भारत ने अपने स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट AMCA के मॉडल को मंजूरी दे दी है, लेकिन यह 2035 से पहले एयरफोर्स में शामिल नहीं हो पाएगा। दूसरी तरफ पाकिस्तान को अगले साल यानी 2026 में ही चीन से 5वीं जेनरेशन के जेट J-35A मिल सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया कि आधुनिक जंग में एयर पावर सबसे जरूरी है। भारत को अपनी एयर डॉमिनेंस बरकरार रखने के लिए फौरन 5वीं पीढ़ी के एडवांस्ड फाइटर जेट्स की जरूरत है। भारत को रूस ने अपना Su-57 और अमेरिका ने F-35 ऑफर किए हैं। इनमें कौन सबसे बेहतर है, भारत किस पर दांव लगाएगा और स्वदेशी AMCA का सफल होना क्यों जरूरी है? जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: भारत के पास फिलहाल कितने और किस जनरेशन के फाइटर जेट मौजूद हैं? जवाबः भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर वायुसेना है। 2025 तक भारतीय वायुसेना के पास 31 स्क्वॉड्रन हैं। हर स्क्वॉड्रन में 18 से 24 फाइटर जेट्स होते हैं। IAF के पास सबसे एडवांस फाइटर जेट 4.5 पीढ़ी के राफेल विमान हैं, जिन्हें भारत ने फ्रांस से खरीदा है। मिलिट्री पावर ट्रैक करने वाली वेबसाइट ग्लोबल फायर पावर के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल 513 फाइटर जेट्स हैं। सवाल-2: भारत का स्वदेशी 5th जेनरेशन AMCA क्या है और कब तक तैयार होगा? जवाबः 27 मई 2025 को भारत के रक्षा मंत्रालय ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA के प्रोडक्शन मॉडल को मंजूरी दे दी। ये 5वीं पीढ़ी का स्वदेशी फाइटर जेट होगा। अभी सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन ही 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट बना सके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक AMCA का पहला प्रोटोटाइप 2031 तक उड़ान भरेगा। 2035 तक प्रोडक्शन शुरू होगा, जिसे एयरफोर्स और नेवी में तैनात किया जा सकेगा। यानी भारत को 5वीं पीढ़ी का स्वदेशी एयरक्राफ्ट मिलने में अभी कम से कम 10 साल लगेंगे। AMCA देश में ही विकसित होने वाला दूसरा फाइटर एयरक्राफ्ट होगा। इससे पहले भारत में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस और उसके एडवांस्ड वर्जन तेजस मार्क-1 को तैयार किया जा चुका है। सवाल-3: क्या भारत को 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट की फौरन जरूरत है? जवाबः भारत को 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट की जरूरत फौरन है। इसकी तीन वजह हैं- सवाल-4: 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट की अंतरिम जरूरत पूरी करने के लिए भारत के पास क्या विकल्प हैं? जवाबः फरवरी में बेंगलुरु में एरो इंडिया शो हुआ था, इसमें दुनिया के कई देशों के जेट्स की प्रदर्शनी लगी थी। अमेरिका और रूस के 5वीं जेनरेशन के जेट्स भी इसमें शामिल थे। शो खत्म होने के बाद दोनों देशों ने भारत को ये विमान खरीदने का ऑफर दिया था... 1. अमेरिका का F-35 फाइटर जेट अमेरिका का F-35 फाइटर जेट 5वीं पीढ़ी का एडवांस एयरक्राफ्ट है। यह एडवांस सेंसर और नेटवर्क कनेक्टिविटी वाला लंबी दूरी का जेट है। पूरी दुनिया में अभी 1,000 से ज्यादा F-35 ऑपरेट हो रहे हैं। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे, डेनमार्क जैसे कई देशों के पास यह जेट है। फरवरी में जब भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी अमेरिका के दौरे पर गए थे, तब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें यह जेट खरीदने का ऑफर दिया था। इसकी कीमत 800 से 1000 करोड़ रुपए है। 2. रूस का सुखोई-57 Su-57 रूस का 5वीं पीढ़ी का इकलौता फाइटर जेट है। रूस ने इसे F-35 से मुकाबला करने के लिए ही बनाया है। यह किसी भी मौसम में मुश्किल डिफेंस ऑपरेशन्स को अंजाम दे सकता है। रूस ने अभी सिर्फ 40 Su-57 बनाए हैं। इसे अभी तक किसी दूसरे देश को बेचा भी नहीं गया है। 