आज का एक्सप्लेनर:ईरान जंग में सोना 15 हजार सस्ता हुआ, 2026 के आखिर तक 40% महंगा हो सकता है, जानिए वजह; खरीदें या इंतजार करें

4 months ago 10
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ईरान जंग शुरू होने से एक दिन पहले, यानी 27 फरवरी को भारत में 10 ग्राम सोना 1.60 लाख रुपए का था। जंग खत्म होने के एक दिन बाद, यानी 19 जून को कीमत 1.45 लाख प्रति 10 ग्राम हो गई। यानी करीब 10% की गिरावट। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तो इस दौरान 20% गिरावट हुई। अब अमेरिकी बैंकिंग कंपनी जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने के दाम 40% तक बढ़ जाएंगे। आखिर ईरान जंग के दौरान सोने के दाम क्यों घटे? अब कीमत बढ़ने का अनुमान क्यों लगाया जा रहा? और अभी सोना खरीदना ठीक रहेगा या नहीं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: ईरान जंग के दौरान सोने की कीमत क्यों घटी? जवाब: सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है। जंग की सुगबुगाहट भी हो, तो निवेशक सोने का रुख करने लगते हैं। डिमांड बढ़ने से सोने की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। इस ट्रेंड से उलट ईरान जंग के दौरान सोने की कीमतें घटीं। इसकी 3 प्रमुख वजहें हैं… 1. डॉलर की मजबूती के चलते सोने की खरीद घटी 2. पहले से महंगा चल रहा सोना बेचकर प्रॉफिट बुकिंग 3. सोना महंगा होने से घरेलू डिमांड घटी सवाल-2: अगले 6 महीने में सोना कितना महंगा हो सकता है? जवाब: 19 जून को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम 4,170 डॉलर प्रति औंस हैं। वित्तीय संस्थानों और बैंकों के मुताबिक, अगले 6 महीने में इसकी कीमतें 20% से 40% तक बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है… जेपी मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च: 6,000 डॉलर प्रति औंस। यानी 40% से ज्यादा महंगा होने का अनुमान। जर्मनी का डॉयचे बैंक: 6,000 डॉलर प्रति औंस। अमेरिका बेस्ड इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स: 5,400 डॉलर प्रति औंस। स्विस इन्वेस्टमेंट बैंक UBS: 5,500 डॉलर प्रति औंस। अमेरिका का सिटीबैंक: 5,000 डॉलर प्रति औंस। जेपी मॉर्गन ने ये भी कहा है कि 2027 के आखिर तक कीमत 6,300 डॉलर तक पहुंच सकती हैं। अगर सोना 20% बढ़ा, तो भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत 1.74 लाख रुपए, 30% बढ़ा तो कीमत 1.88 लाख और अगर 40% बढ़ा तो कीमत 2.03 लाख पहुंच जाएगी। सवाल-3: सोने की कीमतें बढ़ने का अनुमान क्यों लगाया जा रहा? जवाब: सोने के दाम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है सेंट्रल बैंक की खरीदारी। दरअसल, 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ, तो अमेरिका ने यूरोपीय दोस्तों के साथ मिलकर रूस के 300 बिलियन डॉलर के फॉरेन रिजर्व पर रोक लगा दी थी। माना जाने लगा कि अमेरिका अपनी करेंसी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है। इसके बाद से दुनियाभर के देशों में डॉलर के प्रति भरोसा कम होने लगा और वो अपना फॉरेन रिजर्व दूसरी करेंसी और खासकर सोने में जमा करने लगे। इस वजह से सोने की डिमांड बढ़ने लगी और कीमतें भी। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2025-26 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 900 टन से ज्यादा सोना खरीदा, जो ज्यादा खरीद का लगातार चौथा साल है। 2026 की पहली तिमाही में बैंकों ने कागज पर 16 टन खरीद दिखाई। जेपी मॉर्गन का मानना है कि असली खरीदारी कहीं ज्यादा हुई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल 244 टन खरीद का डेटा दे रहा है। सोने की इस खरीद में सबसे आगे है चीन। ‘पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना’ फरवरी 2026 तक हर महीने 1 टन सोना खरीद रहा था। मार्च में उसने 5 टन और अप्रैल में 8 टन सोना खरीदा।’ अब ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों के सेंट्रल बैंकों ने भी सोना खरीदना शुरू किया है। इसी वजह से जेपी मॉर्गन ने अनुमान लगाया कि अब सोने की कीमतें बढ़ेगी। इसके अलावा वो 4 फैक्टर अब भी मौजूद हैं, जो पिछले कुछ सालों से सोने की डिमांड बढ़ा रहे थे- सवाल-4: तो अभी सोना-चांदी खरीदना चाहिए या नहीं? जवाब: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगले 1 से 3 महीने सोना खरीदने के लिए सही समय है। शेयर बाजार, गोल्ड और कमोडिटीज वगैरह से जुड़ी एनालिसिस देने वाली फर्म ‘केड़िया एडवाइजरी’ के डायरेक्टर अजय केड़िया कहते हैं, ‘अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने 17 जून संकेत दिए गए कि आगे ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। ऐसे में सोने के बजाय डॉलर और बॉन्ड्स में ज्यादा इन्वेस्टमेंट होता है। इसके चलते सोने के दाम अभी कुछ गिर सकते हैं। हालांकि लॉन्गटर्म में सोने के दाम बढ़ेंगे। अगर सोना खरीदना है, तो अब से एक से तीन महीने के बीच खरीदना ठीक रहेगा।’ HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट अनुज गुप्ता कहते हैं कि अभी सोने और चांदी दोनों के दाम घटेंगे। इसलिए फिलहाल कुछ महीने सोना इन्वेस्टमेंट के लिए बहुत अच्छा एसेट नहीं है। साल के आखिर तक सोने की इंटरनेशनल मार्केट में कीमत 5 हजार डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है। इसलिए लॉन्ग टर्म के लिहाज से सोना खरीदा जा सकता है। सवाल-5: चांदी की कीमत पर क्या असर पड़ने वाला है? जवाब: 1 जनवरी 2025 को चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी। जो भारत में तब का ऑल-टाइम हाई था। 2025 में चांदी सबसे ज्यादा 170% बढ़ी और 30 जनवरी 2026 को 3.39 लाख पर बंद हुई। हालांकि ईरान जंग के दौरान दाम गिरे और 18 जून को ये 2.40 लाख रुपए पर है। गहनों के अलावा चांदी का इंडस्ट्रियल यूज भी होता है। अमेरिकी NGO ‘सिल्वर इंस्टीट्यूट’ के मुताबिक, अगले एक साल में सोलर पैनल, EV, डेटा सेंटर और AI सेक्टर में चांदी की बढ़ती खपत से इसकी मांग और दाम बढ़ सकते हैं। ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास ----------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… भारत का रुपया एशिया में सबसे तेज गिर रहा:पाकिस्तानी रुपया मजबूत हुआ; आखिर सरकार से कहां चूक हो रही, टॉप एक्सपर्ट्स से समझिए डॉलर के मुकाबले भारत का रुपया एशिया में सबसे तेजी से गिर रहा है। पिछले 5 महीने में 6% से ज्यादा टूटा। जबकि इसी दौरान पाकिस्तानी रुपया 0.5% और चीनी युआन तो 3% मजबूत हो गया। पढ़ें पूरी खबर…
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