ओवल. य़शस्वी जायसवाल के कोच ज्वाला सिंह का मानना है कि भारत ओवल में खराब रिकॉर्ड के बावजूद सीरीज ड्रा कर सकता है. भारत ने केनिंग्टन ओवल में अब तक कुल 15 टेस्ट मैच खेले हैं. जिसमें से 14 मुकाबले भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए हैं, वहीं एक मैच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ था. इन मुकाबलों में भारत को सिर्फ दो बार जीत हासिल हुई है, जबकि छह बार उसे हार का सामना करना पड़ा है. शेष सात मुकाबले ड्रॉ पर खत्म हुए हैं. यह आंकड़े बताते हैं कि यह मैदान भारत के लिए आसान नहीं रहा है.भारत ने इस मैदान पर अपना पहला टेस्ट मुकाबला अगस्त 1936 में खेला था, जिसमें उसे इंग्लैंड से 9 विकेट से हार मिली थी. इसके बाद 1946 और 1952 में हुए मुकाबले ड्रॉ रहे, लेकिन 1959 में भारत को पारी और 27 रन से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. अब जब मौजूदा टेस्ट सीरीज का निर्णायक मुकाबला इसी मैदान पर खेला जाना है, तो भारत के सामने एक बार फिर इतिहास को बदलने की चुनौती होगी. इंग्लैंड जहां घरेलू परिस्थितियों और आत्मविश्वास के साथ उतरेगा, वहीं भारत को अपने रिकॉर्ड से ऊपर उठकर प्रदर्शन करना होगा. टीम इंडिया के पास मौका है कि वह न सिर्फ सीरीज को बराबरी पर खत्म करे, बल्कि ओवल में अपने खराब रिकॉर्ड को भी बेहतर बनाए.भारतीय कप्तान और टीम प्रबंधन को इस ऐतिहासिक मैदान पर जीत दर्ज कर एक नई इबारत लिखने के लिए रणनीति और संयम के साथ उतरना होगा. अगर भारत यहां जीत हासिल करता है, तो यह न केवल सीरीज में सम्मान बचाएगा बल्कि भविष्य के लिए एक सकारात्मक संदेश भी देगा.