पॉजिटिव स्टोरी- 12वीं के बाद से करने लगा बिजनेस:70 लाख से शुरू की ‘क्यारी’; आज हर महीने बेच रहा 75 हजार प्रोडक्ट

1 year ago 8
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‘2021 का साल था। कोरोना की वजह से लॉकडाउन चल रहा था। मैं उस वक्त अपनी पहली कंपनी ‘रोबोट बनाओ’ चला रहा था। हर महीने 25-30 लाख रुपए का बिजनेस हो रहा था। वैसे अभी भी वह बिजनेस चल रहा है। साथ में मैं कुछ और कैटेगरी में बिजनेस प्लान कर रहा था। मेरा भाई सक्षम मुझसे दो साल छोटा है। बिजनेस के लिए हम दोनों ने मिलकर 25-30 कैटेगरी फिल्टर किया, तभी ऑनलाइन इनडोर डेकोर नर्सरी प्लांट सेल करने का आइडिया आया। कई महीनों के रिसर्च के बाद ‘क्यारी’ नाम से 2022 में प्रोडक्ट लॉन्च किया। शुरुआत में महीने के 200-300 ऑर्डर आते थे। आज हर महीने 75 हजार के करीब ऑर्डर डिलिवर कर रहा हूं। एक प्रोडक्ट की औसतन कॉस्ट 300 रुपए होती है।’ ऑनलाइन इनडोन डेकोर नर्सरी प्लांट प्रोवाइड कराने वाली कंपनी ‘क्यारी’ के को-फाउंडर अगम चौधरी से मेरी बात हो रही है। मैं उनसे मिलने इंदौर पहुंचा हूं। इस बिजनेस के बारे में ही क्यों सोचा? अगम कहते हैं, ‘जिस तरह से जमाना बदल रहा है। लोगों की जरूरतें और सामान खरीदने का तरीका भी बदल रहा है। अब हम घर बैठे एक क्लिक में सारी चीजें मंगवा सकते हैं, फिर नर्सरी प्लांट क्यों नहीं। अमूमन शहर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर नर्सरी होती है। अब लोगों के पास आज की तारीख में इतना समय नहीं कि वह जाकर इनडोर प्लांट को खरीदें। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि न तो कस्टमर को प्लांट के बारे में जानकारी होती है और न ही प्लांट बेचने वाले नर्सरी ओनर को। हमने इसी प्रॉब्लम को ‘क्यारी’ के जरिए सॉल्व किया है। एक क्लिक में लोगों को प्लांट और इससे जुड़ी डिटेल्स मिल जाती हैं। किसी प्लांट को कैसे रखना है, कितना पानी देना है, इन बातों की जानकारी हमारी वेबसाइट पर है।’ अगम जिस नर्सरी प्लांट को दिखा रहे हैं, उस गमले के निचले हिस्से में पानी भरने के लिए एक बॉक्स लगा हुआ है। मैं उस बॉक्स के बारे में जानना चाहता हूं। अगम कहते हैं, ‘यह हमारी यूएसपी है। इस बॉक्स को हमने कस्टमाइज किया है। इसमें पानी भरकर गमले के निचले हिस्से से अटैच कर दिया जाता है, जितनी उस प्लांट को जरूरत होगी, वह उतना पानी बॉक्स से ऑब्जर्व कर लेगा। मान लीजिए कि कोई 10 दिनों के लिए कहीं बाहर चला गया, तो ऐसे में प्लांट सूखेगा नहीं, खराब नहीं होगा।’ आप इंदौर से ही हैं? ‘नहीं, मैं सागर से हूं। 2018 में पहली बार बी.टेक करने के लिए इंदौर आया था। दरअसल दादा-पापा का गल्ले व्यापार का बिजनेस था। मंडी में अनाज सेल करने की दुकान थी। कुछ समय बाद पापा ने टाइल्स का बिजनेस शुरू कर लिया। इस दौरान मैं कई बार पापा के साथ गुजरात के मोरबी जाता था। मोरबी टाइल्स मैन्युफैक्चरिंग का हब है। बचपन में तो डॉक्टर बनने का सपना था। 