तमिलनाडु में मोदी पर स्टालिन भारी:DMK-कांग्रेस को 39 में से 32-37 सीटें मिलने के आसार, BJP का वोट शेयर 5 गुना बढ़ेगा

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‘तमिलनाडु नॉर्थ नहीं है।’ तमिलनाडु में लोगों से बातचीत के दौरान ये बार-बार सुनने को मिलता है। जैसे ही BJP या नरेंद्र मोदी का जिक्र आता है, चेन्नई के चैटपैट इलाके में सब्जी बेचने वाले सुकांत बोल पड़ते हैं, 'GST ने सब महंगा कर दिया। मोदी सरकार तमिलनाडु को फंड नहीं देती। बाढ़ आई तो भी पीएम नहीं आए।' हालांकि चेन्नई में ही रहने वाली भाग्यलक्ष्मी कहती हैं, 'सिलेंडर मिला, मुद्रा लोन भी मिला। सबको देख लिया, एक मौका मोदी जी को भी देना है।' अब 4 पॉइंट में समझिए तमिलनाडु के रुझान: 1. DMK-कांग्रेस अलायंस सबसे मजबूत नजर आ रहा है। उसे 39 में से 32-37 सीटें मिलने के आसार हैं। हालांकि करप्शन जैसे मुद्दों के खिलाफ लोगों में गुस्सा है, लेकिन कोई और मजबूत ऑप्शन नहीं है, जिसे वोट दे सकें। 2. AIADMK अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। पार्टी का पूरा फोकस राज्य की दूसरे नंबर की पार्टी बने रहने पर है। इस गठबंधन को 3-0 सीटें मिलने के आसार हैं। 3. BJP के पास तमिलनाडु में खोने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए उसने पूरी ताकत झोंक दी है। नए पार्टी प्रेसिडेंट अन्नामलाई युवाओं के बीच पॉपुलर हैं। BJP का वोट पर्सेंट 3 से बढ़कर 15 होने के आसार हैं, हालांकि सीट 2-0 आ सकती हैं। 4. अगर AIADMK और BJP गठबंधन में चुनाव लड़ते तो 12-15 सीटें जीत सकते थे। तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों पर 19 अप्रैल को पहले ही फेज में वोटिंग है। यहां मुकाबला त्रिकोणीय है। DMK-कांग्रेस अलायंस सबसे मजबूत है। दूसरा अलायंस AIADMK ने कुछ छोटी पार्टियों के साथ मिलकर बनाया है। तीसरा अलायंस BJP-PMK का है। दैनिक भास्कर की टीम चेन्नई-कोयंबटूर में ग्राउंड पर पहुंची और समझा कि इन लोकसभा चुनावों में हवा का रुख क्या है... पहले समझिए कौन किसके साथ है तमिलनाडु लोकसभा चुनाव में इस साल तीन प्रमुख गठबंधन मैदान में हैं 1. INDI अलायंस 2. मुख्य विपक्षी गठबंधन 3. थर्ड फ्रंट इसी अलायंस के साथ DMK-कांग्रेस ने 2019 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। इस अलायंस से कोई भी पार्टी नहीं टूटी है। सिर्फ एक छोटी पार्टी इंदिया जननायका काची BJP के साथ चली गई है। नंबर के मामले में ये सबसे मजबूत गठबंधन है। इन पार्टियों का आपस में वोट ट्रांसफर भी काफी अच्छे से होता है। ये पिछला लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ में लड़ चुके हैं और कामयाब भी रहे हैं। AIADMK लीडर ए. पलानीस्वामी ने NDA से अलग होते हुए ऐलान किया था कि वे तमिलनाडु का सबसे बड़ा गठबंधन बनाएंगे। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। इस गठबंधन में सिर्फ तीन पार्टियां हैं। विजयकांत की पार्टी एंटी-द्रविड़ पॉलिटिक्स करके आगे बढ़ी थी। पार्टी को 2006 में 8% वोट मिले थे। अब विजयकांत नहीं रहे तो पार्टी का वोट शेयर आधे पर्सेंट पर आ गया है। विजयकांत की पत्नी प्रेमलता पार्टी की लीडर हैं और अलायंस में इसे 5 सीटें मिली हैं। मुस्लिम पार्टी SDPI को एक सीट मिली है। ये गठबंधन ही तमिलनाडु में मुख्य विपक्ष की भूमिका में है। 