कर्नाटक में मोदी मैजिक कायम, लेकिन BJP की सीटें घटेंगी:NDA 18-22, कांग्रेस 5-8 सीटों पर आगे, JDS के लिए अस्तित्व की लड़ाई

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रंजीत पेंटर हैं, घरों में पुताई का काम करते हैं। इंडियन सिलिकॉन वैली बेंगलुरु के स्लम चामराजपेट में रहते हैं। ठीक से हिंदी नहीं जानते, लेकिन चुनाव के सवाल पर जोर-जोर से बोलते हैं, 'मुझे मोदी पसंद है। उनसे फायदा कुछ नहीं मिला, बस मोदी पसंद हैं। मोदी नहीं बोलिए, मोदी साब बोलिए, मैं उन्हें वोट दूंगा। मोदी साब ने राम मंदिर बनवा दिया। मैंने दिल्ली और बेंगलुरु में मोदी साब को देखा था। वो इस बार भी जीतेंगे।' ये सिर्फ रंजीत की बात नहीं है। इंजीनियर अक्षित और आर्मी में सर्विस कर रहे मल्लिकार्जुन का मानना है कि मोदी देश को लीड करने के लिए परफेक्ट नेता हैं। इसी मोदी लहर की वजह से BJP ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 28 सीटों में से 25 सीटें जीती थीं। हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 135 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। फिर 5 गारंटी लागू कीं। चामराजपेट स्लम में रंजीत की गली में ही हमारी मुलाकात मेरी नाम की महिला से हुई। मेरी कहती हैं, 'हर महीने 2 हजार रुपए मिलते हैं। बस में फ्री सफर की सुविधा है। हर महीने 120 रुपए चावल के लिए मिलते हैं। जो (कांग्रेस) हमें ये सब दे रहे हैं, हम उन्हें ही सपोर्ट करेंगे।' मेरी जो कह रही हैं, कांग्रेस सरकार की गारंटी लागू होने के बाद कर्नाटक में यही बदलाव है। दैनिक भास्कर की टीम कर्नाटक के कई इलाकों में गई और ये 4 बातें समझ में आईं: 1. कर्नाटक में PM मोदी अब भी ब्रांड हैं और सबसे फेमस लीडर हैं। लोग मोदी को पसंद करते हैं और BJP एक बार फिर लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आएगी। 2. कर्नाटक BJP की लीडरशिप कमजोर है। पूर्व CM बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेंद्र को पार्टी अध्यक्ष बनाकर लिंगायतों को एक रखने की कोशिश की गई है। हालांकि, BJP की सीटें घट रही हैं। इस बार पार्टी 18-21 सीटों पर आगे नजर आ रही है। 3. कांग्रेस को 5 गारंटी लागू करने का सीधा फायदा मिलेगा। महिलाएं कांग्रेस की तरफ नजर आ रही हैं। CM सिद्धारमैया और डिप्टी CM डीके शिवकुमार के बीच तनाव कम हुआ है। इस बार कांग्रेस 5-8 सीटों पर आगे नजर आ रही है। 4. JD(S) ने BJP के साथ अलायंस किया है, जिसे पार्टी के अस्तित्व की लड़ाई की तरह देखा जा रहा है। JD(S) इस बार 0-2 सीटों पर आगे नजर आ रही है। BJP की उम्मीद मोदी मैजिक पर टिकी नित्या एजुकेशन ट्रस्ट के एकेडमिक डायरेक्टर और नेशनल कोऑर्डिनेटर लोकनीति संदीप शास्त्री मानते हैं कि इस बार कर्नाटक में BJP पिछला प्रदर्शन दोहरा पाएगी, ये मुश्किल नजर आ रहा है। संदीप कहते हैं, 'कर्नाटक का पॉलिटिकल सिनेरियो समझने के लिए दो बातें समझनी होंगी। पहली ये कि कर्नाटक में वोटर लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बिल्कुल अलग बिहेव करता है।1984-85 में ऐसा पहली बार ऐसा देखा गया था। ये देश में पहली बार कर्नाटक में हुआ था। दूसरी बात ये कि दक्षिण भारत में कर्नाटक अकेला ऐसा राज्य है, जहां कांग्रेस और BJP दोनों की कभी न कभी सरकार रह चुकी है। इसलिए BJP इस राज्य को काफी उम्मीदों से देखती है।' ‘ऐसे समझिए कि 2013 में विधानसभा चुनाव हुए और BJP हार गई, लेकिन अगले ही साल लोकसभा चुनाव में वो फिर सबसे बड़ी पार्टी बन गई । 