‘चुनाव में जिसे जिताया, वो दूसरी पार्टी में चला गया। हर पार्टी दूसरी पार्टी को तोड़ने में लगी है। ये तो हमारे साथ धोखा है न।’ मुंबई के शिवाजी पार्क में मॉर्निंग वॉक कर रही पल्लवी एक लाइन में महाराष्ट्र के वोटर की उलझन बता देती हैं। यहीं मिले गोपाल शेट्टी कहते हैं, ‘BJP महाराष्ट्र में पार्टियां तोड़ रही है। वो वॉशिंग मशीन नहीं है, जो भ्रष्ट नेताओं को साफ कर देगी। यहां एक पार्टी सत्ता में है और उसी नाम की पार्टी विपक्ष में है। बहुत कन्फ्यूजिंग माहौल है।’ महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटों पर 19 अप्रैल से 20 मई तक 5 फेज में वोटिंग होगी। महायुति यानी NDA और महाविकास अघाड़ी यानी INDI अलायंस के बीच सीधा मुकाबला है। कुछ छोटी पार्टियां भी हैं, जो INDI अलायंस के वोट शेयर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। 4 पॉइंट में समझिए महाराष्ट्र के रुझान और समीकरण 1. महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी और महायुति सरकार के बीच कांटे की टक्कर है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, NDA को 30 से 32 सीटें मिल सकती हैं। 2. शिवसेना उद्धव बालासाहब ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार जैसी पार्टियों के लिए ये चुनाव अस्तित्व बचाने की लड़ाई है। दोनों पार्टियां कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। इस गठबंधन को 16 से 18 सीटें मिल सकती हैं। 3. SC, OBC, धनगर और मराठाओं के लिए आरक्षण मांग रहे संगठन चुनाव में कैंडिडेट उतारते हैं तो दोनों अलायंस को नुकसान पहुंचाएंगे। छोटी पार्टियां वोट तो काटेंगी, लेकिन सीट जीतने की स्थिति में नहीं हैं। 4. महाराष्ट्र में BJP को परिवार और पार्टी तोड़ने के मुद्दे पर जनता का गुस्सा झेलना पड़ सकता है। NDA के पास वोट दिलाने वाला चेहरा नहीं है, इसलिए PM मोदी का ही सहारा है। दैनिक भास्कर की टीम मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के दूसरे शहरों में ग्राउंड पर पहुंची और समझा कि इस लोकसभा चुनावों में हवा का रुख क्या है… पहले समझिए कौन किसके साथ है 1. NDA या महायुति
2. INDI अलायंस या महाविकास अघाड़ी एकनाथ शिंदे और अजित पवार का साथ मिलने से BJP महाराष्ट्र में पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है। 2019 में उसने उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था। BJP ने 23 और शिवसेना ने 18 सीटें जीती थीं। इस बार शिवसेना साथ नहीं है, शिंदे और अजित पवार की पार्टी उसकी भरपाई कर सकते हैं। शिवसेना और NCP में टूट से महाविकास अघाड़ी कमजोर हुआ है। शिवसेना में टूट के वक्त 13 सांसद उद्धव ठाकरे से बगावत कर एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे। यही हाल शरद पवार की NCP का है। दोनों के सामने नई लीडरशिप तैयार करना और कोर वोट बैंक बचाए रखने की चुनौती है।
तीन छोटे दल बिगाड़ सकते हैं महाअघाड़ी का खेल 1. वंचित बहुजन अघाड़ी
इस लिस्ट में पहला नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी का है। महाविकास अघाड़ी लगातार कोशिश कर रही है कि प्रकाश अंबेडकर उसके साथ आ जाएं। 5 सीटों का ऑफर भी दिया, लेकिन वे ज्यादा सीटें मांग रहे हैं। गठबंधन में शामिल होने की अटकलों के बीच वंचित बहुजन अघाड़ी ने कैंडिडेट्स उतारने शुरू कर दिए हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 47 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। पार्टी को 6.92% वोट मिले थे। माना जाता है कि वोट के बंटवारे से कांग्रेस और उसके अलायंस को नुकसान हुआ था। 2. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पास 2.5% वोट शेयर हैं। ये पार्टी महायुति का हिस्सा बन सकती है। इससे लोकसभा चुनाव में भले बड़ा फायदा न हो, लेकिन दो महीने बाद होने वाले राज्यसभा चुनावों में NDA को बड़ा फायदा हो सकता है। 3. AIMIM
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के कोर वोटर मुस्लिम हैं। अगर वे महाराष्ट्र में मजबूती से चुनाव लड़ते हैं, तो महाविकास अघाड़ी का खेल बिगाड़ सकते हैं। अलायंस और पार्टियों का गणित समझने के बाद हमारे सामने कुछ सवाल थे। पढ़िए इनके जवाब... सवाल: महाराष्ट्र में सबसे मजबूत गठबंधन कौन सा है?