2014 में AIADMK ने सभी 39 सीटें जीती थीं, लेकिन तब जयललिता जिंदा थीं। जयललिता नेशनल लीडर थीं और उनके मुकाबले पलानीस्वामी का कद काफी कम है। वे जयललिता की तरह भीड़ इकट्ठा करने में नाकाम रहे हैं। इस अलायंस में बाकी पार्टियां छोटी हैं और उनसे कितना सपोर्ट मिलेगा, ये कहना मुश्किल है। इसे आप रेनबो अलायंस भी कह सकते हैं। तमिलनाडु में पहली बार ऐसा गठबंधन है, जिसका नेतृत्व BJP कर रही है। इससे पहले 2014 में भी BJP ने थर्ड फ्रंट बनाया था, लेकिन तब नेतृत्व विजयकांत की DMDK के पास था, जिसने 14 सीट पर चुनाव लड़ा था। BJP-PMK ने 8-8 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे। BJP के अलावा इस गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी PMK है। इसके लीडर पूर्व यूनियन मिनिस्टर रामदास हैं। ये ओबीसी जाति विशेष की पार्टी है, जिन्हें क्षत्रिय माना जा सकता है। BJP ने इन्हें 10 सीटें दी हैं। इनका वोट शेयर 5% रहता है। हालांकि इस गठबंधन का फायदा BJP को मिलता नजर नहीं आ रहा। PMK नॉर्थ तमिलनाडु, कावेरी डेल्टा रीजन में असर रखने वाली पार्टी है। यहां BJP का असर कम है। BJP वेस्टर्न तमिलनाडु में मजबूत है और वहां PMK का असर नहीं है। BJP गठबंधन में एक और पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कडगम, यानी AMMK है। ये जयललिता की करीबी रहीं शशिकला के भांजे टीटीवी दिनाकरन की पार्टी है। इनके हिस्से 2 सीटें आई हैं। इस पार्टी का असर तमिलनाडु साउथ में है। देवर कम्युनिटी में इनका काफी प्रभाव है। एक और पार्टी इस गठबंधन का हिस्सा है, तमिल मनीला कांग्रेस। पूर्व केंद्रीय मंत्री जीके वासन इस पार्टी के लीडर हैं। इसके अलावा कई छोटी-छोटी पार्टियां भी गठबंधन का हिस्सा हैं। एक पार्टी जो खेल बिगाड़ेगी फिल्म डायरेक्टर सीमान नाम तमिलार काची पार्टी के लीडर हैं। ये पार्टी धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसे मीडिया में कवरेज नहीं मिलती। पार्टी ने 2016 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था और इसे 1% से ज्यादा वोट मिले थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में वोट शेयर बढ़कर 3% पहुंच गया, जो फिल्म स्टार कमल हासन की पार्टी MNM से ज्यादा था। 2021 के विधानसभा चुनाव में ये वोट शेयर बढ़कर 7% हो गया। इस बार पार्टी ने 20 महिलाओं को टिकट दिया है। ये पार्टी कई सीटों पर बड़ी पार्टियों को नुकसान पहुंचा सकती है। राज्य में अलायंस और पार्टियों का गणित समझने के बाद हमारे सामने कुछ सवाल थे। पढ़िए इनके जवाब... सवाल: सबसे मजबूत गठबंधन कौन है? जवाब: ये समझने के लिए हम सबसे पहले दक्षिण भारत के सबसे बड़े अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' के डिप्टी रेजिडेंट एडिटर सुरेश कुमार से मिलने पहुंचे। सुरेश बताते हैं, 'वोट शेयर के हिसाब से देखेंगे तो इंडिया ब्लॉक के पास लीड है। पिछली बार इनका शेयर 50% था। इस बार ये घटेगा, लेकिन 40% से कम होना मुश्किल है। ये 34 से 37 सीटें जीतते हुए नजर आ रहे हैं।' 