मेगा एंपायर- 2 कमरे से शुरू हुई सिक्योरिटी कंपनी SIS:4 देशों में 2.5 लाख से ज्यादा गार्ड, रेवेन्यू 12 हजार करोड़

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मॉल या किसी दफ्तर की बाहर नीले रंग की यूनीफॉर्म पहने सिक्योरिटी गार्ड आपने जरूर देखे होंगे। ये ज्यादातर सिक्योरिटी गार्ड SIS कंपनी के कर्मचारी होते हैं। सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विस कंपनी SIS ने हाल ही में बिहार के दरभंगा जिले में 500 से ज्यादा बेरोजगार युवाओं को नौकरी दी है। कंपनी ने इन लोगों को सिक्योरिटी गार्ड और सुपरवाइजर के पदों पर भर्ती किया है। SIS भारत की सबसे बड़ी सिक्योरिटी सर्विस कंपनी है। इसकी शुरुआत 2 जनवरी 1974 को रिटायर्ड आर्मी मैन के साथ हुई थी। आज SIS कंपनी के 4 देशों में 2.85 लाख गार्ड और कर्मचारी हैं। साथ ही 22 हजार कस्टमर हैं। मेगा एंपायर में आज कहानी 51 साल पुरानी सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विस कंपनी SIS की... 22 साल की उम्र में आरके सिन्हा ने शुरू की कंपनी SIS कंपनी की शुरुआत की कहानी बेहद दिलचस्प है। 22 साल की उम्र में पेशे से पत्रकार रहे रविंद्र किशोर सिन्हा उर्फ आरके सिन्हा ने कंपनी शुरू की। उनका जन्म बिहार के बक्सर जिले में 22 सितंबर 1951 को हुआ था। आरके सिन्हा के पिता पटना में नौकरी करते थे इसलिए उनकी पढ़ाई पटना में ही हुई। पढ़ाई के साथ-साथ आरके सिन्हा 20 साल की उम्र में रिपोर्टिंग करने लगे। पत्रकारिता में आ गए। सरकारी फैसले के खिलाफ लिखे आर्टिकल तो चली गई नौकरी साल 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ गई। आरके सिन्हा ने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘1971 के युद्ध को लेकर उस वक्त की इंदिरा सरकार वामपंथियों के कहने पर फैसला ले रही थीं। मैं इसकी रिपोर्टिंग कर रहा था। मैंने इंदिरा गांधी के खिलाफ लिखना शुरू किया। फैसले की आलोचना करने लगा। एक दिन अखबार के मालिक ने मुझे बुलाया और नौकरी से निकाल दिया। तब मेरी एक महीने की तनख्वाह 230 रुपए थी।’ जेपी की सलाह पर शुरू की सिक्योरिटी कंपनी इसी समय बिहार में इंदिरा सरकार के खिलाफ जेपी मूवमेंट चल रहा था। इस आंदोलन का नेतृत्व जय प्रकाश नारायण कर रहे थे। नौकरी जाने के बाद आरके सिन्हा इस मूवमेंट से जुड़ गए। इसी बीच एक बार वो जयप्रकाश नारायण से मिलने गए। जेपी ने आरके सिन्हा से कहा कि चार लाख आर्मी मैन को भारतीय सेना रिटायर कर रही है। अब उन्हें रोजगार के लिए भटकना पड़ेगा। जेपी ने आरके सिन्हा को सलाह दी कि सभी उद्योगपति तुम्हें जानते हैं। तुम इनके बीच में ब्रिज होने का काम करो। उन उद्योगपतियों को अच्छे कर्मचारी की और इन गरीब नौजवानों को नौकरी की जरूरत है। कुछ दिन बाद आरके सिन्हा के एक दोस्त ने कहा कि एक साइट पर सिक्योरिटी की जरूरत है। आरके सिन्हा ने कुछ रिटायर्ड आर्मी मैन से इस बारे में बात की। जब वो तैयार हुए तो 2 जनवरी 1974 को पटना (बिहार) में 2 कमरे के गैराज से SIS कंपनी की शुरुआत हुई। 10 साल तक वॉलंटियर सिक्योरिटी सर्विस दी आरके सिन्हा ने SIS की नींव तो रख दी थी, लेकिन इसको रजिस्टर नहीं करवाया था। अगले 10 सालों तक SIS वॉलंटियर काम कर रही थी और इससे कंपनी को कोई रेवेन्यू नहीं होता था। कुछ समय बाद कंपनी जहां भी सिक्योरिटी गार्ड प्रोवाइड करवा रही थी, वहां लेबर इंस्पेक्टर आने लगे। कंपनियां परेशान होने लगीं। तब उन कंपनी के मालिकों के कहने पर आरके सिन्हा ने एक फॉर्मल कंपनी खोली। फिर 1985 में इसे प्राइवेट लिमिटेड बना दिया। दूसरी पीढ़ी ने संभाली कमान आरके सिन्हा के बेटे ऋतुराज किशोर सिन्हा 22 साल की उम्र में लंदन से एमबीए करके लौटे। 