जवाब: इस सवाल के जवाब में पॉलिटिकल एक्सपर्ट अभिजीत कहते हैं, ‘NDA अभी सबसे मजबूत नजर आ रहा है। BJP मोदी के नाम और केंद्र में उनके काम पर वोट मांगने वाली है। ये भी है कि अगर विपक्ष ने महाराष्ट्र के अपने सभी बड़े चेहरों को चुनाव लड़वाया तो स्थिति बदल सकती है।’ 2019 में NDA को 41 सीटें मिली थीं। अभिजीत का मानना है कि इस बार 41 सीटें जीत पाना मुश्किल होगा। सीनियर जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर भी कहते हैं, ‘महाराष्ट्र में अभी तस्वीर साफ नहीं है। NDA को सिर्फ 30-32 सीटें मिलती दिख रही हैं। नेताओं के पाला बदलने से वोटर बहुत कन्फ्यूज दिख रहे हैं।’ पॉलिटिकल एक्सपर्ट और पोल डायरी के एडिटर अभिजीत ब्रह्मनाथकर मानते हैं कि NDA को एकतरफा जीत मिल सकती है। वे कहते हैं, ’केंद्र और राज्य में NDA की सरकार है। उनके पास अच्छे और मजबूत उम्मीदवार हैं। दूसरी ओर विपक्ष के पास उतने मजबूत उम्मीदवार नहीं है। NDA महाराष्ट्र में 40 से ज्यादा सीटें जीत सकती हैं। हालांकि INDI अलायंस ने कई सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। अगर वे मजबूत उम्मीदवार ले आते हैं तो NDA को मिलने वाली सीटों की संख्या कम हो सकती है।’ सवाल: पार्टियां टूटने से दोनों अलायंस को कितना नुकसान या फायदा होगा?
जवाब: 2019 में शिवसेना NDA का हिस्सा थी। शिवसेना में टूट नहीं हुई थी। मोदी लहर के बीच NDA ने आसानी से सीटें जीती थीं। हालांकि अब स्थिति बदल गई है। बाला साहब ठाकरे की बनाई शिवसेना दो धड़ों में बंट गई है। एक धड़ा BJP के साथ है और दूसरा कांग्रेस के साथ। यही हाल NCP का भी है। NCP बनाने वाले शरद पवार कांग्रेस के साथ हैं और उनके भतीजे अजित पवार BJP के साथ सरकार में शामिल हैं। संदीप कहते हैं, ‘इस टूट का फायदा उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना को मिल सकता है। उद्धव पहले ही इसकी सहानुभूति लेने में कामयाब रहे हैं। अब देखना ये है कि ये वोट में तब्दील होती है या नहीं। शरद पवार को NCP टूटने पर सहानुभूति वोट मिलें या न मिलें, लेकिन उन्हें बहुत नुकसान नहीं होगा।' सवाल: महाराष्ट्र में मोदी लहर का कितना असर दिखेगा?
