आजकल ज्यादातर मॉल में कपड़ों का चमकता-दमकता शोरूम जारा जरूर दिखता है। जारा एक स्पैनिश फैशन ब्रांड है। जिसकी खासियत है कि हर 15 दिन में इसके कलेक्शन बदल जाते हैं। यानी जो कपड़े आप जारा के शोरूम में आज देख कर आए हैं, वो अगले 15 दिन में आपको स्टोर पर नहीं मिलेंगे। जबकि दूसरे ब्रांड का लेटेस्ट कलेक्शन लॉन्च होने में कम से कम 6 महीने का समय लगता है। इस वजह से जारा सबसे बड़े फास्ट फैशन ब्रांड में से एक है। मई 2010 में जारा ने भारत में अपना पहला स्टोर दिल्ली में खोला था। 2024 तक भारत के 12 शहरों में जारा के कुल 23 स्टोर खुल चुके हैं। भारत में जारा की सेल्स ग्रोथ 8% बढ़कर 2,769 करोड़ हो गई है। जारा दुनिया के सबसे बड़े फास्ट फैशन ग्रुप में से एक है। मेगा एंपायर में आज कहानी 51 साल पुरानी फास्ट फैशन कंपनी ZARA की… ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक जारा के सीईओ अमानसियो ऑर्टेगा दुनिया के 15वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। अमानसियो ने केवल 2600 रुपए में स्पेन के छोटे से स्टोर से जारा की नींव रखी थी। आज दुनिया के 96 देशों में जारा के 2200 से भी ज्यादा स्टोर्स है। अमानसियो की सबसे अलग बिजनेस स्ट्रेटजी ने जारा को इस मुकाम पर पहुंचाया है। अमानसियो की फास्ट फैशन स्ट्रेटजी
आमतौर पर किसी भी ब्रांड का कलेक्शन साल में तीन बार बदलता है। समर कलेक्शन, विंटर कलेक्शन और स्प्रिंग कलेक्शन। जबकि फैशन इंडस्ट्री में ट्रेंड तेजी से बदलता है। ऐसे में कस्टमर को लेटेस्ट ट्रेंड के कपड़ों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था। अमानसियो ने मार्केट के इस गैप को बारीकी से समझा और डिजाइनर को जल्द से जल्द लेटेस्ट कलेक्शन लॉन्च करने के लिए कहा। जिसके बाद जारा ने हर 15 दिन से 1 महीने के भीतर नया कलेक्शन लॉन्च करना शुरू किया। साथ ही कपड़ों का दाम भी दूसरे बड़े ब्रांड की तुलना में कम रखा। इस एक स्ट्रेटजी ने जारा को फास्ट फैशन ब्रांड बना दिया। आज जहां दूसरे ब्रांड एक साल में लगभग 600 डिजाइन लॉन्च करते हैं, वहीं जारा एक साल में 12 हजार डिजाइन लॉन्च करता है। अलग-अलग देशों के हिसाब से जारा के डिजाइन
जारा के डिजाइनर मार्केट और कस्टमर की डिमांड को ध्यान में रखते हुए कपड़े डिजाइन करते हैं। कपंनी के डिजाइनर और एजेंट सोशल गैदरिंग, यूनिवर्सिटी और क्लब जैसी जगहों पर जाकर लेटेस्ट फैशन ट्रेंड को समझते हैं। हर जगह की डिमांड के हिसाब से कपड़े डिजाइन करते हैं, जैसे- जापान के स्टोर्स के लिए छोटे साइज के कपड़े, यूरोप के लिए लॉन्ग कोट्स और बूट्स। जारा का स्टॉक लिमिटेड
जारा अपने कस्टमर के बीच FOMO यानी 'फीयर ऑफ मिसिंग आउट' बनाता है। इसके लिए वो हर डिजाइन का लिमिटेड स्टॉक बनाता है। नए कलेक्शन को 30 दिन बाद स्टोर से हटा देता है। ताकि कस्टमर जो डिजाइन पसंद करें उसे जल्द से जल्द खरीद लें। इससे सेल भी बढ़ती है और स्टॉक को स्टोर करने का खर्च भी कम हो जाता है। जारा प्राइम लोकेशन और स्टोर के इंटीरियर पर खर्च करती है पैसा
