अकबरनगर...जिसे 1972 में यूपी गर्वनर ने बसाया, आज मैदान:1200 घरों पर बुलडोजर चला, लोग बोले- 40 साल टैक्स भरा, अब अवैध कैसे

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तारीख: 18 जून, 2024 समय: रात के करीब 12:30 बजे लखनऊ के अकबरनगर फेज-2 मोहल्ले की चारों तरफ से घेराबंदी कर दी गई। करीब 100 पुलिसवाले छोटी से छोटी हलचल को मॉनीटर कर रहे थे। सिक्योरिटी फोर्स के अलावा इलाके में किसी को घुसने की इजाजत नहीं थी। सख्ती इतनी कि पुलिसवालों को भी मोबाइल फोन निकालने की परमिशन नहीं थी। इन सबके पीछे की वजह बहुत बड़ी थी। मोहल्ले में बनी 5 मंजिला दो मस्जिदें मोहम्मदिया और हंजला समेत एक मदरसे को ढहाया जाना था। एक घंटा बीता… शाम से खामोश पड़े 8 बुलडोजर स्टार्ट हुए। सबसे पहले मदरसा तोड़ा गया, फिर मस्जिद की बारी आई। देखते ही देखते मस्जिदें भी जमींदोज कर दी गईं। लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी, यानी LDA ने 10 से 18 जून तक भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में पूरे अकबरनगर को ढहा दिया। अब इस जगह यूपी सरकार रिवर फ्रंट बनवाएगी। 24 एकड़ में फैली बस्ती में बने अवैध मकान, दुकानें, मंदिर-मस्जिद और मदरसे सब मलबे में तब्दील हो गए हैं। नगर निगम की टीम बचे खंडहर हटाने में जुटी है। पुलिस और PAC के जवानों की टुकड़ी यहां तैनात है। दूसरी तरफ जिन मस्जिदों-मदरसों को ढहाया गया, उनकी देखरेख करने वाले और इमामों के कागजात कहते हैं कि बिल्डिंग की लोकेशन पर 2007 में खुद नगर निगम ने मुहर लगाई थी। बस्ती के लोग बताते हैं कि 1972 में यूपी के गवर्नर अकबर अली खान ने इसे अपना नाम देकर बसाया था। अब यूपी सरकार कह रही है कि ये जमीन उसकी है। अकबरनगर, गवर्नर का बसाया शहर या अवैध बस्ती 1971 की बात है। कमलापति त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के CM थे। तभी लखनऊ के बीचों बीच बहने वाली गोमती नदी को कुकरैल नदी से जोड़ने का प्लान बना। काम जोखिम भरा था क्योंकि दोनों नदियों के बीच घना जंगल था। इस जंगल में जानवर और जहरीले सांप रहते थे। 1972 में अकबर अली खान यूपी के गवर्नर बनाए गए। अकबर 12 साल राज्यसभा के स्पीकर भी रह चुके थे। अकबरनगर के लोग कहते हैं कि अकबर अली खान ने ही कुकरैल नदी के जंगलों को साफ करवाकर ये बस्ती बसाई थी। 2 मंजिला मकान ढहाया, बदले में 2 कमरे का फ्लैट मिला अकबरनगर में रहने वाले मोहम्मद जैद का दो मंजिला मकान 12 जून को ढहा दिया गया। इसकी जगह LDA ने उन्हें बसंत कुंज में दो कमरों का फ्लैट दिया है। मोहम्मद जैद के परिवार में 12 लोग हैं। दो कमरे के फ्लैट में इतने लोग नहीं रह सकते, इसलिए वे दोस्त के घर में रह रहे हैं। जैद कहते हैं, ‘1970 से पहले लोग गोमती नदी के किनारे झोपड़ी बनाकर रहते थे। तब कुकरैल के जंगलों से आए दिन सियार और दूसरे जंगली जानवर गांवों में घुस आते थे। इन परेशानियों को देखते हुए गवर्नर साहब ने इलाके को खाली करवाकर नई बस्ती बसाई। इसका नाम अकबरनगर रखा।