‘ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल को आगे बढ़ाया है। पूरा बंगाल बोलता है- मां बुनकर खोमुता, संगे चाहे दीदी ममता। मोदी सरकार ने सिर्फ बंगाल को अलग कर रखा है। उसने मनरेगा, राशन हर चीज का फंड अपने पास रखा है। कोई पैसा बंगाल को नहीं दिया। ऐसे में BJP बंगाल में कैसे डेवलपमेंट करेगी। पहले हमें हमारा हक चाहिए।' कोलकाता में चाय की एक दुकान पर चुनाव की बात करते ही अरिफुर रहमान की नाराजगी सामने आ जाती है। पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटों पर 7 फेज में 19 अप्रैल से 1 जून तक चुनाव हैं। यहां ममता बनर्जी की पार्टी TMC और BJP के बीच सीधा मुकाबला है। TMC 13 साल से पश्चिम बंगाल की सत्ता में है। कांग्रेस और CPI(M) भी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन उनका वोट बैंक बहुत ज्यादा नहीं रह गया है। 4 पॉइंट्स में समझिए पश्चिम बंगाल का रुझान और समीकरण 1. पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून, यानी CAA चुनाव पर असर डालेगा। CAA लागू होने से पहले TMC की सीटें 20 से कम होती दिख रही थीं। अब उसे 20 से 22 सीटें मिल सकती हैं। 2019 में TMC ने 22 सीटें जीती थीं। 2. इस चुनाव में BJP संदेशखाली में महिलाओं से रेप और करप्शन जैसे मुद्दे उठा रही है। संदेशखाली मामले से उसे फायदा मिलता दिख रहा था, लेकिन अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि CAA ने BJP का नुकसान कर दिया। पार्टी को 15 से 18 सीटें मिलने के आसार हैं। 2019 में पार्टी ने 18 सीटें जीती थीं। 3. कांग्रेस और CPI(M) अलायंस 6-7 सीटों पर जीतने का दावा कर रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनके लिए 2 से ज्यादा सीट जीत पाना मुश्किल है। 4. पश्चिम बंगाल में BJP संगठन मजबूत कर रही है। 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा चुनाव उसके लिए वार्म-अप जैसा है। BJP का फोकस हिंदू, आदिवासी और महिला वोटर्स पर है। वहीं, TMC 'बंगाल कैंपेन' और 'बाहरी बनाम बंगाली' पर फोकस कर रही है। दैनिक भास्कर की टीम कोलकाता के अलावा पश्चिम बंगाल के दूसरे शहरों में ग्राउंड पर पहुंची और समझा कि इस लोकसभा चुनाव में हवा का रुख क्या है… दो पार्टी और एक अलायंस में मुकाबला 1. तृणमूल कांग्रेस, यानी TMC
TMC पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी पार्टी है। पार्टी सभी 42 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है। TMC पहले INDIA ब्लॉक के साथ चुनाव लड़ने वाली थी, लेकिन आखिरी वक्त पर गठबंधन से दूर हो गई। 2. BJP
BJP प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी है। पार्टी सभी 42 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने जा रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP 18 सीटें जीतकर दूसरे नंबर की पार्टी बन गई थी। प्रदेश में पार्टी की कमान शुभेंदु अधिकारी के पास है। 3. थर्ड फ्रंट
पार्टियां- कांग्रेस, CPI(M) और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF)
कांग्रेस और CPI (M) प्रदेश की राजनीति में हाशिए पर हैं। 2019 में कांग्रेस को 2 सीटें और 5.7% वोट मिले थे। CPI(M) ने इस बार 22 सीटों पर कैंडिडेट खड़े किए हैं। कांग्रेस 9 सीटों पर कैंडिडेट का ऐलान कर चुकी है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के नौशाद सिद्दीकी TMC के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ डायमंड हार्बर से चुनाव लड़ रहे हैं। ISF का कोर वोटर मुस्लिम है इसलिए TMC को कई सीटों पर नुकसान हो सकता है। पार्टियों और थर्डफ्रंड का गणित समझने के बाद हमने एक्सपर्ट्स से कुछ सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की। पढ़िए इनके जवाब... सवाल: पश्चिम बंगाल में कौन की पार्टी सबसे मजबूत है?
जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुमन भट्टाचार्य कहते हैं, 'ये सवाल कुछ दिन पहले पूछते तो बोलता कि BJP इस चुनाव में TMC पर भारी पड़ती दिख रही है। दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी, TMC की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा के घर छापा और CAA के आने के बाद अब ये चुनाव दोतरफा हो गया है।' 'अब BJP और TMC में 40 सीटों पर कड़ी टक्कर हाेगी। BJP 18 और TMC 22 सीटों पर जीत सकती है। या फिर दोनों को 20-20 सीटें मिलेंगी।’ पॉलिटिकल एक्सपर्ट शायतन घोष कहते हैं, 'पहले मुस्लिम वोटर्स BJP की तरफ झुक रहे थे। CAA का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद TMC के एंटी-CAA कैंपेन ने मुस्लिम वोटर्स का मूड बदल दिया।’ ‘मुस्लिमों को लगता है कि CM ममता बनर्जी के पास ताकत है और वो मुसलमानों को बचा सकती हैं। उन्हें ये भी लगता है कि कई साल से वे TMC को सपोर्ट कर रहे हैं। अगर अब सपोर्ट हटाया तो ममता भी हमारा साथ छोड़ देंगी। ये 30% मुस्लिम वोटर अब एक होकर ममता को वोट देगा।’ शायतन आगे कहते हैं, ‘2021 में BJP ने ध्रुवीकरण की कोशिश की थी, जो उसे उल्टी पड़ गई थी। BJP अब तक बंगाल की जनता की नब्ज नहीं पकड़ पाई है। शायद इसीलिए चुनाव के इतने करीब CAA नोटिफिकेशन आया। अब इस स्थिति में BJP को 17-20 सीटें ही मिल सकती हैं। बाकी सीटें TMC के खाते में जाएंगी।’ पॉलिटिकल एनालिस्ट दीपक गोस्वामी कहते हैं, 'बंगाल में पंचायत का चुनाव बहुत मायने रखता है। पंचायतें जिसके पास होंगी, वही राज्य में मजबूत होगा। ये बात TMC अच्छे से जानती है। लोग ममता बनर्जी से खुश हैं, लेकिन उनके विधायकों और सांसदों से नहीं। उन्हें लगता है कि जो करप्शन लेफ्ट ने रात के अंधेरे में किया, वही, TMC नेता दिन के उजाले में कर रहे हैं।' सवाल: ममता के बंगाल कैंपेन से TMC-BJP को कितना फायदा और नुकसान है?
जवाब: सीनियर जर्नलिस्ट स्निग्धेंदु भट्टाचार्य कहते हैं, 'चुनाव में BJP के लिए भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा है। वहीं, TMC सुशासन का मुद्दा आगे बढ़ा रही है। पार्टी इस बार बंगाल कैंपेन पर फोकस कर रही है। ममता बनर्जी अपने भाषणों में इस बार मोदी या BJP को उखाड़ फेंकने की बात नहीं कहतीं।’ ‘ममता का अभियान जनता को ये बताना है कि उनके शासन में बंगाल कैसे समृद्ध बना। साथ ही, केंद्र की BJP सरकार की बुराइयों से कैसे उन्होंने बंगाल की रक्षा की। TMC का फोकस सीट बढ़ाने पर है, ताकि बंगाल पर उनकी पकड़ और मजबूत हो सके।’ भट्टाचार्य कहते हैं, ‘2018 से TMC क्षेत्रीय राष्ट्रवादी पहचान की तर्ज पर चुनाव लड़ रही है। ऐसा तमिलनाडु में भी देखा जाता है, जहां द्रविड़ियन राजनीति का इतिहास रहा है।’ स्निग्धेंदु आगे कहते हैं, 'पश्चिम बंगाल में पहले हिंदी राज्यों के BJP नेता रोजाना मीडिया में दिखाई देते थे। आए दिन उनकी रैलियां होती थीं। अब ये नेता नहीं दिखते। अमित शाह, अमित मालवीय और आशा लाकड़ा अब बड़ी रैली नहीं करते।’ ‘2021 में BJP को ये एहसास हुआ कि दूसरे राज्यों से नेताओं को बुलाने पर TMC के 'बाहरी बनाम बंगाली' कैंपेन को बढ़ावा मिल रहा। अब आप बाहर से आने वाले BJP नेताओं को सार्वजनिक रैलियां करते नहीं देख सकते। वे आते हैं और बंद कमरे में बैठकें करके वापस चले जाते हैं। BJP अब अपने लोकल लीडर्स को आगे कर वोटर्स का नजरिया बदलने की कोशिश कर रही है।' सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी कहते हैं, 'ममता हिंदू तुष्टिकरण की राह पर भी चल रही हैं, लेकिन मुसलमानों को भी नाराज नहीं करना चाहती हैं।’ सवाल: हिंदू बनाम मुस्लिम तुष्टिकरण का फॉर्मूला किस पार्टी का ज्यादा बेहतर है?
जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुमन भट्टाचार्य कहते हैं, 'बंगाल की अजीब बात है कि 2021 में TMC ने विधानसभा चुनाव जीता तो सबको लगा कि ममता ने मुसलमान वोट के कारण चुनाव जीता। मान लीजिए 294 में से 100 सीटों पर मुस्लिम वोट बड़े फैक्टर हैं।' 'इसका मतलब ये हुआ कि 194 सीटों पर हिंदू वोट हार-जीत तय करता है। इनमें भी ममता ने 117 सीटें जीत लीं। ममता बनर्जी ने हिंदू और मुस्लिम वोटर्स के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश की है। BJP का फोकस हिंदू तुष्टिकरण की राजनीति पर है।’ वे आगे कहते हैं, ‘ममता के पास मुसलमानों के अलावा दो और वोट बैंक हैं। पहला महिला वोटर हैं और दूसरा अपर कास्ट बंगाली ब्राह्मण। महिलाएं ममता बनर्जी की लक्ष्मी भंडार और कन्याश्री योजनाओं से खुश हैं। उन्होंने लड़कियों को मुफ्त साइकिल दी। महिलाओं को लगता है कि अगर उन्होंने BJP को वोट दिया तो ममता सरकार से उन्हें मिलने वाला पैसा भी रुक जाएगा।’ 'ममता से पहले बंगाल में कम्युनिस्ट सरकार ने जाति का भेदभाव खत्म किया। उसके बाद TMC ने लोगों को एम्पावर करने की कोशिश की। हालांकि BJP ने भी यहां SC-ST को हिंदू पहचान दी है। SC महिलाओं को छोड़ दें तो महिला वोटर TMC से ही जुड़ा रहेगा।' वे आगे कहते हैं, ‘SC-ST महिला वोटर पर BJP की नजर है। अगर 2021 का विधानसभा चुनाव देखें तो महिलाओं का वोट TMC को गया था। SC-ST सीटों पर 52.3% महिलाओं का वोट BJP को मिला था। ऐसे में रिजर्व सीटों पर BJP को फायदा मिलेगा।' सुमन कहते हैं, 'बंगाली भद्रलोग यानी अपर कास्ट बंगाली ब्राह्मण करीब 3 से 4% हैं। बंगाली ब्राह्मण खुद को सेकुलर साबित करने के लिए TMC को वोट देते हैं। ये प्रोगेसिव सोच वाले हैं और इतना जल्दी BJP को एडॉप्ट नहीं करेंगे। इनको लगता है कि BJP इनके रहन-सहन और संस्कृति को अपने हिंदुत्व एजेंडा से बदल देगी। इसने 2019 में ममता का साथ दिया था। इस बार भी TMC के साथ जाएंगे।' सीनियर जर्नलिस्ट स्निग्धेंदु भट्टाचार्य कहते हैं, 'BJP और TMC दोनों ही पार्टियां ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही हैं। BJP हिंदुओं का सारा वोट अपनी तरफ करना चाहती है। उसे मुस्लिम वोट से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। वो प्रो-हिंदू कैंपेन तेज करने की कोशिश कर रही है।’ 13 सीटों पर हार-जीत का फैसला करते हैं मुस्लिम वोटर
पश्चिम बंगाल की 13 लोकसभा सीटों बहरामपुर, जंगीपुर, मुर्शिदाबाद, रायगंज, मालदा (साउथ), मालदा (नॉर्थ), बशीरहाट, जादवपुर, बीरभूम, कृष्णनगर, डायमंड हार्बर, जयनगर और मथुरापुर में मुस्लिम वोटर असर रखते हैं। बहरामपुर में सबसे ज्यादा 64% मुस्लिम वोटर हैं। मुर्शिदाबाद में 66%, मालदा में 51%, नॉर्थ दिनाजपुर में 50%, बीरभूम में 37.1%, नॉर्थ 24 परगना में 35%, मथुरापुर में 32% और हावड़ा में 26% मुस्लिम वोटर हैं। सवाल: 2014 से 2024 तक BJP के लिए बंगाल का रुझान कितना बदला?
