अजित-शरद की NCP का एक होना तय, BJP भी राजी:शरद गुट के 8 सांसद मोदी सरकार को समर्थन देंगे, पार्टी संभालने पर खींचतान

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अजित पवार के निधन के बाद दो सबसे बड़े सवाल हैं। पहला कि उनकी पार्टी NCP कौन संभालेगा और दूसरा कि क्या तीन साल पहले अलग हुए अजित पवार गुट और शरद पवार गुट अब फिर एक हो जाएंगे। दूसरे सवाल का जवाब है- हां। सोर्सेज के मुताबिक, दोनों पार्टियों के विलय की प्रोसेस पूरी हो चुकी है, अजित पवार ने खुद इसका इसका रोडमैप बनाया था। वे लगातार इस मसले पर मीटिंग कर रहे थे। उनके निधन के बाद भी दो बार मीटिंग हो चुकी है। अब 9 फरवरी को जिला परिषद चुनाव का रिजल्ट आने के बाद दोनों गुटों के विलय की घोषणा हो सकती है। सोर्स बताते हैं कि शरद पवार और BJP हाईकमान इस पर राजी हैं। यानी NCP महायुति का हिस्सा बनी रहेगी, इससे केंद्र में NDA को शरद पवार गुट के 8 सांसदों का साथ भी मिल जाएगा। पार्टी की कमान संभालने के लिए अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा को आगे किया गया है। हालांकि, प्रफुल्ल पटेल की दावेदारी से खींचतान की स्थिति बन रही है। विलय तय, लेकिन हालात थोड़े बदले NCP (शरद गुट) में हमारे सोर्स दावा करते हैं कि दोनों पार्टियों ने विलय का खाका तैयार कर लिया है। हालांकि, अजित पवार के निधन के बाद हालात थोड़े बदले हैं। सोर्स बताते हैं, ‘28 जनवरी को अजित दादा नहीं रहे। उनके निधन से पहले ही दोनों गुटों ने विलय के लिए 9 फरवरी की तारीख तय कर ली थी। अब कुछ चीजें बदली हैं, लेकिन विलय अब भी तय है।’ 9 तारीख ही क्यों तय हुई? सोर्स इसका जवाब देते हैं, ‘इसके पीछे शरद पवार का दिमाग है। महीने भर पहले मीडिया में विलय की बात आने लगी थी। शरद पवार पहले पानी की थाह ले रहे थे। उन्होंने ऐसी खबरें चलने दीं। रिस्पॉन्स ठीक आया, तब बात आगे बढ़ाई।’ ‘5 फरवरी को महाराष्ट्र की 12 जिला परिषदों के चुनाव होने हैं। 7 फरवरी को रिजल्ट आना था। रणनीति यह थी कि पहले चुनाव खत्म होने दें क्योंकि पुणे जिला परिषद अजित पवार का गढ़ रहा है। मीटिंग में तय हुआ था कि शरद गुट के कैंडिडेट भी अजित पवार की NCP के सिंबल घड़ी पर ही चुनाव लड़ेंगे। मैसेज दिया जाएगा कि अब दोनों पवार साथ आ रहे हैं। इसके बाद ही अनाउंसमेंट होगा। अब उससे पहले ही स्थितियां बदल गईं हैं। ’ नेताओं के बयानों से इशारा, दोनों पार्टियां एक होने वाली हैं NCP (शरद पवार) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने दावा किया है कि अजित पवार ने महाराष्ट्र में नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनावों के बाद दोनों गुटों के विलय पर साथ बैठकर फैसला लेने की बात कही थी। शिंदे ने कहा, ‘पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनावों के लिए दोनों पार्टियों के गठबंधन के लिए हम मिले थे। तब उन्होंने (अजित पवार) कहा था कि 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के बाद हम बैठकर चर्चा करेंगे।’ 40 साल से ज्यादा वक्त तक अजित पवार के सहयोगी रहे किरण गुर्जर भी यही बात कह चुके हैं। उन्होंने कहा कि अजित पवार ने हादसे से पांच दिन पहले कहा था कि वे दोनों गुटों का विलय चाहते हैं। प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में विलय होने वाला है। 