BJP ने 30 SC बहुल सीटों पर लगाए 45000 कार्यकर्ता:अंबेडकर-संविधान पर जोर, दलित बोले- वो बताएं आज तक हमें क्या दिया

1 year ago 8
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'दिल्ली में 30 सीटें ऐसी हैं, जहां कम से कम 15% दलित वोटर हैं। इन सीटों के लिए हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, पंजाब और यूपी से 30 सीनियर लीडर बुलाए गए हैं। ये BJP के चुनावी कैंपेन के लिए काम कर रहे हैं।’ दलबीर सिंह BJP में पदाधिकारी हैं और राजेंद्र नगर सीट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनकी बातों से साफ है कि BJP का दलित वोटर्स वाली सीटों पर ज्यादा फोकस है। दलितों के हिसाब से मुद्दों की लिस्ट बनाई जा रही है। बूथ लेवल पर 45 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता काम कर रहे हैं। हालांकि BJP की इस कोशिश का जमीन पर कितना असर है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर दलित बस्तियों में भी पहुंचा। त्रिलोकपुरी में रहने वाले सोनू को इन कोशिशों से खास फर्क नहीं पड़ता। वे कहते हैं, ’अंबेडकर को भारत रत्न दिया, भारत का सम्मान हुआ। हमें तो कुछ नहीं मिला।’ प्रेमवती का भी यही मानना है, वे कहती हैं, ‘न BJP ने कुछ किया, न ही किसी और सरकार ने कुछ किया। सब आते हैं, फार्म भरवाते हैं और चले जाते हैं। कोई भी देता कुछ नहीं है।’ वहीं, सीमापुरी की पुष्पा देवी इसे सियासत बताते हुए कहती हैं, ’सरकार तो केजरीवाल की ही बननी चाहिए।’ दिल्ली में 70 सीटों पर 5 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं। दिल्ली में करीब 18% यानी 44 लाख दलित वोटर्स है। BJP की इन्हें साधने की कवायद का बहुत असर नहीं दिख रहा। इस चुनाव में BJP की क्या स्ट्रैटजी है? उसकी दलित वोटरों पर फोकस की वजह क्या है, उन्हें साधने का प्लान और उसका कितना असर है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… दलित सीटों पर BJP के सम्मेलन-अभियान, लेकिन वोटर्स पर असर नहीं देश में 6 महीने पहले लोकसभा चुनाव हुए। तीसरी बार NDA की बहुमत वाली सरकार बनी, लेकिन BJP बहुमत से चूक गई। BJP को 'संविधान के लिए खतरा' बताने का विपक्ष का दांव काम कर गया। 84 दलित सीटों में से BJP सिर्फ 30 सीटें ही जीत सकी। 2019 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले पार्टी ने 3% दलित वोट गंवा दिए। BJP दिल्ली विधानसभा चुनाव में विरोधी पार्टी को ऐसा कोई मौका नहीं देना चाहती है। वो दलितों को साधने के लिए इस बार हर जतन कर रही है। BJP के दिल्ली के मुख्य चुनावी प्लान में अंबेडकर भी हैं और संविधान भी। पार्टी अनुसूचित जाति बहुल विधानसभा विस्तारक अभियान चला रही है। वहीं, दलितों को एकजुट करने के लिए हर मंडल में अनुसूचित जाति सम्मान सम्मेलन भी कर रही है। हालांकि जब इन सम्मेलनों को लेकर हमने त्रिलोकपुरी में रहने वाले सोनू से बात की, तो वे कहते हैं, 'BJP अंबेडकर की तस्वीर वाले पर्चे तो बांट रही है। सम्मेलन भी किया, लेकिन मैं नहीं गया। अंबेडकर के ही दल के हम भी हैं, हमें तो कुछ नहीं मिला।' वहीं जिस अंबेडकर को सम्मान देकर BJP दलितों का दिल जीतना चाहती है, उन अंबेडकर से सीमापुरी की रहने वाली प्रेमवती अनजान हैं। वे हंसते हुए कहती हैं, ‘मैं छह साल से कहीं नहीं गई। मैं किसी के बारे में कुछ जानती नहीं।’ अब दिल्ली में दलितों का गणित समझिए BJP दिल्ली में दलितों पर इतना जोर क्यों दे रही? BJP में हमारे सोर्स ने बताया कि दिल्ली में करीब 18% यानी करीब 44 लाख दलित वोटर हैं। इन्हें साधने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया है। आगे वो हमें समझाते हैं कि ये मास्टर प्लान कैसे बना है? इसे बनाने के लिए माइक्रो लेवल पर पार्टी की स्ट्रैटजी क्या रही? फर्स्ट स्टेज: 'BJP के दलित मोर्चा ने दिल्ली की 12 रिजर्व सीटों के अलावा 18 सीटों को लिस्ट किया। इस काम में मध्यप्रदेश, यूपी, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और पश्चिम बंगाल के सीनियर लीडर और कार्यकर्ता भी शामिल रहे। सबसे पहले उन 18 सीटों की पहचान की गई, जिनमें 15% से ज्यादा दलित आबादी है।' सेकेंड स्टेज: हमारे सोर्स बताते हैं, 'हर बूथ से हमें दलित वोटर्स की जानकारी जुटानी थी। लिहाजा बूथों का सर्वे हुआ। दलित बहुल 30 सीटों में करीब 5,600 बूथ हैं। इसमें वो बूथ तलाशे गए, जिनमें 30% से ज्यादा दलित वोटर हैं। ऐसे 1,970 बूथ मिले। जैसे- मादीपुर में कुल 145 बूथ हैं, जिसमें 62 बूथों में 50% से ज्यादा दलित आबादी है।' 'अब इन बूथों में से समाज के कुछ जागरूक लोग तलाशे गए। इनमें मंदिर के पुजारी, डॉक्टर, सोशल वर्कर और कुछ युवा शामिल किए गए। यानी वो वर्ग, जो लोगों के कॉन्टैक्ट में सबसे ज्यादा रहते हैं। हमने हर बूथ में ऐसे 10 लोगों की टीम बनाई। फिर इन्हें पार्टी से जोड़ा गया।' इन्हें अपने बूथ के लोगों तक पार्टी का संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई। ये लोग अपने बूथ में अब तक 19,000 से ज्यादा लोगों से कॉन्टैक्ट कर चुके हैं। वे आगे कहते हैं, 'मंदिर और चर्चों की भी गिनती की जा रही है, ताकि वो ठिकाने तलाशे जा सकें, जहां हमें दलित वोटर एकजुट मिल सकें। इन जगहों को पार्टी चर्चा का ठिकाना बनाएगी।' आखिर चर्च क्यों? जवाब मिला, 'दिल्ली के वो दलित जिन्हें कन्वर्ट किया जा चुका है, वो भी तो हमारे ही वोटर हैं।' BJP के 30 सीटों पर 90 लीडर और 45,000 कार्यकर्ता राजेंद्र नगर सीट से BJP के पालक पदाधिकारी दलबीर सिंह कहते हैं, ’दलित बहुल 30 सीटों पर हमारा पूरा फोकस है। इन सीटों पर चुनाव प्रचार और उसकी निगरानी 4 हिस्सों में बांटी गई है।’ 1. विधानसभा प्रवासी संयोजक 2. विधानसभा विस्तारक 3. विधानसभा पालक 4. हर बूथ में 10-12 कार्यकर्ता ’ये चारों लेयर चुनाव प्रचार में जुटी हुई है। इन पर निगरानी रखने के लिए भी एक सिस्टम बनाया गया है। विधानसभा संयोजक के ऊपर राष्ट्रीय स्तर का एक पदाधिकारी (ऑब्जर्वर) होगा, जो इनके काम पर नजर रखेगा।’ दलबीर आगे बताते हैं, ’इनके बाद 30 विधानसभा विस्तारक और 30 विधानसभा पालक हैं। यानी 30 सीटों पर 90 लीडर काम करेंगे। इसके बाद मंडल, शक्तिकेंद्र और फिर बूथ स्तर के कार्यकर्ता अलग होंगे। दिल्ली में 1,970 बूथ ऐसे हैं, जिनमें 30% से ज्यादा दलित हैं। उनमें हर बूथ पर 15 लोगों की टीम होगी। यानी कुल 29,550 कार्यकर्ता सिर्फ इन दलित बहुल सीटों पर होंगे।’ ’वहीं, बाकी दलित बूथों पर 10-10 कार्यकर्ताओं की टीम काम कर रही है। अगर 30 सीटों का गणित निकालें तो कार्यकर्ताओं की संख्या 45,000 से ज्यादा निकलेगी। वहीं, BJP के चुनावी कैंपेन के लिए अलग-अलग राज्यों से करीब 500 सीनियर लीडर अगले दो महीने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।’ मेनिफेस्टो के लिए बन रही दलितों के मुद्दों की लिस्ट BJP की मेनिफेस्टो को लेकर क्या तैयारी है? इसमें दलितों के मुद्दों को कितनी जगह मिलने वाली है? ये समझने के लिए हमने दिल्ली में पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष मोहन लाल गिहरा से बात की। वे कहते हैं, 'इस बार हम 12 रिजर्व सीटों में से 9-10 सीटें जीतने वाले हैं। ये भी मुमकिन है कि ये सभी सीटें जीत जाएं।' इतना भरोसा कैसे है? BJP इस बार दलितों के लिए ऐसा क्या कर रही है? इसके जवाब में गिहरा कहते हैं, 'देश के दलितों के लिए मोदी सरकार ने बहुत काम किया है। हमारे कार्यकर्ता दिल्ली में हर विधानसभा और बूथ में दलितों के बीच जा रहे हैं। उनके घर चाय पर चर्चा कर रहे हैं।' क्या अब तक कोई लिस्ट तैयार हुई? गिहरा हां में जवाब देते हुए बताते हैं, ‘सीवर का पानी सड़क पर बह रहा और घरों में घुस रहा है। पीने का पानी गंदा आ रहा है। बच्चों की एजुकेशन और हायर एजुकेशन को लेकर दिल्ली सरकार के किए गए वादे अब भी अधूरे हैं।’ ’बुजुर्गों की पेंशन रुकी हुई है। AAP सरकार 5 लाख तक मुफ्त इलाज वाली आयुष्मान योजना का फायदा दिल्ली वालों को नहीं देने दे रही। उसकी जगह अब संजीवनी योजना देने की बात कर रही है।’ हमने इसे लेकर दलित बस्तियों के लोगों की राय जानी। त्रिलोकपुरी में रहने वाले अनिल कहते हैं, 'मैं सफाई कर्मचारी नहीं हूं, लेकिन गली की नालियों से कचरा हमें खुद निकालना पड़ता है। सीवर लबालब भरे रहते हैं। यहां सफाई का यही हाल है।’ पुरानी सीमापुरी दलित बस्ती में रहने वाले राकेश कहते हैं, ‘बच्चों का स्कूल में एडमिशन तो फ्री हुआ, लेकिन किताबें नहीं मिलतीं। दो साल से छात्रवृत्ति भी नहीं आई।' ​​दलितों के बीच BJP चलाएगी पोल खोल अभियान दिल्ली की AAP सरकार के खिलाफ BJP पोल खोल अभियान चलाएगी। ये कैंपेन दलितों के बीच चलाया जाएगा। इनमें क्या मुद्दे होंगे और उन्हें लोगों के बीच किस तरह पेश किया जाएगा। BJP में हमारे सोर्स ने बताया… 1. दिल्ली की कंगाली BJP के एक कार्यकर्ता ने बताया, 'चुनाव में करप्शन का मुद्दा पूरी दिल्ली में उठेगा, लेकिन झुग्गियों में इसे एक फॉर्मूले के साथ उठाया जाएगा। झुग्गी में रहने वाली ज्यादातर आबादी दलित वर्ग से है। हम उन्हें बताएंगे कि दिल्ली सरकार के वादे अब पूरे नहीं होने वाले हैं, क्योंकि AAP लीडर्स के करप्शन ने दिल्ली को कंगाल कर दिया है। लिकर स्कैम दुनिया के सामने है। इसके अलावा और भी कई स्कैम हैं, जो सामने नहीं आने दिए गए।