राहुल गांधी की कांग्रेस दिल्ली में जीरो थीं, जीरो ही रही। लेकिन आम आदमी पार्टी को जरूर हरवा दिया। 14 सीटों पर आम आदमी पार्टी की हार का अंतर, कांग्रेस को मिले वोटों से कम है। यानी अगर AAP और कांग्रेस का गठबंधन होता, तो दिल्ली में गठबंधन की सीटें 37 हो जातीं और BJP 34 सीटों पर सिमट सकती थी। बहुमत के लिए 36 सीटें चाहिए। आम आदमी पार्टी से हारने वालों में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, सोमनाथ भारती और दुर्गेश पाठक जैसे टॉप लीडर्स हैं। भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे कैसे केजरीवाल और राहुल अपनी-अपनी होशियारी में डूबे, क्या गठबंधन से BJP को रोक सकते थे… दिल्ली में परंपरागत तौर पर BJP और कांग्रेस एक-दूसरे को टक्कर देते रहे हैं। यहां कांग्रेस को एंटी-BJP वोट मिलता रहा, लेकिन 2013 में AAP की एंट्री हुई और कांग्रेस के एंटी-BJP वोट पर कब्जा कर लिया। 2013 में AAP को 30% वोट मिले, जो 2020 में बढ़कर 54% हो गए। वहीं 2013 में कांग्रेस को 25% वोट मिले थे, जो 2020 में घटकर 4% हो गए। जबकि बीजेपी के अपने करीब 35% वोट बरकरार हैं। यानी ये माना जा सकता है कि कांग्रेस और AAP के वोटर कमोबेश एक जैसे हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रोफेसर संजय कुमार कहते हैं कि अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक साथ लड़ते तो आज आंकड़े अलग हो सकते थे। आप को जो नुकसान हुआ है, वह कांग्रेस की ही देन है। केजरीवाल और राहुल ने किस होशियारी में दिल्ली चुनाव में गठबंधन नहीं किया? AAP और कांग्रेस ने एक-दूसरे के खिलाफ कोई कसर नहीं छोड़ी; 6 पॉइंट में एनालिसिस… 1. राहुल बोले- केजरीवाल और मोदी एक ही सिक्के के दो पहलू 2. कांग्रेस ने केजरीवाल पर करप्शन के आरोप को मुद्दा बनाया 3. कांग्रेस ने 6 सीटों पर आप के कद्दावर नेताओं के खिलाफ मजबूत कैंडिडेट उतारे 4. आप के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी का माहौल बनाया 5. कांग्रेस ने अपना पारंपरिक मुस्लिम-दलित वोट टारगेट किया 6. कांग्रेस ने आप को टक्कर देने वाला मैनिफेस्टो जारी किया -------------------- दिल्ली चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें: आज का एक्सप्लेनर:AAP जहां पैदा हुई, वो गढ़ हारी; पार्टी में भगदड़ मचेगी, केजरीवाल की लीडरशिप को चुनौती, क्या फिर जेल जाएंगे आम आदमी पार्टी का जहां जन्म हुआ, जहां लगातार 2 विधानसभा चुनाव में एकतरफा जीत दर्ज की, वो ‘दिल्ली का किला’ ढह गया है। ताजा रुझानों और नतीजों के मुताबिक दिल्ली में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनती दिख रही है। दिल्ली हारने से अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर क्या असर पड़ेगा; पूरी कहानी पढ़ें...