30 जनवरी को शरद गुट के लीडर अनिल देशमुख ने कहा कि अजित पवार की आखिरी इच्छा थी कि NCP के दोनों गुट एक साथ आएं। इस इच्छा को पूरा किया जाना चाहिए। वहीं, पार्टी लीडर जयंत पाटिल ने विलय पर मीटिंग होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अजित पवार इस मसले पर पॉजिटिव थे। उन्होंने कहा था कि पहले स्थानीय निकाय के चुनाव गठबंधन करके लड़ा जाए, चुनाव के बाद विलय पर फैसला लेंगे। हमारे सोर्स ने इस तरह की 4 से 5 मीटिंग की बात मानी है। वे दावा करते हैं, ‘विलय की पहल शरद गुट की तरफ से की गई थी। अजित दादा इससे खुश थे। वे अपनी पार्टी की तरफ से आगे आकर मीटिंग कर रहे थे। शरद गुट से जयंत पाटिल, अमोल कोल्हे और रोहित पवार मीटिंग में शामिल हुए थे।’ विलय से BJP को भी फायदा, हाईकमान की सहमति सोर्स दावा करते हैं कि अजित पवार को BJP हाईकमान से हरी झंडी मिल गई थी। BJP भी चाहती है कि दोनों पार्टियां एक हो जाएं, इसलिए वो इसमें अडंगा नहीं लगा रही। महाराष्ट्र में BJP की सरकार मजबूत है, लेकिन लोकसभा में उसे शरद पवार गुट के 8 सांसदों की जरूरत है। अजित पवार के पास सिर्फ एक सांसद है। अगर NCP एक हो जाती है, तो केंद्र में BJP को 9 सांसदों का समर्थन मिलेगा, जो बड़ा आंकड़ा है। सोर्स के मुताबिक, BJP शरद पवार के साथ काम करने में सहज नहीं है। इसीलिए एक प्लान तैयार किया गया था। शरद पवार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वे मार्च में राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद राजनीति में एक्टिव नहीं रहेंगे। योजना यही थी कि शरद पवार सम्मानजनक तरीके से बाहर निकल जाएं, फिर सुप्रिया सुले दिल्ली और अजित पवार राज्य संभाल लें। इससे NCP के दोनों गुटों और BJP का भी फायदा था। नगर निगम चुनाव से एक होने से शुरुआत नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड में गठबंधन किया था। ये दोनों पार्टियों के एक होने की दिशा में पहला कदम था। उम्मीदवारों को शरद पवार गुट के चुनाव चिह्न ‘बिगुल’ की जगह NCP के चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ पर चुनाव लड़ने के लिए कहा गया। हालांकि गठबंधन का फायदा नहीं मिला। पुणे नगर निगम की 165 सीटों में से BJP ने 119 सीटें जीत लीं। अजित पवार की NCP की 27 और शरद पवार की NCP को 3 सीटें मिलीं। पिंपरी-चिंचवड नगर निगम की 128 सीटों में से BJP को 84 सीटें मिलीं। NCP को सिर्फ 37 सीटें मिलीं। परिवार और पार्टी ने सुनेत्रा पवार को आगे किया, डिप्टी CM बनेंगी NCP (अजित गुट) के एक सीनियर लीडर नाम न देने की शर्त पर बताते हैं, ‘पवार परिवार ने मिलकर तय किया है कि अब अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को आगे किया जाएगा। अजित दादा के दोनों बेटों के पास राजनीतिक अनुभव की कमी है। सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं और उनके नाम पर परिवार या विधायकों में विरोध नहीं है।' आज यानी 31 जनवरी को NCP विधायक दल की बैठक होनी है। इसमें सुनेत्रा को नेता चुना जाएगा। महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूचना दे दी गई है। उन्हें 31 जनवरी को ही डिप्टी CM के शपथ ग्रहण समारोह से आपत्ति नहीं है। अजित पवार के निधन से उनकी सीट बारामती खाली हो गई है। सुनेत्रा वहां से चुनाव लड़ सकती हैं। अजित पवार के बाद पार्टी के कंट्रोल पर खींचतान शरद गुट में हमारे सोर्स दावा करते हैं कि दोनों गुटों के एक होने, अजित पवार के महाराष्ट्र में पार्टी संभालने और सुप्रिया सुले के दिल्ली में रहने से प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे लीडर साइडलाइन हो जाते। प्रफुल्ल पटेल शरद पवार के सबसे करीबियों में शामिल थे। पार्टी टूटने से पहले शरद पवार ने उन्हें अजित पवार पर तवज्जो देकर पार्टी का वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया था। सोर्स आगे कहते हैं, ‘प्रफुल्ल पटेल की BJP से करीबी है। अजित पवार को भी ये बात पता थी। उनके निधन के बाद अब शरद पवार खुद कमान संभालना चाहते हैं ताकि पार्टी पर फैमिली का होल्ड रहे और पहले जैसी समझ बनी रहे।’ ‘शरद पवार अपने वफादार नेताओं जैसे जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे को राज्य की राजनीति में बिठाना चाहते हैं। हालांकि, प्रफुल्ल पटेल को किनारे लगाना आसान नहीं है। पार्टी के वर्किंग प्रेसिडेंट होने के नाते वे खुद को उत्तराधिकारी मान रहे हैं। प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे चाहते हैं कि पार्टी पर उनका होल्ड रहे।’ सोर्स के मुताबिक, प्रफुल्ल पटेल BJP को समझाने में लगे हैं कि वे ही अजित पवार को लेकर आए थे। ऐसे में उनके हाथ में पार्टी रहने पर ही BJP का फायदा है। BJP के हाथ में विलय की चाबी सोर्स मानते हैं कि इस पॉलिटिकल मर्जर पर आखिरी फैसला BJP को ही करना है। पार्टी पूरे मामले को 2029 के लिहाज से देख रही है। BJP को डर है कि अगर शरद पवार के हाथ में पूरी ताकत गई, तो वे पार्टी को फिर से मजबूत कर देंगे। इससे भविष्य में BJP को नुकसान हो सकता है। फिलहाल 3 साल की म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग पर बात चल रही है कि मंत्रियों का पोर्टफोलियो वैसा ही रहे और सुनेत्रा पवार को अध्यक्ष या डिप्टी CM का पद देकर बीच का रास्ता निकाला जाए।’ सोर्स बताते हैं- अजित पवार के निधन के बाद परिवार की एक मीटिंग हुई। इसमें भी आगे के प्लान पर बात हुई। 29 जनवरी को सुप्रिया सुले ने सुनेत्रा के घर जाकर बात की है। आने वाले कुछ दिनों में पार्टी अध्यक्ष का पेच सुलझ जाएगा। एक्सपर्ट बोले- BJP भी चाहती है दोनों गुट एक हो जाएं NCP के मौजूदा हालात पर हमने बारामती के सीनियर जर्नलिस्ट ओमकार वाबले से बात की। वे कहते हैं, ‘दोनों पार्टियों के एक होने से कैडर, वोटर और फैमिली साथ रहेगी। महाराष्ट्र की राजनीति में सरकार किसी की हो, मराठा समुदाय हमेशा सत्ता के करीब रहता है। BJP जानती है कि मराठा उनसे पूरी तरह नहीं जुड़े हैं, इसलिए वह NCP को तोड़कर या साथ रखकर अपना आधार बनाना चाहती है।’ ओमकार इसमें एकनाथ शिंदे को भी जरूरी मानते हैं। वे कहते हैं, 'राज्य में BJP अपने दम पर सत्ता के करीब तक पहुंच गई है। पार्टी के पास 133 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 145 विधायक चाहिए। ऐसे में BJP पूरा कंट्रोल चाहती है। एकनाथ शिंदे के पास लचीलापन नहीं है। वे हर बात पर अमित शाह के पास जाते हैं। अजित पवार काफी फ्लेक्सिबल थे। इसलिए BJP के लिए अब भी NCP को साथ रखना आसान है।’ ……………………………. ये खबर भी पढ़ें एयरस्ट्रिप नहीं दिखी, क्यों लैंड हुआ अजित पवार का प्लेन अजित पवार ने 28 जनवरी की सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी। करीब 40 मिनट में प्लेन बारामती पहुंच गया। लैंडिंग के आखिरी पलों में हादसा हुआ। पायलट ने लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। दूसरी कोशिश में 8:46 बजे प्लेन रनवे के पास क्रैश हो गया। शुरुआती रिपोर्ट में आया है कि पहली बार में पायलट को रनवे नहीं दिखा था। उस वक्त विजिबिलिटी 3 हजार मीटर थी, जो कम से कम 5 हजार मीटर होनी थी। पढ़ें पूरी खबर...
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