‘ मोहन लाल गिहरा भी यही बात दोहराते हैं। वे कहते हैं, 'दिल्ली कंगाल है, ये हम नहीं कह रहे। ये दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है। झुग्गियों में चर्चा के दौरान छोटी-छोटी समस्याएं सामने आ रही हैं। ये भी सच है कि वो समस्याएं इसलिए दूर नहीं हो पा रहीं क्योंकि दिल्ली कंगाल हो चुकी है। यहां हर डिपार्टमेंट में करप्शन चरम पर है और दिल्ली के लीडर्स मोटा पैसा कमा रहे हैं।' दरअसल, दिल्ली में आयुष्मान योजना लागू करने को लेकर लगी एक पिटीशन की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने AAP सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था- ये अजीब है कि दिल्ली सरकार केंद्र की मदद नहीं स्वीकार कर रही है जबकि उसके पास अपने हेल्थ केयर सिस्टम के लिए कोई धन नहीं है। 2. केजरीवाल के झूठे वादे त्रिलोकपुरी विधानसभा सीट पर BJP के पालक रूपेश मेहरा कहते हैं, ‘हम केजरीवाल के झूठे वादों की भी पोल खोल रहे हैं। पंजाब में महिलाओं को 1000 रु. देने का वादा किया गया था। वो पूरा हुआ क्या? डेढ़-डेढ़ लाख रुपए तक बिजली का बिल आ रहा है।‘ अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनने से पहले कहा था कि वो ना गाड़ी लेंगे, ना बंगला और ना ही सुरक्षा लेंगे। पर ऐसा हुआ क्या। केजरीवाल के झूठे वादों की लिस्ट तैयार है। इसे हम सबसे गरीब तबके तक पहुंचा रहे हैं।’ पुरानी सीमापुरी दलित बस्ती में रहने वाले राकेश भी मानते हैं कि मुफ्त बिजली और पानी नाम का है। वे कहते हैं, ‘जरा भी ज्यादा इस्तेमाल करो तो बिल भरना पड़ता है।’ त्रिलोकपुरी में रहने वाले सोनू भी बिजली बिल दिखाते हुए कहते हैं, 'एक महीने में 4 हजार का बिल आया है। इसका क्या तुक है। पानी कुछ दिनों से साफ आ रहा है। वर्ना यहां हमेशा इतना गंदा पानी आता है, जिसे पी नहीं सकते।’ 3. महिलाओं का निजी डेटा क्यों इकट्ठा कर रही सरकार, कोई स्कैम तो नहीं? दिल्ली के प्रदेश स्तर के एक सीनियर वर्कर कहते हैं, ‘महिला सम्मान योजना के नाम पर कैसे धोखा देकर हमारी मां-बहनों का डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। ये मुद्दा इस बार पूरी दिल्ली में गूंजेगा। हम ये सवाल उठाएंगे कि आखिर इसके पीछे सरकार की मंशा क्या है? लगातार बढ़ते साइबर फ्रॉड के बीच ऐसे डेटा इकट्ठा करना कितना सेफ है। दलित वर्ग के बीच काम कर रहीं एक BJP कार्यकर्ता ने बताया, 'गरीब तबके को इस योजना का सबसे ज्यादा इंतजार है, जिसमें सबसे ज्यादा दलित हैं। उनके साथ केजरीवाल एक और बड़ा छल कर रहे हैं। जब दिल्ली के पास पैसा ही नहीं है, नोटिफिकेशन जारी ही नहीं हुआ है तो फिर किस योजना के लिए फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। क्यों महिलाओं का डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। ये कोई स्कैम तो नहीं?' दलित वोटर्स के लिए BJP का रिपोर्ट कार्ड, 35 पॉइंट में गिनाएंगे काम BJP चुनावी माहौल में दिल्ली की AAP सरकार की खामियां ही नहीं गिनाएगी, बल्कि पार्टी ने दलित वोटर्स के लिए अपना रिपोर्ट कार्ड भी तैयार किया है। 