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पूरी बस्ती गैरकानूनी थी बीते 53 साल में अकबरनगर में 2200 परिवार बस गए। जुलाई, 2023 में योगी सरकार ने फैसला लिया कि गुजरात के साबरमती रिवर फ्रंट की तरह कुकरैल नदी पर भी रिवर फ्रंट बनेगा। प्रस्ताव पास हुआ और नदी के किनारे से कब्जा हटाने का अभियान शुरू हो गया। दिसंबर, 2023 में अकबरनगर मोहल्ले का सर्वे हुआ। इसके बाद यहां भी कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। पूरे अकबरनगर को ध्वस्त करने का प्लान बना, तो लोग हाईकोर्ट चले गए। इसके बाद कब्जा हटाने की कार्रवाई रोक दी गई। सरकार का पक्ष और सभी दलीलें सुनने के बाद पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार की कार्रवाई को सही माना। अकबरनगर में 1980 से रह रहे लोगों ने कोर्ट को बताया कि वे 40 साल से हाउस टैक्स और बिजली बिल भर रहे थे, फिर हमें बेघर कैसे किया जा सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट में जजों की बेंच ने कहा कि टैक्स और बिजली बिल भरने से साबित नहीं होता कि आपको उस जमीन का मालिकाना हक दिया जाए। अकबरनगर के लोग केस हार गए। उन्हें डर सताने लगा कि अब कभी भी उनके मकानों पर बुलडोजर चल सकता है। तभी लोकसभा चुनाव आ गए। आचार संहिता लगने से इलाका खाली कराने का काम रोक दिया गया। आचार संहिता हटने के बाद प्रशासन ने 10 जून से अकबरनगर में फिर कब्जा हटाना शुरू किया। 18 जून तक पूरा इलाका जमींदोज कर दिया गया। लखनऊ के पॉश इलाके इंदिरानगर से सटे अकबरनगर मोहल्ले में करीब 1200 मकानों के अलावा 4 मंदिर, 3 मस्जिदें और 3 मदरसे भी ढहा दिए गए। मंदिरों की देखरेख 11 सदस्यों की एक कमेटी करती थी। कमेटी के मेंबर प्रदीप अवस्थी बताते हैं, '1972 में अकबर साहब ने जब ये मोहल्ला बसाया, तब यहां करीब 280 लोग झोपड़ी बनाकर रहते थे। उस वक्त यहां हिंदुओं-मुस्लिमों की आबादी तकरीबन बराबर थी। धीरे-धीरे यहां मंदिर-मस्जिद बनाए गए।' ढहाए गए शिव मंदिर के पुजारी श्रीकांत शुक्ला अब बसंत कुंज में बस गए हैं। श्रीकांत कहते हैं 'अकबरनगर में कृष्ण जन्माष्टमी और दुर्गा पूजा से लेकर शिवरात्रि में जागरण होता था। भंडारा-प्रसाद बंटता था। तब यहां पूरे लखनऊ से लोग आते थे।' 'हमारे सभी जजमान भी शहर में ही थे, जिनके यहां पूजा-पाठ कराकर घर का खर्च चलता था। अब शहर से दूर आ गए हैं, इसलिए सारे जजमान भी छूट गए हैं।' मलबा बनी मस्जिदों में 500 नमाजी आते थे, मदरसों में 250 बच्चे तालीम लेते हमने यहां की मस्जिदों के इमाम और उनकी देखरेख करने वालों से भी बात की। 