श्रीलंका के युवा ऑलराउंडर दुनित वेल्लागे जब अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उसी दौरान उन्हें ज़िंदगी का सबसे बड़ा सदमा मिला पिता का निधन. वो देश की सेवा के लिए वापस मैदान पर लौटे और डटे रहे, इस कठिन घड़ी में भारतीय कप्तान ने जो किया, वह सिर्फ एक कप्तान नहीं, बल्कि एक मानवता के दूत की तरह था. वेल्लागे को गले लगाकर उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि खेल सिर्फ जीत-हार का नाम नहीं, बल्कि साथ खड़े रहने का भी नाम है.