2019 में टेस्टिंग के दौरान रूस में ही यह जेट क्रैश भी हो गया था। रूस भारत को यह जेट बेचना चाहता है। रूस की तरफ से Su-57 की आधिकारिक कीमत तो नहीं बताई गई है, लेकिन इसकी कीमत 300 करोड़ रुपए तक हो सकती है। सवाल-5: रूस का Su-57 या अमेरिका का F-35, भारत के लिए कौन ज्यादा बेहतर है? जवाबः भारत के सामने दोनों फाइटर जेट के विकल्प हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स इन 7 वजहों से Su-57 को भारत के लिए बेहतर बता रहे हैं… 1. अमेरिका F-35A ज्यादा महंगा: F-35A की कीमत करीब 682 करोड़ रुपए से 940 करोड़ रुपए तक है। जबकि Su-57 की कीमत करीब 340 करोड़ रुपए तक है। इसके अलावा F-35 के रखरखाव की लागत Su-57 की तुलना में बहुत ज्यादा है। 2. F-35A बनाने की इजाजत नहीं: अमेरिका इजराइल, ऑस्ट्रेलिया, इटली और जापान समेत अन्य सहयोगी देशों को लाइसेंस के तहत F-35 बनाने की इजाजत नहीं देता। यह देश सिर्फ पुर्जे बनाते हैं और रखरखाव की सुविधाएं देते हैं। 3. F-35 में बदलाव की इजाजत नहीं: F-35 को इस्तेमाल करने वाले देश अमेरिका की इजाजत के बिना इस जेट में बदलाव नहीं कर सकते, क्योंकि अमेरिका इसके हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को कंट्रोल करता है। वहीं, भारत लाइसेंस के तहत Su-30MKI बना रहा है। रूस ने मार्च में भारत को Su-57E के प्रोडक्शन के लिए अपने Su-30MKI मैन्युफैक्चर्ड ढांचे को इस्तेमाल करने की इजाजत भी दी। 4. F-35 के लिए अलग से मिसाइलें खरीदनी होंगी: भारत को F-35 का इस्तेमाल करने के लिए AIM-120 मध्यम दूरी की मिसाइल खरीदनी पड़ेंगी क्योंकि गैर-नाटो और स्वदेशी मिसाइलों का इस्तेमाल करने के लिए जेट में बदलाव करने होंगे, जो अमेरिका की इजाजत के बिना नहीं हो सकते। 5. अमेरिका के महंगे जेट्स का महंगा मेंटेनेंस: भारतीय वायुसेना पहले से ही 7 अलग-अलग तरह के फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करती है। इन्हें महफूज रखना और मेंटेनेंस पर बहुत ज्यादा खर्च होता है। 5वीं पीढ़ी के महंगे अमेरिकी जेट खरीदना लॉजिस्टिक के लिए बहुत मुश्किल होगा। 6. F-35 में सुरक्षा का खतरा: F-35 में तकनीकी खामियां ज्यादा हैं। जनवरी 2023 में बिजनेस इनसाइडर ने F-35 में कई समस्याओं की रिपोर्ट पेश की। इसमें स्टेल्थ कोटिंग, लगातार सुपरसोनिक उड़ान, हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले और तोपों से जेट में बहुत ज्यादा कंपन हो रहा था और बिजली गिरने की आशंका भी थी। 7. चीन ने F-35 की टेक्नोलॉजी चुराई: जर्मन मैगजीन डेर स्पीगेल की जनवरी 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक, NSA इंटेलिजेंस कॉन्ट्रैक्टर और व्हिसलब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन के लीक हुए डॉक्यूमेंट्स से पता चला कि चीन के हैकरों ने ऑस्ट्रेलिया के F-35 के डिजाइन के बारे में 50 टेराबाइट डेटा चुरा लिया था। ऑस्ट्रेलिया अमेरिका के बड़े सहयोगी देशों में से एक है, जो F-35 का इस्तेमाल करता है। हैकरों ने F-35 के रडार सिस्टम, इंजन स्कीम, निकासी गैसों को ठंडा करने की डिजाइन और टारगेट्स को ट्रैक करने वाली प्रोसेस चुरा ली। अमेरिकी जेट और चीन के J-35A के टेलप्लेन विंग का डिजाइन भी एक जैसा है। यानी चीन के हैकरों ने जो इन्फॉर्मेशन चुराई, उसे चीन ने अपने जेट को बनाने में इस्तेमाल किया। अमेरिकी एयरफोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल डेविड डब्ल्यू एल्विन ने एक इंटरव्यू में कहा, 'अमेरिकी F-35 और चीन के J-35A का ब्लूप्रिंट एक ही है।' ऐसे में अगर भारत का चीन या पाकिस्तान के साथ मुकाबला हुआ, तो भारत को J-35A से मुकाबला करना पड़ेगा, जिसमें Su-57 बेहतर साबित हो सकता है। सवाल-6: भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी AMCA का सफल होना क्यों बेहद जरूरी है? जवाबः वायुसेना से रिटायर्ड एयर मार्शल अनिल चोपड़ा के मुताबिक भारत का AMCA सफल होना बहुत जरूरी है। इसकी तीन मुख्य वजह हैं… कल सुबह 6 बजे ऐसे ही बेहद जरूरी टॉपिक पर पढ़िए और देखिए एक और 'आज का एक्सप्लेनर' ----------------------------- ये खबर भी पढ़िए... आज का एक्सप्लेनर:केरल में 640 कंटेनर्स वाला जहाज कैसे डूबा, कैल्शियम कार्बाइड समेत कई खतरनाक केमिकल्स मौजूद; समुद्र में मिले तो क्या होगा कच्चे आम से भरे एक कमरे में कैल्शियम कार्बाइड का छोटा सा टुकड़ा रख दीजिए। इससे निकली खतरनाक एसिटिलीन गैस 2-3 दिनों में पूरे कमरे के आम पका देगी। जिस कैल्शियम कार्बाइड का एक टुकड़ा इतना घातक है, उससे भरे 12 विशाल कंटेनर्स भारत के पास समुद्र में गिर गए हैं। पूरी खबर पढ़िए...