जवाब: संदीप सोनवलकर आगे कहते हैं, ‘महाराष्ट्र में इस बार मोदी लहर भी नहीं चलेगी। 2019 में केंद्र में 303 सीटें लाने के बाद भी BJP महाराष्ट्र में पूर्ण बहुमत से नहीं जीत पाई थी। महाराष्ट्र के लोग पॉलिटिकली बहुत अवेयर हैं। डिजिटली भी काफी एक्टिव हैं। इस बार वोट देते समय वे यह जरूर देखेंगे कि उनका नेता कितना ईमानदार है। महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे काफी चौंकाने वाले रहेंगे।’ सवाल: मराठा आरक्षण और वंचित बहुजन अघाड़ी का चुनाव में कितना असर दिखेगा?
जवाब: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रकाश अंबेडकर और मराठा आरक्षण आंदोलन को लीड करने वाले मनोज जरांगे पाटिल मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। जरांगे पाटिल दावा करते हैं कि उनके पास राज्य के 25% मराठाओं का वोट बैंक हैं। वहीं, बहुजन वंचित अघाड़ी को पिछली लोकसभा में तकरीबन 7% वोट मिले थे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट अभिजीत कहते हैं, ‘यहां के मराठा जो कभी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहते थे, वो अब मनोज जरांगे के साथ जा सकते हैं। ऐसे में NDA को फायदा मिल सकता है।’ सवाल: नेताओं के पार्टी बदलने से लोग कन्फ्यूज, इसका कितना असर दिखेगा?
जवाब: जर्नलिस्ट संदीप सोनवलकर कहते हैं, ’महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे ऐतिहासिक होंगे। नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टी चुन ली है, लेकिन लोगों को तय करना है कि वो किसे वोट देंगे। महाराष्ट्र की जनता के पास बहुत विकल्प हैं। पिछले 3 साल में राज्य में कोई बड़ा चुनाव नहीं हुआ है। इसलिए ये स्पष्ट नहीं है कि जनता किसके साथ है। लोकसभा चुनाव महाराष्ट्र में हुई पार्टियों की तोड़-फोड़ पर भी फैसला देगा।’ संदीप आगे कहते हैं, ‘महाराष्ट्र पहला ऐसा राज्य है जहां पार्टी छोड़कर गए विधायक और सांसद अपने साथ पार्टी का नाम और सिंबल भी ले गए। यहां संवैधानिक उथल-पुथल हुई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की। इसके बावजूद राज्य में नई सरकार बनी और चल रही है। यहां रेफरेंडम सिर्फ लोकसभा चुनाव को लेकर नहीं होगा, बल्कि आगे की सियासत भी तय करेगा।’ अब पढ़िए पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रही हैं... BJP का दावा: 45+ सीटें जीतेगा NDA
BJP के प्रवक्ता केशव उपाध्याय कहते हैं, ‘विदर्भ से लेकर कोंकण तक प्रदेश में सिर्फ मोदी की ही चर्चा है। सोशल मीडिया और ग्राउंड वर्क के जरिए BJP लगातार लोगों से जुड़ी हुई है। BJP ने सुपर वॉरियर्स नाम से कॉन्सेप्ट जारी किया है। इसके तहत हमने हर विधानसभा सीट पर 100 कार्यकर्ता एक्टिव किए हैं। एक लोकसभा सीट के तहत कम से कम 6 विधानसभा सीटें आती हैं, यानी 600 कार्यकर्ता फील्ड पर उतारे हैं। ये कार्यकर्ता एक साल से घर-घर जाकर मोदी के काम लोगों को बता रहे हैं। BJP महाराष्ट्र में 45+ सीटों का आंकड़ा पार करने जा रही है।’ BJP के पूर्व सांसद किरीट सोमैया कहते हैं, ‘इस चुनाव में हम विपक्षी नेताओं के घोटालों और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाएंगे। मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। 2014 से 2019 तक महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार रही। उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं रहा।’ किरीट सोमैया आगे कहते हैं, ‘वैसे BJP का लक्ष्य सभी 48 सीटें जीतने का है। कुछ सीटें मार्जिनल अंतर से जीतने वाली हैं। ऐसी दो-पांच सीटों को छोड़ना पड़ता है।’ शिवसेना (UBT) का दावा: 35 सीटें जीतेगा महाविकास अघाड़ी
शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे कहते हैं, ‘यहां हवा का रुख ठाकरे और शरद पवार ब्रांड की ओर है। हवा महाविकास अघाड़ी के पक्ष में है। लोग कांग्रेस के पिछले काम से भी खुश हैं। पूरे देश में BJP के कुछ भी आंकड़े आएं।’ शिंदे वाली शिवसेना बोली- 400 पार के लिए महाराष्ट्र में 45 सीटें जीतना जरूरी
शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े कहते हैं, ‘नरेंद्र मोदी हमारे नेता हैं और हम हिंदुत्व के मुद्दे पर जनता के बीच जा रहे हैं। 2019 में भी हमने उनके नाम पर वोट मांगा था। हम बाला साहेब की विचारधारा मानते हैं।’ कांग्रेस बोली- किसान और युवा नाराज, NDA को सिर्फ 10 सीटें मिलेंगी
महाराष्ट्र की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. शोभा बछाव कहती हैं, ’यहां का किसान और युवा नाराज है। ज्यादातर युवा बेरोजगार हैं। राज्य में काम करने वाले अफसर और कर्मचारी सरकार से नाराज हैं। सरकार के खिलाफ बोलने वालों को दबा दिया जाता है। उसके पीछे ED, CBI लगा दी जाती है।’ शरद पवार गुट वाली NCP को क्लीन स्वीप की उम्मीद
टूट के बाद शरद पवार की पार्टी कमजोर हुई है, लेकिन दावे बड़े हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो कहते हैं, ‘महाराष्ट्र की जनता ने पिछले दिनों हुई गद्दारी देखी है। 1999 में जिस शख्स ने पार्टी बनाई थी, जिसकी वजह से पार्टी इस मुकाम पर पहुंची है, जिसकी वजह से हम 15 साल महाराष्ट्र और 10 साल केंद्र में रहे। इन्होंने उसके साथ धोखा किया।’ क्लाइड आगे कहते हैं, ‘जो भी नेता पार्टी छोड़कर गए हैं, वे 20-25 साल पहले कुछ भी नहीं थे। शरद पवार 55 साल से ज्यादा समय से राजनीति में हैं और उनकी वजह से ही पार्टी छोड़ने वालों को ये मुकाम मिला है।’ अजित पवार गुट वाली NCP बोली- NDA की जीत पक्की
NCP (अजित पवार गुट) की नेता और महिला-बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे कहती हैं, ‘महाराष्ट्र की जनता समझदार है और वह उसे ही वोट देगी, जिसने गरीबों, महिलाओं और वंचितों के लिए काम किया है। यहां BJP, शिवसेना और NCP गठबंधन की जीत पक्की है।’ मनसे ने कहा- बनते-बिगड़ते समीकरण से हवा का रुख तय नहीं
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के महासचिव वागीश सारस्वत कहते हैं, ‘महाराष्ट्र में अभी समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं। इसलिए अभी ये कहना मुश्किल है कि हवा का रुख किस ओर है।’ हालांकि महाराष्ट्र की राजनीति इतनी सीधी भी नहीं है, जितनी पार्टियां मान रही हैं। दादर में रहने वाले सुनील पवार कहते हैं, ‘नेता एक पार्टी से दूसरी पार्टी और एक गठबंधन से दूसरे गठबंधन में जा रहे है। लोग तो कन्फ्यूज हैं ही कि किसे वोट दें, नेता भी कन्फ्यूज हैं कि किस पार्टी में जाएं।’ भारत की GDP में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 13.08 %, ग्राफिक्स से जानिए राज्य की स्थिति ..................................................... स्टोरी में सहयोग: विनय पांचाल, भास्कर फेलो