कांग्रेस 63 से 20, बीजेपी 79 से 128 पर पहुंची:महाराष्ट्र चुनाव में कैसे किनारे लगे उद्धव और शरद; लोकसभा से बाजी पलटने के 5 फैक्टर्स

1 year ago 8
ARTICLE AD
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत असाधारण है। बीजेपी कुल 149 सीटों पर चुनाव लड़ी और 128 सीटों पर आगे चल रही है। यानी स्ट्राइक रेट 86%। इसी के साथ महाराष्ट्र में बीजेपी का अश्वमेघ यज्ञ पूरा हुआ। 1990 में बाल ठाकरे की शिवसेना के साथ छोटे भाई की हैसियत से 42 सीटें जीतने वाली बीजेपी अकेले बहुमत के करीब है। वहीं, बाला साहब के बेटे उद्धव की शिवसेना सिर्फ 17 सीटों पर सिमटती दिख रही है। हालांकि 5 महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे देखकर इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था। महाराष्ट्र के लोकसभा चुनावों को विधानसभावार कंवर्ट करें, तो कांग्रेस ने 63 सीटें जीती थीं, जो अब महज 20 सीटों पर सिमटती दिख रही है। वहीं, इस हिसाब से बीजेपी 79 से बढ़कर 128 सीटों पर पहुंच रही है। 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों से तुलना करें तो बीजेपी ने सबसे ज्यादा सीटें कांग्रेस से छीनीं… 1. मुंबई क्षेत्र: इस इलाके में मुंबई शहर और मुंबई उपनगर जिले हैं। इन दो जिलों में कुल 36 विधानसभा सीटें हैं। ये क्षेत्र पूरी तरह से शहरी है और देश की फाइनेंशियल कैपिटल है। 'हिंदुत्व' और 'मराठी अस्मिता' की राजनीति करने वाली शिवसेना यहीं बनी और बढ़ी है। इस बार क्या हुआः इस चुनाव में यहां बीजेपी 16 सीटों पर और शिवसेना (शिंदे) 7 सीटों पर आगे है। वहीं एनसीपी (अजित) खाता नहीं खोल सकी। 2. विदर्भ क्षेत्र: इसमें कुल 11 जिले और 62 विधानसभा सीटें है। ये इलाका सूखे और पिछड़ेपन की मार झेल रहा है। महाराष्ट्र में होने वाले किसान आत्महत्या के आधे मामले यहीं होते हैं। बीजेपी और संघ का गढ़ रहा। नितिन गडकरी, देवेंद्र फडणवीस, सुधीर मुनगंटीवार जैसे बीजेपी के कद्दावर नेता यहीं से आते हैं। इस बार क्या हुआः इस चुनाव में यहां बीजेपी ने एकतरफा बढ़त बनाई है और 36 सीटें जीतती नजर आ रही है। वहीं 6 सीटों पर शिवसेना (शिंदे) और 5 सीटों पर एनसीपी (अजित) आगे हैं। 3. कोंकण क्षेत्र: इस इलाके में ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों की कुल 39 सीटें हैं। समुद्र से लगे होने के कारण इसे कोस्टल रीजन भी कहते हैं। ये इलाका ज्यादातर शहरी है, जहां फैक्ट्री और इंडस्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर लोग प्रवासी हैं। इस बार क्या हुआः बीजेपी ने 15, शिवसेना (शिंदे) ने 16 और एनसीपी (अजित) ने 2 सीटों पर बढ़त बनाई है। 4. मराठवाड़ा क्षेत्र: औरंगाबाद, बीड, जालना, उस्मानाबाद, नांदेड़, लातूर, परभणी और हिंगोली जिले की कुल 46 विधानसभा सीटें हैं। सूखे से जूझने वाले इस इलाके में महाराष्ट्र की एक तिहाई मराठा आबादी रहती है। यहां दलित राजनीति भी हावी है। चुनाव में यहां आरक्षण, पानी और विकास तीन बड़े मुद्दे रहे। इस बार क्या हुआः बीजेपी ने 17 सीटों पर बढ़त बनाई है। वहीं 11 सीटों पर शिवसेना (शिंदे) और 7 सीटों पर एनसीपी (अजित) आगे हैं। 5. पश्चिमी महाराष्ट्र क्षेत्र: इस इलाके में कुल 5 जिले और 58 विधानसभा सीटें है। इसमें पुणे, सांगली, सतारा, सोलापुर और कोल्हापुर शामिल हैं। कॉपरेटिव सेक्टर जैसे शुगर फैक्टरी, क्रेडिट सोसायटी और बैंक की मजबूत पकड़ है। आर्थिक तौर पर उन्नत पश्चिमी महाराष्ट्र में ऑटोमोबाइल और आईटी इंडस्ट्री भी हैं। पवार परिवार की पकड़ मजबूत है और ज्यादातर विधायक NCP के ही जीतते हैं। इस बार क्या हुआः बीजेपी ने 23 सीटों पर बढ़त बनाई है। वहीं 7 सीटों पर शिवसेना (शिंदे) और 12 सीटों पर एनसीपी (अजित) आगे हैं। 