मेरा नाम नेहा सबरवाल है। मैं ग्रेटर नोएडा में रहती हूं। दो महीने पहले मेरा एक वीडियो वायरल हुआ था। मैं और मेरे पति अपने दोस्तों के साथ गुरुग्राम के एक रेस्टोरेंट में पार्टी के लिए गए थे। सारा माहौल अच्छा था। हम सबने खूब एंजॉय किया। डिनर के बाद हमें माउथ फ्रेशनर दिया गया, जैसे हर रेस्टोरेंट में होता है। माउथ फ्रेशनर सफेद सौंफ जैसी दिख रही थी। उसे खाते ही हम सबके मुंह से खून निकलने लगा। ऐसा सिर्फ मेरे ही नहीं, वहां मौजूद चार और लोगों के साथ भी हुआ। वहां मौजूद सारे लोग उस चीज को ड्राई आइस कहने लगे। हम सभी को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। आप कहेंगे कि इस बात को काफी दिन गुजर गए। मैं अब क्यों यह सब बात दोहरा रही हूं। दरअसल मेरे मुंह में अभी भी अल्सर है। मेरे साथ जो दोस्त गए थे उनके गले के अंदर, खाने की नली में अल्सर है। मैं खुद तीन दिन तक आईसीयू में रही। मेरे इलाज में 4.5 लाख रुपए खर्च हुए। 3 मार्च 2024 की तारीख थी। मेरे दोस्त मानिक का जन्मदिन था। तय हुआ कि गुड़गांव के सफायर मॉल के भीतर एक रेस्टोरेंट कम बार में पार्टी होगी। कुल छह लोग उस पार्टी में मौजूद थे। रात तकरीबन 9:30 बजे हम लोग रेस्टोरेंट में पहुंचे और फिर दो घंटे तक बातचीत के साथ डिनर चला। रात के 11:30 बजने को थे। मुझे याद है रेस्टोरेंट लगभग खाली हो चुका था और हम लोग शायद उनके लास्ट कस्टमर्स थे। सब अच्छे मूड में थे, वाइब्स अच्छी थी। पेमेंट के बाद हम लोग सेल्फी वगैरह लेने लगे। ये सब चल ही रहा था तब तक एक वेट्रेस आई और उसने हमें माउथ फ्रेशनर दिया। खाने के बाद पता चला कि वह ड्राई आइस था। इस मामले की जांच अब तक पूरी नहीं हुई है। सैंपल लैब में गया है, लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। खैर, मेरे पति के अलावा चार लोगों ने उसे ‘माउथ फ्रेशनर’ समझकर खा लिया था। उसे मुंह में डालने के तीस सेकेंड के भीतर ही ऐसा लगा कि मेरा जबड़ा जकड़ रहा है। मैंने बाकियों का चेहरा देखा और फिर हमारे मुंह से खून निकलने लगा। हम सब इतना घबरा गए कि चिल्लाने लगे। फ्लोर पर मुंह खोलकर अजीब सी आवाजें निकालने लगे। दरअसल, हमें खुद नहीं समझ आ रहा था कि क्या करना है। मैं भागकर रिसेप्शन पर गई और नॉर्मल बर्फ मांगा। मेरे मुंह के भीतर से एकदम आग निकल रही थी। मैंने बर्फ भीतर रखी ताकि कुछ राहत मिले, लेकिन खून बंद होने का नाम ही नहीं ले रहा था। इन सब के बीच मेरे पति ने बेटी को संभाल रखा था। तकलीफ से चिल्लाते-चिल्लाते अचानक मुझे बेटी को देखकर रोना आने लगा। मुझे बस इस बात का डर लग रहा था कि मेरी आवाज चली जाएगी। बेटी एक साल की है और मैं इसके साथ ढंग से खेल भी नहीं पाई हूं। मुझे आज भी अपनी हालत से डर लग रहा है। सोचने वाली बात ये है कि रेस्टोरेंट का स्टाफ क्या कर रहा था? आपको आश्चर्य होगा कि मैनेजर को छोड़कर वेटर्स समेत सारा स्टाफ वहां से गायब हो गया था। काउंटर पर सिर्फ मैनेजर था जो थोड़ी देर वहां खड़ा रहा। मेरे पति उससे पूछते रहे कि क्या खिलाया है, हमें बताओ। वो चुप रहा और मौका पाते ही वह भी किचन में चला गया। हम लोग गुस्से और दर्द में नीचे उतरे। पति ने बेटी को गोद में बिठाए हुए ही गाड़ी चलाई और सबको हॉस्पिटल छोड़ा। उन्होंने