दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल के पर्सनल सेक्रेटरी बिभव कुमार को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। इस केस में सबसे बड़ा सवाल है कि घटना के वक्त बिभव कुमार मौके पर थे या नहीं। अब ये भी साफ होता दिख रहा है। केस की जांच के लिए बनाई गई SIT में शामिल दैनिक भास्कर के सोर्स ने बताया है कि CCTV कैमरे में बिभव नजर आ रहे हैं। इसे सबूत के तौर पर पुलिस कोर्ट में पेश भी करेगी। हालांकि, उनके वकील अब भी दावा कर रहे हैं कि घटना के वक्त बिभव मौजूद नहीं थे। बिभव की रिमांड के खिलाफ अपील और बेल पहले ही रिजेक्ट हो चुकी है। पुलिस कस्टडी भी 3 दिन के लिए बढ़ा दी गई हैं। अब तक ये सभी बातें स्वाति मालीवाल के फेवर में जाती दिख रही हैं। उधर, पुलिस का कहना है कि बिभव पूछताछ में सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। वहीं, बिभव के वकील कह रहे हैं कि पुलिस ने 5 दिन की कस्टडी में कोई सवाल ही नहीं पूछा। दैनिक भास्कर ने केस इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर अंजिथा चेप्याल से बात करनी चाही, तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद हमने पुलिस सोर्स के जरिए इस केस की पड़ताल की। साथ ही AAP की लीगल टीम के हेड और बिभव कुमार के वकील से बातचीत की। पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट… सबसे बड़ा सवाल, बिभव कुमार मौके पर थे या नहीं
स्वाति मालीवाल का आरोप है कि बिभव ने उनके साथ मारपीट की थी। वहीं, बिभव के वकील का कहना है कि वे CM हाउस में मौजूद नहीं थे। अब तक CCTV कैमरे की जांच रिपोर्ट भी सामने नहीं आई है। हालांकि, जांच के लिए बनी SIT में मौजूद भास्कर के सोर्स ने बताया है कि CCTV फुटेज में बिभव की एक झलक दिखी है। SIT कोर्ट में इसे सबूत के तौर पर पेश भी करेगी। हालांकि, अब तक इस फुटेज की रिपोर्ट कोर्ट को नहीं सौंपी गई है। कोर्ट में अब तक फुटेज की रिपोर्ट न सौंपने पर सोर्स ने बताया कि अभी कैमरे की जांच हो रही है। ये बेहद सेंसिटिव केस है, लिहाजा लैब और पुलिस रिपोर्ट लाने से पहले पूरी तरह कन्फर्म करेंगे कि किसी भी गड़बड़ी की संभावना न हो। एक हफ्ते के अंदर ये रिपोर्ट आ सकती है। वकील बोले- ये BJP की साजिश, मोटिव बहुत बड़ा था, निशाना बिभव बने
हमने आम आदमी पार्टी की लीगल सेल के हेड और पैनल में शामिल एडवोकेट संजीव नासियार से बात की। हमने उनसे बिभव कुमार की गिरफ्तारी से लेकर पांच दिन की शुरुआती कस्टडी में क्या-क्या हुआ, ये जानने की कोशिश की। आम आदमी पार्टी के सदस्य और लीगल सेल के हेड संजीव नासियार कहते हैं, 'इस पूरे मामले में स्वाति मालीवाल ने जैसे रिएक्ट किया, उससे साफ है कि BJP ने स्वाति मालीवाल को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया है।' हमने पूछा- इसका मतलब क्या है? जवाब मिला, 'बस इतना कहूंगा कि मोटिव बहुत बड़ा था।' पुलिस ने बिभव से 5 दिन में क्या सवाल पूछे, पूछताछ में क्या निकला? संजीव जवाब देते हैं, 'एक भी नहीं। हमारे वकील बिभव के संपर्क में हैं, लेकिन अब तक बिभव से कुछ नहीं पूछा गया।’ वे आगे कहते हैं, ‘पुलिस दबाव में काम कर रही है। इस केस में कुछ भी सच नहीं, बस पुलिस भी टाइम काट रही है।’ वकील बोले- बिभव निर्दोष है, स्वाति झूठ बोल रहीं
