मेगा एंपायर- तीन दोस्तों ने शुरू की थी Swiggy:चार साल में बनाया यूनिकॉर्न; 10 साल में 8 हजार करोड़ का कारोबार

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इंडियन फूड डिलीवरी ऐप स्विगी जल्द ही अपना आईपीओ लेकर आ रही है। कंपनी को शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिल गई है। आईपीओ के जरिए कंपनी की लगभग 10 हजार करोड़ जुटाने की योजना है। इससे ठीक पहले अमेरिकी एसेट मैनेजमेंट फर्म ‘बैरन कैटल’ ने स्विगी की मार्केट वैल्यूएशन को करीब 24% बढ़ाकर 1.26 लाख करोड़ कर दिया है। आज मेगा एंपायर में बात फूड डिलीवरी ऐप स्विगी की... बात 2013 की है। दो दोस्त नंदन रेड्डी और श्रीहर्ष मजेटी अपना कोई बिजनेस करना चाहते थे। दोनों ने कूरियर और शिपिंग सर्विस के लिए ‘बंडल’ नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया। जिसका काम कूरियर और शिपिंग मार्केट को ऑर्गेनाइज करना था। यह कंपनी ज्यादा समय तक नहीं चल पाई और एक साल बाद ही इसे बंद करना पड़ा। दोनों ने बिट्स पिलानी से पढ़ाई की थी। वहीं उन्होंने स्टार्टअप के बारे में सोचा था। हालांकि कॉलेज से निकलने के बाद मजेटी ने लगभग 3 साल लंदन में एक नौकरी भी की, लेकिन उनके दिमाग में खुद का बिजनेस करने का प्लान उस वक्त भी चल रहा था। ऐसे में मजेटी ने अपनी जॉब छोड़ दी और देश लौट आए। पहले स्टार्टअप के बंद होने के बाद स्विगी खोला ‘बंडल’ के फ्लॉप होने के बाद भी नंदन और मजेटी ने हार नहीं मानी और कुछ नया शुरू करने का प्लान बनाया। दोनों कुछ नया करने की तलाश में ही थे कि उनकी मुलाकात आईआईटी ग्रेजुएट राहुल जैमिनी से हुई। राहुल ई- कॉमर्स साइट Myntra में काम कर रहे थे। उन्हें नंदन और मजेटी ने अपने स्टार्टअप प्लान के बारे में बताया। राहुल भी उनके साथ जुड़ गए और तीनों फ्रेश आइडिया की तलाश करने लगे। ब्रेनस्ट्रॉमिंग और काफी रिसर्च के बाद तीनों ने देखा कि भारत में फूड डिलीवरी सर्विस बहुत ही अन-ऑर्गनाइज्ड है। उन्हें इस फील्ड में कुछ बेहतर करने का विकल्प दिखा। इस तरह नंदन और मजेटी ने राहुल के साथ मिलकर स्विगी लॉन्च किया। बेंगलुरु से हुई शुरुआत स्विगी की शुरुआत बेंगलुरु के कोरामंगला से हुई थी। फाउंडर्स ने कुछ डिलीवरी पार्टनर और लगभग 25 रेस्टोरेंट से जुड़कर कंपनी शुरू की। उन्होंने ऐसे रेस्टोरेंट को टारगेट किया, जो कस्टमर को क्वालिटी फूड तो दे रहे थे, पर उनके पास होम डिलीवरी की सुविधा नहीं थी। स्विगी ने इन रेस्टोरेंट्स को अपने साथ जोड़कर डिलीवरी करना शुरू किया। उस वक्त स्विगी ऐप पर मौजूद नहीं था। इसलिए लोग उसकी वेबसाइट पर जाकर अपने मनपसंद रेस्टोरेंट को चुनकर फूड ऑर्डर करते थे। स्विगी की सर्विस लोगों को काफी अच्छी लगने लगी और इससे कंपनी को पहचान मिलनी शुरू हो गई। कंपनी ने 2015 के शुरुआती महीनों में खुद का ऐप लॉन्च किया। ऐप की मदद से फूड ऑर्डर करना कस्टमर के लिए आसान हो गया। इस बीच कंपनी ने अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए कस्टमर को काफी ऑफर दिए। जिससे स्विगी का नाम आम लोगों की जुबान पर चढ़ गया। लोग एक दूसरे को स्विगी से खाना ऑर्डर करने की सलाह देने लगे। उस समय फूड डिलीवरी ऐप स्विगी ने लोगों का विश्वास कायम रखा और हर वह कोशिश की जिससे कस्टमर को बेस्ट सर्विस दी जा सके। 