रेस्टोरेंट से टिश्यू पेपर में थोड़ा-सा वह केमिकल क्रिस्टल भी ले लिया था। वहां इमरजेंसी में जो डॉक्टर बैठी थीं, उन्होंने उसे देखते ही कहा कि ये तो ड्राई आइस है। हमारा ध्यान उस वक्त भी डॉक्टर की बात पर नहीं गया। ‘ड्राई आइस’ सुनने पर भी ऐसा नहीं लगा कि यह जानलेवा है। हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बताया कि पूरे मुंह की हालत खराब हो चुकी है। मेरी आवाज तक जा चुकी थी। कुछ जांचें लिखीं और हम चारों को एडमिट कर लिया। मैं तीन दिन आईसीयू में थी। आज भी चूंकि आराम नहीं है इसलिए हर 15 दिन पर मुंह के भीतर के अल्सर के ठीक होने की प्रोग्रेस रिपोर्ट बनती है। हजारों खर्च करने के बाद भी पता नहीं कब तक मुझे आराम मिलेगा। आपको बताऊं कि उस रेस्टोरेंट के मालिक ने आज तक हमसे पब्लिकली माफी नहीं मांगी। मुझे तो लगता है कि उसे इसका गिल्ट ही नहीं। मैंने मुकदमा किया, पुलिस के चक्कर काटे, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। कुछ लोग मुझे कहते हैं कि तुम्हें उस रेस्टोरेंट ओनर को सबक सिखाना चाहिए। कुछ कहते हैं आराम मिल जाए सिर्फ इस बात पर फोकस करो, मुकदमे के चक्कर में न पड़ो। मैं इंसाफ मांगकर रहूंगी। मेरे अंदर रेस्टोरेंट के खिलाफ लड़ाई लड़ने का आत्मविश्वास परिवार से आया है। घर में कई बड़े अधिकारी रहे हैं। कुछ लोग पुलिस में रहे हैं और फिर मैं भी एक मल्टीनेशनल कंपनी में दस साल से काम करती हूं। दुनिया भर के क्लाइंट्स के साथ डील करती हूं। मेरा बचपन प्रिविलेज्ड था। हरियाणा के यमुना नगर की रहने वाली हूं। 2009 में मां की डेथ हुई तब मैं हरियाणा के कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर रही थी। मेरी और अंकित की लव मैरिज हुई है। शादी से पहले मैं गुरुग्राम में ही रहती थी। मेरे सारे दोस्त अभी भी उधर ही हैं। इसी वजह से डिनर पार्टी के लिए उस दिन सब गुरुग्राम में इकट्ठा हुए थे। जो भी घटना मेरे साथ हुई उससे जुड़ा एक और किस्सा सुनाती हूं। घटना वाले दिन मेरे पति ने सबका वीडियो बनाया था। सोशल मीडिया पर एक रात में सब कुछ वायरल हो जाता है। हमारा भी वीडियो वायरल हुआ। जब तक हॉस्पिटल में रही, जाहिर सी बात है मैंने सोशल मीडिया नहीं देखा। कुछ दिनों के बाद जब मैंने मोबाइल देखा तो हर तरफ मेरा ही वीडियो नजर आया। मैंने कमेंट्स पढ़ने शुरू किए तो मेरी तकलीफ मानसिक तौर पर बढ़ गई। कमेंट में किसी ने मुझे मोटी कहा, किसी ने लिखा- बाहर खाने ही क्यों गई थी, घर पर तो बनता नहीं तुम लोगों से खाना, अब भुगतो। एक व्यक्ति ने तो सारी सीमा पार कर दी थी। उसने लिखा- यह मेरी वाइफ है, मैंने ही उसका वीडियो बनाया था। आप बताए ये किस किस्म की बातें हैं? क्या कूल साउंड करने के लिए कोई भी सोशल मीडिया पर कुछ भी लिख सकता है? बाद में पता चला कि ऐसा लोग अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए करते हैं। आप सोचिए किस दुनिया में जी रहे हैं हम। जहां लोगों को मुझे ट्रोल करने में मजा आ रहा है। रेस्टोरेंट में घटी घटना पर किसी के पास कोई ओपिनियन नहीं है। घटना के बाद भी वो रेस्टोरेंट लगातार चलता रहा। पुलिस में लगातार शिकायत करने के बाद उसका लाइसेंस अब जाकर रद्द हुआ है। नेहा ने अपने जज्बात शाश्वत से साझा किए..