकेशन जारी किया कि BLO का वेतन 6 हजार रुपए से बढ़ाकर 12 हजार रुपए कर दिया है। सुपरवाइजर का मेहनताना 12 हजार रुपए से बढ़ाकर 18 हजार रुपए कर दिया है। हालांकि BLO की मौत और उनके परिवार की दी जा रही मदद पर आयोग ने कुछ नहीं कहा है। SIR प्रक्रिया के दौरान BLO-BLA की मौत पर हमने 5 और 6 दिसंबर को चीफ इलेक्शन कमिश्नर के ऑफिस में कॉन्टैक्ट किया। हमें बताया गया कि आप सवाल ईमेल कर दीजिए। दैनिक भास्कर ने 5 सवाल चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को मेल के जरिए भेजे हैं। फिलहाल, उनकी तरफ से जवाब नहीं आया है। जवाब आते ही खबर में अपडेट किया जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल 1. SIR प्रक्रिया के दौरान 30 BLO-BLA कर्मचारियों की मौत हुई है, क्या आयोग पीड़ित परिवारों को मुआवजा देगा? 2. वर्कलोड को देखते हुए क्या BLO-BLA का वेतन और बढ़ाया जाना चाहिए? 3. BLO दूरदराज के इलाकों में अकेले फॉर्म भरवा रहे हैं, इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? 4. आगे ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए चुनाव आयोग क्या कर रहा है, क्या वर्कलोड मैनेजमेंट के लिए कोशिश की जा रही है? 5. SIR पर विपक्ष हमलावर है, कई राज्यों में इसका बहिष्कार भी हो रहा है। क्या आने वाले समय में आयोग SIR को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर सकता है? एक्सपर्ट बोले- जल्दबाजी ठीक नहीं, हर 10 साल पर SIR करवाए आयोग देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया पर पॉलिटिकल एनालिस्ट कुमार भवेश चंद्र कहते हैं, ‘चुनाव से पहले SIR करवाने का कोई मतलब नजर नहीं आता। इसे हर 10 साल में करवाना चाहिए। इस प्रोसेस को जितना टाइम दिया जाएगा, उतनी ही इसकी विश्वसनीयता बढ़ेगी। इसके दो फायदे होंगे।’ पहला: पूरी पारदर्शिता के साथ बिना जल्दबाजी किए वोटर वैरिफिकेशन हो सकेगा। दूसरा: BLO और ग्राउंड पर काम कर रहे कर्मचारियों पर दबाव कम होगा। ‘चुनाव आयोग ये जानता है कि उसके पास ऐसी प्रक्रिया करवाने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इसे देखते हुए वो सरकारी कर्मचारियों खासकर टीचरों को ये काम सौंपता है। इससे स्कूलों पर भी असर पड़ता है। पढ़ाई रुक जाती है। ये सब ध्यान में रखकर ऐसी प्रक्रिया लागू करनी चाहिए।’ तनाव बढ़ाने वाले काम के लिए 2 घंटे की ट्रेनिंग काफी नहीं सीनियर जर्नलिस्ट शरत प्रधान कहते हैं, ‘राज्यों में फिलहाल SIR की कोई खास जरूरत नहीं दिखती। यूपी में 2027 में चुनाव है, लेकिन यहां अभी से SIR प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। BLO पर इतना दबाव है कि देशभर से सुसाइड के मामले सामने आ रहे हैं। उन पर बेवजह प्रेशर डालने के लिए FIR तक दर्ज हो रही हैं। ये एक तरह से शोषण है।’ SIR पर पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं… कांग्रेस: SIR कोई सुधार नहीं, थोपा गया जुल्म SIR को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग ने ऐसा सिस्टम बनाया है, जिसमें नागरिकों को खुद को तलाशने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची के हजारों स्कैन पन्ने पलटने पड़ें। मकसद साफ है, सही मतदाता थककर हार जाए और वोट चोरी बिना रोक-टोक जारी रहे। SIR के नाम पर देशभर में अफरा-तफरी मचा रखी है। SIR कोई सुधार नहीं, थोपा गया जुल्म है। सपा: BLO पर जानलेवा दबाव हटाए चुनाव आयोग सपा प्रमुख अखिलेश यादव कहते हैं, ‘यूपी में कितने प्रतिशत SIR हुआ है, इसका आंकड़ा पब्लिश किया जाए। BLO पर जानलेवा दबाव हटाकर अतिरिक्त लोगों को डेडलाइन देकर इस काम में लगाया जाए। यूपी में SIR फॉर्म भरवाने के दौरान हर विधानसभा में PDA समाज के कितने लोगों को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश की जा रही है, हर हाल में इसकी जांच-पड़ताल होनी चाहिए। BJP: SIR ने गलत वोटिंग नेटवर्क खत्म किया BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन राजीव चंद्रशेखर कहते हैं, ‘बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की जबरदस्त जीत से साफ हो गया है कि SIR ने फर्जी वोटर्स हटाने में बड़ा काम किया है। SIR की वजह से गलत वोटिंग नेटवर्क खत्म हुआ है, पहले जिन फेक वोटरों की मदद से कांग्रेस और दूसरे दल चुनाव जीतते थे। उनका इस प्रक्रिया ने पर्दाफाश किया है।’ SIR से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... पश्चिम बंगाल SIR में 39 मौतों की वजह क्या पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल में चुनाव होने हैं। इसलिए यहां SIR की वजह से ज्यादा कंट्रोवर्सी है। सरकार चला रही TMC का दावा है कि SIR के दौरान राज्य में 39 मौतें हो चुकी हैं। इनमें 4 बीएलओ हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। कोलकाता के धर्मतल्ला में पार्टी की रैली में ममता ने कहा कि SIR के डर से लोग जान न दें, किसी का भी नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटेगा। पढ़िए पूरी खबर...
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