'BJP सिर्फ वोट परसेंट बढ़ाने पर फोकस कर रही है। उनका सिंगल पॉइंट एजेंडा है कि वोट शेयर डबल डिजिट करना है। कन्याकुमारी और साउथ की एक-दो सीटों पर BJP कड़ी टक्कर दे सकती है। ओपिनियन पोल्स भी बता रहे हैं कि BJP का वोट शेयर 10 से 12% जा सकता है। हालांकि, इसके पीछे मोदी मैजिक नहीं है, स्टेट प्रेसिडेंट अन्नामलाई की एग्रेसिव पॉलिटिक्स से ये वोट शेयर बढ़ने वाला है।' सुमन राव पेशे से तो डॉक्टर हैं, लेकिन तमिलनाडु के जाने-माने पॉलिटिकल एनालिस्ट भी हैं। वे बताते हैं, 'इस बार BJP तमिलनाडु में काफी कोशिश कर रही है। अभी उनका वोट शेयर करीब 3% है, जिसे वे डबल या ट्रिपल करना चाहते हैं। इसी प्लान के तहत वे अन्नामलाई को लाए और प्रेसिडेंट बना दिया। AIADMK के साथ न होने से BJP का अलायंस कमजोर है।’ ‘BJP का वोट शेयर तो बढ़कर 15-18% हो जाएगा, लेकिन पार्टी 1-2 से ज्यादा सीट नहीं जीत पाएगी। कन्याकुमारी सीट BJP ने पहले भी जीती थी। पार्टी ने फिर से वहां पोन राधाकृष्णन को टिकट दिया है। राधाकृष्णन पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, उनकी छवि काफी अच्छी है।' माइनॉरिटी वोट पहले से DMK के साथ जुड़ा हुआ है। 2014 में जयललिता ने 37 सीटें जीती थीं, तब भी माइनॉरिटी वोट DMK के खाते में ही गया था। तमिलनाडु में 15% तक माइनॉरिटी वोट हैं, जिसमें से 90% DMK को मिलता है। 32 से 35 सीट DMK-कांग्रेस अलायंस जीत सकता है। AIADMK के लिए ये चुनाव बड़ा टेस्ट है। 2014 में अकेले इनका वोट शेयर 45% था। अभी ये घटकर 20-22% के आस-पास है। AIADMK की लड़ाई दूसरे नंबर पर आने की है। शायद 2-3 सीट जीत भी जाएं। DMK का पार्टी कैडर वोट नॉर्थ तमिलनाडु में बना हुआ है। AIADMK का वोट बैंक वेस्ट तमिलनाडु में है, जैसे कोयंबटूर, तिरुपुर, सेलम। 2021 के विधानसभा चुनाव में AIADMK ने कोयंबटूर की सभी 10 सीटें जीती थीं। इसी सीट से अब अन्नामलाई मैदान में हैं। साउथ तमिलनाडु में तिरनलवेली सीट से नैना नागेंद्रन को टिकट मिला है। वे असेंबली में BJP के फ्लोर लीडर हैं और पहले AIADMK में ही थे। इस सीट पर भी BJP फाइट दे सकती है। सवाल: क्या तमिलनाडु में BJP का उभार हो रहा है? जवाब: इसका जवाब 'द हिंदू' के डिप्टी रेजिडेंट एडिटर सुरेश कुमार देते हैं, 'कोयंबटूर BJP का ट्रेडिशनली मजबूत इलाका है। साउथ तमिलनाडु में गाउंडर कम्युनिटी सबसे मजबूत है। इस कम्युनिटी के लीडर पलानीस्वामी हैं। 2021 के चुनाव में इस कम्युनिटी ने BJP-AIADMK गठबंधन को एकतरफा वोट दिया था। गठबंधन को मिलीं कुल 75 सीटों में से ज्यादातर सीटें साउथ तमिलनाडु की हैं। हालांकि BJP ने अपना लीडर अन्नामलाई को बना दिया। अन्नामलाई भी इसी कम्युनिटी से आते हैं। AIADMK के BJP से अलग होने का ये भी एक बड़ा कारण है। BJP ने उनके स्थायी वोट बैंक पर सीधा हमला किया और अब दो लीडर सामने हैं। अन्नामलाई तेजतर्रार नेता हैं और उन्हें कोयंबटूर से टिकट भी दिया गया। सोशल मीडिया पर वे मशहूर हैं और गाउंडर युवाओं का भी उन्हें खूब समर्थन मिल रहा है। PM मोदी की तिरुपुर रैली और कोयंबटूर रोड शो में आई भीड़ इस बात का सबूत है। इस इलाके में बाहर से काम करने आए मजदूर भी रहते हैं। ये बंगाल, बिहार, यूपी, झारखंड से हैं और इनका पहले से मोदी से जुड़ाव है। कोयंबटूर को मोदी ने इसलिए चुना, क्योंकि तमिलनाडु के इतिहास की इकलौती हिंदू-मुस्लिम घटना कोयंबटूर में हुआ 1998 का बम ब्लास्ट है। ब्लास्ट में कट्टरपंथी संगठन अल उम्मा का नाम आया था। इनमें 58 लोग मारे गए थे। मोदी ने ब्लास्ट