पश्चिम बंगाल का मालदा शहर, यहां के आम जितने मशहूर हैं, सियासत में उतना ही मशहूर गनी परिवार है। 73 साल से मालदा में इस परिवार का दबदबा है। विधानसभा हो या लोकसभा किसी न किसी सीट पर गनी परिवार का सदस्य चुनकर आता ही है। 1980 से 2004 तक लगातार 8 बार गनी खान चौधरी सांसद रहे। परिसीमन के बाद मालदा सीट दो हिस्सों में बंट गई। तब भी 2009 और 2014 के चुनावों में मालदा नॉर्थ और मालदा साउथ इसी परिवार के पास रहा। 2019 में पहली बार BJP मालदा नॉर्थ सीट जीत गई। BJP के खगेन मुर्मू ने दो बार की सांसद और कांग्रेस छोड़ TMC के टिकट पर चुनाव लड़ीं मौसम नूर को हराया। वहीं, मालदा साउथ सीट पर BJP हारी जरूर, लेकिन ये हार बहुत छोटी थी। इस बार BJP मालदा की दोनों सीटें जीतने के लिए ताकत लगा रही है। 26 अप्रैल को मालदा में हुई PM मोदी की रैली इसी जोर-आजमाइश का हिस्सा है। 10 साल में पहली बार PM ने मुस्लिम बहुल सीट मालदा में चुनावी रैली की। मालदा नॉर्थ और मालदा साउथ, दोनों सीटों पर थर्ड फेज में 7 मई को वोटिंग होनी है। दोनों सीटों पर इस बार कांग्रेस, BJP और TMC के बीच मुकाबला है। PM मोदी ने रैली के लिए मुस्लिम बहुल मालदा को ही क्यों चुना और इसके मायने क्या हैं, दैनिक भास्कर ने इस पर लोगों से बात की। PM बोले- TMC और कांग्रेस दोनों तुष्टिकरण की सियासत कर रहे
मालदा में रैली के दौरान PM मोदी ने कहा, ‘आप सब इतना प्यार दे रहे हैं, ऐसा लगता है कि मैं या तो पिछले जन्म में बंगाल में पैदा हुआ था या अगले जन्म में बंगाल में पैदा होने वाला हूं। मुझे इतना प्यार कभी नसीब नहीं हुआ।’ PM ने जय मां काली, जय मां दुर्गा से भाषण शुरू किया और करप्शन, संदेशखाली, CAA, SC-ST आरक्षण, शारदा, चिटफंड, टीचर भर्ती, राशन, म्यूनिसिपैलिटी भर्ती और गौ तस्करी जैसे मुद्दों पर बोले। बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए PM मोदी कहते हैं, 'TMC और कांग्रेस दोनों तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं। TMC बांग्लादेशी घुसपैठियों को बंगाल में बसा रही है और उन्हें आपकी जमीन-खेतों पर कब्जा करने दे रही है।' 'TMC मां-माटी-मानुष की बात करके सत्ता में आई, लेकिन उसने बंगाल की महिलाओं को धोखा दिया है। BJP सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को अत्याचार से बचाने के लिए तीन तलाक को खत्म किया, तो TMC ने इसका विरोध किया था।' PM मोदी की रैली को लेकर लोग क्या कह रहे?
मालदा में रैली में शामिल रहीं मौसमी गुप्ता कहती हैं, 'मैं मोदी जी की रैली में गई थी। वहां इतनी भीड़ थी, जितनी मैं सोच भी नहीं सकती थी। भीड़ की वजह से मैं बस उन्हें स्क्रीन पर देख पाई। मुझे बहुत खुशी है कि मोदी जी यहां आए और उससे भी ज्यादा खुशी उन्हें फेस टू फेस देखकर हुई। मुझे मोदी जी का काम बहुत अच्छा लगता है। वे लोगों की मदद करते हैं। उनकी जरूरतों का ध्यान रखते हैं।’ संदेशखाली में हुई घटना के बारे में पूछने पर मौसमी अपनी परेशानियां गिना देती हैं। वे कहती हैं, ‘मुझे संदेशखाली के बारे में तो कुछ नहीं पता। हां, हम सब महिलाओं को रात में बाहर निकलने में दिक्कत होती है। बहुत सावधानी रखनी पड़ती है।' PM का भाषण समझने में भी कई लोगों को दिक्कत हुई। रैली में पहुंची गीता रानी कर्माकर कहती हैं, 'मोदी जी हिंदी में बोल रहे थे। मुझे ज्यादा अच्छे से समझ नहीं आया कि उन्होंने क्या बोला। मुझे मोदी जी बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन इतनी भीड़ थी कि मैं उन्हें देख भी नहीं पाई।’ संदेशखाली और CAA के बारे में पूछने पर वे कहती हैं, 'इसके बारे में तो मुझे कुछ नहीं पता, लेकिन यहां बांग्लादेशी बहुत आ गए हैं।' रैली में आए झाटू अली कहते हैं, 'मोदी बहुत समय से CAA-NRC के बारे में बोल रहे हैं। इसका मुसलमानों में तो डर है ही। यहां से निकलकर इतने मुसलमान कहां जाएंगे। बांग्लादेश से हिंदू और मुस्लिम सभी आए हैं। मुझे लगता है कि मोदी मुसलमानों के खिलाफ नहीं हैं, उनके लोकल नेता हमें डराते हैं।’ मालदा में 63% मुस्लिम वोटर, BJP को उनके वोट मिलना मुश्किल
