चुनाव के बाद क्या BJP को समर्थन देंगे?
‘नहीं, सवाल ही नहीं उठता।’ जम्मू-कश्मीर के बड़े लीडर्स में शामिल और पूर्व CM गुलाम नबी आजाद एक लाइन के सवाल का जवाब एक लाइन में ही दे देते हैं। ये जवाब इसलिए भी खास है क्योंकि कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले आजाद की BJP से करीबी की खबरें आती रहती हैं। जम्मू का डोडा-किश्तवाड़ इलाका गुलाम नबी आजाद का गढ़ रहा है। 2006 में उन्होंने यहां की भदरवाह सीट से पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता था। डोडा-किश्तवाड़ में विधानसभा की 6 सीटें हैं। यहां के सियासी समीकरण बाकी जम्मू और कश्मीर से अलग होते हैं। हिंदू-मुस्लिम आबादी का अनुपात 55-45 है, जो रीजन की पॉलिटिक्स को दिलचस्प बनाता है। गुलाम नबी आजाद खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी, यानी DPAP ने कैंडिडेट उतारे हैं। 75 साल के हो चुके आजाद की तबीयत खराब है, इसलिए वे ज्यादा प्रचार नहीं कर पाए। डोडा में प्रचार के लिए निकले गुलाम नबी आजाद से दैनिक भास्कर ने बात की। हमारे सवालों के उन्होंने छोटे-छोटे जवाब दिए, लेकिन साफ किया कि अगर पार्टी के उम्मीदवार जीतते हैं, तो BJP को समर्थन नहीं करेंगे। चुनाव नतीजों पर बोले कि किसकी सरकार बनेगी, अभी कह पाना मुश्किल है। पढ़िए गुलाम नबी आजाद से पूरी बातचीत सवाल: जम्मू-कश्मीर चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा क्या लग रहा है, आप लोगों से क्या वादा करेंगे?
जवाब: मैं नौजवान बच्चों के लिए पहली बार प्रचार के लिए निकला हूं। हिंदुस्तान में हमारी रियासत में सबसे बड़ा मुद्दा लाखों नौजवानों की बेगारी और बेरोजगारी है। मेरी जद्दोजहद इसी के लिए है। बेरोजगारी मेरा सबसे बड़ा मुद्दा है। सवाल: हमने फारूक अब्दुल्ला साहब का इंटरव्यू किया था। उन्होंने कहा कि अगर आप अलायंस में साथ आएंगे तो आपका स्वागत करेंगे?
जवाब: फारूक साहब का बहुत-बहुत शुक्रिया… सवाल: आप इलेक्शन में अपना और पार्टी का रोल किस तरह देख रहे हैं?
जवाब: रोल तो बहुत होता, लेकिन अल्लाह ने तबीयत ठीक नहीं दी। इंशाअल्लाह जो भी अभी इलेक्शन में दिन बचे हुए हैं, इसमें पूरी कोशिश होगी कि ज्यादा से ज्यादा सीटें आएं और ज्यादा से ज्यादा लोगों का सपोर्ट हासिल करें। सवाल: आपके कैंडिडेट जीतते हैं, तो सरकार बनाने में किसका समर्थन करेंगे?
जवाब: ये इलेक्शन के बाद देखेंगे। किसकी और कैसी हुकूमत बनती है, अभी नहीं कह सकते। किसी एक पार्टी को बहुमत मिलना मुश्किल है। सवाल: डीलिमिटेशन के बाद डोडा-किश्तवाड़ के इलाके में क्या बदला है?
जवाब: चिनाब वैली को पूरा ही बदल दिया है। सब जानते हैं कि कैसे बदला है। इधर का गांव उधर, उधर का कस्बा इधर। सवाल: डीलिमिटेशन जिन्होंने किया है, क्या उनके साथ जाएंगे, क्या BJP का समर्थन करेंगे?
जवाब: सवाल ही पैदा नहीं होगा। सवाल: इंजीनियर रशीद की एंट्री से इलेक्शन कितना बदलेगा?
जवाब : अभी देखना होगा, उनका चुनाव-प्रचार अभी शुरू ही हुआ है। सवाल: आपको लगता है कि आर्टिकल-370 हटाने का मुद्दा जम्मू के लिए अहम है?