में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि भी दी। साउथ तमिलनाडु में लगातार BJP का उभार नजर आने लगा है। कन्याकुमारी में BJP पहले से मजबूत है। इस सीट पर कांग्रेस और BJP का मुकाबला रहता है। साउथ चेन्नई सीट पर BJP का प्रभाव बढ़ रहा है। यहां ब्राह्मण कम्युनिटी ज्यादा है। ये जयललिता के सपोर्टर थे, लेकिन अब BJP की तरफ झुक रहे हैं। फर्स्ट टाइम वोटर्स में भी अन्नामलाई के लिए लहर नजर आ रही है। वे मेच्योर नेता नहीं हैं, लेकिन उनकी एग्रेसिव पॉलिटिक्स युवाओं को पसंद आ रही है। अन्नामलाई पूर्व IPS हैं और पत्रकारों के साथ आए दिन मिसबिहेव करते रहते हैं। इससे लोगों में एक राय बनती है कि ये तो पत्रकारों से भी नहीं डरता, ये मजबूत नेता है। स्टालिन अब पुराने स्टाइल के नेता हैं और उनके बेटे उदयनिधि को हमेशा परिवारवाद की नजर से ही देखा जाएगा, ऐसे में अन्नामलाई मॉडर्न लीडर नजर आ रहे हैं। सवाल: तमिलनाडु में BJP इस बार फेल क्यों? जवाब: पॉलिटिकल एनालिस्ट सुमन राव के मुताबिक, 'AIADMK के साथ गठबंधन न होना, BJP के लिए नुकसान भरा कदम होने वाला है। आधिकारिक तौर पर AIADMK ने अलायंस छोड़ी, लेकिन इसके पीछे नए BJP प्रेसिडेंट अन्नामलाई हैं।’ ‘अन्नामलाई ने जयललिता को सबसे करप्ट लीडर कहा। तमिलनाडु के पूर्व CM और द्रविड़ आंदोलन में पेरियार के साथी रहे अन्नादुरई के बारे में भी खूब उल्टा-सीधा बोला। AIADMK के पास अलायंस छोड़ने के अलावा कोई रास्ता ही नहीं बचा। BJP की सेंट्रल लीडरशिप देर से जागी, उन्होने गठबंधन के लिए बातचीत की और ऑफर भी दिए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।’ सुमन राव कहते हैं, ‘अगर AIADMK और BJP आज भी साथ चुनाव लड़ लें तो कम से कम 15 सीटें जीत सकते हैं। ये साफ है कि तमिलनाडु में DMK के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी है, लेकिन विपक्ष के वोट बंट गए हैं। BJP अपनी जिद से फेल हो रही है। अगर BJP ने फंड दिया होता तो 20% वोट शेयर मिलने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता था।’ ‘लोगों को याद है, जब तमिलनाडु में बाढ़ आई थी तो PM एक बार भी नहीं आए। अब वे वोट मांगने के लिए बार-बार आ रहे हैं। ये सिर्फ तमिलनाडु का मामला नहीं है, केरल-कर्नाटक को भी फंड नहीं दे रहे हैं। गुजरात-उत्तराखंड में बाढ़ आती है तो PM अगले दिन चले जाते हैं, लेकिन यहां नहीं आते। लोग इससे काफी नाराज हैं।’ सीनियर जर्नलिस्ट कुबेंद्रन ब्लैक एंड व्हाइट तमिल नाम से एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं। BJP के फेल होने के सवाल पर वे कहते हैं, 'तमिलनाडु के बारे में आपको ये समझना होगा कि लोगों का भरोसा यहां की स्थानीय पार्टियों पर ज्यादा रहा है। DMK और AIADMK यहां की मजबूत पार्टियां रही हैं। 50% से ज्यादा वोट शेयर इन्हीं के पास रहता है।’ ‘कांग्रेस हो या BJP, तमिलनाडु की जनता के मुद्दों को समझ नहीं पातीं। उदाहरण के लिए कर्नाटक के साथ पानी का विवाद होता है तो कांग्रेस कर्नाटक को सपोर्ट करती है। केरल के साथ पानी का विवाद होता है तो केंद्र की BJP सरकार केरल को सपोर्ट करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे वहां अपना राजनीतिक भविष्य देखते हैं।' 