डॉ. सीएन मंजूनाथ कौन हैं, आप ये सवाल बेंगलुरु शहर में किसी से भी पूछिए, बहुत मुमकिन है कि वो उन्हें जानता होगा। डॉ. मंजूनाथ कार्डियोलॉजिस्ट हैं और इन्होंने 35 साल मरीजों का इलाज किया है। फ्री में कितने ही ऑपरेशन कर चुके हैं। कर्नाटक के सरकारी हॉस्पिटल श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियालॉजी के 18 साल डायरेक्टर रहे। इस दौरान इतना काम किया कि ये हॉस्पिटल हार्ट के इलाज के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। डॉ. मंजूनाथ की एक पहचान और है। वे पूर्व प्रधानमंत्री और JD(S) सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा के दामाद हैं। अब तक राजनीति से दूर थे, लेकिन इस बार BJP ने उन्हें बेंगलुरु रूरल सीट से टिकट दिया है। बेंगलुरु रूरल सीट से कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश सांसद हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस को राज्य में यही इकलौती सीट मिली थी। इस बार BJP ने डॉ. मंजूनाथ को कैंडिडेट बनाकर कांग्रेस के लिए दिक्कत खड़ी कर दी है। क्यों, इसका जवाब ऑटो ड्राइवर सुरेश डेविड देते हैं। हमने सुरेश डेविड से पूछा कि डॉ. मंजूनाथ चुनाव लड़ रहे हैं, क्या आपने उनका नाम सुना है? सुरेश बोले, 'डॉ. मंजूनाथ की वजह से ही मैं जिंदा हूं। 2011 में मुझे हार्ट अटैक आया था, तब उन्होंने ही ऑपरेशन किया। फ्री में ऑपरेशन हुआ था। अब तक कोई दिक्कत नहीं हुई। वे बहुत पॉपुलर हैं, चुनाव जीत जाएंगे' डॉ. मंजूनाथ के बारे में ऐसे किस्से कई लोगों से सुनने को मिल जाते हैं। हालांकि डॉ. मंजूनाथ के लिए भी मुकाबला आसान नहीं है। उनके सामने चुनाव लड़ रहे डीके सुरेश कर्नाटक के सबसे अमीर कैंडिडेट हैं। 593 करोड़ रुपए की संपत्ति वाले डीके सुरेश 2013 से सांसद हैं। बेंगलुरु रूरल सीट 2008 में बनी थी। 2009 में यहां से JD(S) के एचडी कुमारस्वामी चुनाव जीते। 4 साल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। फिर हुए उपचुनाव में डीके सुरेश जीते। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बड़े मार्जिन से जीत गए। BJP के लिए पॉजिटिव पॉइंट 1. डॉ. मंजूनाथ की अच्छी इमेज
डॉ. मंजूनाथ की इमेज ही BJP की सबसे बड़ी ताकत है। पार्टी पिछले दो चुनावों से ऐसा कोई कैंडिडेट नहीं उतार सकी, जो डीके सुरेश को हरा सके। डॉ. मंजूनाथ को राजनीति का अनुभव नहीं है, लेकिन बेंगलुरु के लोग उन्हें जानते हैं। किसी विवाद में नाम नहीं है । BJP ने काफी सोच-समझकर डॉ. मंजूनाथ को टिकट दिया है। 2. BJP-JD(S) का गठबंधन
इस बार कर्नाटक में BJP और JD(S) का गठबंधन है। बेंगलुरु रूरल सीट पर BJP के साथ JD(S) भी काफी मजबूत है। कुमारस्वामी यहां से सांसद रहे हैं। ऐसे में दोनों पार्टियों का कैडर एक हो गया है, जो कांग्रेस के लिए चुनौती है। कांग्रेस के लिए पॉजिटिव पॉइंट 1. शिवकुमार ब्रदर्स का मैनेजमेंट
डीके सुरेश और डीके शिवकुमार का चुनावी मैनेजमेंट दमदार होता है। बेंगलुरु रूरल सीट में ही कनकपुरा भी है, जो डीके शिवकुमार का विधानसभा क्षेत्र है। पिछली बार BJP की लीड कनकपुरा में ही सबसे कम थी और डीके सुरेश जीत गए थे। 2. फ्री स्कीम्स से उम्मीद
