‘उम्मीद थी कि सरकार धराली में खुदाई कराएगी। यहां से गुजरने वाला नेशनल हाईवे तो साफ करा दिया, लेकिन हमारा गांव अब भी मलबे में दबा है। खुदाई बंद है। मिट्टी और पत्थरों में दबी लाशें भी बाहर नहीं निकाली गईं। यहां के लोग होटलों से ही कमाई करते थे। उन्हें तो अब तक मुआवजा नहीं मिला। पता नहीं आगे क्या होगा।‘ धराली के ब्लॉक प्रमुख सुशील पंवार को सरकार से कई शिकायतें हैं। उत्तराखंड का धराली 5 अगस्त, 2025 से पहले खुशहाल गांव था। खीर गंगा नदी में आए मलबे ने सिर्फ 34 सेकेंड में पूरा गांव उजाड़ दिया। दो महीने बीत गए, लेकिन करीब 900 लोगों की आबादी वाला धराली दोबारा नहीं बस पाया। 110 परिवारों को उनके टूटे घरों के बदले 5-5 लाख रुपए मिले हैं, जबकि कुछ मकानों की कीमत एक करोड़ रुपए तक थी। गांव में मशीनें नहीं पहुंच सकती थीं, इसलिए कुछ दिन हाथों से खुदाई की गई, फिर उसे भी बंद कर दिया गया। मान लिया गया कि मलबे में दबे 53 लोग अब जिंदा नहीं हैं। सरकार उनके परिवारों को डेथ सर्टिफिकेट देने वाली है। दो महीने बाद भी 4 सवाल बाकी हैं… 1. धराली में आपदा के बाद सरकार ने जो वादे किए थे, उनका क्या हुआ?
2. जिन लोगों के घर और होटल मलबे में दब गए, उन्हें कितना मुआवजा मिला?
3. खुदाई में क्या मिला?
4. धराली को फिर से कहां और कैसे बसाया जाएगा? हमने ये सवाल धराली के लोगों, प्रशासन और रेस्क्यू टीम के अफसरों से पूछे। जवाब में खुदाई बंद होने की बात तो पता चली ही, ये भी मालूम हुआ कि अब पूरा फोकस धराली को नई जगह बसाने पर है। इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने एक कमेटी बनाई है। ये कमेटी धराली को बसाने के लिए नई जगह और तरीका तय करेगी। 10 से 50 फीट मलबा, लाशें निकालना भी मुश्किल
धराली के मौजूदा हालात जानने के लिए हमने ब्लॉक प्रमुख सुशील पंवार से बात की। उन्होंने बताया, ‘खुदाई अब नहीं हो रही है। मलबा हटाकर नेशनल हाईवे खोल दिया गया। यहां दबे लोगों में से एक या दो की डेडबॉडी मिली हैं। यहां 50 फीट तक मलबा है। इसलिए उम्मीद नहीं है कि दबे लोगों की लाशें निकाल पाएंगे।’ ‘इस आपदा से सबसे ज्यादा नुकसान होटल कारोबारियों का हुआ है। हमने अपने पूरी कमाई होटल खोलने में लगाई थी। सब एक झटके में खत्म हो गया। सरकार होटल मालिकों की मदद कैसे करेगी, इसकी कोई पॉलिसी नहीं है।’ सरकार ने अब तक क्या मदद की है?