बिभव कुमार के वकील का कहना है कि CM के PS पर आरोप लगाना पॉलिटिकल साजिश का नतीजा है। वे 5 आधारों पर केस लड़ रहे हैं। 1. सबसे बड़ा सवाल- घटना के बाद 3 दिन स्वाति कहां थीं
संजीव नासियार कहते हैं, ‘घटना 13 मई को हुई और FIR 16 मई को लिखी गई। जांच तो इस बात की होनी चाहिए कि आखिर 3 दिन वो किस-किस के संपर्क में आईं। BJP के नेताओं में उन्होंने किससे बात की। उनसे 3 दिन बाद एप्लिकेशन किसने टाइप करवाई।’ वे आगे कहते हैं, ‘स्वाति मालीवाल ने कहा था कि वो डर गई थीं। दूसरी तरफ लोग ज्यादा पावरफुल हैं, मीडिया से घिरने का डर था। ये बातें दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद और इतनी तेज तर्रार महिला के मुंह से सच लगती हैं क्या। कोई आम औरत ये कहती, तो ठीक भी लगता।’ 2. स्वाति मालीवाल के पास CM से मिलने का अपॉइंटमेंट नहीं था
संजीव बताते हैं, ‘जिस दिन स्वाति मालीवाल CM हाउस पहुंचीं, उस दिन उनका CM के साथ कोई अपॉइंटमेंट नहीं था। अगर बहुत कुछ अर्जेंट हो, तो पार्टी का नेता CM से मिल सकता है, लेकिन अर्जेंट क्या था, ये अब तक पता नहीं चला।’ वे आगे कहते हैं, ‘CM के रेजिडेंस में बिना अपॉइंटमेंट पहुंचना ही अपने आप में सीरियस है। अगर आप पार्टी मेंबर होने के नाते पहुंच भी गईं, तो बहुत अर्जेंट होने पर CM मिल भी सकते हैं, लेकिन CM का कंसेंट तो चाहिए न। आप CM के कमरे में तभी जा सकते हैं, जब उनकी परमिशन हो।’ ‘अंदर से कोई कंसेंट नहीं आया तो सिक्योरिटी आपको रोकेगी ही। सिक्योरिटी आपको अंदर जाने से रोक रही है। वे कह रहे हैं कि हमारे पास कोई परमिशन नहीं आई है। आप अंदर बिना कंसेंट के नहीं जा सकती हैं। तो आप ही सोचिए कि फिर बखेड़ा खड़ा किसने किया। 3. बिभव घटना के वक्त वहां नहीं थे, सिक्योरिटी की रिपोर्ट और आरोपों में फर्क
वकील कह रहे हैं कि जब पूरा घटनाक्रम हुआ तब बिभव वहां नहीं थे। एडवोकेट संदीप कहते हैं, ‘रिपोर्ट के मुताबिक, स्वाति मालीवाल ने खुद वहां मौजूद स्टाफ से कहा था कि आप बिभव से बात करो। स्वाति बिभव से बात करने के लिए कह रही हैं तो इसका सीधा मतलब है कि बिभव वहां नहीं थे। ऐसे में फिर बिभव पर आरोप कैसे लग गए।’ 4. वारदात के ही दिन क्यों नहीं लिखवाई रिपोर्ट
संजीव का कहना है कि स्वाति मालीवाल के साथ अंदर अगर इस तरह की मारपीट हुई थी, तो उन्हें थाने पहुंचकर फर्स्टहैंड रिपोर्ट लिखवानी चाहिए थी। वो बिना रिपोर्ट लिखवाए लौट गईं। ये कोई कैसे मान ले कि स्वाति जी जिस पद पर रहीं, उन्हें महिलाओं के हक के बारे में नहीं पता होगा।’ 5. अब तक आए CCTV फुटेज में गंभीर इंजरी के सबूत नहीं
संजीव कहते हैं, ‘CCTV फुटेज में स्वाति जी खुद कह रही हैं कि मैंने 112 नंबर पर कॉल कर दिया है। फुटेज में वो लगातार खुद गाली-गलौज करती दिख रही हैं। सिक्योरिटी अफसर को धमका रही हैं। बिभव के बारे में खराब बातें बोल रही हैं। वीडियो में न उनके कपड़े फटे दिख रहे और न ही वो लंगड़ाती नजर आ रही हैं।’ ‘बाद में वे कहती हैं कि उनके कपड़े फाड़े गए। उन्हें इतनी चोट लगी कि चल तक नहीं पा रही हैं। बाद के वीडियो में वो लंगड़ाती भी दिख रही हैं, लेकिन घटना के वक्त के वीडियो में तो ऐसा कुछ नहीं दिखा। 112 पर कॉल करने के बाद का जो वीडियो पब्लिक डोमेन में है, उसमें उनकी जो टोन और सेहत है, वो सभी आरोपों को गलत साबित करती है।’ वकील बोले- आप नेताओं ने अलग-अलग हालात में अलग बयान दिए