'तमिलनाडु की पॉलिटिक्स काफी सिंपल है। यहां 2+2 हमेशा 4 ही होता है। जिसका अलायंस मजबूत होता है, वही सरकार बनाते हैं। ये तय है कि BJP का वोट शेयर बढ़ने जा रहा है। ये बढ़कर 8% तक हो सकता है, लेकिन डबल डिजिट में नहीं जाएगा। अभी 10 साल तक BJP का तमिलनाडु में कोई भविष्य नहीं है। उसके बाद वो जनरेशन वोटर होंगे, जो BJP राज में ही पैदा हुए हैं, तब शायद कुछ बदल जाए।' सवाल: क्या कमजोर पड़ रहा है DMK का एंटी मोदी नैरेटिव जवाब: 'द हिंदू' के डिप्टी रेजिडेंट एडिटर सुरेश कुमार बताते हैं, '2018-19 में DMK ने एंटी BJP और एंटी मोदी का एक नैरेटिव सेट कर दिया था। लोगों में एंटी मोदी लहर थी। केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई और सेंटर से राज्य के लिए फंड न आना लोगों के बीच बड़ा मुद्दा बन गया था। इसे तमिलनाडु के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार की तरह प्रोजेक्ट किया गया था।' 'ये सच भी है कि बाढ़ के दौरान केंद्र से कोई फंड नहीं आया, जबकि उत्तराखंड और अन्य राज्यों की मदद की जा रही थी। हालात ये थे कि मोदी की रैली में आम लोगों ने ब्लैक गुब्बारे उड़ाए थे। हालांकि अब ये नैरेटिव कमजोर पड़ा है।' ‘राहुल गांधी ने संसद में BJP से कहा था कि आप लोग कभी तमिल लोगों पर राज नहीं कर पाओगे। शायद BJP ने इसे चैलेंज की तरह ले लिया है। आप देखेंगे कि काशी-तमिल संगम, सौराष्ट्र-तमिल संगम, सेंगोल, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा और संसद के इनॉगरेशन में तमिल पुजारियों को बुलाना BJP की रणनीति का हिस्सा है।’ सुरेश कुमार कहते हैं, ‘कोई सबूत नहीं है कि सेंगोल किसी भी तरह से सत्ता हस्तांतरण का सिंबल था, लेकिन BJP ने इसे प्रोजेक्ट ऐसे किया। BJP ने प्रचार किया कि ये पवित्र सेंगोल है और कांग्रेस ने इसे वॉकिंग स्टिक कहकर म्यूजियम में रख दिया।' 'बीते 10 साल से मोदी लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तमिल भाषा, उनके कवि, कल्चर की तारीफ करते हैं। BJP धीरे-धीरे तमिल जनता के बीच में अपनी जगह बनाने के लिए ये तरीके अपना रही है।’ अब पढ़िए पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रही हैं... DMK का दावा- सभी 39 सीटें जीतेंगे पूर्व राज्यसभा सांसद और DMK के स्पोक्सपर्सन टीकेएस इलांगोवन का कहना है कि पिछले चुनाव में हम 38 सीटें जीते थे, लेकिन इस बार सभी 39 सीटें जीतेंगे। इस बार हमारा अलायंस बहुत मजबूत है, जबकि अपोजिशन आखिरी वक्त तक गठबंधन के लिए पार्टियों को ढूंढता रहा। दोनों कम्युनिस्ट पार्टी, मुस्लिम लीग, कांग्रेस के साथ ही तमाम छोटी पार्टियां भी हमारे गठबंधन में हैं। मोदी जो कहते हैं, उससे तमिलनाडु के लोग नफरत करते हैं, क्योंकि उन्होंने तमिलनाडु को एक भी रुपया नहीं दिया। GST में भी हमें हमारा हिस्सा नहीं दिया जा रहा। एक बात बताना चाहता हूं, GST के तहत भारत सरकार को टैक्स के तौर पर हम 1 रुपए दे रहे हैं तो हमें 28 पैसे ही वापस मिल रहे हैं, जबकि यूपी को 2 रुपए मिल रहे हैं। AIADMK को स्विंग स्टेट वाले करिश्मे का इंतजार AIADMK के आईटी विंग के हेड और स्पोक्सपर्सन कोवई सत्यन कहते हैं कि बीते 55 साल से तमिलनाडु में द्रविड़ विचारधारा वाली पार्टियों का राज चल रहा है, जो AIADMK और DMK हैं। तमिलनाडु स्विंग स्टेट है, यहां हर पांच साल में सरकार बदलती है। 