झारखंड में BJP+ को 37-40, JMM+ को 36-39 सीटें:दोनों अलायंस बहुमत के करीब, पांकी-कोडरमा से लड़े निर्दलीय बन सकते हैं किंगमेकर

1 year ago 7
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झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है। अब 23 नवंबर को पता चलेगा कि क्या JMM सत्ता में वापसी कर रही है? या फिर BJP सरकार बना रही है? नतीजों की तस्वीरें साफ होने से पहले भास्कर रिपोर्टर्स झारखंड की सभी 81 विधानसभा सीटों तक पहुंचे और हवा का रुख समझा। हमने आम जनता से लेकर पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स, सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल पार्टियों से बात की। झारखंड में किसी एक पार्टी या गठबंधन को बहुमत के लिए जरूरी 41 सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। सबसे ज्यादा सीटें BJP गठबंधन (NDA) को मिल सकती हैं। दूसरे नंबर पर JMM के नेतृत्व वाला INDIA ब्लॉक रह सकता है। सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होता दिख रहा है, जो INDIA ब्लॉक को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा सकता है। इस बार झारखंड की JLKM जैसी लोकल पार्टियां और निर्दलीय कैंडिडेट भी सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पांकी सीट से निर्दलीय कैंडिडेट देवेंद्र सिंह उर्फ बिट्टू सिंह और कोडरमा सीट से निर्दलीय कैंडिडेट शालिनी गुप्ता मजबूत स्थिति में हैं। NDA झारखंड में सत्ता पाने के करीब झारखंड में भले किसी अलायंस को बहुमत मिलता नहीं दिखा रहा है, लेकिन BJP की अगुआई में NDA सरकार बनाने के करीब दिख रहा है। NDA 37-40 सीटों पर मजबूत है। अगर ये अलायंस 40 सीटें भी जीतता है तो बहुमत के लिए एक सीट की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में NDA किसी निर्दलीय विधायक या छोटी पार्टियों की मदद ले सकता है। झारखंड विधानसभा चुनाव में अगर NDA का सीट शेयरिंग फॉर्मूला देखें तो BJP 68, AJSU 10, JDU 2 और LJP(R) एक सीट पर चुनाव लड़ी है। 2019 के चुनाव में BJP को 25 सीटें मिली थीं, इस बार पार्टी 29-32 सीटें जीत सकती है। यानी पार्टी को 4-7 सीटों का फायदा होता दिख रहा है। AJSU को पिछले चुनाव में 2 सीट मिली थी। इस बार उसे 3-5 सीटें मिल सकती हैं। JDU और LJP (R) को पिछले चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी। इस बार इन्हें 2 और 1 सीट मिलने के आसार हैं। INDIA ब्लॉक के लिए कांग्रेस कमजोर कड़ी INDIA ब्लॉक में सबसे ज्यादा 43 सीटों पर JMM चुनाव लड़ रही है। इसके बाद 30 सीटों पर कांग्रेस और 6 पर RJD मैदान में है। CPI (ML) ने 4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। इनमें से 3 सीटों धनवार, विश्रामपुर और छतरपुर पर INDIA ब्लॉक में शामिल पार्टियों के बीच फ्रेंडली फाइट है। 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने 16 सीटें जीती थीं, इस बार पार्टी 6-8 सीटों पर सिमट सकती है। JMM को भी नुकसान होता दिख रहा है। पिछले चुनाव में JMM के पास 30 सीटें थीं। इस बार पार्टी के 25-29 सीटें जीतने की संभावना है। लेफ्ट को एक सीट का फायदा हो सकता है। पार्टी इस बार 2 सीटें जीत सकती है। वहीं, RJD को पिछली बार की तरह एक सीट मिल सकती है। सीनियर जर्नलिस्ट शंभू नाथ चौधरी बताते हैं, ‘कांग्रेस पूरे विधानसभा चुनाव में लड़ती हुई नहीं दिखी। पार्टी की स्टेट लीडरशिप चुनाव में बिखर गई। राष्ट्रीय नेताओं के जो दौरे हुए, वो भी पूरी तैयारी से नहीं हुए। झारखंड के मुद्दों पर उन्होंने बात ही नहीं की। राहुल गांधी के भाषणों में सिर्फ संविधान बचाओ और लोकसभा चुनाव के पुराने मुद्दे उठाए गए।’ ’INDIA ब्लॉक पहले से हेमंत सोरेन को लीडर मानकर चल रहा था। चुनाव में JMM को कल्पना सोरेन के रूप में एक और स्टार प्रचारक मिल गया। इन्हीं दोनों नेताओं के बलबूते INDIA ब्लॉक का प्रचार अभियान चला। लिहाजा, ये कहा जा सकता है कि इस चुनाव में INDIA ब्लॉक को जितना भी फायदा होगा, उसका 80% श्रेय हेमंत-कल्पना की जोड़ी को ही जाएगा।’ BJP कोल्हान में खोल सकती है खाता 2019 में BJP को जिस इलाके में सबसे बड़ा झटका लगा था, वो कोल्हान ही है। इस बार पार्टी ने यहां मजबूत घेराबंदी की है। सबसे पहले पार्टी ने कोल्हान टाइगर कहे जाने वाले पूर्व CM चंपाई सोरेन को JMM से BJP में शामिल कराया। इसके बाद कांग्रेस की बड़ी लीडर और पूर्व सीएम मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा को अपने साथ जोड़ा। पिछले चुनाव में सरयू राय, चंपाई सोरेन और गीता कोड़ा के कारण ही BJP को इस इलाके में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। सरयू राय ने तो CM रहे रघुवर दास को ही हरा दिया था। इस बार ये सभी चेहरे BJP के साथ हैं। BJP ने यहां के दो बड़े नेता झारखंड के पूर्व CM रघुवर दास और अर्जुन मुंडा के घरवालों को मैदान में उतारा है। इन समीकरणों की मदद से BJP कोल्हान में वापसी करती दिख रही है। अगर NDA के सहयोगी JDU को भी शामिल कर दें, तो कोल्हान में ‌‌BJP 4-6 सीटें निकालने में कामयाब होती दिख रही है। निर्दलीय कैंडिडेट और छोटी पार्टियां अहम झारखंड में NDA और INDIA ब्लॉक के बीच कड़ा मुकाबला है। बावजूद इसके 2-3 सीटों पर निर्दलीय और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा यानी JLKM मजबूत दिख रही है। JLKM चीफ जयराम महतो इलेक्शन में ‘X-फैक्टर’ साबित हो सकते हैं। पांकी और को़डरमा सीटों पर निर्दलीय कैंडिडेट कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पांकी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार देवेंद्र सिंह उर्फ बिट्टू सिंह पहले कांग्रेस में थे। टिकट कटने पर वो BJP के कॉन्टैक्ट में थे लेकिन वहां से भी टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। वहीं, कोडरमा सीट से निर्दलीय कैंडिडेट शालिनी गुप्ता चुनाव मैदान में हैं। यहां से BJP ने नीरा यादव और RJD ने सुभाष यादव को टिकट दिया है। ऐसे में एंटी यादव वोटों का फायदा शालिनी गुप्ता को मिलता दिख रहा है। वो 2014 में कोडरमा जिला परिषद अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और 2019 के चुनाव के बाद से लगातार फील्ड में एक्टिव हैं। एक्सपर्ट बोले- सरकार में निर्दलीय बन सकते हैं किंगमेकर रांची के सीनियर जर्नलिस्ट शंभूनाथ चौधरी कहते हैं, ‘अगर सीट दर सीट कैलकुलेट करेंगे, तो NDA 38 से 39 सीटें जीत सकती है। वहीं, INDIA ब्लॉक 40-41 सीटें जीतती दिख रही है। NDA में BJP 30 से 32 सीटें जीत सकती है। AJSU 5 सीट, JDU और LJP को 1-1 सीट मिलती दिख रही है।‘ ‘INDIA ब्लॉक में सबसे ज्यादा 31 सीटें JMM को मिल सकती हैं। कांग्रेस अपने पुराने प्रदर्शन से नीचे जा सकती है। मैं कांग्रेस को 7 सीटें, RJD को 2 और CPI-ML को एक सीट दूंगा।‘ शंभूनाथ आगे कहते हैं, ‘चुनाव में BJP का कैंपेन सबसे स्ट्रॉन्ग रहा। कोल्हान में BJP पिछली बार 0 थी। इस बार उसे 5 सीटें मिल सकती हैं। दूसरी तरफ संथाल परगना में भी पिछले चुनाव की तुलना में BJP को 1-2 सीटें ज्यादा मिलती दिख रही हैं। 2019 में BJP ने संथाल में 4 सीटें जीती थीं।‘ NDA-INDIA ब्लॉक के लिए बहुमत का आंकड़ा छूना मुश्किल झारखंड की सियासत को समझने वाले पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुरेंद्र सोरेन कहते हैं, ‘इस बात की संभावना ज्यादा है कि किसी अलायंस को बहुमत न मिले। चुनाव के बाद झारखंड एक बार फिर से पुराना इतिहास दोहरा सकता है। NDA- 37 से 40 और INDIA-36 से 38 सीट जीतता दिख रहा है।‘ JMM की टीम और इसके दो स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन और हेमंत सोरेन की सभाओं को छोड़ दिया जाए, तो बाकी न कोई चुनावी सभा हुई और न कोई रैलियां होती दिखीं। उनके कार्यकर्ता डोर-टु-डोर कैंपेनिंग पर फोकस कर रहे थे। ‘दूसरी तरफ BJP की सभाओं की संख्या इस तुलना में थोड़ी ज्यादा रहीं। हालांकि सभाओं की संख्या विधायकों की संख्या बढ़ाएगी, ये कहना फिलहाल मुश्किल है। BJP और JMM दोनों के खाते में 25-25 सीटें आती दिख रही हैं।