सबसे पहले दो बयान... 10 जून 2024: हम अब भी NDA का हिस्सा हैं। हमने BJP को स्पष्ट कर दिया है कि हम कैबिनेट से कम कोई पद स्वीकार नहीं करेंगे।- अजित पवार, अध्यक्ष, NCP 10 जून 2024: हमने 15 सीटों पर चुनाव लड़ा और 7 सीटें जीतीं। हमें एक कैबिनेट मंत्री के साथ एक राज्य मंत्री का पद भी दिया जाना चाहिए था। लगता है BJP हमारे साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।- श्रीरंग बारणे, नेता, शिवसेना (शिंदे गुट) दोनों बयान ये बताने के लिए काफी हैं कि महाराष्ट्र में सरकार चला रही महायुति, यानी NDA में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पहले लोकसभा चुनाव में कम सीटें मिलीं, अब मिनिस्ट्री के बंटवारे पर एकनाथ शिंदे और अजित पवार नाराज हैं। महाराष्ट्र में सितंबर तक विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। लोकसभा चुनाव में 30 सीटें जीतने वाला विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी, यानी INDIA ब्लॉक का कॉन्फिडेंस बढ़ गया है। महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़े खिलाड़ी बनकर उभरे शिवसेना (UBT) के प्रेसिडेंट उद्धव ठाकरे ने 185 सीटें जीतने का टारगेट रखा है। अगर एक लोकसभा सीट को विधानसभा की 6 सीटों के बराबर मानें, तो ये टारगेट मुश्किल नहीं होगा। वहीं, शरद पवार ने भी NCP के स्थापना दिवस पर 10 जून को पार्टी वर्कर्स से कहा कि अगले 3 महीने में विधानसभा चुनाव होंगे। उसके बाद राज्य की सत्ता आपके हाथों में होगी।’ उधर, एकनाथ शिंदे और अजित पवार NDA से अलग होते हैं, तो लोकसभा चुनाव के हिसाब से NDA को करीब 48 सीटों का नुकसान होगा। एकनाथ शिंदे पर उद्धव, भतीजे अजित पर भारी पड़े शरद पवार
लोकसभा चुनाव में CM एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 15 सीटों पर चुनाव लड़ा था। 13 सीटों पर सीधा मुकाबला उद्धव ठाकरे की शिवसेना से था। मुंबई रीजन में उद्धव गुट ने साउथ मुंबई, साउथ सेंट्रल मुंबई, मुंबई नॉर्थ-ईस्ट सीटें जीतीं। शिंदे गुट अपने गढ़ मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट पर हार गया। शिंदे गुट को पूरे महाराष्ट्र में 7 सीटें मिली हैं। उद्धव गुट ने 21 सीटों पर चुनाव लड़ा और 9 सीटें जीतीं। महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले सीनियर जर्नलिस्ट सुकृत करिंदिकर कहते हैं, ‘यूपी के बाद BJP को सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र में हुआ है। देवेंद्र फडणवीस की लीडरशिप में महाराष्ट्र ने 2014 में 41 और 2019 में 42 सांसद दिए थे। उसी महाराष्ट्र में 23 सांसदों वाली BJP ने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 9 जीत पाई। ‘2019 में कांग्रेस के पास सिर्फ एक सांसद था। वो इस बार 13 सीटें जीतकर महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और BJP के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, सभी विदर्भ से आते हैं। विदर्भ में कांग्रेस ने BJP को चित कर दिया। मोदी सरकार में मंत्री रहीं डॉ. भारती पवार, राव साहेब दानवे और कपिल पाटिल चुनाव हार गए।’ वे आगे कहते हैं, ‘नारायण राणे, पीयूष गोयल और नितिन गडकरी जैसे मंत्रियों को भी जीत के लिए मेहनत करनी पड़ी। शरद पवार की पार्टी ने 10 सीटों पर चुनाव लड़ा और उनके 8 कैंडिडेट जीते। अजित पवार की NCP सिर्फ एक सीट पर सिमट गई। महाराष्ट्र की 48 सीटों में से 30 सीटें INDIA ब्लॉक और 17 सीटें NDA को मिली हैं।’ इस नतीजों से तीन बातें साफ हैं... 1. अपने अलायंस में दोनों शिवसेना मजबूत: 15 मई को महाराष्ट्र में PM मोदी ने कहा था कि उद्धव की शिवसेना नकली है। हालांकि, मुंबई रीजन अब भी उद्धव ठाकरे के पास है। विदर्भ की 10 सीटों में से 7 INDIA ब्लॉक ने जीती हैं। मुंबई के पास के कोंकण रीजन में शिंदे गुट जीता है। शिवसेना के दोनों गुटों ने NDA और INDIA ब्लॉक में अपनी स्थिति मजबूत की है। 2. असली NCP का दावा नहीं कर पाए अजित: शरद पवार से अलग होकर NCP पर अधिकार जमाने वाले अजित पवार को बड़ा झटका लगा है। बारामती में अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार सुप्रिया सुले से हार गईं। अजित पवार के लिए विधानसभा चुनाव अस्तित्व बचाने की लड़ाई होंगे। 3. NDA के हाथ से खिसक रहा महाराष्ट्र: सीनियर जर्नलिस्ट सुकृत करिंदिकर कहते हैं, 'पिछले 10 साल से महाराष्ट्र में BJP को लीड कर रहे देवेंद्र फडणवीस के सामने चुनौतियां हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों के हिसाब से 170 से 180 विधानसभा सीटों पर NDA की हार होती दिख रही है। इसकी भरपाई के लिए उनके पास सिर्फ तीन-चार महीनों का वक्त बचा है।' मराठा, दलित और मुस्लिम वोट एक हुए, इसलिए NDA हारा
मराठवाड़ा की सियासत के जानकार सीनियर जर्नलिस्ट दत्ता देशमुख बताते हैं, ‘इन चुनावों में मनोज जरांगे पाटिल और मराठा आरक्षण के फैक्टर ने अहम भूमिका निभाई है। रिजल्ट से अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस को निजी तौर पर बड़ा नुकसान हुआ है। महाराष्ट्र में मराठा, दलित और मुस्लिम वोटर्स ने BJP गठबंधन के खिलाफ वोट किया है।’ ‘लोग पूछ रहे थे कि जिन्हें आप भ्रष्टाचारी कहते थे, वे अब आपके साथ खड़े हैं। आपके पास ऐसी कौन सी वाशिंग मशीन है। महाराष्ट्र में ज्यादातर इंडस्ट्री या तो गुजरात या फिर तेलंगाना जा रही थीं, इससे भी लोगों में नाराजगी थी।’ देशमुख कहते हैं, ‘महाराष्ट्र में किसानों को कपास के भाव नहीं मिले, प्याज का एक्सपोर्ट आखिरी वक्त तक बंद रहा।' 'आज फडणवीस भले कह रहे हैं कि इस हार के लिए वे जिम्मेदार हैं, लेकिन मेरा मानना है कि इसके लिए उनकी पॉलिसी जिम्मेदार हैं।’ महायुति के सामने 5 चुनौतियां