2014 में हम सभी सीटें जीते थे, 2019 में वो जीते। अब हमारा टर्न है। इस बार हम सभी सीटें जीतने वाले हैं। अन्नामलाई को BJP ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, वो राजनीति में अभी बच्चे हैं। महज तीन साल पहले पॉलिटिक्स में आए हैं। न नेतृत्व करना जानते हैं और न ही गठबंधन को लेकर चल सकते हैं। उन्हें मेंटर करने के लिए भी कोई नहीं है। सत्यन कहते हैं, '2019 के चुनाव में हमारी हार का बड़ा कारण पार्टी में दोहरा नेतृत्व होना था। अब ये सब खत्म हो चुका है। पार्टी में सिंगल लीडरशिप वापस आ चुकी है। लोगों को भी यकीन हो गया है। इसी का नतीजा है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में हमें 33% वोट शेयर मिला। हमारे 2 करोड़ एक्टिव मेंबर हैं, यही हमे चुनाव जिताएंगे।' 'DMK पर्दे के पीछे से BJP को सपोर्ट कर रही है। वो जिस आइडियोलॉजी को फॉलो नहीं करते, उसके बारे में बातें करने लगे हैं। सनातन पर उनके नेता बयान देते हैं। फिर लोगों में इसकी चर्चा शुरू हो जाती है। इस तरह से ये लोग कहीं न कहीं BJP को ही सपोर्ट कर रहे हैं। उन्हें समझना होगा कि तमिलनाडु में उनकी लड़ाई BJP से नहीं बल्कि AIADMK से है।' 'उन्होंने हमारी पार्टी को एक कास्ट के नाम पर ब्रांड करने की कोशिश की, लेकिन वो उसमें फेल हो गए। तमिलनाडु में बहुत कम ऐसे कैंडिडेट हैं जो लगातार चुनाव जीते हैं। इसलिए इस बार DMK में कई सांसदों ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। उन्होंने 5 साल में ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे लोग उन्हें वोट करेंगे।' कांग्रेस को भरोसा- तमिल लोगों को मोदी नहीं चाहिए कांग्रेस के स्टेट वॉररूम चेयरमैन और PCC के जनरल सेक्रेटरी वसंतराज कहते हैं कि जब लोकसभा में राहुल जी ने PM मोदी को देखकर कहा था कि आप कभी भी तमिलनाडु में नहीं जीत सकते। शायद उसी को लेकर उन्हें चोट लगी है। इसीलिए PM बार-बार तमिलनाडु आ रहे हैं। वसंतराज आगे कहते हैं, DMK के साथ हमारा सालों पुराना अलायंस है। पिछली बार स्टालिन जी ने ही राहुल जी को PM पद का उम्मीदवार बताया था। केंद्र की स्कीम्स और अन्नामलाई के भरोसे BJP तमिलनाडु BJP के वाइस प्रेसिडेंट नारायण तिरुपति कहते हैं, 'राज्य में इस बार लड़ाई दो द्रविड़ पार्टी, यानी DMK-AIADMK और BJP के बीच है। पिछले चुनाव में हमारा वोट शेयर 3.5% के आसपास था। लोकल बॉडी इलेक्शन में 7% के पास पहुंच गया है। हर गांव में हमारा फ्लैग और रिप्रेजेंटेटिव हैं।' 'पिछले तीन साल में संगठन बहुत मजबूत हुआ है। पहली बार सभी बूथ पर कमेटी बनी है। दूसरी पार्टियों के तमाम नेताओं ने BJP जॉइन की है। वे केंद्र में हमारी सरकार की एक्सीलेंट परफॉर्मेंस और स्कीम्स को देख रहे हैं, जो हर सेगमेंट के लिए हैं। इन्हीं स्कीम्स को लेकर हम तमिलनाडु के आम लोगों तक पहुंचे हैं।' नारायण तिरुपति कहते हैं, 'हमारे प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने पूरे प्रदेश का दौरा किया। ऐसे में लोगों में BJP की लहर दिख रही है। हमारे 68 हजार बूथ में 95% से ज्यादा पर शक्ति केंद्र भी बन चुके हैं। इस इलेक्शन में BJP कुछ अलग करके दिखाएगी।' तमिलनाडु पर 6.56 लाख करोड़ रुपए का कर्ज, ग्राफिक से जानिए राज्य की स्थिति...
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