प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 भाई-बहन हैं। 17 महीने पहले उनकी मां हीराबेन मोदी का निधन हुआ। जब हीराबेन जिंदा थीं, तो मोदी उनसे मिलने घर जाया करते थे। तब मां के सिवा परिवार का कोई सदस्य वहां मौजूद नहीं होता था। 2021 में मोदी की भतीजी सोनल मोदी ने एक मीडिया इंटरव्यू में दावा किया- 'नरेंद्र मोदी जब भी अपनी मां से मिलने आते हैं, तो परिवार के लोगों को हटा दिया जाता है। ये उनका फैसला है। हमें दुख होता है कि हम उनसे नहीं मिल पाते, लेकिन हम उनके फैसले का सम्मान करते हैं।' प्रधानमंत्री के परिवार से जुड़ा एक और किस्सा है। दरअसल PM के बड़े भाई, सोमाभाई मोदी वडनगर में एक वृद्धाश्रम चलाते हैं। एक बार पुणे में वृद्धाश्रम का एक कार्यक्रम था। सोमाभाई वहां मौजूद थे। कार्यक्रम संचालक ने मंच से एलान कर दिया कि सोमाभाई हमारे प्रधानमंत्री के बड़े भाई हैं। इतना सुनते ही सोमाभाई नाराज हो गए। उन्होंने मंच से कहा- 'मेरे और नरेंद्र के बीच एक पर्दा है। जिसे आप नहीं देख सकते, लेकिन मैं देख सकता हूं। नरेंद्र मेरा छोटा भाई है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी से मेरा कोई वास्ता नहीं है। प्रधानमंत्री के लिए, मैं देश के 130 करोड़ लोगों में से एक हूं और कुछ नहीं।' परिवार और परिवारवाद को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का ये स्टैंड है। वे परिवारवाद को लेकर विपक्ष पर हमेशा से हमलावर रहे हैं। इस चुनाव में भी उन्होंने परिवारवाद को मुद्दा बनाया है। आज का ‘यक्ष प्रश्न’- क्या वाकई BJP में परिवारवाद नहीं है? साल 1984, इंदिरा गांधी की हत्या के करीब दो महीने बाद लोकसभा चुनाव हुए। देशभर में कांग्रेस के प्रति सहानुभूति की लहर थी। 4 साल पहले यानी, 1980 में जनसंघ से बनी BJP का यह पहला लोकसभा चुनाव था। BJP हर सीट पर मजबूत दावेदार की तलाश में जुटी थी। ग्वालियर राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बड़ी बेटी वसुंधरा राजे को BJP ने भिंड से चुनावी मैदान में उतारा। 1971 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट से विजयाराजे सिंधिया जनसंघ की टिकट पर चुनाव जीत चुकी थीं। उन्हें बेटी की सीट सेफ लग रही थी। इसी बीच वसुंधरा राजे के भाई माधवराव सिंधिया की एंट्री हुई। अपनी बहन के खिलाफ उन्होंने दतिया राजघराने के कृष्ण सिंह जूदेव को कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारा। वसुंधरा राजे की तरह उनका भी यह पहला चुनाव था। एक तरफ वसुंधरा के चुनाव प्रचार की कमान विजयाराजे सिंधिया ने संभाली, तो दूसरी तरफ कृष्ण सिंह की चुनावी कमान माधवराव सिंधिया के हाथों में थी। कृष्ण सिंह कई बार जनसभाओं में भावुक हो जाते थे। ऐसा ही एक किस्सा दतिया के किला चौक का है। यहां वे भीड़ के सामने रो पड़े। उन्होंने कहा- 'पहली बार चुनाव में हूं... दतिया राजघराने की इज्जत आपके हाथों में है।' वसुंधरा राजे 87 हजार वोट से चुनाव हार गईं। BJP के लिए लोकसभा चुनाव में शायद यह पहला मौका था, जब किसी राजनीतिक परिवार से आने वाले को टिकट मिला। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला भी BJP की टिकट पर लड़ीं और सांसद भी बनीं। तारीख 27 जून 2023, जगह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल। PM मोदी ने कहा- ‘अगर गांधी परिवार के बेटे-बेटी का विकास करना हो, तो कांग्रेस को वोट दीजिए। मुलायम सिंह जी के बेटे का भला करना हो, तो सपा को वोट दीजिए। लालू परिवार के बेटे-बेटियों का भला करना चाहते हैं, तो राजद को वोट दीजिए। शरद पवार की बेटी का भला करना हो, तो NCP को वोट दीजिए। अब्दुला परिवार का भला करना हो, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस का वोट दीजिए वोट दीजिए... लेकिन अपने बेटे-बेटी का भला करना हो, तो BJP को वोट दीजिए।’ करीब 10 महीने बाद यानी, 3 मार्च 2024, जगह पटना का गांधी मैदान। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव ने कहा- ‘ये मोदी क्या है...कोई चीज है क्या मोदी। ये नरेंद्र मोदी आजकल परिवारवाद पर हमला कर रहे हैं। अरे भाई, तुम बताओ न कि तुम्हें कोई संतान क्यों नहीं हुआ? ज्यादा संतान होने वाले लोगों को बोलता है कि तुम्हारी पार्टी में परिवारवाद है।’ अगले दिन यानी, 4 मार्च 2024, जगह तेलंगाना। PM मोदी ने कहा- 'मैं जब भी परिवारवाद की राजनीति की बात करता हूं, तो विपक्ष के लोग कहते हैं कि मोदी का तो कोई परिवार ही नहीं है।' इसके बाद BJP के तमाम नेताओं ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल बदल ली और अपने नाम के आगे 'मोदी का परिवार' लगा दिया। प्रधानमंत्री बनने से पहले भी मोदी परिवारवाद का मुद्दा उठाते रहे हैं। 2 अप्रैल 2014 की बात है। BJP के PM कैंडिडेट नरेंद्र मोदी एक चुनावी रैली के लिए झारखंड के पलामू पहुंचे थे। मोदी ने भीड़ से कहा- ‘कांग्रेस मां-बेटे की पार्टी है। सपा बाप-बेटे और बहू की पार्टी है। राजद पति-पत्नी की पार्टी है और जेएमएम बाप-बेटे की पार्टी है। अब वंशवादी शासन को खत्म करने का वक्त आ गया है।’ 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी के भाषणों में परिवारवाद, वंशवाद, शहजादा… सबसे कॉमन वर्ड रहे। तकरीबन हर रैली में उन्होंने परिवारवाद पर कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियों को घेरा। करीब 10 साल बाद, 5 फरवरी 2024, लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए PM मोदी ने कहा- ‘देश ने जितना परिवारवाद का खामियाजा उठाया है, खुद कांग्रेस ने भी यह खामियाजा उठाया है। एक ही प्रोडक्ट को बार-बार लॉन्च करने के चक्कर में कांग्रेस की दुकान पर ताला लगने की नौबत आ गई है।’ BJP के 442 कैंडिडेट में से 110 राजनीतिक परिवार से BJP इस लोकसभा चुनाव में 442 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इनमें 110 कैंडिडेट ऐसे हैं, जिनके परिवार का कोई न कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड रहा है। यानी, BJP के हर चौथे उम्मीदवार का कनेक्शन परिवारवाद से है। इनमें से करीब 70% दूसरी पीढ़ी से हैं और करीब 25% पहली पीढ़ी से। वहीं, कांग्रेस में करीब 30% उम्मीदवार राजनीतिक