जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हुए, अब कुछ सवाल हैं। क्या नए कश्मीर का दावा करने वाली BJP सरकार बना पाएगी? या फिर 16 साल बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और लोकसभा चुनाव के बाद नए तेवर में दिख रही कांग्रेस का क्या होगा? इन सवालों का जवाब जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर्स जम्मू-कश्मीर की सभी 90 विधानसभा सीटों तक गए और हवा का रुख समझा। जम्मू-कश्मीर में तीन फेज में 18 सितंबर, 25 सितंबर और एक अक्टूबर को वोटिंग हुई थी। इस दौरान हमने आम लोगों, पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स, सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल पार्टियों से बात की। इससे समझ आया कि 10 साल बाद भी जम्मू-कश्मीर में एक पार्टी या अलायंस को बहुमत के लिए जरूरी 46 सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। सबसे ज्यादा सीटें नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस के अलायंस को मिल सकती हैं। दूसरे नंबर पर BJP रह सकती है। पिछली CM महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP की सीटें भले दहाई से कम रहें, लेकिन वे किंगमेकर की भूमिका में आ सकती हैं। इस बार निर्दलीय उम्मीदवार भी सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। NC-कांग्रेस अलायंस: कश्मीर में मजबूत
नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस का गठबंधन सरकार बनाने के सबसे करीब है। इसे 35 से 40 सीटें मिल सकती हैं। इतनी सीटें सरकार बनाने के लिए नाकाफी हैं, इसलिए PDP या निर्दलियों की जरूरत पड़ेगी। ये गठबंधन कश्मीर की 47 सीटों में से ज्यादातर पर मजबूत दिख रहा है। 2014 में दोनों पार्टियों ने 27 सीटें जीती थीं। इस लिहाज से अलायंस को 10 से ज्यादा सीटों का फायदा हो सकता है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 51 और कांग्रेस ने 32 सीटों पर चुनाव लड़ा है। 5 सीटों पर दोनों ने अलग-अलग कैंडिडेट उतारे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस 28 से 32 और कांग्रेस 7 से 12 सीटों पर जीत सकती है। CPI (M) और पैंथर्स पार्टी को 1-1 सीट दी गई है। BJP: घाटी में खुल सकता है खाता
2014 के विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रही BJP इस बार भी उसी पोजिशन पर रह सकती है। पार्टी को 20 से 25 सीटें मिल सकतीं हैं। जम्मू की 43 सीटों पर आधे या इससे ज्यादा पर BJP को जीत मिल सकती हैं। इस बार कश्मीर घाटी में भी पार्टी का खाता खुल सकता है। उम्मीद गुरेज सीट से है। यहां से फकीर मोहम्मद खान पार्टी के कैंडिडेट हैं। फकीर मोहम्मद 28 साल पहले 1996 में गुरेज से विधायक चुने गए थे। इसके बाद चार बार चुनाव लड़े, लेकिन हर बार मामूली अंतर से हार गए। गुरेज सीट से नेशनल कॉन्फ्रेंस के कैंडिडेट नजीर अहमद खान लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं। वे इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं। PDP: विधानसभा चुनाव में भी कमजोर
लोकसभा चुनाव के नतीजों से साफ हो गया था कि महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP घाटी की सियासत में पकड़ खो रही है। लोकसभा चुनाव में PDP एक भी सीट नहीं जीत पाई। महबूबा मुफ्ती खुद अनंतनाग से चुनाव हार गईं। विधानसभा चुनाव में भी नतीजे अलग नहीं दिख रहे हैं। शुरुआत में PDP कमजोर नजर आ रही थी। दूसरे और तीसरे फेज के चुनाव आते-आते स्थिति थोड़ी सुधर गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि PDP सिर्फ 4-7 सीटें जीत पाएगी। इसके बावजूद सरकार बनाने की लिए दूसरी पार्टियों को उनकी जरूरत पड़ेगी। बहुत चांस हैं कि PDP नतीजे आने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाए। निर्दलीय और छोटी पार्टियां अहम
