मणिपुर में तीसरी दरार, मैतेई के बाद कुकी-नगा क्यों भिड़े:6 अधकटी लाशें, 20 मर्डर, 50 घर जले, लोग बोले- 1992 जैसा डर लौटा

4 months ago 10
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7 फरवरी, 2026 की बात है। मणिपुर के उखरुल जिले के लिटान सरईखोंग गांव में एक नगा टीचर स्कूल से घर जा रहे थे। उन्होंने कुछ लड़कों को सड़क पर बैठकर शराब पीते देखा। टीचर ने स्कूल के पास शराब पीने से मना किया। आरोप है ये लड़के कुकी समुदाय से थे। उन्होंने टीचर को पीटा और धमकी दी कि जिंदा रहना है, तो उखरुल छोड़ दो। इस मारपीट ने जातीय रंग ले लिया। 8 और 9 फरवरी की रात भीड़ ने लिटान सरईखोंग के आसपास के नगा गांवों में 20 से ज्यादा घर जला दिए। माहौल बिगड़ता देख सरकार ने 10 फरवरी को उखरुल और कांगपोकपी जिलों में इंटरनेट सर्विस सस्पेंड कर दी। दोनों जिलों की सीमाओं पर अब भी सेना का पहरा है। मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। बीते 3 साल में ज्यादातर वक्त हिंसा के बीच ही गुजरा। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद मैतेई-कुकी के बीच लड़ाई थम गई, लेकिन अब कुकी और नगा समुदायों के बीच शुरू हुई हिंसा ने राज्य में तीसरी दरार पैदा कर दी है। 4 महीने से मणिपुर फिर जल रहा है। फरवरी से जून तक 48 लोग किडनैप किए गए, 20 की हत्या कर दी और 50 से ज्यादा घर जला दिए गए। ऐसा ही डर 1992 में था, जब 5 साल चले संघर्ष में एक हजार लोग मारे गए थे। ‘कुकी पति को गाड़ी से उठा ले गए, 27वें दिन डेडबॉडी मिली’ 10 जून को कुकी-नगा समुदायों के बीच तनाव बढ़ गया, जब खारम वैफेई गांव के पास 6 नगा लोगों के अधकटे शव मिले। इन लोगों को 13 मई को कांगपोकपी से अगवा किया गया था। इनमें दिलीप थियूमई भी थे। दिलीप की पत्नी विनीलियू ने बताया, ‘मैं और दिलीप बच्चे के लिए दवा लेने कांगपोकपी बाजार गए थे। लौटते वक्त कुकी लोगों के ग्रुप ने हमारी गाड़ी रोक ली। उन्होंने सभी सवारियों को बाहर निकाला, आंखों पर पट्टी बांधी और अलग-अलग गाड़ियों में बैठाकर ले गए। अगले दिन सारी महिलाओं को छोड़ दिया, लेकिन पुरुषों को नहीं छोड़ा।' ‘मैंने बंदूक लिए लोगों से पति के बारे में पूछा, तो उन्होंने गुस्से में कहा कि तुम लोगों ने हमारे 3 पादरियों को मारा है। हम इसका बदला लेंगे। 26 दिन तक मेरे पति का कुछ पता नहीं चला। 10 जून को 6 शव मिले। हमें बॉडी की पहचान के लिए इंफाल अस्पताल बुलाया गया। लाशों पर हर जगह चोट के निशान थे। चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था। मैंने कपड़ों से दिलीप की डेडबॉडी को पहचाना।’ जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल (JTC) और यूनाइटेड नगा काउंसिल (UNC) मणिपुर में नगा समुदाय के सबसे बड़े संगठन हैं। हमने JTC के प्रमुख सदस्य मेराचाओ इंका से बात की। वे बताते हैं कि पुलिस ने 6 लोगों के शव सौंपे थे। हमारे भाइयों को बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं। शव लेने से पहले हमने सरकार के सामने तीन मांगें रखी हैं। 1. अपहरण में शामिल लोगों, खासकर कुकी नेशनल फ्रंट के कैडर पर सख्त कार्रवाई हो, उन पर प्रतिबंध लगे। 2. महिला संगठन की प्रमुख लालबाई वैफेई और मणिपुर पुलिस के कर्मी थांग्गिलियन ने हमारे लोगों के अपहरण का आदेश दिया। उन्हें गिरफ्तार किया जाए। 3. मारे गए लोगों के परिवार को आर्थिक मदद मिले, उनके बच्चों की पढ़ाई फ्री की जाए। 1992 का कुकी-नगा टकराव याद आया, तब 1 हजार लोग मारे गए थे मणिपुर की आबादी में करीब 24% नगा हैं। ये ज्यादातर पहाड़ी जिलों उखरुल, सेनापति, चंदेल, तेंगनौपाल और तमेंगलोंग में बसे हैं। मैतेई-कुकी संघर्ष से ये समुदाय दूर ही रहा। शांति बहाली के बाद 4 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म हुआ और नई सरकार बनी। युमनाम खेमचंद सिंह CM बने। तीन दिन बाद, यानी 7 फरवरी से मणिपुर में नगा-कुकी समुदायों के बीच हिंसा भड़क गई। असम राइफल्स से जुड़े सीनियर अधिकारी ने भास्कर को बताया, ‘बीते 40 दिनों में हुईं हिंसक घटनाओं को देखते हुए हमारी चिंता मैतेई-कुकी संघर्ष से हटकर नगा-कुकी की नई लड़ाई की तरफ मुड़ गई है।’ फ्रंटियर मणिपुर के संपादक धीरेन सदोकपम इस पर कहते हैं, ‘मणिपुर में नगा और कुकी के बीच संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। दोनों समुदायों के बीच आखिरी टकराव 1992 में हुआ था। ये 5 साल तक चला। लगभग 1 हजार लोग मारे गए थे। हजारों लोगों को बेघर होना पड़ा था। हिंसा नहीं रुकी, तो उससे भी बदतर हालात हो सकते हैं।’ वजह पूछने पर धीरेन कहते हैं, ‘बड़ी वजह स्थानीय घुसपैठ है। घाटी से विस्थापन के बाद कुकी समुदाय के कई लोग पहाड़ियों पर चले गए। वहां पहले से नगा बहुल गांव थे। कुकी के पास अपने ग्रुप और हथियार हैं। इससे पहाड़ों पर उनका प्रभाव बढ़ रहा है। ये देखकर नगा समुदाय में चिंता बढ़ गई है। इसलिए छोटे विवाद भी बड़े टकराव में बदलने लगे हैं।’ कुकी लीडर बोले- हमारे खाने की सप्लाई रोकी, नगा-मैतेई हालात और बिगाड़ेंगे कांगपोकपी जिले में बिगड़ते हालात पर कुकी लीडर महंगाई और खाने-पीने की किल्लत को बड़ा फैक्टर मानते हैं। एक लीडर ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बात की। वे बताते हैं कि कांगपोकपी और चुराचांदपुर में जरूरी चीजें बहुत महंगी हो गई हैं। गैस और पेट्रोल नहीं मिल रहा। गैस सिलेंडर 5 हजार रुपए तक बिक रहा है। तंगखुल समुदाय के लोगों ने कुकी इलाकों में जाने वाले खाने-पीने के सामान की सप्लाई रोक दी है। इससे लोगों को बहुत मुश्किल हो गई। उधर, कुकी स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन के लीडर रूबोल मणिपुर के विवाद में नगा और मैतेई समुदाय के साथ होने का दावा करते हैं। वे कहते हैं- दोनों समुदाय पहले से मिले हुए हैं। नगा और मैतेई की वजह से हालात और खराब हो सकते हैं। हम अपना बचाव करके चल रहे हैं। सरकार से मदद की उम्मीद है, लेकिन अब तक हमारे लिए कुछ किया नहीं गया। नगा समुदाय का आरोप है कि सुरक्षाबल कुकी लोगों को बचा रहे हैं? रूबोल जवाब देते हैं, ’ सेना किसी एक का पक्ष नहीं ले रही। वो बस बीच-बचाव करने की कोशिश कर रही है। हमें सुरक्षा बलों से ही रिपोर्ट मिली है कि खोपूम घाटी में 200 से 300 लोग कुकी इलाकों पर हमला करने की तैयारी में हैं।’ अब तक 10 गिरफ्तारी, कांगपोकपी, इंफाल और चुराचांदपुर में NIA एक्टिव कुकी-नगा समुदायों के बीच हिंसा पर मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने यूनाइटेड नागा काउंसिल और कुकी समुदाय के डेलिगेशन के साथ बैठक की। उन्होंने 6 नगा और मई 2026 में कांगपोकपी में 3 पादरियों की हत्या की जांच NIA को सौंपी दी। उखरुल और कांगपोकपी जिलों में सेना के सर्च ऑपरेशन का हिस्सा रहे CRPF के सीनियर अधिकारी कहते हैं, ‘डेडबॉडी मिलने के बाद मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स और CRPF ने कांगपोकपी, इंफाल और चुराचांदपुर में जॉइंट ऑपरेशन चलाया। 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।’ NIA के मुताबिक, ये गिरफ्तारियां इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, बिष्णुपुर, चुराचांदपुर, उखरुल, चंदेल और फेरजॉल जिलों से की गई हैं। नवंबर 2024 में जिरीबाम में एक महिला की हत्या, जून 2024 में इंफाल से जिरीबाम जाते समय पूर्व CM एन बीरेन सिंह के काफिले पर हमले और नवंबर 2023 में उखरुल में बैंक डकैती के मामले में भी अरेस्टिंग की गई है। ये रिपोर्ट भी पढ़ें 10 मंदिर उड़ाने की धमकी, कौन है खालिस्तान नेशनल आर्मी 4 जून की सुबह 9:54 बजे पंचकूला के मेयर श्यामलाल बंसल को धमकी भरा ई-मेल मिला। इसमें दिल्ली-हरियाणा के 6 बड़े मंदिरों में ब्लास्ट करने की धमकी थी। मेल मिलते ही लोकल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। डॉग स्क्वाड और एंटी-बम स्क्वाड बुलाई गईं। मंदिर खाली कराए गए, लेकिन कुछ नहीं मिला। जांच आगे बढ़ी, तो पता चला कि धमकी के पीछे पाकिस्तान में एक्टिव खालिस्तान नेशनल आर्मी है। पढ़ें पूरी खबर…
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