परिवार से हैं। यानी, हर तीसरा। यूपी में अखिलेश यादव के परिवार के पांच लोग चुनावी मैदान में हैं। जबकि बिहार में लालू यादव की दो बेटियां चुनाव लड़ रही हैं। BJP के साथ 10 से ज्यादा ऐसी पार्टियां, जिन्हें परिवार चलाता है प्रधानमंत्री और BJP लगातार परिवारवाद पर हमलावर रहे हैं। अजीब विडंबना है कि इस चुनाव में BJP ने 10 से ज्यादा ऐसी पार्टियों के साथ गठबंधन किया है, जो उनकी नजर में पारिवारिक पार्टी हैं। यानी, जिस पार्टी पर एक खास परिवार का वर्चस्व रहा है। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों में इन्हीं परिवारवादी पार्टियों के साथ सरकार भी चला रही है। इससे पहले भी ऐसी पार्टियों के साथ जाने में BJP ने गुरेज नहीं किया है। 2015-2017 तक BJP जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार में रही। 2019 से 2024 तक BJP, हरियाणा में दुष्यंत चौटाला की पार्टी के साथ सरकार में रही। महाराष्ट्र में BJP लंबे समय तक शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ती रही और सरकार में भी शामिल रही। 2024 लोकसभा चुनाव में BJP ने 10 से ज्यादा मुख्यमंत्रियों के बेटे-बेटियों को टिकट दिया है। इनमें से कुछ मंत्री कांग्रेस या दूसरी पार्टियों से रहे हैं, लेकिन उनके बेटे-बेटियां अब BJP से चुनाव लड़ रहे हैं। जैसे पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी तीन बार केरल के मुख्यमंत्री रहे। BJP ने उनके बेटे अनिल एंटनी को पथानामथिट्टा से चुनावी मैदान में उतारा है। यहां उनका मुकाबला कांग्रेस के एंटो एंटनी से है, जो लगातार तीन बार से चुनाव जीत रहे हैं। 2019 लोकसभा में BJP ने 437 उम्मीदवार उतारे थे। इसमें से 303 कैंडिडेट्स जीतकर आए। इनमें से 22% पॉलिटिकल फैमिली से ताल्लुक रखते थे। ज्यादातर केंद्रीय मंत्री भी बने। फिलहाल अनुराग ठाकुर, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे केंद्रीय मंत्री का संबंध पॉलिटिकल फैमिली से है। BJP में पूर्व प्रधानमंत्रियों का कुनबा भी शामिल पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कुनबे के कई लोग BJP में हैं। सिद्धार्थ नाथ सिंह, आंध्रप्रदेश में BJP के सह चुनाव प्रभारी हैं। शास्त्री के पोते विभाकर और नाती अशोक शास्त्री भी BJP में हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर, BJP से राज्यसभा सांसद हैं। एक और पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के पोते एनवी सुभाष भी BJP में हैं। पिता का टिकट काटा, बेटे को उतारा चुनावी मैदान में BJP नेता बृजभूषण सिंह उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से सांसद हैं। बृजभूषण पर कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहने के दौरान महिला पहलवानों के साथ यौन शोषण करने के आरोप हैं। दिल्ली की राउज ऐवन्यू कोर्ट में एक जून से उन पर मुकदमा चलेगा। बृजभूषण को लेकर विपक्ष लगातार BJP पर हमलावर था। कई बार महिला पहलवानों ने धरना भी दिया था। यहां तक कि कुछ पहलवान बृजभूषण के विरोध में हरिद्वार में गंगा नदी में अपना