जगह: कोलकाता की 6 मुरलीधर रोड, समय: रात 8 बजे BJP ऑफिस के हॉल में बैठकर पार्टी कार्यकर्ता खाना खा रहे हैं। एक ठेले पर बड़े-बड़े बर्तनों में 150 से ज्यादा लोगों के लिए खाना आया है। कार्यकर्ता यहीं गद्दे बिछाकर परिवार के साथ सोते भी हैं। उनका आरोप है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद TMC नेता उनके घर जला रहे हैं। इसलिए वे जान बचाने के लिए परिवार के साथ भागकर यहां आ गए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने 10 जून से कोलकाता BJP ऑफिस में शरण ली हुई है। ये सभी साउथ और नॉर्थ-24 परगना से आए हैं। साउथ-24 परगना से आए गोपाल मंडल बताते हैं, 'TMC नेताओं ने मुझ पर हमला किया। मेरे घर पर पत्थर फेंके। वो धमकी दे रहे थे कि मेरी जान ले लेंगे।’ दैनिक भास्कर की टीम BJP ऑफिस पहुंची। BJP कार्यकर्ताओं ने हमें बताया कि हर जिले में TMC के लोग हमला कर रहे हैं। कई जगह पार्टी दफ्तर तोड़ दिया। BJP वर्कर्स के घरों में ताला लगा दिया और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद से करीब 170 BJP कार्यकर्ता कोलकाता के 6 मुरलीधर सेन रोड और साउथ 24 परगना के बरईपुर में रह रहे हैं। पार्टी दफ्तर में ही उनके लिए रहने और खाने-पीने का इंतजाम है। BJP लीडर और नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर दखल देने की मांग की है। बंगाल में चुनाव नतीजे आने के बाद से हो रही हिंसा
पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान कई जिलों में हिंसा हुई थी। नतीजे आने के बाद कोलकाता, नॉर्थ-24 परगना, साउथ-24 परगना, बर्धमान और कूचबिहार में चुनाव शुरू होने से लेकर अब तक हिंसा की 500 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें 5 लोगों की मौत हुई है और करीब 6 हजार लोग घायल हुए हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव के वक्त भी ऐसे ही हालात थे। चुनाव के नतीजे सामने आने के 24 घंटे के अंदर 12 लोगों की मौत हुई थी। BJP ने 6 पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप लगाया था। वहीं, TMC ने 5 लोगों की मौत का दावा किया था। 2023 में हुए पंचायत चुनाव के वक्त भी 50 से ज्यादा लोगों की मौत की बात सामने आई थी। BJP कार्यकर्ता बोले- हमारे घर जला दिए, सबकुछ लूट लिया
कोलकाता के बेलियाघाट की रहने वाली रीता रजाक 2015 में BJP से जुड़ी थीं। उनके पति भी पार्टी के लिए काम करते थे। 2021 में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में उनके पति की मौत हो गई थी। रीता बताती हैं, 'चुनाव वाले दिन पार्टी ने मुझे एजेंट बनाया था। मेरी ड्यूटी नाकाडाला हाई स्कूल पर बूथ नंबर-170 पर लगी थी। इसके बाद से ही मैं और मेरा परिवार TMC नेताओं के टारगेट पर है। पश्चिम बंगाल में BJP से जुड़ा होना आसान नहीं है। यहां की पुलिस और सेंट्रल फोर्स बंगाल की TMC सरकार का कहा मानती है।’ वे आगे कहती हैं, ‘2021 के विधानसभा चुनाव में भी TMC के लोगों ने मेरा सब कुछ लूट लिया था। घर में रखा अनाज, गहने-रुपए और बर्तन सब उठा ले गए थे। मैंने पति को खो दिया, बावजूद इसके मैं BJP के लिए काम कर रही हूं।' ‘इतने अत्याचार और हिंसा के बाद भी मैंने BJP का झंडा नहीं छोड़ा। दिल्ली में बैठी सरकार हमें बचाए। PM नरेंद्र मोदी और अमित शाह से मेरा निवेदन है कि वे हमें बचाएं। बंगाल में ऐसी फोर्स भेजें, जो बिकाऊ न हो।' BJP दफ्तर में आग लगाई, पार्टी कार्यकर्ताओं को ढूंढ-ढूंढकर पीटा
साउथ-24 परगना जिले के जयनगर में रहने वाले गोपाल मंडल भी BJP दफ्तर में रह रहे हैं। गोपाल कहते हैं, 'TMC के लोगों ने BJP दफ्तर में आग लगा दी। अब हमें कोलकाता आकर पार्टी दफ्तर में रहना पड़ रहा है। पता नहीं यहां कितने दिन रहना पड़ेगा। TMC के लोग तो अब तक हमारा घर भी जला चुके होंगे।' यहीं हमें कोलकाता के भवानीपुर के रहने वाले रवि साहा मिले। वे बताते हैं, 'चुनाव जीतने के बाद TMC कार्यकर्ताओं ने मेरी दुकान पर हमला किया। दुकान का सारा सामान लूट लिया और ताला लगाकर चले गए। वार्ड काउंसलर भी TMC का है। वो इलाके में BJP कार्यकर्ताओं को ढूंढ-ढूंढकर पीटता है।' 