कर्नाटक में महिलाओं के लिए बस का सफर फ्री है। हर महीने दो हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इन दो स्कीम्स से कांग्रेस को उम्मीद है कि महिलाओं के वोट उसे ही मिलेंगे। डॉ. मंजूनाथ: 35 साल का करियर, टीम के साथ 75 लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज
डॉक्टरी करते-करते अचानक राजनीति में कैसे आ गए? ये सवाल हमने डॉ. मंजूनाथ से पूछा। उन्होंने जवाब दिया, ‘31 जनवरी को मैं रिटायर हुआ। इसके बाद बेंगलुरु, कलबुर्गी और दूसरे शहरों में मेरे लिए प्रोग्राम हुए। इसी दौरान लोगों ने कहा कि आपने जिस तरह हेल्थ सेक्टर में काम किया है, वैसे ही पब्लिक सेक्टर में भी करना चाहिए।’ ‘तभी लोकसभा इलेक्शन का ऐलान हो गया। कर्नाटक की BJP यूनिट ने मुझसे कॉन्टैक्ट किया। कर्नाटक में BJP और JD(S) में अलायंस है। BJP हाईकमान ने मेरे ब्रदर इन लॉ एचडी कुमारस्वामी से बात की। कहा कि मंजूनाथ से बात कीजिए कि क्या वो चुनाव लड़ेंगे। डिस्कशन के बाद मैंने तय कर लिया कि अब राजनीति में आकर लोगों की सेवा करूंगा।’ क्या कभी PM मोदी से बात हुई?
PM शिमोगा आए थे, तब मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा- ऑल द बेस्ट डॉक्टर। अमित शाह से भी मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि आप चुनाव लड़िए। हम आपके साथ हैं। जीत आपकी ही होगी।’ पॉलिटिक्स कितनी मुश्किल लग रही है?
मैं 18 साल तक श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में डायरेक्टर रहा हूं। इस दौरान कई मरीजों से, अटेंडर्स से मिलता था। लोगों से मिलना मेरे लिए नया नहीं है। इसलिए मैंने सोचा है कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं। इस पॉलिटिकल प्लेटफॉर्म को भी मैं सर्विस सेक्टर की तरह देखता हूं। हालांकि इसके अलग चैलेंज हैं। जब मैं डायरेक्टर था, तब भी ऑफिस में कम बैठता था, बाकी टाइम कॉरिडोर में घूमकर लोगों से मिलता था। यही वजह है कि लोग मेरा नाम जानते हैं। मुझे इसका फायदा मिलेगा। दूसरी जरूरी बात ये है कि डायरेक्टर रहने के दौरान मैंने कई सुधार किए। देश को दिखाया कि कैसे एक सरकारी मेडिकल इंस्टीट्यूट 5 स्टार कॉर्पोरेट हॉस्पिटल की तरह चल सकता है। मैंने तीन स्लोगन बनाए और उन्हें प्रैक्टिस किया है। 1. ट्रीटमेंट फर्स्ट, पेमेंट नेक्स्ट
2. लाइफ इज मोर इम्पोर्टेन्ट दैन द फाइल
3. ह्यूमैनिटी इज प्रायोरिटी मेरी कोशिश थी कि कोई भी बिना इलाज के न जाए, किसी का इलाज पैसे की वजह से लेट न हो। इसने मुझे पूरे राज्य से जोड़ा। इस मॉडल की तारीफ तब अमेरिका के प्रेसिडेंट रहे बराक ओबामा ने भी की थी। कुछ एजेंसियां जैसे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, लीडरशिप स्कूल ऑफ सिंगापुर, येल यूनिवर्सिटी ऑफ यूएसए, IIM बेंगलुरु ने इस मॉडल की स्टडी की। मैंने जनवरी, 1989 में ये इंस्टीट्यूट जॉइन किया था। यहां करीब 35 साल काम किया। इस दौरान मेरी टीम ने 75 लाख मरीजों का ट्रीटमेंट किया। डीके सुरेश से आपका मुकाबला है, कितना चैलेंजिंग लग रहा है?
