पहली तारीख: 17 फरवरी, 2023- चुनाव आयोग ने फैसला सुनाया और उद्धव ठाकरे ने पिता बालासाहेब ठाकरे की बनाई पार्टी का नाम और तीर-धनुष वाला सिंबल गंवा दिया। शिवसेना अब एकनाथ शिंदे की पार्टी थी। उद्धव ने सिर्फ इतना कहा, 'एक बार गद्दारी करने वाला, हमेशा गद्दारी करता है।' दूसरी तारीख: 6 फरवरी, 2024- चुनाव आयोग ने फैसला सुनाया और शरद पवार के बागी भतीजे अजित पवार को NCP का घड़ी वाला सिंबल दे दिया। शरद ने कहा, 'ऐसा कभी नहीं हुआ कि जिसने पार्टी बनाई, उसी को बाहर कर दिया गया और सिंबल हड़प लिया।' तीसरी तारीख: 4 जून, 2024- लोकसभा चुनाव में उद्धव की शिवसेना 10 सीटें जीत रही है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना 6 सीटों पर आगे है। उधर, शरद पवार की NCP 7 सीटें जीत रही है, अजित पवार सिर्फ 1 सीट पर सिमटते दिख रहे हैं। एग्जिट पोल्स को गलत बताते हुए महाराष्ट्र में कांग्रेस सबसे ज्यादा 11 सीटें जीत रही है। शिवसेना-UBT, NCP-शरद पवार और कांग्रेस वाली महाविकास अघाड़ी महाराष्ट्र की 48 में से 28 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। उधर, शिवसेना-NCP में तोड़-फोड़ करने के बावजूद सरकार चला रही गठबंधन महायुति सिर्फ 19 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। शुरुआती नतीजों के मुताबिक, महाविकास अघाड़ी को मुंबई, मराठवाड़ा, विदर्भ, पश्चिम महाराष्ट्र आदि सभी क्षेत्रों में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। कुछ जगहों पर वोटों का अंतर 500 से 1000 वोटों के बीच है। 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP-शिवसेना (शिंदे) महायुति ने 48 में से 42 सीटें जीती थीं। हालांकि इस साल शिवसेना और एनसीपी के अलग होने से तस्वीर बदल गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP कांग्रेस के साथ हैं। जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना BJP के साथ हैं। इन दोनों की ताकत से BJP के महागठबंधन को कोई फायदा होता नहीं नजर आ रहा है। सबसे ज्यादा सीटें महाविकास अघाड़ी के पास
अब तक के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी 26 सीटों पर आगे चल रही है। उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 9 सीटें, कांग्रेस ने 10 सीटें और शरद पवार के समूह ने 7 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं, महागठबंधन में BJP ने 13 सीटों पर, शिवसेना ने 7 सीटों पर और NCP ने 1 सीट पर बढ़त बना ली है। सीट बंटवारे में शरद पवार गुट को सिर्फ 10 सीटें मिलीं थी, लेकिन उनके 10 में से 7 उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। NCP के प्रमुख उम्मीदवारों में सुप्रिया सुले, अमोल कोल्हे, भास्कर भागरे, बजरंग सोनावणे, नीलेश लंका, बाल्यामामा म्हात्रे, अमर काले, दारिशिल मोहिते पाटिल शामिल हैं और इन्होंने अपने विरोधियों पर बड़ी बढ़त बना ली है। महाराष्ट्र में महायुति की हार की 5 वजहें
महाराष्ट्र की राजनीतिक नब्ज को समझने वाले सीनियर जर्नलिस्ट और सेफोलॉजिस्ट श्रीकांत देशपांडे कहते हैं, 'महाराष्ट्र के नतीजे जनता का जनादेश हैं। इन नतीजों ने ये साबित कर दिया है कि जनता ही सर्वोपरि होती है और वो जिसे चाहे उसे सत्ता के शिखर पर पहुंच सकती है।' इन चुनाव में PM मोदी ने 25 से ज्यादा सभाएं कीं और कई शहरों में तो वो दो से तीन दिन तक रहे। इसके बावजूद नतीजें यही दिखाते हैं कि न तो मोदी, न राम मंदिर का मैजिक यहां चला और ना ही उनके मुद्दे लोगों को अपनी ओर प्रभावित करने में कामयाब रहे। 1. मराठा आरक्षण