निर्दलीय और छोटी पार्टियों के खाते में 9 से 12 सीटें जाती दिख रही हैं। बारामूला से सांसद इंजीनियर राशिद की अवामी इत्तेहाद पार्टी के सपोर्ट वाले कैंडिडेट 2-3 सीटें जीत सकते हैं। एक्सपर्ट मान रहे थे कि वे मजबूत स्थिति में थे, लेकिन चुनाव से पहले बेल मिलने से उन पर BJP की B टीम होने के आरोप लगे। इससे इंजीनियर राशिद को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा सज्जाद लोन की 'पीपुल्स कॉन्फ्रेंस' को 1-2 सीटें और अल्ताफ बुखारी की 'अपनी पार्टी' को 0-1 सीटें मिल सकती हैं। एक्सपर्ट बोले- सरकार के लिए निर्दलियों की जरूरत पड़ेगी
कश्मीर के पॉलिटिकल एक्सपर्ट अजहर हुसैन कहते हैं, ‘मुझे नहीं लगता है कि किसी पार्टी या अलायंस को बहुमत के लिए जरूरी 46 सीटें मिल सकेंगी। कश्मीर में सबसे बड़ी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस रहेगी। जम्मू में BJP के पास बढ़त रहेगी।' 'इस बार निर्दलियों का रोल सबसे अहम होने वाला है। निर्दलीय कैंडिडेट 8-10 सीटें जीत सकते हैं। छोटी पार्टियों के एक-दो कैंडिडेट ही जीतेंगे, लेकिन सरकार बनाने में उनकी बड़ी भूमिका रहेगी। 2-3 महीने पहले लोकसभा चुनाव हुए थे, तब इंजीनियर राशिद के मैदान में आने से नॉर्थ कश्मीर की पॉलिटिक्स में नया मोड़ आया था।’ अजहर हुसैन आगे कहते हैं, ‘BJP को 25 से 30 सीटें मिल सकतीं हैं। BJP कह चुकी है कि निर्दलीय विधायकों को मिलाकर सरकार बना सकती है। कश्मीर घाटी में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। अलायंस को 35 से 40 सीटें मिल सकतीं हैं।’ ‘महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में मेरे बगैर हुकूमत नहीं बन सकती। इसी तरह पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चीफ सज्जाद लोन ने भी कहा कि सरकार बनाने में किसी कम्युनल पार्टी का सपोर्ट नहीं करेंगे। दोनों पार्टियां नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के अलायंस के साथ आ सकती हैं।’ ‘इस लिहाज से BJP के पास सरकार बनाने के ऑप्शन कम हैं। INDIA अलायंस के पास ज्यादा मौके हैं। इंजीनियर राशिद की पार्टी भी BJP के साथ नहीं जाना चाहेगी क्योंकि उन्होंने BJP के खिलाफ बोलकर ही वोट मांगे हैं।’ इंजीनियर राशिद ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के वोट काटे, फायदा PDP को
जम्मू कश्मीर की सियासत को समझने वाले एक्सपर्ट जफर कहते हैं, ‘इस बार कई पार्टियां मिलकर ही सरकार बना सकेंगी। महबूबा मुफ्ती की पार्टी को शुरुआत में 4 सीट मिलने का अनुमान था, लेकिन इंजीनियर राशिद को प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मिल गई। उनके बाहर आने से समीकरण बदल गए।’ ‘इंजीनियर राशिद के कैंडिडेट्स ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के वोट बैंक पर असर डाला है। इसलिए मुझे लगता है कि अब PDP को 6 से 8 सीटें मिल सकती हैं।'
जफर आगे कहते हैं... बिजबेहरा सीट पर महबूबा की बेटी इल्तिजा मुफ्ती को कड़ी टक्कर मिल रही है। PDP के लिए ये सीट खतरे में दिख रही है। बिजबेहरा सीट पर इल्तिजा समेत कुल 3 उम्मीदवार मैदान में हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बशीर अहमद को टिकट दिया है। वे पिछले चुनाव में भी मैदान में थे। BJP ने सोफी यूसुफ को उतारा है। बिजबेहरा सीट पर 1967 से लेकर अब तक 9 बार विधानसभा चुनाव और उपचुनाव हुए। इनमें से 6 चुनाव में मुफ्ती परिवार या PDP कैंडिडेट की जीत हुई है। 1996 से अब तक इस सीट पर मुफ्ती परिवार या PDP का ही कब्जा है। जफर आगे कहते हैं, ‘इंजीनियर राशिद की पार्टी को 3-4 सीटें मिल सकती हैं। अपनी पार्टी और सज्जाद लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस को 1-1 या ज्यादा से ज्यादा दो सीटें मिल सकतीं हैं। BJP के खिलाफ सभी पार्टियां INDIA ब्लॉक को कर सकती हैं सपोर्ट