AAP नेता संजय सिंह ने पहले माना कि स्वाति मालीवाल के साथ अभद्रता हुई। ये बहुत गलत है, इसकी जांच होगी। बाद में आतिशी ने कहा कि स्वाति झूठी हैं। ऐसे में किस नेता की बात मानें? इस पर एडवोकेट संजीव कहते हैं, 'देखिए स्वाति, संजय के पास पहुंचीं। वो पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। इस मौके पर परिवार का मुखिया जैसा रिएक्ट करता है, संजय ने वैसा ही रिएक्शन दिया था। उन्होंने स्वाति को दिलासा दिया कि छानबीन होगी। आतिशी उस वक्त सामने आईं, जब पब्लिक डोमेन में बहुत सारी बातें और सबूत आ चुके थे। उन्होंने उस आधार पर बयान दिया।' बिभव के वकील बोले- आरोप और स्वाति की रिपोर्ट में फर्क
बिभव के दूसरे वकील ऋषिकेश कुमार कहते हैं, ‘स्वाति ने 112 पर फोन किया। पुलिस आई और वो भी थाने गईं। अगर इतनी गंभीर इंजरी होती, जिसका आरोप स्वाति लगा रही हैं तो पुलिस को भी दिखती। इतनी गंभीर चोट को पुलिस अनदेखा कर दे, ये मुमकिन नहीं लगता।’ वे आगे कहते हैं, ‘FIR में सबसे गंभीर धारा-308 है, यानी गैर इरादतन हत्या के प्रयास का मामला। मेडिकल रिपोर्ट में जो चोटें आई हैं, वो इस तरफ इशारा तक नहीं करतीं। वो इतनी गंभीर नहीं थीं। धारा के मुताबिक चोट बहुत गंभीर होनी चाहिए।’ बिभव की रिहाई के लिए आगे क्या रास्ता है
बिभव के केस में अब तक आम आदमी पार्टी की तरफ से 6 से ज्यादा वकील इन्वॉल्व हो चुके हैं। इनमें शामिल एडवोकेट ऋषिकेश कुमार कहते हैं, ‘तीस हजारी कोर्ट में बेल रिजेक्ट हो गई है। अब हम हाईकोर्ट में जल्द बेल की अपील करेंगे।’ हालांकि आम आदमी पार्टी की लीगल सेल के प्रमुख एडवोकेट संजीव नासियार कहते हैं, ‘हमारे पास 40 वकीलों की टीम है। जिसकी जरूरत होगी वो बिभव के केस में इन्वॉल्व होगा।’ कोर्ट की टिप्पणी और मेडिकल रिपोर्ट्स में क्या है
दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने स्वाति के देर से रिपोर्ट लिखवाने की दलील को नहीं माना। बिभव के वकील ने कहा था कि 3 दिन बाद स्वाति का FIR लिखवाना किसी साजिश का नतीजा है। कोर्ट ने कहा- आरोपों और 3 दिन की देरी का कोई लिंक नहीं है। FIR की कॉपी भी अगर ध्यान से देखें तो डिले यानी देरी की जगह नो डिले लिखा है। मेडिकल रिपोर्ट में स्वाति के बाएं पैर की जांघ में 3x2 सेंटीमीटर के आकार की चोट का जिक्र है। वहीं, उनकी दाहिनी आंख के नीचे दाहिने गाल पर 2x2 सेंटीमीटर आकार की एक और चोट थी। हालांकि अभी बिभव कुमार के फोन की फोरेंसिक रिपोर्ट नहीं आई है। पुलिस को शक है कि बिभव कुमार का फोन फॉर्मेट हुआ है। मुंबई में किसी व्यक्ति के साथ उनकी बातचीत को डिलीट किया गया है। पुलिस 3 दिन के लिए बिभव को मुंबई ले गई थी, लेकिन उस विजिट में क्या निकला, पुलिस ने अब तक कोर्ट को नहीं बताया।