श्रीकांत देशपांडे के मुताबिक,महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण एक बहुत बड़ा मुद्दा था, जिसे राज्य सरकार सही तरीके से सुलझाने में नाकाम रही। इसी वजह से मराठा वोटर उनसे बेहद नाराज चल रहे थे। जिस मनोज जरांगे पाटिल को जूस पिलाकर एकनाथ शिंदे ने आरक्षण देने का वादा किया। वे अब फिर से उनके खिलाफ अनशन पर बैठने जा रहे हैं। ये साबित करता है कि राज्य का 6 करोड़ मराठा उनसे नाराज चल रहा था। 2. परिवार और पार्टी टूटना
श्रीकांत कहते हैं, 'जिस तरह से शिवसेना और एनसीपी के दो टुकड़े हुए, शरद पवार का परिवार टूटा, इससे महाराष्ट्र के लोगों में उद्धव ठाकरे और शरद पवार को लेकर एक सिंपैथी वेव क्रिएट हो गई थी। इस लहर को उद्धव ठाकरे और शरद पवार वोट में कन्वर्ट करने में कामयाब रहे। 'महाराष्ट्र की जनता देवेंद्र फडणवीस से भी बहुत नाराज चल रही थी। यहां के लोगों का मानना है कि परिवार और पार्टी तोड़ने में उनका सबसे बड़ा हाथ है।' 3. मोदी के भाषणों ने बिगाड़ा खेल
श्रीकांत देशपांडे के मुताबिक, 'चुनाव प्रचार के दौरान PM मोदी ने उद्धव के लिए कहा- 'जो उद्धव ठाकरे पिता का नहीं हुआ, उसके बारे में क्या बोलें। इसी के साथ उन्होंने शरद पवार को भटकती आत्मा कहकर विवाद खड़ा कर दिया था। महाराष्ट्र की जनता इस बात से नाराज थी। श्रीकांत कहते हैं कि यहां के लोग अपने नेता का अपमान बर्दाश्त नहीं करते हैं।' 4. नाराज किसान
मोदी सरकार ने देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य में प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगाते हुए सबसे ज्यादा किसानों को नाराज किया। हालांकि, चुनाव के आखिरी टाइम में उन्होंने प्रतिबंध जरुर हटा लिया था, लेकिन किसानों को ये लग रहा था कि ये सिर्फ चुनावों तक ही रहेगा। इसके अलावा गन्ना किसान और दूध उत्पादक भी भाव नहीं मिलने की वजह से इनसे बेहद नाराज चल रहे थे। : 5. एंटी इनकम्बेंसी
महाराष्ट्र की नासिक, कोल्हापुर, हथकंगले और जलगांव समेत ऐसी कई सीटें थी, जहां पर BJP 10 साल की एंटी इनकम्बेंसी खत्म करने के लिए नए उम्मीदवार उतारने की बात कर रही थी। उनके घटक दलों ने इस बात को नहीं माना और जबरदस्ती इन सीटों को अपने पास रखा। अमरावती जैसी सीट पर शिवसेना(शिंदे गुट) के लोगों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए कांग्रेस के उम्मीदवार को वोट दिया। उद्धव ही असली शिवसेना, शरद ही असली NCP के वारिस
श्रीकान्त देशमुख कहते हैं, 'महाराष्ट्र में चुनाव लोकल मुद्दों पर लड़े गए थे। जिसमें महंगाई, बेरोजगारी, आरक्षण और परिवार तोड़ने जैसे मुद्दे प्रमुख थे। यहां मोदी जी अपना मैजिक चलाने में कामयाब नहीं रहे हैं।' अब तक के नतीजे यही साबित करते हैं, 'उद्धव ठाकरे, शरद पवार और कांग्रेस पार्टी के साथ महाराष्ट्र की जनता खड़ी है। जनता ही अपने वोट से तय करती है कि कौन असली और कौन नकली है। उद्धव और शरद पवार के पास जिस तरह से सीटें गई हैं। इससे ये साबित होता है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना असली ‘शिवसेना’ और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी असली ‘NCP’ है। श्रीकांत देशमुख आगे बताते हैं, 'महाराष्ट्र