FCRA बिल JPC को भेजने पर अखिलेश ने उठाया सवाल:संसद में अमित शाह जवाब देने को तैयार, लेकिन विपक्ष ने नहीं छोड़ा विरोध

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संसद में बुधवार को हंगामा जारी रहा। लोकसभा में विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे तो सरकार की ओर से कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं। लेकिन सवाल यह था कि जब सरकार जवाब देने को तैयार है, तब विपक्ष का विरोध क्यों नहीं थम रहा? इसी बीच FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक को लेकर भी खूब हंगामा हुआ। अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल किए तो कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी बिल को JPC के पास भेजने के तरीके पर विरोध जताया। उधर, राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने सभापति से ऐसा सवाल पूछ लिया कि सदन का माहौल कुछ देर के लिए दिलचस्प हो गया। लोकसभा में शुरुआत से ही हंगामा सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई। अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से कहा कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं। यानी सरकार की तरफ से साफ संदेश था- गृह मंत्री जवाब देंगे, लेकिन सदन को चलने देना होगा। इसके बावजूद नारेबाजी जारी रही। आखिरकार कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। 2 बजे सदन दोबारा शुरू हुआ। पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा, लेकिन हंगामा पूरी तरह थमा नहीं था। FCRA बिल पर असली टकराव इसके बाद मामला विदेशी अंशदान विनियमन यानी FCRA संशोधन विधेयक 2026 पर आ गया। सरकार की कार्यसूची में इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC को भेजने का प्रस्ताव था। हालांकि, इसे गृह मंत्री अमित शाह की ओर से पेश किया जाना था, लेकिन सदन में प्रस्ताव गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने रखा। यहीं से विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने पूछा कि जब विपक्ष को बिल को JPC भेजने की जानकारी अचानक दी गई, तो इस प्रक्रिया को इस तरह क्यों आगे बढ़ाया जा रहा है। FCRA बिल को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार पर निशाना साधता रहा है। उसका आरोप है कि विदेशी फंडिंग को कंट्रोल करने के नाम पर सरकार NGOs और स्वतंत्र संस्थाओं पर ज्यादा नियंत्रण चाहती है। सरकार का कहना है कि इसका मकसद विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। बुधवार को हंगामे के बीच बिल को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव आगे बढ़ा। अखिलेश यादव ने सरकार से क्या पूछा? FCRA बिल पर समाजवादी पार्टी सांसद अखिलेश यादव भी सरकार पर बरसे। उनका सवाल विदेशी पैसे को लेकर था। अखिलेश पहले भी इस बिल पर सरकार से पूछ चुके हैं कि जब विदेश से आने वाले पैसे पर इतनी पाबंदियां लगाई जा रही हैं, तो विदेशों में अवैध तरीके से भेजी गई भारतीय संपत्ति पर सरकार क्या कार्रवाई कर रही है। उन्होंने पीएम केयर्स फंड और चुनावी बॉन्ड से मिले पैसों को लेकर भी सवाल उठाए थे। अप्रैल में अखिलेश ने आरोप लगाया था कि सरकार NGOs को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है और पूछा था कि विदेश से पीएम केयर्स फंड में आए पैसे का क्या होगा। उन्होंने चुनावी बॉन्ड के जरिए मिले पैसे को लेकर भी सवाल उठाए थे। यानी आज सदन में उनका सवाल सिर्फ FCRA की धाराओं तक सीमित नहीं था। वह सरकार की उस नीति पर सवाल उठा रहे थे जिसमें विदेशी फंडिंग पर ज्यादा निगरानी की बात कही जा रही है। हंगामा बढ़ा तो 3 बजे तक सदन स्थगित FCRA बिल पर बहस और नारेबाजी के बीच सदन का माहौल और गरमा गया। आखिरकार लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित कर दी गई। 3 बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई तो विपक्षी सांसद वेल के करीब पहुंच गए। नारेबाजी के बीच सरकार ने अपना विधायी काम जारी रखा। हंगामे के बीच खनन विधेयक पास विपक्ष के विरोध के बीच खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को मतदान और पारित करने के लिए रखा। सदन में तेज नारेबाजी जारी रही। इसके बावजूद मतदान हुआ और विधेयक लोकसभा से पारित हो गया। यानी तस्वीर वही रही- विपक्ष विरोध करता रहा और सरकार विधायी कामकाज आगे बढ़ाती रही। संसद के मौजूदा मानसून सत्र में ऐसा कई बार हुआ है कि विपक्ष के हंगामे के बीच विधेयक पारित हुए हैं। संसद के कामकाज पर पहले भी यह सवाल उठता रहा है कि हंगामे के दौरान कानूनों पर कितनी चर्चा हो पा रही है। गृहमंत्री को लेकर रिजिजू ने क्या बताया? हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन को गृह मंत्री अमित शाह के जवाब को लेकर जानकारी दी। सरकार की ओर से लगातार यह कहा जा रहा था कि गृह मंत्री सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष की नारेबाजी नहीं रुकी। आखिरकार लोकसभा की कार्यवाही 13 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। अब चलते हैं राज्यसभा में। अठावले ने सभापति से क्या पूछ लिया? राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने सभापति से एक सवाल पूछा। सदन में मौजूद सदस्य उनकी बात सुनते रहे और कुछ देर के लिए माहौल हल्का भी हुआ। इसके बाद शून्यकाल शुरू हुआ, लेकिन यहां भी विवाद ने सदन को घेर लिया। सुष्मिता देव को लेकर गरमाया विवाद शून्यकाल के दौरान CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने बीजेपी सांसद सुष्मिता देव पर एक आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया। मामला बढ़ा तो सुष्मिता देव की ओर से विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिए जाने की बात सामने आई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभापति से अपील की कि सुष्मिता देव को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए। यानी राज्यसभा में भी चर्चा शुरू होते-होते मामला आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया। हंगामे के चलते सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा में NCDC बिल पास हुआ हंगामे के बीच राज्यसभा में विधायी कामकाज भी चलता रहा। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम यानी NCDC संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा हुई। चर्चा के बाद विधेयक राज्यसभा से पारित हो गया। इसका मकसद NCDC के कामकाज और सहकारी क्षेत्र के लिए उसके वित्तीय दायरे को विस्तार देना है। विधेयक के पारित होने की पुष्टि बुधवार की रिपोर्टों में भी हुई है। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
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