मैं बीते 15-16 दिनों में सभी 8 विधानसभा सीटों पर गया हूं। यहां बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला। लोग बदलाव चाहते हैं। इस सीट पर BJP और JD(S) का स्ट्रॉन्ग बेस है। 2019 के चुनाव में जब सिटिंग MP यहां से जीते थे, तब कांग्रेस और JD(S) का अलायंस था। तब BJP अकेले लड़ी थी, उसके कैंडिडेट को 6.7 लाख वोट मिले थे। जीत का मार्जिन करीब 2 लाख था। अब JD(S) का अलायंस BJP के साथ है। वोट का गणित देखें तो JD(S) और BJP के वोट मिला दें तो ये कांग्रेस से ज्यादा हैं। अगर जीत के बाद हेल्थ मिनिस्टर बनने का मौका मिला तो क्या करेंगे?
सबसे पहले आयुष्मान योजना के लूपहोल्स हटाएंगे। इसके पैकेज रेट को रिवाइज करने की जरूरत है। आयुष्मान के तहत अभी 30% इलाज सरकारी और 70% प्राइवेट हॉस्पिटल में हो रहा है। रेट रिवाइज न होने से प्राइवेट हॉस्पिटल मरीजों को एडमिट करने में ना-नुकुर करते हैं। ऐसे में सरकारी पर बोझ बढ़ रहा है, इससे क्वालिटी खराब हो रही है। हम इसे बदलेंगे। अस्पतालों में मैनपावर बढ़ाएंगे। भारत में 13% मौतें रोड एक्सीडेंट में होती हैं। इसलिए बहुत जरूरी है कि हर 100-125 किमी के दायरे में एक ट्रॉमा सेंटर हो, ताकि गोल्डन ऑवर में पेशेंट को इलाज मिल सके। मेंटल हेल्थ भी बहुत जरूरी है। हमारे पास और मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट होने चाहिए। पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रही हैं BJP: डीके सुरेश 11 साल में 30 किमी हाईवे नहीं बना पाए
BJP के प्रवक्ता मोहन विश्वा कहते हैं, ‘डीके सुरेश के बारे में सबको पता है। उनके एरिया में बेंगलुरु से कनकपुरा तक सिर्फ 30 किमी का हाईवे बनना है। 11 साल से बन ही रहा है। BJP ने तीन साल में बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेस-वे तैयार कर दिया।’ ‘बेंगलुरु रूरल में 8 विधानसभा सीट आती हैं। पिछले चुनाव में 7 में से 5 में हमने लीड ली थी। हम डीके शिवकुमार की सीट कनकपुरा में हार गए थे। इस बार ऐसा नहीं होगा क्योंकि हमारे साथ JD(S) का भी सपोर्ट है।' JD(S): BJP के साथ आने से डीके सुरेश का जीतना नामुमकिन
JD(S) स्पोक्सपर्सन प्रदीप कुमार कहते हैं, बेंगलुरु रूरल में एक तरफ मसल पावर है तो दूसरी तरफ ऐसे कैंडिडेट हैं, जिन्होंने हमेशा लोगों की मदद की है। डॉ. मंजूनाथ देवगौड़ा जी के दामाद भी हैं।' कांग्रेस: डीके सुरेश को पता है काम कैसे किया जाता है, वे ही जीतेंगे
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चीफ स्पोक्सपर्सन और पूर्व MLC रमेश बाबू कहते हैं कि डॉ. मंजूनाथ अच्छे डॉक्टर हैं, वे नेता नहीं हैं। डीके सुरेश तीन बार के सांसद हैं और वे जानते हैं कि पब्लिक सेक्टर में काम कैसे किया जाता है। इसलिए बेंगलुरु रूरल सीट को जीतने में कांग्रेस को कोई चुनौती नहीं आएगी। इन VIP सीट के बारे में भी पढ़िए