सीनियर जर्नलिस्ट जयदेव ढोले कहते हैं, ‘महाराष्ट्र के लोकसभा चुनाव में INDIA ब्लॉक को 30 सीटें मिली हैं। मौजूदा स्थिति के मुताबिक शिवसेना-UBT, NCP-SP और कांग्रेस के गठबंधन को 180 सीटें मिलती दिख रही हैं।’ जयदेव ढोले बताते हैं कि महाराष्ट्र में बहुमत के लिए 144 सीटों की जरूरत होती है। इस तक पहुंचने के लिए महायुति को इन 5 पॉइंट्स पर काम करना होगा। 1. सिम्पैथी वेव खत्म करना: परिवार और पार्टी टूटने के बाद उद्धव ठाकरे और शरद पवार को लेकर जो सिम्पैथी वेव बनी है, उसे खत्म करना होगा। 2. किसानों की समस्या: किसानों की समस्या बहुत बड़ी है। लोकसभा चुनाव के दौरान ही 200 किसानों ने सुसाइड कर लिया। अब मानसून आ गया है। किसानों के लिए शिंदे सरकार क्या योजनाएं लाती है, ये देखना होगा। महाराष्ट्र में 55% ग्रामीण क्षेत्र है। खेती हमेशा महाराष्ट्र की राजनीति को चलाती आई है। यूनियन मिनिस्टर के तौर पर शरद पवार का पोर्टफोलियो कृषि मंत्री का रहा, इसलिए किसानों का झुकाव उनकी तरफ है। 3. युवाओं की बेरोजगारी: युवाओं की बेरोजगारी पर शिंदे सरकार अगर कुछ कर पाई, तो बड़े वोट बैंक को टारगेट कर सकती है। 4. मराठा वोट बैंक पर फोकस: जयदेव कहते हैं, 'इस बार NDA मराठा आबादी वाली 8 लोकसभा सीटों में से 7 पर हारा है। नाराज चल रहे मराठा वोट बैंक को टारगेट करना पड़ेगा। 5. पार्टियों के बीच कोऑर्डिनेशन: शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के बीच जैसा कोऑर्डिनेशन है, वो महायुति में अजित, शिंदे और फडणवीस के बीच नहीं दिखता। इसका ताजा उदाहरण देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे का ऐलान था। उन्होंने सहयोगियों की राय लिए बिना इस्तीफे की बात कह दी। तीनों पार्टियों को कोऑर्डिनेशन दिखाना होगा। बारामती से पत्नी के चुनाव हारने के बाद अजित पवार कह चुके हैं कि BJP से अल्पसंख्यकों की नाराजगी की वजह से चुनाव हारे हैं। उद्धव और शरद पवार की पार्टियों की अहमियत बढ़ेगी
सीनियर जर्नलिस्ट बृजमोहन पांडे कहते हैं, ‘महाराष्ट्र की राजनीति में आगे बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल सकता है। नतीजों के बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। दूसरे नंबर पर शिवसेना और शरद पवार की पार्टी है, जिनके 9 और 8 सांसद हैं। INDIA ब्लॉक मजबूत हुआ है, इसलिए आने वाले दिनों में दल-बदल की स्थिति भी देखने को मिल सकती है।’ अजित पवार की NCP सबसे मुश्किल दौर में
पॉलिटिकल एक्सपर्ट अनुराग त्रिपाठी बताते हैं, ‘अजित पवार की पार्टी चुनाव में सिर्फ एक सीट जीत पाई। यही वजह है कि नई कैबिनेट में उनका कोई मंत्री नहीं है। पार्टी भी संकट में दिख रही है। शरद पवार गुट दावा कर रहा है कि अजित पवार के 18 विधायक उनके संपर्क में हैं।’ अनुराग आगे कहते हैं, ‘ये विधायक जहां से टूटकर आए थे, वहां वापस जाने को तैयार हैं। ऐसी स्थिति में अजित पवार कई तरह के संकट में फंसे हैं। परिवार के मोर्चे पर भी वे अकेले हैं। पूरे परिवार ने उनके खिलाफ चुनाव प्रचार किया है। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार लोकसभा और बेटे पार्थ पवार विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं। BJP इस समय एक सांसद वाली इस पार्टी को बहुत खुश करने की कोशिश नहीं करेगी।’ चाचा के साथ गए तो नुकसान कर सकते हैं अजित