8वीं के बाद से बिजनेस करने का चस्का लग गया। मैं पापा के साथ उनकी दुकान पर भी बैठता था। वह चाहते थे कि मैं उनके फैमिली बिजनेस को जॉइन करूं, लेकिन शुरू से मुझे अपना कुछ करना था। जब मैं 12वीं में था, उस वक्त भी चीन से मोबाइल रिलेटेड प्रोडक्ट इम्पोर्ट कर इंडिया में ऑनलाइन सेल करता था। उस वक्त इंडिया में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म धीरे-धीरे बढ़ रहा था। बैचलर में एडमिशन के बाद भी पढ़ाई से ज्यादा बिजनेस पर फोकस कर रहा था। उसी दौरान मैंने ‘रोबोट बनाओ’ नाम से एक कंपनी शुरू की। दरअसल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट को प्रोजेक्ट बनाने के लिए इक्विपमेंट्स की जरूरत पड़ती है। मैं इसे ऑनलाइन बेचता था।’ इसका मतलब ‘क्यारी’ आपका तीसरा बिजनेस है? वह बताते हैं, ‘हां, 12वीं के बाद ट्रेडिंग करने लगा। उसके बाद रोबोट बनाओ और अब क्यारी। शुरू से पापा चाहते थे कि मैं उनके बिजनेस को जॉइन करूं। अभी भी वह ऐसा चाहते हैं, लेकिन मैं अलग-अलग बिजनेस को एक्सफ्लोर करना चाहता था। ऐसा मैंने किया और हर बिजनेस को प्रॉफिटेबल भी बनाया। अब तो शायद पापा भी मान बैठे हैं कि मैं उनकी बातों को नहीं मानूंगा। अपने दिल की करूंगा। अगम आगे कहते हैं, 'जब इस बिजनेस की शुरुआत की, तो मेरी कोई एक्सपर्टाइज नहीं थी। मैंने कुछ लोकल नर्सरी चलाने वालों को कंपनी के साथ टाइअप करके ऑनलाइन प्रोडक्ट बेचना शुरू किया, लेकिन यह आइडिया काम नहीं किया। मुझे सक्सेस नहीं मिली। इस धंधे में सबसे बड़ा चैलेंज प्लांट को सही तरीके से कस्टमर तक पहुंचाना है। हमने फिर अपना टिश्यू लैब कल्चर और वेयरहाउस प्लान करना शुरू किया। हॉर्टिकल्चर एक्सपर्ट्स की टीम बनाईं। इसमें ऐसे भी लोग हैं, जो पहले से नर्सरी चला रहे थे। आज देखिए कि 80 से ज्यादा लोगों की टीम है।’ कहां-कहां वेयरहाउस हैं? ‘जब कंपनी की शुरुआत की थी, तो तकरीबन 70 लाख का इन्वेस्ट किया था। सबसे पहले अपना वेयरहाउस दिल्ली में सेटल किया, लेकिन मौसम में उतार-चढ़ाव होने की वजह से इसे शिफ्ट करना पड़ा। अभी हमारा पुणे में वेयरहाउस है। दरअसल प्लांट के नेचर के हिसाब से मौसम का ध्यान रखना पड़ता है। शुरुआत में कई बार ऐसा भी हुआ कि प्लांट डिलिवर होने से पहले या उसके तुरंत बाद खराब हो गया। हमने धीरे-धीरे इन सारी चीजों को सॉर्ट आउट करना शुरू किया। आज हमारे पूरे पैन इंडिया में कस्टमर हैं। टियर-1 सिटी में सबसे ज्यादा लोग ‘क्यारी’ के प्रोडक्ट खरीद रहे हैं। अब हम बेंगलुरु और कोलकाता में अपना वेयरहाउस सेटअप करने जा रहे हैं ताकि कस्टमर को कम समय में बेहतर प्रोडक्ट मिले। जब हमने शुरुआत की थी, तो महीने में बमुश्किल 300 ऑर्डर आ रहे थे। अभी हर महीने 75 हजार के करीब ऑर्डर डिलिवर हो रहे हैं। एक ऑर्डर की औसतन कॉस्ट 300 रुपए होती है।’
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