जारा की मार्केटिंग स्ट्रेटजी दूसरे ब्रांड से काफी अलग है। जारा ट्रेडिशनल मार्केटिंग यानी विज्ञापन में ज्यादा पैसे खर्च नहीं करती है। जारा अपने स्टोर के प्राइम लोकेशन और इंटीरियर पर खूब पैसे खर्च करती है। चमकते-दमकते शोरूम के सामने से जब भी कोई गुजरता तो एक बार जरूर स्टोर विजिट करता है। 13 साल की उम्र में नौकरी करने लगे थे अमानसियो
जारा के फाउंडर अमानसियो ऑर्टेगा का जन्म स्पेन के एक छोटे से गांव में हुआ था। पिता रेलवे में नौकरी करते थे। जबकि दूसरों के घरों में जाकर काम करती थीं। 13 साल के अमानसियो एक दिन अपनी मां के साथ किराना स्टोर पर गए थे। मां के पास पैसे नहीं थे इसलिए उधार मांगा। दुकानदार ने मना कर दिया। ये सब देखकर अमानसियो ने पढ़ाई छोड़ दी और स्पेन के ए कोरुना शहर के एक लग्जरी शर्ट मेकर शॉप में नौकरी करने लगे। 14 साल बाद अमानसियो को इसी शॉप का मैनेजर बना दिया गया। यहीं नौकरी करते हुए उनकी मुलाकात रोसालिया मेरा से हुई। जिनसे उन्होंने बाद में शादी कर ली। 1960 की शुरुआत तक अमानसियो कपड़ों के मार्केट को अच्छे से समझ चुके थे। उनका मानना था कि कस्टमर की डिमांड और महंगे ब्रांड के डिजाइन सस्ते मटेरियल से बनाए जाएं तो बिक्री ज्यादा होगी। अमानसियो ने अपने बॉस से एक वर्कशॉप शुरू करने की इजाजत ली। उन्होंने अपनी पत्नी और तीन कजिन के साथ घर पर एक वर्कशॉप बनाई। जहां क्लॉथ, नाइटगाउन और अंडर गारमेंट बनाने शुरू किए। ये कपड़े कम रेट में रिटेलर्स को बेचने लगे। 1963 में अमानसियो ने शुरू की अपनी कंपनी
1963 में अमानसियो ने पत्नी रोसालिया के साथ मिलकर GOA नाम की खुद की कंपनी लॉन्च की, जो कपड़े बनाती थी। 10 साल के अंदर इस कंपनी से 500 कर्मचारी जुड़ गए। अब अमानसियो को ये लगने लगा था कि ये कपड़े रिटेलर के जरिए न बेचकर अपनी शॉप शुरू की जाए ताकि मुनाफा और ज्यादा हो। 1975 में खोला पहला जारा स्टोर
1975 तक अमानसियो और उनकी पत्नी रोसालिया ने स्पेन में जारा का पहला स्टोर खोला। शुरुआत में इसका नाम जोर्बा रखा गया था। जिस गली में ये स्टोर था वहीं जोर्बा नाम का एक बार भी था, इसलिए स्टोर का नाम जोर्बा से जारा कर दिया गया। 1977 में ए कोरुना में जारा की पहली गारमेंट फैक्ट्री शुरू हुई। देखते ही देखते उनका ब्रांड पूरे स्पेन में मशहूर होने लगा। 1983 तक स्पेन में जारा के 9 स्टोर खुल गए थे। 1988 में पहली बार स्पेन से बाहर स्टोर खोला