‘ कांग्रेस इस चुनाव में कहां खड़ी है? इसके जवाब में सुरेंद्र सोरेन कहते हैं, ‘ग्राउंड लेवल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की बॉडी लैंग्वेज में ज्यादा कॉन्फिडेंस दिखाई नहीं दिया। कांग्रेस इस चुनाव में डबल डिजिट तक भी पहुंच जाए, तो हैरानी की बात होगी। JMM की बैसाखी के सहारे उनके नेता विधानसभा तक पहुंचेंगे।‘ अगर किसी पार्टी या अलायंस को बहुमत नहीं मिलता है तो सरकार कैसे बनेगी? इस सवाल पर सुरेंद्र कहते हैं, ‘बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों पार्टियों को सहयोगी दलों पर निर्भर रहना पड़ेगा। संथाल में कांग्रेस और लेफ्ट बेहतर प्रदर्शन करती हैं, तो राज्य में एक बार फिर से INDIA ब्लॉक की सरकार बनेगी।‘ ‘वहीं, NDA खेमे में LJP(R), JDU और AJSU तीन बड़ी पार्टियां हैं। अगर ये अपनी सीटें निकालने में कामयाब हुईं, तो निश्चित तौर पर BJP अलायंस की सरकार बन जाएगी।‘ संथाल में पहली बार JMM से ज्यादा दिखे BJP के झंडे सुरेंद्र के मुताबिक, इस चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ है कि संथाल परगना में घरों पर बड़ी तादाद में BJP के झंडे लगे थे। संथाल के यूथ और महिलाओं में BJP के प्रति झुकाव दिखाई दिया। ये एक बड़ा बदलाव है। इस बार BJP संथाल में कुछ उलटफेर कर सकती है। वहीं, कोल्हान में भी BJP 2-3 सीटें जीत सकती है। ओवरऑल BJP इस बार 25-30 सीटें लाएगी। जयराम महतो JMM और AJSU के वोट को प्रभावित करेंगे। जहां सीटों पर महतो वोटर्स हैं, वहां दोनों अलायंस को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सीटें, जिन पर नजर रही... 'बंटोगे तो कटोगे' और 'एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे' का असर झारखंड में पॉलिटिकल एनालिस्ट आनंद कुमार 70 विधानसभा सीटों की यात्रा कर चुके हैं। वो एक्सपर्ट शंभूनाथ चौधरी और सुरेंद्र सोरेन के आंकड़ों पर सहमति नहीं जताते। आनंद का मानना है कि इस बार झारखंड में NDA 42 सीटों के साथ सरकार बनाने की स्थिति में दिख रही है। हंग असेंबली के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। आनंद कहते हैं, ‘चुनाव में BJP सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई है। अकेले BJP 34 सीटें जीतती दिख रही है। वहीं उसके सहयोगियों की बात करें तो JDU 2, AJSU 5 और LJP(R) एक सीट पर मजबूत दिख रही है।‘ ‘दूसरी तरफ, INDIA ब्लॉक 34-38 सीटों पर सिमट सकता है। चुनाव में JMM और कांग्रेस दोनों को नुकसान होता दिख रहा है। कांग्रेस 16 से घटकर 8 और JMM 30 से घटकर 26-28 सीट पर आ सकती है। जबकि CPI(ML) के विधायकों की संख्या 1 से बढ़कर 2 हो सकती है।‘ 'आदिवासियों के साथ जिस तरीके से मुस्लिम शादी कर रहे हैं, ये राज्य की एक समस्या है। इस मुद्दे को यूपी के CM योगी आदित्यनाथ के नारे 'बंटोगे तो कटोगे' और PM मोदी के 'एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे' बयान ने बड़ा बना दिया।‘ BJP की टॉप लीडरशिप पर हेमंत-कल्पना पड़े भारी इस चुनाव में JMM को कहां देखते हैं? इसके जवाब में आनंद कहते हैं, ‘मंइयां योजना का एक अंडर करंट हो सकता है। महिला वोटर्स बढ़ने में मंइयां योजना की भी भूमिका हो सकती है। अब जमीन पर ये कितना रंग लाएगी, इसका आकलन होना अभी बाकी है।‘ ‘इस चुनाव में JMM ने जो चीज कमाई है, वो उसके पावरफुल फेस हैं। हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन की जोड़ी ने BJP की टॉप लीडरशिप से अकेले मुकाबला किया। कल्पना की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि PM नरेंद्र मोदी के बाद किसी की सभा में भीड़ उमड़ रही थी, तो वो कल्पना सोरेन की सभा थी।‘ ‘कांग्रेस झारखंड विधानसभा का चुनाव अपने बूते लड़ी ही नहीं, वो कल्पना और हेमंत के सहारे रही। राहुल गांधी ने यहां सिर्फ दो दौरे किए। प्रियंका की कोई सभा ही नहीं हुई। अगर कांग्रेस के कोई कैंडिडेट जीतते हैं, तो वे अपनी लोकप्रियता के सहारे ही जीतेंगे।‘ .................................................
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