जवाब: मेरे ख्याल में 370 के हक में जम्मू और कश्मीर दोनों तरफ के लोग थे। कोई नहीं चाहता था कि 370 खत्म हो। सवाल: जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी को दूर करने के लिए आपके पास क्या रास्ता है?
जवाब: बहुत बड़ा मैप बनाकर तैयार किया है। 2008 में भी मैं बेरोजगारी को लेकर बड़े ऐलान करने वाला था, लेकिन मेरी सरकार से समर्थन वापस ले लिया। मेरे पास जो प्लान है, उसमें लाखों लोगों को रोजगार मिल सकता है। सवाल: बाकी देश के लिए जम्मू-कश्मीर इलेक्शन को लेकर क्या मैसेज है?
जवाब: हिंदुस्तान में सिर्फ विकास के मुद्दे पर चुनाव होना चाहिए। फिजूल के नारों पर चुनाव नहीं सिमटना चाहिए। धर्म के नाम पर कोई चुनाव नहीं होना चाहिए। सभी पार्टियों को सभी समुदायों के लिए होना चाहिए। कोई मजहबी विवाद नहीं होना चाहिए। हिंदू-मुस्लिम के नाम पर बंटवारा नहीं होना चाहिए। लीडर को सबका होना चाहिए। सबके साथ इंसाफ होना चाहिए। डोडा में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के कैंडिडेट आमने-सामने
डोडा-किश्तवाड़ सीट पर चुनावी लड़ाई सबसे रोचक है। यहां करीब 72% आबादी मुस्लिम और 28% हिंदू है। आजाद की पार्टी DPAP के मजबूत कैंडिडेट मजीद वानी यहीं से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व मंत्री वानी यहां से विधायक रह चुके हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस से खालिद नजीब सुहरावर्दी मैदान में हैं। कांग्रेस के शेख रियाज अहमद चुनाव लड़ रहे हैं। BJP के गजय सिंह राणा उम्मीदवार हैं, जो पहली बार चुनावी मैदान में हैं। मजीद वानी डोडा के कद्दावर नेता हैं और गुलाम नबी आजाद के खास हैं। आजाद के कांग्रेस से इस्तीफे के बाद उन्होंने भी पार्टी छोड़ दी थी। हमने उनसे पूछा कि पहले कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते थे, अब नई पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। क्या बदला है? वानी कहते हैं, ‘आजाद साहब का सियासी कद है। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए जो काम किया, वो मिसाल है। साधुओं के लिए यात्री निवास बनाया, श्रीनगर में हज हाउस बनाया। ये तारीखी काम लोगों को याद हैं। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने ईमानदारी से काम किया। अब अपनी पार्टी बनाई, तो हम वफादार सिपाहियों में से हैं। हमारा विजन बेरोजगारी को खत्म करना है, वही मुद्दा लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं।’ गुलाम नबी साहब खुद चुनाव क्यों नहीं लड़ रहे हैं। उनकी सेहत भी खराब बताई जा रही है। लोगों को लग रहा है कि वो पूरी शिद्दत से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। क्या ये बात ठीक है? वानी जवाब देते हैं, ‘बीमार होने के बावजूद वे प्रचार कर रहे हैं। उनका मकसद था कि वे उम्मीदवार खड़े करेंगे। अगर वे खुद चुनाव लड़ते, तो सभी के लिए कैंपेन नहीं कर पाते। उनकी पार्टी के लोग जीतते हैं, तो आजाद साहब अपने आप जीत जाएंगे। उनकी तबीयत खराब होना भी एक वजह है।’ अगर आपकी पार्टी के कुछ कैंडिडेट जीत भी जाते हैं, तो बेरोजगारी के मुद्दे पर कैसे काम कर पाएंगे? वानी कहते हैं, ‘हमारे बिना सरकार नहीं बनेगी। बाकी काम हम बतौर विधायक सदन में मुद्दा उठाकर करते रहेंगे।’ अगर जीते तो किसे समर्थन करेंगे, क्या BJP से समर्थन लेंगे? वानी कहते हैं, ‘अभी ये तय करने का वक्त नहीं आया है। जो पार्टी हमारे लोगों का काम करेगी, उसका समर्थन करेंगे।’ BJP कैंडिडेट बोले- कांग्रेस छोड़ने के बाद आजाद साहब का जनाधार खत्म