जवाब: सीनियर जर्नलिस्ट और राइटर स्निग्धेंदु भट्टाचार्य बताते हैं, '2014 के लोकसभा चुनाव में BJP ने बड़ी जीत हासिल की थी और केंद्र में सरकार बनाई। उसी वक्त से उसका फोकस पश्चिम बंगाल पर है। उनके सेंट्रल मिनिस्टर बंगाल के दौरों पर आने लगे। 2014 से 2019 के बीच कैलाश विजयवर्गीय, अरविंद मेनन और जेपी नड्डा जैसे कई बड़े नेता पश्चिम बंगाल पहुंचे।' स्निग्धेंदु आगे कहते हैं, ‘CPI(M) यानी लेफ्ट सरकार को बंगाल से गए 4 साल ही हुए थे। जनता नहीं चाहती थी कि लेफ्ट की सरकार लौटे। उसी समय TMC ने लेफ्ट को पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश की।' 'उन्होंने पंचायत, नगर पालिका और MLA लेवल पर लेफ्ट के नेताओं को अपनी तरफ करने की कोशिशें कीं। कई लेफ्ट समर्थकों को जेल पहुंचा दिया। लेफ्ट के लीडर्स को लगने लगा था कि ममता बनर्जी से उन्हें सिर्फ BJP ही बचा सकती है, क्योंकि वह केंद्र में है।' पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुमन भट्टाचार्य बंगाल में BJP के राइज के लिए RSS को भी श्रेय देते हैं। वे कहते हैं, 'RSS पिछले कुछ साल से बंगाल में एक्टिव है। नॉर्थ बंगाल में BJP को इसका सीधा फायदा मिला। नॉर्थ बंगाल में राजवंशियों पर पार्टी का प्रभाव RSS की ही देन है। 2019 के लोकसभा चुनाव में इसका फायदा भी मिला। बंगाल के पश्चिमांचल में BJP ने बांकुरा, बिष्णुपुर और झारग्राम जीत ली थीं।' पॉलिटिकल एक्सपर्ट शायतन घोष कहते हैं, 'बंगाल में जब लेफ्ट की सरकार थी, तब TMC विपक्ष में थी। 2011 में सत्ता में आने के बाद से वह राज्य की सबसे मजबूत पार्टी है। विपक्ष की जगह खाली थी। CPI(M) और कांग्रेस ये जगह नहीं ले पाए। 2014 में BJP के केंद्र की सत्ता में आने के बाद से ही उसकी नजरें पश्चिम बंगाल पर टिकी हैं। उसने विपक्ष के लिए खाली जगह देखी और ग्राउंड पर काम करना शुरू कर दिया।' '2014 में ही BJP ने RSS के बड़े नेता दिलीप घोष को बंगाल का प्रभारी नियुक्त किया। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अच्छा परफॉर्म किया था, लेकिन 2021 से दिलीप घोष की जगह सुकांता मजूमदार और TMC से BJP में आए शुभेंदु अधिकारी ने ले ली। तब से शुभेंदु अधिकारी बंगाल में BJP की राजनीति का बड़ा चेहरा बने हुए हैं।’ शुभेंदु अधिकारी के असर वाले मेदिनीपुर में BJP मजबूत
2020 में शुभेंदु अधिकारी TMC छोड़कर BJP में आ गए थे। वे अपने साथ बर्धमान के बड़े नेता सुनील मंडल को भी ले आए। शुभेंदु की वजह से BJP मेदिनीपुर डिवीजन में मजबूत हो रही है। यहां 9 लोकसभा सीटें हैं। कांथी सीट से शुभेंदु के भाई शुमेंदु चुनाव लड़ रहे हैं। सवाल: बंगाल में क्यों टूटा INDIA ब्लॉक
जवाब: TMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहम्मद तौसीफ रहमान बताते हैं, 'पार्टी INDIA ब्लॉक के साथ चुनाव लड़ने के लिए तैयार थी। ममता बनर्जी मीटिंग में भी जाती थीं, लेकिन पश्चिम बंगाल में आकर कांग्रेस हमें ही बुरा-भला बोले, ये मंजूर नहीं।’ ‘कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी हमें सपोर्ट नहीं कर रहे थे। राहुल गांधी की न्याय यात्रा पश्चिम बंगाल आई तो TMC को जानकारी ही नहीं दी गई, न ही शामिल होने का न्योता मिला। सीट शेयरिंग बताने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर थी। हमें वह भी नहीं बताई गई। ऐसे में TMC को जो करना चाहिए था पार्टी ने वही किया।' अब पढ़िए पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रही हैं... TMC का दावा: 35 से 36 सीटें जीतेंगे
TMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता तौसीफ रहमान कहते हैं, 'BJP सरकार ने देश की सत्ता संभाली है, तब से कई दंगे हुए। गोमांस को लेकर राजनीति हुई। हम शुरू से विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं और आज भी हमारा मुद्दा वही है।’ ‘साल 2014 में BJP को बड़ी जीत मिली थी। इसके बाद 2019 में बंगाल के लोगों ने भी उन पर भरोसा किया और बंगाल से 18 सीटें जिताईं। BJP ने जनता के इस आशीर्वाद का अपमान किया। 2021 के विधानसभा चुनाव में ये साबित भी हो गया।’ BJP का दावा: 35 सीटें जीतेंगे
BJP प्रवक्ता और BJYM के वाइस प्रेसिडेंट सुखदेव पांडा कहते हैं, 'बंगाल में महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा क्राइम हो रहा है। राज्य में एक संदेशखाली है, लेकिन यहां हर कोने में बहुत सारे संदेशखाली पैदा हो चुके हैं।’ ‘बेरोजगारी युवाओं के लिए बड़ा मुद्दा है। आज भी धरणा तालाब पर दो-ढाई साल से युवा हड़ताल पर बैठे हैं। इनकी नौकरियां करोड़ों रुपए के लिए दूसरे लोगों को बेच दी गईं। ये राज्य का सबसे बड़ा स्कैम रहा है। इसी आरोप में बंगाल के एजुकेशन मिनिस्टर पार्थ चक्रवर्ती जेल में हैं।’ कांग्रेस का दावा: चुनाव बायपोलर, फिर भी 4-5 सीटें जीतेंगे
प्रदेश कांग्रेस महासचिव कमरू चौधरी कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में धर्म के आधार पर चल रही राजनीति ममता बनर्जी की देन है। 2016 में हमने बंगाल चुनाव में 44 सीटें जीती थीं। 2021 में ममता के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी थी। तब से ममता ने ध्रुवीकरण की राजनीति शुरू की।’ वे आगे कहते हैं, 'कांग्रेस बहरामपुर, दक्षिण मालदा, उत्तर मालदा, और रायगंज में बहुत अच्छी टक्कर दे रही है। कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन में भी कई ऐसे उम्मीदवार हैं जिनकी छवि बहुत साफ है। सारा शाह आलिम, श्रीजन, दिप्शिता धर जैसे पढ़े-लिखे और मेहनती लोग पॉलिटिक्स में आ रहे हैं। उन्हें पता है कि देश के लिए क्या करना है।’ ‘इस बार चुनाव बायपोलर है। पहली बार बंगाल के चुनाव में इस हद तक ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है। ज्यादातर वोटर TMC और BJP के बीच बंटे हुए हैं। हमें उम्मीद है कि कांग्रेस 4 से 5 सीटें तो जीतेगी ही।’ CPI(M) का दावा: 10-12 सीटों पर फोकस
राज्यसभा सांसद और CPI(M) नेता बिकाश रंजन भट्टाचार्य कहते हैं, 'हम कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। प्रदेश में 40% सीटों पर हम साथ चुनाव लड़ेंगे। हमारी कोशिश है कि हम कुछ और सेकुलर पार्टी जैसे ISF को भी साथ जोड़ें, लेकिन अभी ये तय नहीं है।' भट्टाचार्य आगे कहते हैं, ‘इस चुनाव में हमारा फोकस भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाना है। प्रदेश में राशन घोटाला, पेपर लीक घोटाला और टीचर भर्ती घोटाले जैसे कई स्कैम हुए हैं। इसकी वजह से बंगाल में बेरोजगारी बढ़ गई है। TMC और BJP दोनों की विचारधारा एक है और दोनों इसका बराबरी से फायदा उठा रहे हैं।’ ............................................ स्टोरी में सहयोग: गौरव शर्मा, भास्कर फेलो