6. उत्तरी महाराष्ट्र क्षेत्रः इस इलाके में अहमदनगर, धुले, जलगांव, नंदुरबार और नाशिक जिले हैं। इन 5 जिलों में कुल 47 विधानसभा सीटें हैं। अंगूर, केला और प्याज की खेती के लिए पहचाने जाने वाले इस इलाके में अनुसूचित जनजातियां यानी ST किंगमेकर हैं। इस बार क्या हुआः यहां बीजेपी ने 20, शिवसेना (शिंदे) ने 9 और एनसीपी (अजित) ने 9 सीटों पर बढ़त बनाई है। महाराष्ट्र में महायुति और खासकर बीजेपी की प्रचंड जीत के 5 बड़े फैक्टर… 1. ‘माझी लाडकी बहिन’ योजना के कारण महायुति को मिला महिलाओं का वोट महायुति की शिंदे सरकार ने जून 2024 में ‘माझी लाडकी बहिन’ योजना शुरू की। इस योजना के तहत 2.5 लाख रुपए से कम सालाना कमाई वाले परिवार की महिलाओं को हर महीने 1500 दिए जा रहे हैं। जुलाई से अक्टूबर तक 2.34 करोड़ महिलाओं को इसका फायदा मिला, जो राज्य की कुल महिला वोटर्स का लगभग आधा है। चुनाव के दौरान सीएम एकनाथ शिंदे ने वादा किया, ‘अगर महायुति सत्ता में आती है तो योजना के तहत हर महीने 2,100 रुपए दिए जाएंगे। कई लोगों ने इसे सराहा। इलेक्शन एक्सपर्ट अमिताभ कहते हैं, ‘महायुति को उम्मीद थी कि लाडकी बहिन योजना से महिलाओं का वोट हासिल करने में मदद मिलेगी। ऐसी ही योजना मध्यप्रदेश में बीजेपी के लिए कारगर साबित हुई, जहां कांग्रेस जीतती दिख रही थी। महिला वोटर्स चुनावों में किंगमेकर का रोल निभा रही हैं।’ पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुधीर महाजन बताते हैं, ‘मध्यप्रदेश की लाडली बहन योजना को कॉपी कर महायुति ने महाराष्ट्र में लाडकी बहिन योजना लॉन्च की। इसमें टाइम-टू-टाइम महिलाओं को पैसा मिला। इस योजना से महिला वोटर्स महायुति की ओर लामबंद हुईं।’ 2. जमीन पर उतरा संघ, बैठकें कर बीजेपी के लिए मांगे वोट लोकसभा चुनाव के दौरान कई ऐसी खबरें चली कि बीजेपी और संघ के रिश्ते बिगड़ रहे हैं। नतीजों में बीजेपी 240 सीटों पर सिमट गई। इस नतीजे को संघ-बीजेपी के बिगड़े हुए संबंधों से जोड़कर देखा गया। इसके बाद हरियाणा चुनाव में संघ जमीन पर उतारा और बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत हासिल कर हैट्रिक मारी। महाराष्ट्र में भी बीजेपी के लिए वोट मांगने के लिए संघ जमीन पर उतारा। सीनियर जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘इस चुनाव में संघ पूरी तरह से जमीन पर उतारा। लोकसभा चुनाव में बीजेपी का जो वोटर वोट देने नहीं निकला, उसे संघ बूथ तक पहुंचाया। संघ ने करीब 60 हजार कार्यकर्ता ग्राउंड पर उतारे। लगभग 12 हजार छोटी-बड़ी बैठकें कीं। सोसाइटियों के अंदर ही संघ के कार्यकर्ताओं ने अपनी कुर्सी-टेबल लगाई। संघ ने उन सीट पर भी फोकस किया, जहां बीजेपी का जीतना तय था। संघ जिस साइलेंट वर्कर की भूमिका के लिए जाना जाता है, वो इस चुनाव में देखने के लिए मिली। संघ ने बीजेपी के लिए हर तरह से वोट मांगे, जो नतीजों में साफ दिख रहा है।’ 3. MVA लोगों को समझाने में पिछड़ी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘INDIA’ एलायंस ने ‘संविधान’ और आरक्षण को मुद्दा बनाया, जो उनके फायदे में रहा। बीजेपी 240 में सिमट गई और कांग्रेस को बढ़त के साथ 99 सीटें जीती। लेकिन महाराष्ट्र में कांग्रेस का MVA एलायंस नरैटिव बनाने में पिछड़ता दिखा। संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘चुनाव की शुरुआत में कांग्रेस ने ‘संविधान’ को मुद्दा बनाने की कोशिश की थी, लेकिन ये मुद्दा विधानसभा चुनाव में उस तरह से नहीं चला, जैसा लोकसभा चुनाव में चला था। दरअसल, कांग्रेस को ये समझना चाहिए कि एक मुद्दा एक ही चुनाव में चलता है। हालांकि, सोयाबीन-कपास, किसानों और महंगाई का मुद्दा उठाया। इसका फायदा विदर्भ और अन्य कुछ सीटों पर मिला।’ अमिताभ तिवारी कहते हैं, ‘लोकसभा चुनाव के दौरान महाविकास अघाड़ी ने जो पकड़ बनाई थी, वो इस चुनाव में ढीली पड़ गई। MVA न तो कोई नरैटिव खड़ा किया और न ही कोई मुद्दा उठाया। पूरे चुनाव उन्होंने ‘गद्दारी-गद्दारी’ का नारा लगाया।’ हालांकि सुधीर महाजन मानते हैं कि कांग्रेस को महाराष्ट्र में फायदा हुआ है। वे कहते हैं, ‘भारत जोड़ो यात्रा करके राहुल गांधी लोगों तक पहुंचे। लोगों के बीच उन्होंने अपनी सहज छवि बनाई। जो कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहा।’ 4. ‘मराठा’ की बजाए ‘छोटी-छोटी जातियों’ को बीजेपी ने साधा इस चुनाव में बीजेपी ने जातिगत समीकरण साधने की पूरी कोशिश की। बीजेपी ने प्याज के निर्यात पर शुल्क घटाने से लेकर बंजारा विरासत म्यूजियम बनाने बनाने तक के दांव चले। गोपीनाथ मुंडे और प्रमोद महाजन के दौर में बनाया गया बीजेपी का ‘माधव’ फॉर्मूला इस चुनाव में जिंद किया। बीजेपी के 'माधव' में माली, धनगर और वंजारी समुदाय आते हैं। ये तीनों ही समुदाय OBC कैटेगरी में आते हैं। बीजेपी ने इस चुनाव में 'मराठा' से इतर OBC को साधने की कोशिश की। संदीप सोनवलकर कहते हैं, ‘बीजेपी ने हरियाणा की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी छोटी-छोटी जातियों को साधा। जैसे बीजेपी ने विदर्भ में तेली कैंडिडेट को चुनावी मैदान में उतारा, वहां तेली समाज करीब 6% है। बीजेपी ने कुनबी, कोमटी, हल्बा जैसी छोटी जातियों को साधने में कमायाब रही। इसके अलावा दलित वोट भी एकजुट होकर किसी एक ओर नहीं पड़ा, जिसका फायदा बीजेपी को मिला।’ अमिताभ तिवारी कहते हैं, ‘अब मराठा आंदोलन खत्म हो गया है और मनोज जरांगे पाटिल एक्सपोज हो गया। OBC में एकजुटता में बढ़ी है। 2019 में जैसे दलित और मुस्लिम वोट एकमुश्त एक ओर पड़ा था, वैसा इस बार नहीं हुआ। इसका फायदा महायुति को मिला।’ 5. ज्यादा वोटिंग होने से महायुति को फायदा 2019 के विधानसभा चुनाव में 61.1% वोटिंग हुई थी, जो इस बार बढ़ी है। इस बार के विधानसभा चुनाव में करीब 66% वोटिंग हुई। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि वोटिंग को बढ़ाने के लिए बीजेपी समेत महायुति एलायंस काफी जोर लगाया। संदीप सोनवलकर मानते हैं कि ज्यादा वोटिंग होने का फायदा महायुति को हुआ। वे कहते हैं, ‘महायुति की ओर से ज्यादा वोटिंग के लिए जोर लगाया गया। बीजेपी, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित) ने सामूहिक प्रयास कर वोटिंग परसेंटेज बढ़ाया, जिसका फायदा उन्हें मिला। लोकसभा चुनाव के दौरान महायुति को केवल 1.5% वोट के अंतर से शिकस्त मिली थी। इस अंतर को महायुति ने पाटा और ज्यादा वोट हासिल किए।’ **** एक्सपर्ट पैनल: -------- महाराष्ट्र चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... महाराष्ट्र के रुझानों में भाजपा गठबंधन को बहुमत: शिंदे बोले- CM तीनों पार्टियां मिलकर तय करेंगीं; फडणवीस ने कहा- एक हैं तो सेफ हैं महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर सुबह 8 बजे से मतगणना जारी है। शुरुआती दो घंटों में महायुति (MU) और महाविकास अघाड़ी (MVA) के बीच टक्कर दिखी, लेकिन ढाई घंटे बाद यानी सुबह 10.30 बजे के बाद भाजपा गठबंधन रुझानों में एक तरफा जीत की ओर आ गया। उसे 200 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं। उधर, कांग्रेस गठबंधन पिछड़ गया है। वह 49 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। मुख्यमंत्री सीएम शिंदे ने कहा कि तीनों पार्टी मिलकर तय करेंगे कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। वहीं देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया पर लिखा- एक हैं तो सेफ हैं। पूरी खबर पढ़िए...
Read Entire Article