अगर किसी पार्टी या अलायंस को बहुमत नहीं मिलता है तो सरकार कैसे बनेगी? जफर जवाब देते हैं, ‘मुझे लगता है कि INDIA ब्लॉक की सरकार बनेगी। PDP, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, अपनी पार्टी और निर्दलीय विधायक सरकार बनाने के लिए सपोर्ट करेंगे। PDP INDIA ब्लॉक का हिस्सा है।’ ‘आर्टिकल-370 हटाए जाने के बाद BJP के विरोध में गुपकार अलायंस बना था। PDP उसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के साथ थी। विधानसभा चुनाव में PDP, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच कॉमन प्रोग्राम नहीं बन सका। मुझे लगता है कि सरकार बनाने की बात आएगी, तो सबसे पहले PDP सपोर्ट में आगे आएगी।’ जम्मू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हरिओम भी ऐसा ही मानते हैं। वे कहते हैं, ‘चुनाव रिजल्ट आने के बाद INDIA ब्लॉक वाले एक हो जाएंगे। ऐसा 2018 में हो चुका है। तब महबूबा मुफ्ती की सरकार चली गई थी। उन्हें पता चल गया था कि अब राष्ट्रपति शासन लगने वाला है। तब कांग्रेस, PDP, नेशनल कॉन्फ्रेंस, CPI (M) एक हो गए।’ ‘उन्होंने गवर्नर को लेटर लिखा कि अपनी पार्टी के चीफ अल्ताफ बुखारी हमारे CM कैंडिडेट हैं। आप उन्हें शपथ लेने के लिए बुलाएं। इससे समझ आता है कि भले ही सारी पार्टियां आपस में लड़ती थीं, लेकिन देखा कि राष्ट्रपति शासन लगने वाला है, तो सभी एक हो गईं।’ प्रोफेसर हरिओम आगे कहते हैं, ‘BJP के पास 25 सीटें थीं। उसने पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चीफ सज्जाद लोन को अपना चीफ मिनिस्टर कैंडिडेट बताते हुए लेटर लिख दिया था। हालांकि, दोनों पक्षों की सुनवाई नहीं हुई और राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसलिए मुझे लग रहा है कि इस बार भी आसानी से कई पार्टियां मिलकर सरकार बनाएंगी।’ नेशनल कॉन्फ्रेंस जीत सकती है 30-32 सीटें, राशिद को नुकसान
जम्मू कश्मीर के सीनियर जर्नलिस्ट बिलाल फुरकानी कहते हैं, ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस इस बार मजबूत लग रही है। पार्टी 30-32 सीटें जीत सकती है।’ इंजीनियर राशिद की पार्टी को कितनी सीटें मिल सकतीं हैं? बिलाल फुरकानी कहते हैं, ’राशिद पर पहले से आरोप लगते रहे हैं। उन पर BJP की प्रॉक्सी पार्टी होने का भी आरोप लगता है। कश्मीर के लोग पहले ही समझ जाते हैं कि आगे क्या होने वाला है। यहां अपनी पार्टी और सज्जाद लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस पर BJP की B पार्टी होने का आरोप लगा तो उनके कैंडिडेट्स की जमानत जब्त हो गई थी।’ बिलाल फुरकानी कहते हैं, ‘कश्मीर में कहावत है कि अफवाहें कभी गलत साबित नहीं होती हैं। मतलब ये कि कश्मीर में कोई अफवाह उड़ती है तो वो सही ही साबित होती है। इंजीनियर राशिद को लेकर अफवाह उड़ी है तो लोग उसे सच ही मान लेंगे। मेरा मानना है कि इंजीनियर राशिद को 4-5 सीटें मिल सकतीं हैं। वे किसी भी तरह 6 सीट से ज्यादा नहीं जीत सकते।’
...........................................
जम्मू-कश्मीर इलेक्शन में फेजवाइज क्या रहा हवा का रुख, यहां पढ़िए
फेज 1: जम्मू-कश्मीर में पहले फेज में NC-कांग्रेस भारी जम्मू-कश्मीर की 24 सीटों पर पहले फेज में 18 सितंबर को वोट डाले गए थे। इनमें 16 सीटें कश्मीर और 8 जम्मू की थीं। पहले फेज में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस अलायंस 12-13 सीटों पर मजबूत लगा। दूसरे नंबर पर BJP और PDP दिखीं। दोनों को 4-6 सीटें मिल सकती हैं। निर्दलीय को 1-2 सीटें मिलने की उम्मीद है। पढ़िए पूरी खबर... फेज 2: नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस घाटी में, जम्मू में BJP मजबूत जम्मू-कश्मीर की 26 सीटों पर सेकेंड फेज में 25 सितंबर को वोट डाले गए। इनमें 15 सीटें कश्मीर और 11 सीटें जम्मू की थीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस अलायंस सेकेंड फेज में 13 से 15 सीटों पर मजबूत दिखा। दूसरे नंबर पर BJP है, जो 4-5 सीटों पर मजबूत है। ये सभी सीटें जम्मू रीजन की हैं। PDP को 1-2 सीटें मिल सकती हैं। फेज 3: कश्मीर में पहली बार कमल खिलने की उम्मीद जगी जम्मू-कश्मीर में 1 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के आखिरी फेज में 40 सीटों पर वोटिंग हुई थी। इनमें जम्मू की 24 और कश्मीर की 16 सीटें थींं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तीसरे फेज में BJP को सबसे ज्यादा 16-18 सीटें मिल सकती हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस अलायंस को 11-13 सीटें, इंजीनियर राशिद की पार्टी AIP को 3-4 सीटें और PDP को 1-2 सीट मिलने का अनुमान है। पढ़िए पूरी खबर...