डोडा सीट से BJP ने गजय सिंह राणा को टिकट दिया है। गजय पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वे कहते हैं, ‘2014 से 2024 के बीच प्रशासन में सुधार आया है। अमन बहाल होने की वजह से अच्छा माहौल बना है। पहले चुनाव होते थे, तो खौफ का माहौल रहता था। अब सड़क और पानी के मुद्दों पर बात हो रही है। ये हमारी वजह से हो पाया है।’ गुलाम नबी आजाद की पार्टी की एंट्री से मुस्लिम वोट में बिखराव देखने को मिल रहा है, लेकिन BJP के लिए चुनौती है कि क्या वो हिंदू वोट को एकजुट कर पाएगी। गजय सिंह राणा कहते हैं, ‘BJP काम से जानी जाती है। आजाद साहब कांग्रेस के अच्छे नेता थे, लेकिन पार्टी छोड़ने के बाद उनका जनाधार खत्म हो गया है।’ नेशनल कॉन्फ्रेंस कैंडिडेट बोले- चिनाब घाटी हमारा गढ़ थी, अब फिर बनेगी
डोडा सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस दोनों के कैंडिडेट चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य में दोनों पार्टियों का अलायंस है, लेकिन मुस्लिम बहुल कुछ सीटों को दोनों पार्टियों ने आपसी रजामंदी से फ्रेंडली फाइट के लिए छोड़ा है। मतलब ऐसी सीटें जहां सिर्फ कांग्रेस और नेशनल कॉनफ्रेंस का ही बेस है, ऐसी सीटों पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता खालिद नजीब सुहरावर्दी डोडा से चुनाव लड़ रहे हैं, सुहरावर्दी नेशनल कॉन्फ्रेंस के बड़े नेता हैं और जम्मू कश्मीर के गृहमंत्री रह चुके हैं। सुहरावर्दी कहते हैं, ‘हम आर्टिकल 370, 35ए और स्टेटहुड के मुद्दों को लेकर चुनाव में जा रहे हैं। 35ए का तो सीधा असर हमारे नौजवानों पर हो रहा है।’ ‘आजाद साहब से पहले ये पूरा इलाका नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़ था। मिलिटेंसी में हमारे हजारों वर्कर मारे गए। मुझ पर कई बार हमले हुए। हमारी पार्टी से भी कभी गलतियां हुई हैं। चिनाब घाटी में हमारी पार्टी फिर से उभरेगी।’ एक्सपर्ट बोले- आजाद की पार्टी कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस के वोट काटेगी
पॉलिटिकल एनालिस्ट हरिओम कहते हैं कि यहां की 6 सीटों पर गुलाम नबी आजाद की पार्टी के उम्मीदवार कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वोट काटेंगे। वे कहते हैं, ‘गुलाब नबी आजाद खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनकी तबीयत खराब होने की वजह से प्रचार भी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में वो लोगों का भरोसा कितना जीत पाएंगे, ये कहना मुश्किल है।’ जम्मू की सीटों के बारे में सीनियर जर्नलिस्ट बिलाल फुरकानी कहते हैं, ‘रामबन और बनिहाल में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के कैंडिडेट भी चुनाव लड़ रहे हैं। इससे दोनों के वोट कटेंगे। पहले फेज में रामबन, भदरवाह, बनिहाल और डोडा में BJP की बढ़त रहेगी।’ वहीं, पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रो. हरिओम कहते हैं कि 55-45 फीसदी डेमोग्राफी में मुस्लिम आबादी का वोट लेने के लिए कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, PDP और गुलाम नबी आजाद की पार्टी कोशिश करेगी। इससे मुस्लिम वोटों का बिखराव होगा। अगर BJP हिंदू वोट एकजुट कर लेती है, तो मुस्लिम वोटों के बिखराव का उसे फायदा मिल सकता है। टिकट बंटवारे को देखें तो BJP ने अपने पुराने नेताओं पर भरोसा जताया है। ऐसे में उनका फिक्स हिंदू वोट साथ रह सकता है। गुलाम नबी आजाद की एंट्री से कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP के बीच पहले से बंटे वोटों में सेंधमारी हो गई है। ....................................... जम्मू-कश्मीर इलेक्शन पर ये खबरें भी पढ़ें...