में अगले तीन महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं और यही नतीजे आगामी चुनाव में कैरी फॉरवर्ड होंगे। भारतीय जनता पार्टी कितना भी डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर ले लेकिन सत्ता से उन्हें बाहर होना पड़ेगा।' '220 विधानसभा सीटों पर महाविकास गाड़ी मौजूदा समय में आगे चल रही है। इनमें से अगर 160 सीटें भी ये लोग विधानसभा में ले आते हैं तो वो सत्ता पर काबिज होने में कामयाब हो जाएंगे। नतीजों को देखकर मेरा मानना है कि आने वाले समय में महाविकास अघाड़ी एक बड़ी ताकत बनकर सामने आएगी।' 13 सीटों पर उद्धव और शिंदे के बीच सीधा मुकाबला
महाराष्ट्र में 13 लोकसभा सीटों पर शिंदे की शिवसेना और उद्धव की शिवसेना के बीच सीधा मुकाबला है। इसमें से उद्धव गुट 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। BJP को 11 और NDA को 23 सीटों का नुकसान
देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य में NDA 23 सीटों का नुकसान हो रहा है। पिछली बार इन्हें 42 सीटें मिली थी। इस बार BJP को 12 सीटें मिलती हुई नजर आ रही है। 2019 में उन्हें 23 सीट मिली थी, इस हिसाब से उन्हें 11 सीटों का नुकसान हो रहा है। कांग्रेस को 2019 में 4 सीटें मिली थीं, जिसे अब 10 मिल रही हैं। यानी 6 सीटों का फायदा कांग्रेस को हो रहा है। शिवसेना (UBT) को 11 सीटों पर, NCP (SP) को 7 सीटों पर, शिवसेना (शिंदे गुट) को 5 सीटों पर और NCP (अजीत पवार) को 1 सीट पर जीत मिलती दिख रही है। वहीं एक सीट पर निर्दलीय विशाल पाटिल जीत रहे हैं। सबसे बेहतर स्ट्राइक रेट कांग्रेस का रहा
2019 में सिर्फ 1 सीट जीतने वाली कांग्रेस राज्य में 10 सीटें जीत रही है। इस हिसाब से कांग्रेस का स्ट्राइक रेट सबसे बेहतर माना जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार के नाम पर मिली सिंपैथी वेव का फायदा महाविकास आघाड़ी को हुआ है। अजित पवार के लिए बड़ा झटका
इन चुनावों में सबसे बड़ा झटका अजित पवार को लगता दिखा रहा है। अजित पवार की पार्टी सिर्फ एक सीट पर आगे नजर आ रही है। जबकि उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार, सुप्रिया सुले से पीछे चल रही हैं। यहां पहली बार पवार परिवार चुनाव में आमने-सामने है। ऐसे में अगर वे हार जाती हैं तो ये अजित पवार के लिए बड़ा सेटबैक होगा और उनकी बारगेनिंग पावर आगामी विधानसभा चुनाव में कम होगी। महाराष्ट्र BJP की लीडरशिप में बड़े बदलाव की उम्मीद
सीनियर जर्नलिस्ट बृजेश त्रिपाठी कहते हैं,'अब BJP में अंदरखाने ये आवाज उठने लगी है कि अगर पार्टी अकेले लड़ती तो शायद नतीजे कुछ और ही होते। आने वाले दिनों में इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति और अपकमिंग सरकार पर भी पड़ेगा। विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में लीडरशिप में बदलाव पर भी विचार किया जा सकता है।' 'महाराष्ट्र के नतीजे पूरे देश को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि इन पर पूरे देश की नजर थी। जो पॉलिटिकल सिनेरियो था, इसमें BJP को नुकसान होना ही था। इन नतीजों के बाद शरद पवार ने फिर से ये साबित कर दिया है कि असली NCP वही हैं।'' 'महाराष्ट्र की जनता ने जो पिछले दो साल में देखा है, उसी के आधार पर वोटिंग की है। जनता ने भी ये साफ कर दिया है कि वे जोड़-तोड़, खरीद फरोख्त को पसंद नहीं करती है।'