कल्पना कीजिए कि कोई खिलाड़ी 50 रन बनाने के बाद मशीन-गन सेलिब्रेशन करे, खासकर एक आतंकी हमले के महीनों बाद जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे? इससे पहले कि कोई बीच में आकर कहेसूर्या ने शुरू किया', कृपया रुकें और सोचें बंदूक सेलिब्रेशन? सच में? मैं तर्क दूँगा कि अगर साहिबज़ादा फ़रहान ने मैच पर ध्यान दिया होता और अपनी हरकतों पर नहीं, तो वे शतक बनाकर मैच जीत सकते थे. लेकिन उन्होंने दर्शकों को लुभाने और हीरो बनने की कोशिश कीलेकिन वे खलनायक बन गए.