18 जून की रात जिस मोहम्मदिया मस्जिद को गिराया गया, उसकी नींव कारी रौशन अली कादरी ने रखी थी। मस्जिद से सटा उनका मदसरा अहले सुन्नत भी गिरा दिया गया। मस्जिद-मदरसे के सरकारी दस्तावेज पर लगा नगर निगम का स्टैंप दिखाते हुए कारी रौशन अली कहते हैं, ‘जब गवर्नर अकबर अली ने अकबरनगर बसाया, तब यहां कोई मस्जिद नहीं थी। सिर्फ खाली मैदान थे। तब कुछ लोग यहां खेती करते थे।’ कारी रौशन अली आगे कहते हैं, ‘बाद में मोहम्मदिया मस्जिद बनी। पहले टीनशेड डालकर झुग्गी में नमाज अदा होती थी। फिर टीनशेड की जगह मस्जिद खड़ी कर दी गई। 18 जून को ढहाए जाने से पहले यहां रोजाना 60 से 70 लोग नमाज पढ़ते थे। जुमे को ये संख्या 500 से 600 हो जाती थी।’ ‘अकबरनगर की आबादी बढ़ी तो हमने 2014 में यहां नई सुन्नी मदीना मस्जिद बनवाई। इसके लिए 16 लाख रुपए में जमीन खरीदी थी। 9 लाख रुपए हमने लगाए और 7 लाख रुपए का चंदा अकबरनगर के लोगों ने दिया था। हमने कारी रौशन अली से पूछा- अब नमाजी और मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे कहां हैं? रोशन अली कहते हैं, ‘नमाजी आसपास की छोटी मस्जिदों में इबादत कर रहे हैं। मदरसे में पढ़ रहे दूसरे राज्यों के बच्चों को घर भेज दिया है। यहां के बच्चों की पढ़ाई के लिए हमें पास की मस्जिद में जगह मिल गई है। वहां शिफ्ट में पढ़ाई करवा रहे हैं।’ हंजला मस्जिद के इमाम बोले- सबसे खूबसूरत मस्जिद थी, मलबा हो गई अकबरनगर फेज-2 में बनी हंजला मस्जिद पर भी बुलडोजर चलाया गया। यहां के इमाम असीफुर्ररहमान बादशाहनगर की करबला वाली मस्जिद में जाकर नमाज अदा कर रहे हैं। इमाम असीफुर्ररहमान कहते हैं, ‘हंजला मस्जिद अकबरनगर की सबसे खूबसूरत मस्जिद थी। यहां ईद और जुमे के दिन पूरे लखनऊ से लोग इबादत के लिए आते थे। एक साथ 700 लोग नमाज पढ़ सकते थे, लेकिन अब सब मलबा हो चुका है।’ सरकार बेघर लोगों को नई जगह पर बसा रही है। क्या मस्जिद-मदरसे के लिए अलग से जमीन नहीं दी गई? असीफुर्ररहमान कहते हैं, ‘मस्जिद कमेटी के लोग इस सिलसिले में LDA के वीसी इंद्रमणि त्रिपाठी से मिले थे। उन्होंने कहा कि मस्जिद के लिए अलग से कोई जमीन देने का प्रस्ताव हमें नहीं मिला है। इसलिए फिलहाल कुछ नहीं हो सकता।’ यहां वोटिंग हुई, मंत्रियों ने सड़कों का उद्घाटन किया, फिर बस्ती अवैध कैसे अकबरनगर का सबसे पुराना मदरसा अरबिया खादिमुल उलूम भी गिरा दिया गया। मदरसे के केयरटेकर और उस्ताद मो. इमरान बच्चों की पढ़ाई के लिए फिक्रमंद हैं। बकरीद के बाद से उनके पास लगातार फोन आ रहे हैं। बच्चों के मां-बाप पूछते हैं कि क्या अब स्कूल दोबारा नहीं खुलेगा। इमरान कहते हैं, ‘जो चला गया, उसके लिए हम खून के आंसू भी रोएंगे, तो भी वो वापस नहीं लौटेगा। तीन मंजिला मदरसा था, करोड़ों की प्रॉपर्टी थी। यहां बच्चों के लिए सारी सुविधाएं थीं।’ बेघर हो चुके लोगों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के दौरान अकबरनगर में 4 पोलिंग बूथ बने थे। 