मालदा में करीब 63% मुस्लिम वोटर हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि BJP को मुसलमानों का वोट मिलना मुश्किल है, इसलिए उन्होंने मालदा के SC और ST वोटर को चुना। मालदा में 29% वोट SC और 9.49% वोट ST का है। मालदा में सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट शुभ्रो मित्रा कहते हैं, 'ये पहला मौका है जब PM मोदी मालदा आए हैं। लोगों ने पहली बार मोदी मैजिक देखा। 26 अप्रैल को मालदा ग्राउंड में इतने लोगों को पहले कभी नहीं देखा गया। मोदी के आने से लोकल कार्यकर्ताओं को भी हिम्मत मिली है।’ शुभ्रो के मुताबिक, ‘मालदा नॉर्थ में खास तौर पर SC और ST वोटरों की संख्या ज्यादा है। यहां से खगेन मुर्मू को टिकट देकर मोदी दिखाना चाहते हैं कि उनके शासन में आदिवासियों को भी पावर दी गई।' घुसपैठ और CAA का मुद्दा उठाना सोची-समझी स्ट्रैटजी
शुभ्रो बताते हैं, 'मालदा की सीमा बांग्लादेश से जुड़ी है। इसलिए घुसपैठ यहां की बड़ी समस्या है। घुसपैठ करने वाले मालदा होते हुए मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाते हैं। कई लोग मालदा में बस जाते हैं और यहीं के वोटर बन जाते हैं। ये लोग TMC को वोट देते हैं। मोदी ने घुसपैठ का मुद्दा बिल्कुल स्ट्रैटजी के तहत उठाया है।' शुभ्रो आगे कहते हैं, ‘मोदी ने CAA का मुद्दा भी उठाया। मालदा नॉर्थ में 3 लाख से ज्यादा मतुआ वोटर हैं। ये लोग कई साल से नागरिकता की मांग कर रहे हैं। इस चुनाव में BJP की स्ट्रैटजी रही है कि वे मिडिल क्लास हिंदू और SC-ST वोटर्स का विश्वास जीतकर मालदा, बशीरहाट और मुर्शिदाबाद जैसी मुस्लिम बहुल सीटों को जीत लें। इसके लिए इन सीटों पर हिंदू वोट का एक होना जरूरी है।’ शुभ्रो आगे कहते हैं, 'TMC और कांग्रेस के बीच मुस्लिम वोट डिवाइड हुए बिना BJP इन सीटों पर अपनी जगह नहीं बना सकती। पिछले चुनाव में भी मुस्लिम वोट बंटने की वजह से ही मालदा नॉर्थ में खगेन मुर्मू को जीत मिली थी।' BJP टीचर भर्ती घोटाला अपने हर भाषण में उठाती है। इस बार के चुनाव का ये सबसे अहम मुद्दा है। शुब्रो बताते हैं कि इसके जरिए मोदी युवाओं को टारगेट कर रहे हैं। वो कहते हैं, 'करप्शन TMC के खिलाफ BJP का सबसे बड़ा हथियार है। करप्शन मिडिल क्लास के बीच एक मुद्दा है, जो खुद को धोखा खाया महसूस कर रहा है। टीचर भर्ती घोटाले में पीड़ित एजुकेटेड मिडिल क्लास के लोग हैं। ये मुद्दा उन्हें प्रभावित करता है, जो पढ़-लिखकर नौकरी करने का सपना देखते हैं।' PM मोदी के दौरे के बाद क्या मालदा जीतेगी BJP
सीनियर जर्नलिस्ट पार्थ दास कहते हैं, 'मोदी के कार्यक्रम में साउथ और नॉर्थ मालदा, दोनों से बहुत लोग आए। मेरा अंदाजा है कि डेढ़ लाख से ज्यादा लोग रैली में पहुंचे थे। मोदी के आने से यहां BJP और मजबूत होगी।' पार्थ आगे कहते हैं, ‘ यहां संदेशखाली का थोड़ा बहुत इम्पैक्ट है। CAA-NRC ने 2019 और 2021 में TMC के फेवर में काम किया था। ममता CAA के बारे में लोगों को बताकर डरा रही हैं। गजोल विधानसभा में मतुआ लोग हैं, जो TMC को ही वोट देते आए हैं। यहां थोड़े राजवंशी समुदाय के लोग भी हैं, लेकिन इस बार ये दोनों समुदाय मिलकर BJP को ही वोट करेंगे।' कांग्रेस पर हमला करने से बचे PM मोदी