35 पॉइंट्स में वो वोटर्स को अपने काम भी गिनाएगी। BJP ने ऐसे ही 35 कामों का जिक्र करते हुए एक पैम्फलेट छपवाया है। इसे दिल्ली की दलित आबादी के बीच बांटा जा रहा है। हालांकि इसे लेकर दलित वोटर्स की राय अलग है। 5 दशक से त्रिलोकपुरी में रह रहे सतबीर कहते हैं, हम न तो अंबेडकर को जानते हैं और न संविधान को। हमें तो AAP सरकार का काम पता है। घर के 6 वोट झाड़ू को जाएंगे। इसे लेकर कोई दुविधा नहीं है।' वहीं सोनू अंबेडकर पर बने पंच तीर्थ को लेकर कहते हैं, '400 रुपए कमाने वाला व्यक्ति कौन से तीर्थ पर जाएगा। हम बच्चों का पेट भरेंगे या तीर्थ पर जाएंगे। अगर वहां आना-जाना मुफ्त कर भी दें, तो वहां रहना-खाना तो हमें ही करना होगा। रोजाना 400 रु. कमाने वाला व्यक्ति क्या ये खर्च उठा सकेगा।’ अब बात एक्सपर्ट की… AAP और BJP की दलितों से केमिस्ट्री तय करेगी नतीजे BJP की स्ट्रैटजी और उसका चुनाव में कितना असर होगा? ये समझने के लिए हमने सीनियर जर्नलिस्ट प्रदीप सिंह और नीरजा चौधरी से बात की। प्रदीप कहते हैं, ‘दलित किस तरफ जाएंगे, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें किसकी अप्रोच पसंद आती है। हालांकि एक बात जो मैं लगातार देख और सुन रहा हूं कि इस बार दलित वोटर रिथिंकिंग की प्रोसेस में है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘दलितों के लिए हर पार्टी कोई न कोई रणनीति बना रही है। खासतौर पर AAP और BJP।‘ सीनियर जर्नलिस्ट और राइटर नीरजा चौधरी कहती हैं, ’BJP दलितों के लिए चाक-चौबंद स्ट्रैटजी बना रही है, क्योंकि इस वर्ग को साधे बिना चुनाव जीतना मुश्किल है। वहीं, AAP भी इसे साधने में कसर नहीं छोड़ेगी क्योंकि केजरीवाल का वजूद दिल्ली से ही है।’ वे आगे कहती हैं, ‘महाराष्ट्र में दलित वोटर BJP के साथ लौटा इसलिए विधानसभा में इनकी जीत हुई। अमित शाह के अंबेडकर पर दिए बयान से हाईक्लास दलित में एक बहस छिड़ी है। अब दिल्ली का दलित वोटर इस बहस को कैसे लेता है, BJP दलितों के बीच खुद को कितना स्थापित कर पाती है। नतीजा इसी बात पर निर्भर करेगा।’ .................................... दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर AAP की स्ट्रैटजी भी पढ़ें... केजरीवाल ने 1000 वोटर्स पर लगाए 12 कार्यकर्ता, बस्तियों में फ्री बिजली-इलाज का वादा दिल्ली में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हर रोज दो टीमें बनाकर निकलते हैं। एक टीम ऐसे इलाके में जाती है, जहां जरूरतमंद लोग रह रहे हों। उनके बीच जाकर कार्यकर्ता सरकारी स्कीम जैसे फ्री बिजली-पानी और इलाज की बातें करते हैं। दूसरी टीम ऐसे इलाकों में जाती है, जहां अमीर लोग रहते हैं। ये विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी की स्ट्रैटजी है। पढ़िए पूरी खबर...
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