40 साल से लोग सीवर, पानी, बिजली का बिल भर रहे थे। बस्ती में कई सड़कों का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और लखनऊ की पूर्व मेयर संयुक्ता भाटिया ने किया। फिर कैसे हमारा मोहल्ला अचानक अवैध हो गया। इतिहासकार रौशन तकी बोले- यहां हमेशा से हिंदू-मुस्लिम मिलकर रहे लखनऊ के स्मारकों और मुगलिया इतिहास पर 13 किताबें लिख चुके इतिहासकार डॉ. रौशन तकी कहते हैं, ‘1972 में लखनऊ की आबादी आज से लगभग आधी थी। उस समय राज्यपाल अकबर अली साहब ने ही कुकरैल नदी से सटी जमीनों की सफाई करवाई। ‘ऐसा नहीं था कि अकबरनगर में सिर्फ मुस्लिम आबादी रहती थी। यहां 40% आबादी हिंदुओं की भी थी। महज 3 किमी दूर अलीगंज का पुराना हनुमान मंदिर है। वहां के पुजारियों ने अकबरनगर मोहल्ले में मंदिरों की स्थापना करवाई थी। यहां सुबह की आरती और अजान साथ होते थे। ये बस्ती हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल थी।’ अकबरनगर के लोगों से जुड़े सवाल और गिराई गईं मस्जिद-मदरसों पर प्रशासन का क्या कहना है, अब ये जान लीजिए… म्युनिसिपल कमिश्नर बोले- अकबरनगर की जमीन नगर निगम की क्या वाकई अकबरनगर को गवर्नर अकबर अली खान ने बसाया था? इस सवाल का जवाब देते हुए लखनऊ के म्युनिसिपल कमिश्नर इंद्रजीत सिंह कहते हैं, ‘अकबरनगर को सरकारी जमीन पर बसाया गया था, जो नगर निगम के अधीन आती है। डिमोलिशन से पहले हमने यहां के सभी पुराने लैंड रिकॉर्ड्स चेक करवाए, तभी इस जगह को खाली कराया गया।' ‘कुकरैल अवध की पुरानी नदियों में से एक है। ये 27 किमी के क्षेत्र में फैली है। इसका उद्गम स्थल लखनऊ के पास में बसा अस्ती गांव है। इस गांव में एक कुएं से नदी का उद्गम हुआ है। ये नदी 20 से ज्यादा तालाबों से घिरी हुई है, जो मानसून में इसे फिर जिंदा कर देते हैं।’ यूपी सरकार कुकरैल नदी के किनारे रिवर फ्रंट बनाने की तैयारी कर रही है। लिहाजा इसके घाटों पर हुए अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं। इसी वजह से अकबरनगर को भी खाली करवाया गया और अब उस जगह पर पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। ये काम अगले 20 से 25 दिन में शुरू हो जाएगा। LDA वीसी बोले- अकबरनगर पुराना मसला…इस पर अब कुछ नहीं बोलना अकबरनगर के लोगों की बातें सुनकर तीन सवाल खड़े होते हैं। 1. ढहाई गईं मस्जिदों-मदरसों को दोबारा बनाने के लिए क्या दूसरी जगह अलॉट होगी? 2. मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को क्या दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा? 3. सरकार यहां के लोगों के लिए भविष्य में नई इबादतगाह बनवाएगी? इन सवालों का जवाब जानने हम लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी के उपाध्यक्ष इंद्रमणि त्रिपाठी के पास पहुंचे। सवाल सुनकर उन्होंने जवाब दिया- ‘अकबरनगर अब पुराना मामला हो गया है, इसलिए इस बारे में कुछ भी बोलना सही नहीं रहेगा।’
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