अनुराग बताते हैं, ‘अगले 6 महीने में महाराष्ट्र में चुनाव होने हैं। मौजूदा स्थिति की बात करें तो अजित पवार और उनकी पार्टी, BJP को बहुत नुकसान पहुंचाने की स्थिति में नहीं हैं। अगर वे अपने चाचा शरद पवार के पास वापस गए तो BJP के सामने चुनौती खड़ी हो जाएगी। ऐसे में देर से ही सही, लेकिन अजित पवार की पार्टी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह तो मिलेगी।’ ‘BJP भी जानती है कि वो एकनाथ शिंदे की बदौलत चुनाव नहीं जीत सकती। सोर्स बता रहे हैं कि अजित पवार को खुश करने के लिए महाराष्ट्र में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। इसमें NCP के विधायकों को जगह मिल सकती है।’ BJP 23 से 9 सीटों पर आई, नुकसान के डर से फडणवीस सेफ
सीनियर जर्नलिस्ट अभिजीत देशमुख कहते हैं, ‘खराब प्रदर्शन के बावजूद देवेंद्र फडणवीस को उनके अनुभव और विधानसभा चुनाव को देखते हुए पद से नहीं हटाया गया। BJP को पता है कि आखिरी समय में बदलाव से पार्टी को नुकसान हो सकता है।’ PM की 19 सभाएं, महायुति के 15 कैंडिडेट हारे
PM नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र में महायुति के कैंडिडेट्स के लिए 19 चुनावी सभाएं और 4 रोड शो किए। इनमें से 15 सीटों पर हार मिली। विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने इस पर तंज कसा कि PM ने गडकरी के लिए एक भी सभा नहीं की, इसलिए वे जीत गए।’ महायुति की हार की 7 वजहें
महाराष्ट्र में महायुति को सिर्फ 17 सीटें मिली हैं। इनमें BJP को 9, शिवसेना को 7 और NCP को सिर्फ 1 सीट मिली। इस हार की ये 7 वजह समझ आती हैं… 1. MVA की बेहतर तैयारी: महाविकास अघाड़ी, यानी कांग्रेस, शिवसेना(UBT) और NCP (SP) ने चुनावी तैयारियों में महायुति पर बढ़त बना ली थी। उनके उम्मीदवार पहले से तय थे, उन्हें प्रचार का ज्यादा समय मिला। 2. महायुति में कोऑर्डिनेशन की कमी: महायुति में शामिल पार्टियों के बीच कोऑर्डिनेशन की कमी रही। अजित पवार अपने उम्मीदवारों तक सीमित रहे। PM मोदी ने भी NCP के उम्मीदवारों के प्रचार से दूरी बनाए रखी। 3. लोकल गुटबाजी का असर: कई सीटों पर महायुति के उम्मीदवारों को अपने सहयोगी दलों से मदद नहीं मिली। जैसे- शिवसेना के उम्मीदवार श्रीरंग बारणे ने NCP के कार्यकर्ताओं पर प्रचार में मदद न करने का आरोप लगाया। 4. गलत सर्वे: BJP ने सर्वे के आधार पर शिवसेना को मौजूदा सांसदों को टिकट न देने के लिए मजबूर किया। ये स्ट्रैटजी कामयाब नहीं हुई। शिवसेना के कई कैंडिडेट कमजोर साबित हुए। 5. वोटरों का समीकरण: उद्धव ठाकरे गुट को मराठी वोटरों का समर्थन मिला। मुस्लिम और दलित वोटर भी उनके पक्ष में आए। इससे महाविकास अघाड़ी को बड़ा वोट बैंक मिला। 6. मराठा आरक्षण का मुद्दा: मराठा कम्युनिटी की OBC आरक्षण की मांग राज्य सरकार ने पूरी नहीं की, जिससे मराठवाड़ा क्षेत्र में BJP कैंडिडेट को नुकसान उठाना पड़ा। 7. किसानों और युवाओं की नाराजगी: किसानों में फसल नुकसान और कम मुआवजे को लेकर नाराजगी थी। रोजगार के मुद्दे पर युवाओं में भी गुस्सा था।