'पुलिस TMC की वफादारी कर रही है। BJP का कोई भी कार्यकर्ता पुलिस स्टेशन जाता है, तो उसकी बात नहीं सुनी जाती। पुलिस उल्टा उस पर ही तरह-तरह के इल्जाम लगाती है।' हमले के डर से नूर इस्लाम मोल्ला बशीरहाट के मिनाखां से भागकर कोलकाता आए हैं। वे बताते हैं, 'TMC का ब्लॉक सभापति आयूब हसन गाजी और उसके लोग गुंडे हैं। इन लोगों ने मिलकर मेरी 35 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया है। रिकॉर्ड से मेरी 8 बीघा जमीन काट दी। मैंने पुलिस को इसकी शिकायत की है।’ नूर कहते हैं, ‘मैं मुसलमान होकर BJP के लिए काम क्यों काम करता हूं, ये बोलकर मेरा घर जलाया गया। मेरा एक गैराज था, वो तोड़कर लूट लिया। मैं एक स्कूल चलाता था, उसे भी लूट लिया। घर के पास ही मेरी कपड़ों की दुकान थी, उसे भी जला दिया। 2021 में विधानसभा चुनाव के वक्त भी यही हुआ था।’ नूर आगे कहते हैं, ‘मैं अपने बेटे के साथ जान बचाकर कोलकाता पार्टी ऑफिस आ गया। एक हफ्ता हो गया, हम सब BJP कार्यकर्ता पार्टी दफ्तर में ही रह रहे हैं।' यहीं मिले एक कार्यकर्ता ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर हमसे बात की। उन्हें डर है कि अगर उनकी पहचान सामने आई तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। वे कहते हैं, ‘साउथ 24 परगना के कैनिंगपुर में TMC के विधायक शौकत मोल्ला ने BJP कार्यकर्ताओं को धमकी दी है कि हमें हमारे घर में घुसकर मारेंगे। हमारा राशन, पानी और बिजली बंद कर देंगे। हम घर से भले दूर हैं, लेकिन हमें रोज धमकी भरे कॉल आ रहे हैं।’ BJP लीडर और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी 16 जून को हिंसा के पीड़ितों के साथ राज्यपाल सीवी बोस से मिले थे। उन्होंने कहा, 'हमने राज्यपाल से बात की। उन्होंने आश्वासन दिया है कि हिंसा रुकने तक पीड़ितों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं।' इससे पहले 13 जून को भी सुवेंदु अधिकारी करीब 200 BJP कार्यकर्ताओं को लेकर राज्यपाल सीवी बोस से मिलने राजभवन पहुंचे थे। उस दिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली थी। इसके बाद सुवेंदु ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर TMC सरकार पर आरोप लगाए थे। सुवेंदु ने लिखा कि 4 जून को चुनाव के नतीजे आने के बाद TMC के लोगों ने BJP कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले किए। सेंट्रल फोर्स ने भी BJP कार्यकर्ताओं को बचाने की कोशिश नहीं की। TMC बोली- जनमत BJP के खिलाफ, इसलिए हिंसा का सहारा ले रही
हिंसा के बढ़ते मामलों और BJP के आरोपों पर TMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती कहते हैं, ‘BJP अपने ही लोगों से पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमला करवा रही है। लोकसभा चुनाव में जनता ने BJP के खिलाफ फैसला सुनाया। अब राज्य में अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए वो हिंसा का सहारा ले रही है। इस हिंसा में TMC के ही 4 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है।' हिंसा पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकारा
पश्चिम बंगाल में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं को लेकर एक सामाजिक संगठन ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। 6 जून को इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस कौशिक चंदा और जस्टिस अपूर्व सिंहा रे की बेंच ने राज्य सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार हिंसा से प्रभावित लोगों को ईमेल के जरिए DGP से शिकायत दर्ज कराने की अनुमति दे। जस्टिस कौशिक चंदा ने कहा, 'हम मीडिया में चुनाव के बाद शुरू हुई हिंसा की खबरें देख रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद जो हुआ, वही इस बार भी हो रहा है। आपको (राज्य सरकार) शर्म आनी चाहिए।' जस्टिस कौशिक ने आगे कहा, 'अगर राज्य सरकार इस हिंसा को कंट्रोल करने में नाकाम साबित होती है, तो हमें फैसला लेना होगा कि अगले पांच साल तक सेंट्रल फोर्स इस राज्य में रहेगी।' 3 जून, यानी काउंटिंग से एक दिन पहले इलेक्शन कमीशन ने पश्चिम बंगाल में सेंट्रल फोर्स की तैनाती बढ़ाने का फैसला किया। चुनाव आयोग ने कहा था कि हिंसा रोकने के लिए CAPF को संवेदनशील जिलों में तैनात किया जा रहा है। इसके बाद सेंट्रल फोर्स की करीब 400 कंपनियां 19 जून तक के लिए तैनात कर दी गईं।