2018 में भी BJP को बहुमत नहीं मिला, लेकिन उसने 2019 में 25 सीटें जीती थीं।' संदीप आगे कहते हैं, 'मोदी फैक्टर को आप लोकनीति-CSDS के सर्वे रिजल्ट से भी समझ सकते हैं। 2019 के बाद कराए इस सर्वे में BJP को वोट देने वाले हर 10 में से 6 लोगों ने माना कि अगर मोदी PM कैंडिडेट नहीं होते तो वे पार्टी को वोट नहीं करते।' 'BJP इन चुनावों में भी पूरी उम्मीद इसी फैक्टर से लगाए है। BJP कैंपेन इसी एक लाइन पर है कि मोदी को फिर से PM बनाना है। सभी BJP कैंडिडेट लोगों से यही कह रहे हैं कि आप हमें वोट नहीं दे रहे, बल्कि केंद्र में मोदी जी को एक सीट जिता रहे हैं।' एक्सपर्ट बोले- पॉलिटिकल स्टैबलिटी के लिए मोदी पर भरोसा सीनियर जर्नलिस्ट एसए हेमंत भी ऐसा ही मानते हैं। वे कहते हैं, '1983 में पहली बार कर्नाटक में कांग्रेस हार गई और गैर-कांग्रेस सरकार बनी। जनता पार्टी की सरकार में रामकृष्ण हेगड़े मुख्यमंत्री बने। अक्टूबर, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में 28 में से 27 सीट कांग्रेस काे मिली।' 'रामकृष्ण हेगड़े ने इस हार की जिम्मेदारी लेते हुए विधानसभा भंग कर दी। फिर विधानसभा चुनाव हुए और जिस जनता ने 5-6 महीने पहले कांग्रेस को वोट दिया था, उसी जनता ने हेगड़े की पार्टी को 136 सीट दे दीं।’ ‘इसका मतलब जनता जानती है कि किस पार्टी को किस चुनाव में कितनी सीट देनी है। 1999 में कर्नाटक में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हुए थे। लोकसभा चुनाव में BJP ने 16 सीट जीती थी, लेकिन असेंबली इलेक्शन में 44 सीट मिलीं।’ ‘लोगों ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जिताया। एसएम कृष्णा CM बने थे। ये ट्रेंड है। जनता समझदार है। वो सोचती है कि लोकसभा चुनाव है और पॉलिटिकल स्टैबलिटी चाहिए, इसलिए मोदी को वोट दे सकती है। ऐसी बातें भी चल रही हैं कि कांग्रेस हार गई और उसने गारंटी कैंसिल कर दी तो।’ BJP ने दोनों टर्म में अलग-अलग स्ट्रैटजी पर काम किया एसए हेमंत आगे कहते हैं, 'मुझे लगता है लोकसभा चुनाव में लोगों की सोच अलग रहेगी। सबसे अहम फैक्टर ये है कि 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार में आए। तब उन्होंने कांग्रेस लीडरशिप वाली UPA के खिलाफ आंदोलन चलाया था। कहा कि मुझे मौका दो, मैं आपको भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन दूंगा। 2014 से 2019 तक उन्होंने आर्टिकल-370, राम मंदिर, UCC, CAA टच नहीं किया। उन्होंने पॉलिटिकल स्टेबिलिटी और इकोनॉमी पर फोकस किया।’ ‘2014 में BJP को 282 सीट मिली थीं, 2019 में 303 सीट मिलीं। 2019 के बाद उन्होंने क्या किया, वैचारिक इश्यूज को एड्रेस किया। राम मंदिर बन गया, आर्टिकल-370 हट गया, UCC के लिए दो कदम बाकी हैं। CAA को लागू कर दिया। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बना दिया। उज्जैन का महाकाल कॉरिडोर डेवलप कर दिया। आर्थिक लिहाज से कई स्कीम जैसे किसान फसल बीमा, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और मुद्रा स्कीम शुरू की।’ कांग्रेस कर्नाटक के वोटिंग पैटर्न को तोड़ने के मिशन पर सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट बेलागारु समीउल्लाह भी संदीप शास्त्री की बात से इत्तेफाक रखते हैं। समीउल्लाह कहते हैं, 'कर्नाटक का वोटिंग पैटर्न अलग है। आप ऐसे मानिए कि अभी कांग्रेस विधानसभा में जीती है, लेकिन लोकसभा चुनाव में लोग BJP को जिता देंगे। तीन चुनाव से कर्नाटक के लोग BJP को ही सपोर्ट कर रहे हैं।’ ‘इस बार कांग्रेस इस पैटर्न को तोड़ना चाहती है। वो अपनी 135 विधानसभा सीटों को लोकसभा सीट में कन्वर्ट करने की कोशिश कर रही है। BJP का पूरा फोकस ओल्ड मैसूरु रीजन में JD(S) की मदद से खुद को मजबूत करना है। BJP अपना पिछला प्रदर्शन दोहराना चाहती है। इसलिए उसका फोकस साउथ कर्नाटक पर है। कांग्रेस गारंटी स्कीम के जरिए महिला वोट बैंक बना रही है। अब ये कितना हो पाया है, ये रिजल्ट आने पर ही पता चलेगा।’ सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट एसए हेमंत भी ऐसा ही मानते हैं। वे कहते हैं, 'कर्नाटक के पॉलिटिकल सिनेरियो में असमंजस की स्थिति है। लोगों के मन में है कि कांग्रेस की 5 गारंटी के साथ जाना है या मोदी की गारंटी और स्कीम पर जाना है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 135 सीटें जीतकर आई थी। एक इंडिपेंडेंट का सपोर्ट था। इतनी सीट 5 गारंटी की वजह से आई थीं। कांग्रेस ने सिर्फ बोला नहीं, इसे लागू किया।’ ‘हम जानते हैं कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में वोटिंग पैटर्न अलग-अलग होता है। अलग फैक्टर्स काम करते हैं। इस बार BJP का कहना है कि लोग मोदी की गारंटी को सपोर्ट करेंगे। 2019 के चुनाव में BJP ने 25 सीट जीती थीं। एक इंडिपेंडेंट ने सपोर्ट किया था। ये अभी तय नहीं है कि जनता कांग्रेस की गारंटी पर जाएगी या मोदी की पॉलिटिकल स्टेबिलिटी पर।' समीउल्लाह एक और जरूरी बात कहते हैं, '2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और JD(S) साथ थे। अब BJP और JD(S) साथ हैं। ये इस चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव है।' BJP के लिए लड़ाई मुश्किल, कांग्रेस का लोकल मुद्दों पर फोकस नेशनल कोऑर्डिनेटर लोकनीति संदीप शास्त्री के मुताबिक, ‘BJP पिछली बार सभी 28 सीटों पर लड़ी और 25 सीटें जीती थी। इस बार वो 25 सीटों पर ही लड़ रही है। ऐसे में पुराना रिकॉर्ड कायम रखना है तो 100% स्ट्राइक रेट चाहिए।’ ‘BJP वाले भले ही कहें कि JD(S) भी साथ है। NDA सभी 28 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है, लेकिन JD(S) को वोट ट्रांसफर भी बड़ा सवाल है। कई साल से JD(S) के वर्कर और BJP वर्कर आमने-सामने थे। अब लीडर्स तो हाथ मिला चुके हैं, लेकिन ग्राउंड पर भी ऐसा होगा, ये सवाल बना हुआ है।' संदीप आगे कहते हैं, 'बीते सभी चुनावों से अलग इस बार एक फर्क नजर आ सकता है। बीते दो लोकसभा चुनावों से पहले राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन BJP ने लीड बनाए रखी। इस बार कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और खासकर अपनी गारंटी या योजनाओं पर चुनाव लड़ रही है। लोगों को क्या मिला ये कैंपेन के केंद्र में है और नेशनल मुद्दे सेकेंडरी हैं। BJP को पहले के मुकाबले ज्यादा कंपटीशन मिल रहा है। BJP को भितरघात और कांग्रेस को परिवारवाद से खतरा सीनियर जर्नलिस्ट एसए हेमंत कहते हैं, 'कर्नाटक BJP में गड़बड़ थी, अब भी है। 