मेडल प्रवाह करने भी चले गए थे। इसी बीच 2 मई 2024 को BJP ने कैसरगंज से बृजभूषण का टिकट काटकर उनके बेटे करण सिंह को मैदान में उतार दिया। बृजभूषण 6 बार सांसद रह चुके हैं। उनके बड़ा बेटा प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर से BJP का विधायक है। बृजभूषण सिंह के बेटे को टिकट मिलने के बाद महिला पहलवान साक्षी मलिक ने सोशल मीडिया पर लिखा- ‘देश की बेटियां हार गईं, और बृजभूषण जीत गए।’ क्या वाकई BJP में परिवारवाद नहीं है... इसी साल फरवरी में लोकसभा में PM ने अपने परिवारवाद का मतलब समझाया। उन्होंने कहा- ‘परिवारवाद मतलब- जो पार्टी, परिवार चलाता है। जो पार्टी, परिवार के लोगों को प्राथमिकता देती है। जहां पार्टी के सारे फैसले परिवार के लोग ही लेते हैं। वह परिवारवाद है।' PM ने आगे कहा- 'अगर किसी परिवार में अपने बलबुते और जनसमर्थन से एक से ज्यादा लोग राजनीतिक में आते हैं, तो हम इसे परिवारवाद नहीं कहते हैं। न राजनाथ सिंह की कोई पॉलिटिकल पार्टी है और न अमित शाह की। एक परिवार के 10 लोग राजनीति में आएं, इसमें कुछ भी बुरा नहीं है। मैं स्वागत करता हूं।’ तभी विपक्षी खेमे से आवाज उठी- LJP, अकाली दल…? PM मोदी टोकते हुए बोलते हैं- ‘हम भी चाहते हैं कि आप इस पर चर्चा कीजिए। लोकतंत्र के लिए परिवारवादी पार्टी की राजनीति... हम सब की चिंता का विषय होना चाहिए। ये पक्का है कि इसके बाद इसका बेटा पार्टी का अध्यक्ष होगा। ये नहीं, तो इसका बेटा होगा...। ये लोकतंत्र के लिए खतरा है।’ BJP नेताओं की तीन-तीन पीढ़ियां राजनीति में है : नवीन जोशी, पॉलिटिकल एक्सपर्ट लंबे समय से यूपी की राजनीति को कवर कर रहे सीनियर जर्नलिस्ट नवीन जोशी बताते हैं, ‘परिवारवाद लोकतंत्र की सबसे खतरनाक चीज है। प्रधानमंत्री का बेटा-बेटी प्रधानमंत्री नहीं होना चाहिए। किसी पार्टी के अध्यक्ष का बेटा-बेटी पार्टी अध्यक्ष नहीं होना चाहिए। कांग्रेस 150 साल पुरानी पार्टी है। उसका अपना इतिहास रहा है। उसमें एक परिवार का वर्चस्व रहा है। अब BJP भी उसी रास्ते पर है। PM मोदी का भले ही किसी पॉलिटिकल फैमिली से कनेक्शन नहीं है, लेकिन BJP के दर्जनों नेताओं की तीन-तीन पीढ़ियां राजनीति में हैं। 30-40 साल बाद BJP की भी वही स्थिति हो जाएगी, जो कांग्रेस की है।’ PM ने परिवारवाद की परिभाषा बदल दी है : रशीद किदवई, सीनियर जर्नलिस्ट पॉलिटिकल एनालिस्ट और सीनियर जर्नलिस्ट रशीद किदवई लिखते हैं- ‘मैं तो कहूंगा कि BJP में एक चौथाई परिवारवाद है। ये अलग बात है कि प्रधानमंत्री ने परिवारवाद की परिभाषा बदल दी है। उनका कहना है कि परिवारवाद से लोग आएं, तो कई दिक्कत नहीं है, लेकिन परिवार जब, दल विशेष की राजनीतिक धरोहर पकड़ ले तब परेशानी है। मुझे लगता है कि ये परिवारवाद की गलत परिभाषा है।’ परिवारवाद में कांग्रेस से पीछे नहीं है BJP : राहुल वर्मा, रिसर्च फेलो सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के फेलो राहुल वर्मा बताते हैं, ‘परिवारवाद किस पार्टी में नहीं है। कांग्रेस का सौ-डेढ़ सौ साल का इतिहास है, लंबे समय तक एक परिवार का व्यक्ति सुप्रीम पोजिशन पर बैठा रहा, तो परिवारवाद दिखता है, लेकिन BJP इससे पीछे नहीं है। इसमें भी अभी 25% ऐसे नेता हैं, जिनका बैकग्राउंड पॉलिटिकल फैमिली से है। CSDS के प्रोफेसर अभय दुबे बताते हैं, ‘परिवार की वजह से न कोई पार्टी हारती है और न कोई पार्टी जीतती है। हां ये राजनीतिक केंद्र का बहस जरूर है। जनता किसी को परिवारवाद के नाम पर वोट नहीं देती है। यह वोटरों को प्रभावित भी नहीं करता है।’ वे कहते हैं, ‘परिवारवाद हर सेक्टर में है। डॉक्टर से लेकर एडवोकेट तक... हर जगह परिवार के लोग होते हैं। राजनीति में परिवारवाद होना चाहिए या नहीं, इस पर सिर्फ बहस हो सकती है। कांग्रेस इसलिए नहीं चुनाव हार रही है कि उनमें परिवारवाद है और BJP इसलिए नहीं जीत रही है कि उनमें परिवारवाद नहीं है।’ PM जिन पार्टियों को परिवारवादी कहते हैं, उन्हीं के साथ सरकार बनाते हैं- अजय राय, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय बताते हैं, ‘BJP, कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाती है। आपको मैं BJP के परिवारवाद का दर्जनों नाम गिनवा सकता हूं। कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री रहे, उनके बेटे राजवीर सिंह BJP से चुनाव लड़ रहे हैं। अभी यूपी में जो बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह हैं, वो राजवीर सिंह के बेटे हैं। यानी, लगातार तीन पीढ़ी राजनीति में है। इसी तरह केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और उनका बेटा पंकज सिंह। केसी नाथ त्रिपाठी के बेटे नीरज त्रिपाठी। सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज। गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे… ये परिवारवाद नहीं है, तो और क्या है।’ अजय राय कहते हैं- ‘PM मोदी बार-बार कहते हैं कि परिवारवाद देश और लोकतंत्र के लिए खतरनाक है, लेकिन वे अपनी पार्टी के परिवारवादी नेताओं को लेकर कुछ नहीं कहते।' यूपी के मुजफ्फरनगर के रहने वाले विजय पाल कहते हैं, ‘BJP दूसरे दलों पर परिवारवाद का आरोप लगाती रहती है, लेकिन सबसे बड़ा परिवारवाद तो BJP में है।’ देवबंद के रहने वाले मामूर हासन कहते हैं, ‘कांग्रेस की तरह BJP भी परिवारवाद के रास्ते पर है। परिवार से किसी के ऊपर आरोप लगता है, तो BJP उसके बेटे को टिकट दे देती है। अगर BJP में परिवारवाद हावी नहीं होता, तो टिकट काटकर दूसरे उम्मीदवार को देती। एक ही परिवार को बार-बार टिकट क्यों देना।’ 'यक्ष प्रश्न' सीरीज की ये स्टोरीज भी पढ़िए : 1. बागी हिमंत मिलने पहुंचे, राहुल कुत्ते से खेलते रहे:आज नॉर्थ-ईस्ट के 6 राज्यों में BJP की सरकार; भाजपा ने कैसे किया उलटफेर 2. इंदिरा को जेल से छुड़वाने के लिए प्लेन हाईजैक: सोनिया के लिए पिस्टल तानी; क्या गांधी परिवार बिना कांग्रेस कुछ नहीं 3. क्या मायावती UP से खत्म हो गईं:पिता से बगावत, BJP के समर्थन से 3 बार CM बनीं; आज सिर्फ 1 विधायक यक्ष प्रश्न सीरीज के आठवें एपिसोड में 03 जून यानी, सोमवार को पढ़िए- अब लेफ्ट सिर्फ केरल में ही क्यों है... ग्राफिक्स : अंकित द्विवेदी