2002 में ऋतुराज ने SIS कंपनी का काम देखना शुरू किया। ऋतुराज कंपनी को सिक्योरिटी सर्विस के साथ ही अन्य फील्ड में भी आगे बढ़ाना चाहते थे। ऋतुराज ने कंपनी को भारत में कैश लॉजिस्टिक की फील्ड में लाने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने सिक्योरिटी की दुनिया में बेस्ट कंपनी ‘सिक्योरिटास’ के साथ पार्टनरशिप करने का प्रपोजल बनाया। ये प्रपोजल लेकर ऋतुराज 2005 में लंदन पहुंच गए, लेकिन ‘सिक्योरिटास’ के तत्कालीन अध्यक्ष और सीईओ थॉमस बर्गलुंड ने प्रपोजल ठुकरा दिया। ऋतुराज ने इसके बाद भी अकेले ही 2006 में कैश लॉजिस्टिक की फील्ड में SIS की एंट्री करवाई। रिस्क लेकर कंपनी को नई ऊंचाई पर पहुंचाया साल 2008 में सारी दुनिया जहां आर्थिक संकट से जूझ रही थी, उसी समय ऋतुराज ने कंपनी के दूसरे देशों में विस्तार करने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की सिक्योरिटी कंपनी ‘चब ऑस्ट्रेलिया’ को खरीदने की तैयारी करनी शुरू कर दी। ये कंपनी SIS से 7 गुना बड़ी थी। जिसको लेकर ऋतुराज को काफी दिक्कतें आ रही थीं। हालांकि एसबीआई बैंक से मदद मिलने के बाद ऋतुराज ऐसा करने में सफल रहे। उन्होंने यूएस समूह यूनाइटेड टेक्नोलॉजीज कॉर्प से 238 मिलियन डॉलर यानी 2 हजार करोड़ रुपए में ‘चब ऑस्ट्रेलिया’ को खरीदा। 4 देशों में कंपनी की सिक्योरिटी सर्विस SIS भारत में तो सबसे बड़ी सिक्योरिटी सर्विस बन ही गई थी, अब कंपनी ऑस्ट्रेलिया में भी नंबर वन होने जा रही थी। इसी बीच ऋतुराज ने इस विस्तार को और बढ़ाया। ऑस्ट्रेलिया में दो कंपनियां, भारत, सिंगापुर और न्यूजीलैंड में भी कई सिक्योरिटी कंपनियों को खरीद लिया। आज 4 देशों (भारत, सिंगापुर, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में SIS सिक्योरिटी सर्विस प्रोवाइड कर रही है। जिसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया में नंबर 1, न्यूजीलैंड में नंबर 3 के साथ ही सिंगापुर में 5वें नंबर की सिक्योरिटी कंपनी है। रिसर्च-आयुष अग्रवाल ----------------------- अन्य मेगा एंपायर भी पढ़िए... 1.मेगा एंपायर-साइकिल रिपेयर की दुकान से शुरू हुई MG MOTOR:6 बार बिकी, आज 40 हजार करोड़ की कंपनी, 80 देशों में कारोबार दुनिया के सबसे बड़े कार ब्रांड में से एक MG Motors की शुरुआत साइकिल की दुकान से हुई थी। इसकी शुरुआत सिसिल किम्बर ने मोरिस गैराज से 1924 में की थी। आज एमजी मोटर 80 से ज्यादा देशों में कारोबार कर रहा है। पूरी खबर पढ़ें... 2. मेगा एंपायर-कैंडी की शॉप से शुरू हुई चॉकलेट कंपनी हर्शेज:दुकान के लिए घर गिरवी रखा, आज 95 हजार करोड़ रेवेन्यू हर्शे शुरुआत अमेरिका के मिल्टन हर्शे ने की थी, जिन्होंने 12 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी। ये कंपनी आज 85 देशों में कारोबार करती है और सालाना 93 हजार करोड़ से भी ज्यादा का रेवेन्यू जनरेट करती है। पूरी खबर पढ़िए... 3. मेगा एंपायर-2600 रुपए से शुरू हुई थी ZARA:आज 2.32 लाख करोड़ की सेल; 96 देशों में 2 हजार स्टोर्स आजकल ज्यादातर मॉल में कपड़ों का चमकता-दमकता शोरूम जारा जरूर दिखता है। जारा एक स्पैनिश फैशन ब्रांड है। जिसकी खासियत है कि हर 15 दिन में इसके कलेक्शन बदल जाते हैं। यानी जो कपड़े आप जारा के शोरूम में आज देख कर आए हैं, वो अगले 15 दिन में आपको स्टोर पर नहीं मिलेंगे। जबकि दूसरे ब्रांड का लेटेस्ट कलेक्शन लॉन्च होने में कम से कम 6 महीने का समय लगता है। इस वजह से जारा सबसे बड़े फास्ट फैशन ब्रांड में से एक है। पूरी खबर पढ़ें...
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