3 साल में 20 हजार रेस्टोरेंट्स को जोड़ा अप्रैल 2016 में स्विगी ने लागत कम करने और लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत करने का फैसला किया। कस्टमर की जरूरतों को समझने और कंपनी को बेहतर ढंग से ऑपरेट करने के लिए इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और पर्सनलाइजेशन में इन्वेस्ट किया। दिसंबर 2017 तक स्विगी के साथ 20,000 से ज्यादा रेस्टोरेंट्स जुड़ चुके थे और कंपनी हर महीने 40 लाख रुपए का कारोबार कर रही थी। फूड कैटेगरी का टॉप स्टार्टअप बना स्विगी लॉन्च के दो साल के अंदर ही 2016 में स्विगी भारत का टॉप फूड स्टार्टअप बन गया। फोर्ब्स एशिया ने कंपनी को एक बिलियन से कम वाली सर्वश्रेष्ठ कंपनियों में जगह दी। 2017 में कंपनी को ग्लोबल वेंचर कैपिटल एंड प्राइवेट इक्विटी फर्म ​​​​​​डीएसटी ग्लोबल से 600 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली। 2018 में कंपनी सिंगापुर में भी स्विगी लॉन्च करना चाहती थी, लेकिन वहां की सरकार से इसकी परमिशन नहीं मिली। भारत की सबसे तेज यूनिकॉर्न स्विगी भारत की सबसे तेज यूनिकॉर्न बनने वाली कंपनी है। यूनिकॉर्न तक का सफर तय करने में कंपनी को 4 साल से भी कम समय लगा। 2014 में शुरू हुई कंपनी 2018 तक 10 हजार करोड़ की वैल्यूएशन वाली कंपनी बन गई थी। आज भारत में कुल 67 यूनिकॉर्न हैं। जिसमें स्विगी और ड्रीम-11 टॉप इंडियन यूनिकॉर्न कंपनी में शामिल है। स्विगी का 43% मार्केट शेयर भारतीय फूड डिलीवरी मार्केट में स्विगी का आज 43% मार्केट शेयर है। 2019 में कंपनी ने हर दिन औसतन 14 लाख ऑर्डर डिलीवर किए थे। इस समय स्विगी पूरे भारत में करीब 580 शहरों में ऑपरेट करती है। वहीं, करीब 2 लाख रेस्टोरेंट इसके साथ जुड़े हुए हैं। 2023 में कंपनी का रेवेन्यू 8 हजार करोड़ से ज्यादा रहा था। कोविड में 1000 एम्प्लॉई को निकाला स्विगी ने 2020 में कोविड के दौरान 1000 से ज्यादा एम्प्लॉई को नौकरी से निकाला था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल जनवरी में भी कंपनी ने लगभग 400 एम्प्लॉई को निकाला है। 2023 में स्विगी पहली बार प्रॉफिट में रही थी, इसके बावजूद अपने खर्च को कम करने के लिए कंपनी ने यह फैसला लिया। विवादों से नाता कंपनी का विवादों से गहरा नाता रहा है। कई बार कंपनी अपनी मार्केटिंग की वजह से विवाद में रही है। 2023 की होली में कंपनी की अंडे के विज्ञापन वाले बिलबोर्ड की काफी आलोचना हुई थी। विज्ञापन में बिलबोर्ड पर रंगों के साथ अंडों की फोटो थी और तीन लाइन लिखी थी। इसमें ऑमलेट और सनी साइड अप के आगे ‘सही’ का टिक लगा था। जबकि ‘किसी के सिर पर’ के आगे ‘गलत’ का टिक लगा था। नीचे लिखा था- 'बुरा मत खेलो'। जिसके बाद स्विगी को बायकॉट करने की भी मांग उठने लगी थी। वर्ल्ड कप फाइनल में हर मिनट 188 पिज्जा का ऑर्डर कंपनी ने 2023 के अंत में एक डेटा जारी किया था, जिसमें कई इंटरेस्टिंग फैक्ट्स सामने आई थीं। जैसे-
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