1985 में अमेंसियो ऑर्टेगा ने Inditex कंपनी की स्थापना करते हुए सभी जारा स्टोर्स को एक नेटवर्क में जोड़ दिया। इसके तीन साल बाद ही 1988 में जारा का स्पेन की सीमाओं से निकलकर पुर्तगाल तक पहुंच गया। इसके बाद न्यूयॉर्क, पेरिस, मैक्सिको जैसे कई और देशों में जारा का विस्तार हुआ। जारा ने टाटा की मदद से इंडिया में पहला स्टोर खोला 2010 का साल आते-आते इंडिया के मेट्रोपोलिटन सिटी में बड़े-बडे इंटरनेशनल फैशन ब्रांड्स की एंट्री हो चुकी थी। मॉल्स खुलने लगे, लेकिन मिडिल क्लास फैमिली की पहुंच से यह दूर था। लोग लोकल मार्केट और ट्रेडिशनली कपड़े ही खरीद रहे थे। साथ ही भारत में इकोनॉमिकली रिवॉल्यूशन भी हो रहा था। लोग नए फैशन की तरफ भी बढ़ना चाह रहे थे। स्टाइलिश दिखना चाह रहे थे। वेस्टर्न चीजों को फॉलो करना चाह रहे थे। टाटा ग्रुप ने लोगों के बदलते माइंडसेट को भांप लिया। कंपनी इंडियन कंज्यूमर के बिहेवियर को बखूबी समझ रही थी। जारा उस वक्त तक इंडिया में नहीं था। टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा जारा को इंडिया में लाना चाह रहे थे। वह सिर्फ जारा को नहीं लाना चाह रहे थे, बल्कि इंडिया के रिटेल मार्केट और फैशन इंडस्ट्री को बदलना चाह रहे थे। टाटा जारा को सिर्फ लग्जरी ब्रांड नहीं, मिडिल क्लास फैमिली तक पहुंचने वाला स्टाइलिश ब्रांड बनाना चाह रही थी। उसके बाद जारा ने अपना पहला स्टोर दिल्ली में 2010 में खोला। उसके बाद उसने मुंबई और बेंगलुरु में स्टोर खोला। आज जारा के इंडिया में 23 स्टोर्स हैं। वहीं दुनिया के 96 देशों में 2200 से ज्यादा स्टोर्स हैं। 2024 में जारा ने इंडिया में करीब 2,769 करोड़ रुपए का बिजनेस किया है। ****** रिसर्च-प्रेरणा सागर ------------------------------------ अन्य मेगा एंपायर भी पढ़िए... 1.मेगा एंपायर-8.5 लाख करोड़ की कंपनी LIC:साइकिल-बैलगाड़ी से जाते थे बीमा एजेंट, आज पाकिस्तान की GDP से डबल संपत्ति एलआईसी साल 1956 से बीमा कर रही है और देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी है। एलआईसी के देश भर में 2 हजार से ज्यादा ऑफिस और 13.5 लाख एजेंट हैं। इस कंपनी का बिजनेस 8.5 लाख करोड़ से ज्यादा का है। पूरी खबर पढ़ें... 2. हैवेल्स का रेवेन्यू 18 हजार करोड़:10 हजार रुपए से शुरुआत; आज 50 देशों में बिजनेस राहुल की नींद खुली, बिस्तर में लेटे-लेटे ही रिमोट से पंखा बंद कर दिया। वॉइस कमांड देकर बाथरूम में लगा गीजर ऑन किया। वो जब घर लौटा, तो स्मार्ट एयर प्यूरीफायर मीटर ने बताया कि एयर क्वालिटी खराब है। राहुल ने तुरंत स्मार्ट प्यूरीफायर ऑन किया। राहुल की जिंदगी में ये इनोवेशन लाने वाली कंपनी का नाम हैवेल्स है। हैवेल्स फास्ट मूविंग इलेक्ट्रिकल गुड्स (FMEG) कंपनी है। पूरी खबर पढ़ें... 3. मुनाफे में चलती कंपनी बेच देते हैं अजय पीरामल:मर्जर किंग के नाम से मशहूर है पीरामल ग्रुप के चेयरमैन अजय गोपीकिशन पीरामल अपने कारोबारी फैसलों के लिए जाने जाते हैं। एक सफल बिजनेसमैन के तौर पर अजय पीरामल ने अपने ग्रुप को बीते 4 दशक में नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। ग्रुप का कारोबार 30 से ज्यादा देशों में है। फोर्ब्स के अनुसार अजय पीरामल की नेटवर्थ 30 हजार करोड़ से अधिक की है। उन्हें मर्जर किंग भी कहा जाता है। पूरी खबर पढ़ें...