60% मुस्लिम वोटर्स वाले हैदराबाद में ओवैसी अजेय:BJP को माधवी से गेम पलटने की उम्मीद, AIMIM विधायक बोले- हमारे सामने बच्ची हैं

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तारीख: 10 फरवरी, 2024, दिन: शनिवार, वक्त: दोपहर के 2 बजकर 20 मिनट। संसद में बजट सेशन के आखिरी दिन राम मंदिर निर्माण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की बारी आई तो वे बोले- मेरा मानना है कि मस्जिद अभी भी मौजूद है और उसी जगह पर रहेगी, जहां हुआ करती थी। बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी। बाबरी मस्जिद जिंदाबाद...भारत जिंदाबाद...जय हिंद।' असदुद्दीन ओवैसी अब संसद में खड़े होकर लगाए नारे चुनावी रैलियों में याद दिला रहे हैं। 3 मार्च को हैदराबाद में उन्होंने लोगों से कहा- आपको याद है न संसद में किसने बाबरी जिंदाबाद कहा था। वो भी कह सकते थे, लेकिन नहीं कह पाए। 17 सीटों वाले तेलंगाना में 13 मई को वोटिंग होनी है। 40 साल से ओवैसी परिवार का गढ़ हैदराबाद सबसे हॉट सीट है। BJP ने यहां से हिंदुत्व का चेहरा बनीं माधवी लता को टिकट दिया है। BJP हो या AIMIM, दोनों का 'धर्म की राजनीति' पर फोकस है। AIMIM माधवी लता को कमजोर कैंडिडेट मानकर चल रही है। आखिर हैदराबाद के चुनाव में 'धर्म' कितना बड़ा फैक्टर है, वोटर्स क्या सोचते हैं, ये जानने दैनिक भास्कर हैदराबाद पहुंचा। पहले जान लीजिए हैदराबाद में कौन सी पार्टी कितनी मजबूत है... AIMIM: लगातार 10 बार ओवैसी परिवार से ही सांसद, इस बार भी सबसे मजबूत हैदराबाद सीट पर 1984 से 2019 तक के लोकसभा चुनाव में ओवैसी परिवार को कोई हरा नहीं पाया। असदुद्दीन ओवैसी के पिता सलाहुद्दीन ओवैसी 6 बार हैदराबाद से चुनाव लड़े और हर बार जीते। उनके बाद से असदुद्दीन ओवैसी जीत रहे हैं। असदुद्दीन 2004 से सांसद हैं। हर बार उनकी जीत का अंतर पिछली बार से ज्यादा रहा है। 2019 में उन्होंने BJP कैंडिडेट डॉ. भगवंत राव को 2.82 लाख वोट से हराया था। हैदराबाद में AIMIM के अजेय रहने की वजह BJP: बढ़ते वोट शेयर से पार्टी कॉन्फिडेंट, पर हैदराबाद में कभी जीती नहीं हैदराबाद लोकसभा सीट से BJP कभी नहीं जीती। हालांकि, पार्टी यहां नंबर दो पर रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने डॉ. भगवंत राव को ओवैसी के खिलाफ उतारा था। ओवैसी को 5,17,471 और भगवंत राव को 2,35,285 वोट मिले थे। 2014 के चुनाव में ओवैसी को 5,13,868 और भगवंत राव को 3,11,414 वोट मिले थे। बीते 10 साल से BJP ने तेलंगाना में पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी थी। विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर 7% से 15% तक बढ़ गया है। इस बार ओवैसी के सामने BJP ने माधवी लता पर दांव खेला है। माधवी हिंदुत्व वाली छवि की वजह से लाइमलाइट में रहती हैं। हैदराबाद में तीन तलाक प्रथा के विरोध में कैंपेन चला चुकी हैं। वह पसमांदा मुस्लिम महिलाओं के बीच और ओल्ड सिटी में पॉपुलर हैं। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के लिए बैंक भी बनाया है। इससे वे उनके बच्चों की शादी और इलाज में मदद करती हैं। हैदराबाद जीतने के लिए BJP इसलिए जोर लगा रही BRS: हैदराबाद में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी, इस बार वोट% बढ़ाने का टारगेट BRS ने ओवैसी के खिलाफ हैदराबाद के सोशल वर्कर गद्दाम श्रीनिवास यादव को टिकट दिया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में AIMIM और BJP के बाद TRS तीसरे नंबर पर थी। उसे 7.2% वोट मिले थे। गद्दाम श्रीनिवास हैदराबाद की मुस्लिम बस्तियों में जाकर वोट मांग रहे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि 2019 के मुकाबले इस बार उसका वोट शेयर बढ़ेगा। कांग्रेस: चुनाव से पहले ही AIMIM के लिए सॉफ्ट कॉर्नर तेलंगाना में सरकार चला रही कांग्रेस ने आखिरी बार 1980 में हैदराबाद सीट जीती थी। 1984 से 2019 तक पार्टी ने कैंडिडेट्स उतारे, लेकिन हर बार हार मिली। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने मोहम्मद फिरोज खान को टिकट दिया, लेकिन उन्हें सिर्फ 49,944 वोट मिले थे। पार्टी यहां चौथे नंबर पर थी। तेलंगाना में नॉमिनेशन फाइल करने की आखिरी तारीख 25 अप्रैल है और अब तक कांग्रेस ने कैंडिडेट का ऐलान नहीं किया है। लोकसभा चुनाव से पहले ओवैसी तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी को RSS का एजेंट बताते थे लेकिन ईद की इफ्तार पार्टी के दौरान दोनों नेता बहुत आत्मीयता से मिले। रेवंत रेड्डी ने कहा कि हैदराबाद सीट पर ओवैसी और उनके विधायक जीतते आ रहे हैं। मैं भी उन्हें नहीं हरा पाया। विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद हमने सोचा कि AIMIM को साथ लेकर हैदराबाद का विकास करेंगे। CM के इस बयान से चर्चा शुरू हो गई है कि कांग्रेस हैदराबाद सीट खाली छोड़ देगी। ओल्ड सिटी में 8 लाख गैर-मुस्लिम वोटर्स बीजेपी के लिए एडवांटेज हैदराबाद सीट पर 19 लाख वोटर्स में 8 लाख गैर-मुस्लिम हैं। इनमें यूपी और राजस्थान के मारवाड़ी समुदाय के लोग हैं। इन्हें BJP अपनी ताकत मानती है। हैदराबाद की गोशामहल और मालकपेट विधानसभा में गैर-मुस्लिम समुदाय के सबसे ज्यादा लोग रहते हैं। इनमें से ज्यादातर पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। ज्यादातर लोग हार्डवेयर और प्लंबिंग का काम करते हैं। इन्हीं वोटर्स की बदौलत विधानसभा चुनाव में गोशामहल सीट BJP ने जीती थी। यहां से टी राजा सिंह विधायक हैं। गैर मुस्लिम वोटर्स को साधने के लिए PM मोदी नवंबर 2023 और फिर मार्च 2024 में हैदराबाद न्यू टाउन से ओल्ड सिटी तक रोड शो कर चुके हैं। एक्सपर्ट बोले- BJP का हिंदू कार्ड काम नहीं करेगा हैदराबाद के सबसे बड़े उर्दू अखबार ‘द सियासत डेली’ के संपादक आमिर अली हैदराबाद के चुनावी गणित पर कहते हैं, ‘यहां BJP ने राम मंदिर और हिंदुत्व का मुद्दा उठाने की कोशिश की है। लोकसभा चुनाव हो या नगर निगम चुनाव, अमित शाह खुद चारमीनार के पास भाग्य लक्ष्मी मंदिर आकर कहते हैं कि हैदराबाद में रोहिंग्या मुसलमान घुस गए हैं। हालांकि ऐसा कोई मुद्दा नहीं है।' आमिर अली कहते हैं, 'चाहे कोई भी चुनाव हो BJP की यहां पोलराइजेशन की कोशिश रहती है। सच तो यह है कि साउथ इंडिया में ध्रुवीकरण, राम मंदिर, हिंदू-मुस्लिम, बीफ और दाढ़ी-टोपी जैसे मामलों की राजनीति नहीं चलती।’ ‘हैदराबाद में BJP की तैयारी देखकर लगता है कि वे चुनाव में इंट्रेस्टेड नहीं हैं। नॉर्थ इंडिया में AIMIM पर इल्जाम लगता है कि वो BJP की B टीम है। उसी तरह BJP भी हैदराबाद में जानबूझकर ओवैसी के खिलाफ कोई मजबूत कैंडिडेट नहीं खड़ा करती।’ ‘इस बार भी पार्टी ने माधवी लता को उतारा है। वे कमजोर कैंडिडेट हैं। अगर उनकी जगह पार्टी टी. राजा सिंह को चांस देती तो हम कह सकते थे कि मुकाबला कड़ा है, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं दिख रहा है।’ चुनाव पर पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रही हैं BJP: माधवी लता बोलीं- लोगों के पास खाने तक के पैसे नहीं हैदराबाद में सांसद ओवैसी के काम के बारे में पूछने पर BJP कैंडिडेट माधवी लता कहती हैं, ‘40 साल तक ओवैसी परिवार ने हैदराबाद की जनता के लिए कोई काम नहीं किया। आप पुराने शहर जाएंगे तो देखेंगे कि वहां रहने वाले लोगों के पास 4-5 दिन का राशन तक नहीं होता। इसी से समझ सकते हैं कि वहां रहने वाले लोगों के लिए ओवैसी ने क्या किया है।’ हैदराबाद सीट पर 60% मुस्लिम वोटर हैं, आप कैसे जीतेंगी? माधवी जवाब देती हैं, ‘जब मैं हैदराबाद की पसमांदा मुसलमान महिलाओं के साथ काम करती हूं तो क्या इसका ये मतलब है कि मैं पूजा-पाठ करना बंद कर दूं। मैं मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को खाना खिलाती हूं, तो क्या मैं मंदिर जाना बंद कर दूं।’ AIMIM: MLA बोले- माधवी अभी बच्ची हैं, AIMIM की सुनामी में खो जाएंगी AIMIM के सीनियर लीडर और चारमीनार विधानसभा सीट से MLA मीर जुल्फिकार अली कहते हैं, ‘हैदराबाद की अवाम ने BJP को हमेशा मुंहतोड़ जवाब दिया है। इस सीट पर PM मोदी से लेकर अमित शाह आए। RSS-VHP, यहां तक कि वेंकैया नायडू से लेकर कई दिग्गज नेता लड़े, लेकिन सबको शिकस्त मिली। इस बार भी भाजपा की कैंडिडेट माधवी लता की वही हालत होने वाली है।’ ‘भाजपा नेता यहां की जनता की मदद के लिए कभी आगे नहीं आए। अब चुनाव नजदीक आ रहा है तो तरह-तरह के ढकोसले कर रहे हैं। माधवी AIMIM के आगे बच्ची हैं। 13 मई के बाद ऐसी सुनामी आएगी कि वो कहां चली जाएंगी, किसी को पता नहीं चलेगा।' BRS: कैंडिडेट बोले- ओवैसी मेरे लिए मामूली चुनौती BRS कैंडिडेट गद्दाम श्रीनिवास कहते हैं, ‘हैदराबाद में ओवैसी मेरे लिए साधारण चुनौती हैं। उनके परिवार के लोग 40 साल से यहां सांसद हैं, लेकिन यहां विकास नहीं हुआ। इसलिए हम जनता के बीच KCR सरकार के 10 साल के काम लेकर जा रहे हैं। BRS पार्टी ने हैदराबाद के लोगों तक डबल बेडरूम घर, रायथु बंधु, शादी मुबारक और कल्याण लक्ष्मी जैसी अच्छी योजनाए पहुंचाई हैं। इन्हीं स्कीम्स को देखकर जनता एक बार फिर हमें मौका देगी।” BJP कैंडिडेट माधवी लता के बारे में श्रीनिवास कहते हैं, ‘माधवी BJP की पैराशूट कैंडिडेट हैं। असल जिंदगी में वे आर्टिस्ट हैं। अभी चुनाव में भी रोल अदा कर रही हैं। 