सुशील पंवार कहते हैं, ‘रेस्क्यू का काम अच्छा हुआ। 5 अगस्त से अब तक सरकार ने खाने-पीने और बाकी चीजों की व्यवस्था करवाई है। हमने मांग की है कि धराली बाजार को फिर से बसाया जाए और होटलों का पूरा मुआवजा मिले। सरकार से सिर्फ आश्वासन मिला है।’ मलबे में एक करोड़ का घर दबा, मुआवजा सिर्फ 5 लाख रुपए
खुशाल सिंह पंवार का धराली गांव के बीचों-बीच दो मंजिला मकान था। कीमत करीब 1 करोड़ रुपए होगी। अब पूरा मकान मिट्टी में दबा है। खुशाल सिंह को मुआवजे के नाम पर सिर्फ 5 लाख रुपए मिले हैं। वे कहते हैं, ‘हमने सरकार से कहा है कि हमें धराली के पास लंका में बसा दे। ये करीब 8-10 किमी दूर है। अधिकारियों ने बताया है कि हमें उत्तरकाशी मेन टाउन के पास गणेशपुर के सामने बसाएंगे। ये जगह धराली से 70 किमी दूर है। वहां अभी रोड तक नहीं है।’ ‘डेढ़ करोड़ का होटल बर्बाद, अब तक मुआवजा नहीं मिला’
विजय सिंह पंवार का धराली में मेन मार्केट के पास 6 कमरों का होटल था। होटल के नीचे दुकानें थीं। इनसे किराया मिलता था। कुल डेढ़ करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी थी। पूरा होटल मलबे में दब गया। अब विजय सिंह परिवार के साथ भाई के घर में रह रहे हैं। वे बताते हैं, ‘मुझे सरकार की तरफ से 5 लाख रुपए मिले हैं। होटल के नुकसान की भरपाई नहीं हुई। कोई काम भी नहीं है। सरकार ने कहा था कि कुछ करेंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।’ डीएम बोले- अब खुदाई नहीं होगी, लोगों को बसाने पर काम कर रहे
हमने उत्तरकाशी के डीएम प्रशांत आर्य से पूछा कि क्या अब धराली में खुदाई का काम नहीं होगा? उन्होंने जवाब दिया, ‘हां, अब खुदाई नहीं होगी। अभी विस्थापन पॉलिसी पर काम चल रहा है।’ धराली में NDRF की टीम को लीड करने वाले कमांडेंट सुदेश कुमार बताते हैं, ‘हादसे के एक हफ्ते बाद ही लग गया था कि मलबे में दबे लोगों में अब शायद ही किसी की जान बची हो। हमने राज्य सरकार के साथ मिलकर नेशनल हाईवे को क्लियर कर दिया था।' ‘हमने बड़े इलाके में 5 से 7 फीट तक खुदाई की थी। तब तक कुछ नहीं मिला। खुदाई करना बहुत मुश्किल हो रहा था। धराली में फैला मलबा कम से कम 40-50 फीट होगा। 4 मंजिला होटल भी नहीं दिख रहे हैं।’ 53 लोग लापता, तीन की डेडबॉडी मिली
धराली उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लॉक में है। यहां की SDM शालिनी नेगी ने बताया कि अब तक तीन डेड बॉडी मिली हैं। इनमें से दो की शिनाख्त हो गई है। 53 लोग लापता हैं। हमने SDM से पूछा कि पहले तो सरकार ने 68 लोगों के लापता होने की बात कही थी। वे बताती हैं, ‘हमने पुलिस के जरिए जांच कराई थी। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, ये नया आंकड़ा निकलकर आया है। कुछ लोग मिसिंग बताए जा रहे थे, वे मिल गए। कुछ लोगों के नाम रिपीट हो रहे थे, उन्हें हटा दिया गया है।’ आपदा की जांच के लिए बने पैनल की रिपोर्ट में क्या निकला
शुरुआत में कहा गया था कि धराली की बाढ़ ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की वजह से आई थी। इसका मतलब होता है ग्लेशियर में बनी झील से अचानक पानी आना या उसका टूट जाना। फिर पता चला कि ये असल वजह नहीं है। उत्तराखंड सरकार ने वजह का पता लगाने के लिए एक पैनल बनाया था। इसकी शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि आपदा की वजह ऊंचाई वाले एरिया में हुई बहुत ज्यादा बारिश थी। इस पैनल में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के साइंटिस्ट शामिल हैं। ये रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में क्या है, ये अब तक सामने नहीं आया है। इससे जुड़े एक अधिकारी बताते हैं, ‘ऊंचाई वाले इलाकों में आमतौर पर बर्फबारी होती है। वहां तेज बारिश ने मोरेन यानी ग्लेशियर हटने से बने मलबे और बड़े पत्थरों को अस्थिर कर दिया। इसके बाद ये मलबा खीर गंगा धारा में गिरा और नीचे की ओर बहता चला गया।’ ‘लोगों ने बताया कि इसका बहाव इतना तेज था कि जमीन कांपती महसूस हुई। अनुमान है कि 15 से 20 लाख टन मलबा नालों से होते हुए नीचे की ओर बहा और निचले इलाकों को तबाह कर गया।’ झील बनने से आपदा आने की बात भी गलत