मालदा में PM मोदी ने चुनावी रैली के दौरान TMC पर हमले किए, लेकिन कांग्रेस को गिने-चुने मुद्दों पर ही घेरा। इसमें परिवारवाद का मुद्दा तो बिल्कुल ही गायब था। सीनियर जर्नलिस्ट पार्थ दास कहते हैं, 'मोदी हर जगह परिवारवाद का जिक्र करते है, लेकिन मालदा में गनी परिवार के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा। गनी खान चौधरी को यहां के लोग बहुत मानते हैं, इसलिए उनके खिलाफ बोलने से मोदी जी भी बचे।’ पार्थ आगे कहते हैं, ‘बड़ी बात ये है कि यहां अमित शाह आए, योगी आदित्यनाथ आए और ममता बनर्जी-अभिषेक बनर्जी ने भी रैली और सभाएं की, लेकिन किसी ने भी गनी खान चौधरी के बारे में एक शब्द नहीं बोला।' सीनियर जर्नलिस्ट शुभ्रो मित्रा कहते हैं, 'PM मोदी और अमित शाह विरासत की राजनीति और परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं। इसे लेकर वे कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमले भी करते हैं, लेकिन उन्होंने मालदा में गनी खान चौधरी पर एक भी कमेंट नहीं किया। उनका अपना गणित है। वे चाहते हैं कांग्रेस को TMC से ज्यादा वोट मिलें। इससे मुस्लिम वोट डिवाइड होगा और BJP के लिए जीतने का मौका होगा।' पॉलिटिकल पार्टीज क्या कह रहीं
BJP: PM हों या BJP प्रेसिडेंट, सबकी फर्स्ट प्रायोरिटी बंगाल
मालदा साउथ में BJP जिलाध्यक्ष पार्थ घोष कहते हैं, 'मालदा में 2021 में भी PM का प्रोग्राम होना था, लेकिन कोरोना की वजह से कैंसिल करना पड़ा। हर इलेक्शन में अलग-अलग तरह की प्लानिंग होती है। उस वक्त मोदी जी ने जो सभा की थी, उसमें दो-तीन लोकसभाओं को जोड़ दिया गया था। जैसे बुनियादपुर में उनकी सभा में मालदा को जोड़ दिया गया था।’ ‘इस बार बंगाल में 7 फेज में चुनाव है। अच्छा खासा वक्त है। कैंडिडेट भी पहले ही डिक्लेयर कर दिए गए। इस वजह से PM मोदी के पास वक्त है। वो जहां-जहां कवर हो पाए, वहां-वहां जा रहे हैं। इस वक्त BJP प्रेसिडेंट हो, नेशनल प्रेसिडेंट हो या प्राइम मिनिस्टर, सभी के लिए फर्स्ट प्रायोरिटी बंगाल है। यहां से अगर TMC को नहीं हटाएंगे, तो अगले कुछ साल में यहां कश्मीर के जैसे हालात हो जाएंगे।' कांग्रेस: BJP-TMC में फर्क नहीं, दोनों एक-दूसरे के फायदे के लिए काम कर रहीं
मालदा में कांग्रेस डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट कालीशरण राय कहते हैं, 'BJP और TMC में कोई अंतर नहीं है। दोनों एक दूसरे के फायदे के लिए काम करते हैं। नरेंद्र मोदी के पास कोई मुद्दा नहीं है। उन्होंने अपने 10 साल के कार्यकाल में लोगों के लिए कुछ नहीं किया है। उनकी सभी योजनाएं इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह की बनाई हुई हैं।' 'लोग जिन नेताओं को टीवी पर देखते हैं, वे उन्हें देखने रैली में जाते हैं। उससे ज्यादा कुछ नहीं।’ TMC: BJP का टारगेट सिर्फ समाज को बांटना है
TMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशीष कुंडू कहते हैं, 'दोनों सीटों पर गंगा नदी के बहाव से जमीन का कटाव एक बड़ी समस्या है। मालदा में एयरपोर्ट शुरू नहीं हो सका, ये भी एक समस्या है। कांग्रेस से सांसद अबु हासिम खान चौधरी और BJP के खगेन मुर्मू दोनों सांसदों ने पार्लियामेंट में यहां के लोगों की तरक्की के लिए कोई बात नहीं की।’ वे आगे बोलते हैं, 'मोदी के आने से SC-ST वोटर्स में फर्क नहीं पड़ेगा। वे आज बोलते हैं कि उन्हें सिर्फ हिंदुओं के वोट चाहिए, मुसलमानों के नहीं। कल बोलेंगे कि हिंदुओं में भी सिर्फ SC-ST वोट चाहिए। फिर इनको भी बांटने लग जाएंगे। इस पार्टी का कोई एजेंडा नहीं है। इनका लक्ष्य सिर्फ समुदायों में बंटवारा करना है।' पश्चिम बंगाल से इलेक्शन पर ये खबरें भी पढ़ें...