13 मई के बाद लापता हो जाएंगी।’ श्रीनिवास आगे कहते हैं, ‘कांग्रेस चुनाव से पहले ही AIMIM के आगे घुटने टेक चुकी है। CM रेवंत हार से इतना डर गए हैं कि उन्होंने ओवैसी के खिलाफ कैंडिडेट ही खड़ा नहीं किया। BJP भी इंटर्नली AIMIM की दोस्त है। मैं अकेला हिंदू हूं, जो ओवैसी के खिलाफ हैदराबाद से लड़ रहा हूं।’ कांग्रेस: वाइस प्रेसिडेंट बोलीं- मोदी-शाह 100 बार हैदराबाद आ जाएं, BJP नहीं जीतेगी तेलंगाना की पूर्व मंत्री और कांग्रेस की वाइस प्रेसिडेंट पुष्पलीला कहती हैं, ‘मोदी के रोड शो का हैदराबाद में असर नहीं दिखा। अमित शाह और जेपी नड्डा यहां 10 बार नहीं 100 बार भी आएंगे तो भी फर्क नहीं पड़ेगा। उन्हें यहां के लोग बाहरी लीडर मानते हैं।’ आखिर में हैदराबाद के लोगों की बात... लोग बोले- बैरिस्टर साहब और माधवी के बीच मुकाबला तो है गोशामहल विधानसभा एरिया में काम करने वाले कमल कहते हैं, ‘ओवैसी परिवार ने डेवलपमेंट तो किया है, पर उतनी तेजी से नहीं किया जितना होना चाहिए था। मोदी पूरे देश में विकास कर रहे हैं। यही हम हैदराबाद के लिए चाहते हैं। इसलिए इस बार BJP को मौका देंगे।’ यहीं मिले सुमित कहते हैं, ‘BJP देश में अच्छा काम कर रही है, लेकिन हैदराबाद में उसका जीतना मुश्किल है। यहां मुस्लिम वोटर्स की संख्या ज्यादा है और वे ओवैसी को सपोर्ट करते हैं। इस सीट पर धर्म की राजनीति चलती है, इसीलिए ये सीट ओवैसी के लिए रिजर्व सीट बन गई है। यहां उन्हें हराना मुश्किल है।’ गोशामहल से आगे बेगमबाजार इलाका है। यहां रेडीमेड कपड़ों और हैदराबादी बिरयानी की कई दुकानें हैं। बेगमबाजार में रहने वाले शेख सिद्दीकी बिजनेसमैन हैं। वे कहते हैं, ‘ओवैसी साहब हैदराबाद ही नहीं, पूरे हिंदुस्तान के मुसलमानों के लिए लड़ रहे हैं। वही हमारी आवाज पार्लियामेंट में उठा रहे हैं। वहां दूसरे भी नेता हैं, पर उनकी बोलने की हिम्मत नहीं होती।’ चारमीनार के बाजार में कपड़े का स्टॉल लगाने वाले तौफीक कहते हैं, ‘हैदराबाद में जीतेंगे तो ओवैसी ही। माधवी लता के खिलाफ चुनाव वन साइडेड मैच है। ओवैसी ने हमें 24 घंटे कारोबार करने की फैसिलिटी दी है। रमजान में भी हमारा ख्याल रखा। इस बार असद साहब को 6 लाख से ज्यादा वोट मिलेंगे।’ मीर चौक पर ट्रैवल्स का बिजनेस करने वाले शेख सईद कहते हैं, 'हैदराबाद के लोगों का विश्वास है कि AIMIM के आने के बाद से यहां बदलाव हो रहा है। ओवैसी परिवार ने गरीबों के लिए अस्पताल बनवाए जहां फ्री इलाज होता है, गरीब बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल बनवाए, ओवैसी साहब ने बैंक भी खुलवाया, जहां कम ब्याज पर लोन मिलता है। लोग उन्हें पसंद करते हैं।’ ........................................... स्टोरी में सहयोग: उदित शर्मा ............................................ तेलंगाना से ये खबरें भी पढ़िए...
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