SDRF के IG अरुण मोहन जोशी ने 17 अगस्त को कहा था, ‘हमारी टीम ने 2 दिन तक कई किलोमीटर लंबा ट्रैक किया। ये टीम श्रीकंठा पर्वत की तलहटी और खीर गंगा धारा के उद्गम तक पहुंची। इसी धारा की बाढ़ ने धराली में तबाही मचाई थी। टीम ने रास्ते में मिट्टी के नमूने, फोटो और वीडियो लिए। इन्हें अब वैज्ञानिकों को जांच के लिए दिया जाएगा।’ ‘हमें लग रहा था कि कोई झील बनने से यह आपदा आई होगी, लेकिन टीम को रास्ते में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला। ग्लेशियर के भीतर क्या हो रहा है, यह सिर्फ एक्सपर्ट ही बता सकते हैं।’ टीम को पता चला कि मलबा धराली गांव के ऊपर लगभग 4 हजार मीटर श्रीकंठ पर्वत के बेस कैंप से आया था। SDRF की सर्च टीम वहां पहुंची तो देखा कि श्रीकंठ पर्वत का बेस जहां शुरू होता था उसी जगह पर तीन तरफ से खीर गंगा में पानी आया था। ‘सरकार को पहले ही चेताया था, लेकिन बात नहीं मानी’
‘धराली आपदा: भागीरथी ईको-सेंसेटिव जोन’ नाम से एक रिपोर्ट भी तैयार की गई है। इसमें जियोलॉजिस्ट नवीन जुयाल और पर्यावरणविद हेमंत ध्यानी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने लगातार वैज्ञानिकों की चेतावनियों की अनदेखी की। ईको-सेंसेटिव जोन के नियमों का उल्लंघन किया और भौगोलिक तौर पर कमजोर इलाके में गलत तरीके से सड़कें बनवाईं। हेमंत ध्यानी सुप्रीम कोर्ट की बनाई 2013 केदारनाथ त्रासदी विशेषज्ञ समिति और 2019 चारधाम सड़क चौड़ीकरण उच्चाधिकार समिति के सदस्य रह चुके हैं। लापता लोगों के डेथ सर्टिफिकेट जारी होंगे
लापता लोगों को मृत घोषित करने के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेजा था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ये प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया। इस पर सरकार ने मंजूरी दे दी। इसके बाद उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने डेथ सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दे दिया। लापता लोगों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है 1. धराली या आसपास स्थायी तौर पर रहने वाले लोग।
2. उत्तराखंड के दूसरे जिलों के रहने वाले लोग।
3. उत्तराखंड के बाहर यानी दूसरे राज्यों के लोग। इनके परिवार अपने नजदीकी थाने में FIR दर्ज करवाएंगे। पुलिस इसकी जांच करेगी। ये जांच रिपोर्ट उत्तरकाशी जिले में भेजी जाएगी। उत्तरकाशी में रिपोर्ट का वेरिफिकेशन करने के बाद भटवाड़ी SDM लापता व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट जारी करेंगे। आपदा प्रबंधन विभाग के सेक्रेटरी विनोद कुमार सुमन ने इस पर कहा है कि आमतौर पर कोई व्यक्ति लापता होता है और 7 साल तक उसके बारे में पता नहीं चलता है, तो उसे मृत मानकर डेथ सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। धराली आपदा बड़ी त्रासदी थी। इसमें लापता लोगों के बचने की उम्मीद न के बराबर है। इस वजह से 7 साल की समय सीमा में छूट दी गई है। उनके डेथ सर्टिफिकेट जारी होने के बाद पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 के तहत लापता लोगों को 7 साल के बाद ही मृत घोषित करने का प्रावधान है। इससे पहले 7 फरवरी 2021 को उत्तराखंड के चमोली में भी ऐसा ही हादसा हुआ था। इसमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए या लापता हो गए। तब भी केंद्र सरकार ने उनके डेथ सर्टिफिकेट जारी करने में 7 साल वाले प्रावधान में छूट दी थी। ...................................... उत्तराखंड से ये रिपोर्ट भी पढ़िए
10 दिन से लापता-नदी में लाश, जर्नलिस्ट की मौत कैसे उत्तराखंड के जर्नलिस्ट राजीव प्रताप की लाश 28 सितंबर को नदी में मिली थी। परिवार का आरोप है कि ये एक्सीडेंट नहीं मर्डर है। उत्तरकाशी के जिला अस्पताल और एक स्कूल पर रिपोर्ट करने के बाद से उन्हें धमकियां मिल रही थीं। राजीव का परिवार मामले की CBI जांच की मांग कर रहा है। पढ़िए पूरी खबर..