28 सीट जीतने का टारगेट रखना ठीक है, पर मुझे लगता है कि 5-6 सीट कम हो सकती हैं। BJP की 20-21 तक सीट आ सकती हैं।' हेमंत एक किस्सा सुनाते हैं, '1984 में BJP सिर्फ दो सीटें जीती थी। खुद अटल जी भी ग्वालियर से हार गए थे। तब उनका बेंगलुरु में भाषण हुआ था। उन्होंने कहा था कि BJP जितना नीचे आ सकती थी, आ गई है। आंध्रप्रदेश के हनमकोंडा से चंदुपतला जंगा रेड्डी और गुजरात के मेहसाणा से डॉ. एके पटेल BJP से सांसद चुने गए थे। 'कांग्रेस जितनी ऊपर जा सकती थी, चली गई है। इससे ऊपर नहीं जा सकती। BJP इससे नीचे नहीं आ सकती। अब हम उत्तर की ओर आगे बढ़ेंगे। आडवाणी जी के नेतृत्व में काम करेंगे। मुझे लगता है कि BJP 2019 में 25 सीटें जीतकर जितना ऊपर जा सकती थी, चली गई है। इससे ऊपर जीतना नामुमकिन तो नहीं है, लेकिन मुश्किल है।' हालांकि, नेशनल कोऑर्डिनेटर लोकनीति संदीप शास्त्री मानते हैं, 'BJP ने आधे से ज्यादा कैंडिडेट को बदल दिया है। इस वजह से कई जगह विरोध है। कई सीटों पर लोग भले चुप हों, लेकिन नाराज हैं। देखना होगा कि इसका कितनी सीटों पर इम्पैक्ट होगा। इसके अलावा कर्नाटक में पार्टी के अंदर बाकी राज्यों जैसी यूनिटी नजर नहीं आती है। पार्टी में काफी खेमेबाजी है। इसीलिए BJP मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रही है।’ कांग्रेस भी यहां काफी मुश्किल में है। कांग्रेस के पास तो चुनाव लड़ने के लिए लीडर ही नहीं थे। कांग्रेस के कैंडिडेट्स में सिर्फ 3 लोग ऐसे हैं, जो पहले लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 25 कैंडिडेट्स ने कभी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। आधे से ज्यादा कैंडिडेट किसी कांग्रेस लीडर के भाई, बेटे, बेटी या रिश्तेदार हैं।’ ‘इसमें पॉजिटिव ये है कि अपने लोगों को जिताने के लिए पार्टी के नेता पूरा जोर लगाएंगे। ये कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है। इसका नुकसान ये है कि इन सीटों पर ऐसे बहुत से नेता थे, जो चुनाव लड़ना चाहते थे, यानी सेकेंड लाइन लीडरशिप में थे। उन्हें टिकट नहीं मिला तो वे इन कैंडिडेट को कितना सपोर्ट करेंगे, ये सवाल बना हुआ है।’ सीनियर जर्नलिस्ट समीउल्लाह के मुताबिक, 'JD(S) की बात करें तो ओल्ड मैसूरु उनका गढ़ रहा है। विधानसभा में यहां उन्हें 40 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार वे 19 पर सिमट गए हैं। बीते कुछ चुनावों में साफ दिखा कि JD(S) का वोटबैंक BJP की तरफ शिफ्ट हो रहा है। इसलिए उनके पास BJP के साथ जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।’ पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रही हैं… BJP: भरोसा है कि सभी 28 सीटें हम जीतेंगे BJP के कर्नाटक से राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया कहते हैं, ‘कर्नाटक में पहली बार BJP और JD(S) अलायंस में लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इसका नतीजा ये होगा कि हम पूरी 28 सीटें जीतेंगे। पिछली बार कांग्रेस कर्नाटक में एक सीट जीत गई थी, लेकिन इस बार वो सीट भी नहीं जीत पाएगी। हमने उस सीट पर बहुत दमदार कैंडिडेट उतारा है।’ वे कहते हैं, ‘कांग्रेस अपनी हार पहले ही मान चुकी हैं। इसे इस बात से समझ सकते हैं कि उन्हें तमाम सीटों पर मंत्रियों के बेटे और पत्नियों को टिकट देना पड़ा क्योंकि अच्छे कैंडिडेट मिल ही नहीं रहे थे। एक-दो सीट पर ही कांग्रेस अच्छे कैंडिडेट उतार पाई है, लेकिन मोदी जी की आंधी में वो उड़ जाएंगे।’ कर्नाटक BJP के प्रवक्ता मोहन विश्वा कहते हैं, ‘पिछले चुनाव में हम ओल्ड मैसूरु में थोड़ा कमजोर थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। मैसूरु से हमारे कैंडिडेट मैसूरु महाराजा ही हैं। मंड्या से हमारे अलायंस पार्टनर JD(S) के नेता और पूर्व CM कुमारस्वामी मैदान में हैं। बेंगलुरू रूरल से मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मंजूनाथ मैदान में हैं। ऐसे में हम कर्नाटक में क्लीन स्वीप करने वाले हैं।’ ‘केंद्र की सीधे फायदा देने वाली स्कीम्स चल रही हैं। जनता ये सब देख रही है और चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर हो रहा है, इसलिए लोग मोदी जी को ही चुनेंगे।' विधानसभा चुनाव में हार पर सिरोया कहते हैं, ‘विधानसभा चुनाव में हम हारे जरूर थे, लेकिन हमारा वोट शेयर कम नहीं हुआ था। हार भी इसलिए हुई थी क्योंकि कांग्रेस के कुछ बागी हमारी पार्टी में आ गए थे। हम उनके जाल में फंस गए थे, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है। BJP और JD(S) साथ मिलकर 51% वोट शेयर तक पहुंच सकती है।’ कांग्रेस: 5 गारंटी कमाल दिखाएगी, हम 20 से ज्यादा सीटें जीतेंगे कर्नाटक कांग्रेस की मीडिया विभाग के चेयरमैन रमेश बाबू कहते हैं, 'हमें उम्मीद है कि हम इस बार 20 से ज्यादा सीटें जीत रहे हैं। हमारी 5 गारंटी को लेकर लोग काफी खुश हैं। कर्नाटक में असेंबली इलेक्शन में हमें 43% वोट मिले थे। इसके अलावा हम जो गारंटी दे रहे हैं, उनकी वजह से 2 से 3% वोट ज्यादा मिलेंगे। हम 20 से ज्यादा सीटें जीतने वाले हैं और BJP यहां नुकसान में रहने वाली है। ‘हमें INDIA ब्लॉक का सपोर्ट मिल रहा है। इनमें DMK, AAP, सपा, CPI, CPM, मुस्लिम लीग, CPI (ML), फारवर्ड ब्लॉक, सर्वोदय कर्नाटक पार्टी, किसान और दलित यूनियन कांग्रेस का सपोर्ट कर रहे हैं।’ JD(S): BJP के साथ मिलकर सभी सीटें जीतेंगे JD(S) के स्टेट स्पोक्सपर्सन प्रदीप कुमार कहते हैं, 'हम सिर्फ तीन सीटें हसन, मंड्या और कोलार से लड़ रहे हैं। मंड्या से एचडी कुमारस्वामी, हसन से प्रज्ज्वल रेवर्णा और कोलार से मल्लेश बाबू चुनाव लड़ रहे हैं। कर्नाटक में NDA सभी सीटों पर जीत रही है। देवगौड़ा जी ने प्रधानमंत्री और कर्नाटक का चीफ मिनिस्टर रहते हुए कर्नाटक के लिए बहुत अच्छा काम किया था। इसी तरह प्रधानमंत्री ने भी किसानों के लिए और मजदूरों के लिए काम किया है। सड़कें बनी हैं। डेवलपमेंट प्रोग्राम अनाउंस किए हैं। यही वजह है कि BJP और JD(S) सभी सीटें जीत रही है। कांग्रेस ने आजादी के बाद सेंटर में 52 साल से ज्यादा सरकार चलाई है। 1947 में भी वही दिक्कतें थीं। वही दिक्कतें अब भी हैं, जैसे- बेरोजगारी, गांवों में पानी की समस्या, सड़कों की समस्या।’ ‘UPA सरकार के 10 साल के कार्यकाल में एक के बाद एक स्कैम हुए। यही वजह है कि लोगों ने उसे रिजेक्ट कर दिया। बीते 20 साल में कर्नाटक के लोगों ने कांग्रेस को स्वीकार नहीं किया है। इन 20 साल में उन्होंने BJP को ही सपोर्ट किया।’ ....................................................................... देश के दूसरे राज्यों में क्या है हवा का रुख, पढ़िए ये स्टोरीज
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