पश्चिम बंगाल का बशीरहाट। इसकी सरहद बांग्लादेश से सटी है। चुनाव में यहां अवैध घुसपैठ ही सबसे बड़ा मुद्दा होता था। नॉर्थ 24 परगना जिले के छोटे से गांव संदेशखाली ने बशीरहाट सीट की कहानी ही बदल दी। गांव की महिलाओं ने TMC नेता शेख शाहजहां और उसके लोगों पर पार्टी ऑफिस में गैंगरेप करने का आरोप लगाया था। इसके बाद BJP ने संदेशखाली को चुनावी मुद्दा बनाने में पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन बशीरहाट सीट पर ही इसका असर नहीं दिखता। यहां की महिलाएं ही नहीं जानतीं कि संदेशखाली में क्या हुआ था। पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटों पर 7 फेज में 19 अप्रैल से 1 जून तक चुनाव हैं। बशीरहाट सीट पर आखिरी फेज में वोटिंग होगी। हालांकि BJP संदेशखाली के जरिए पूरे बंगाल में अपने पक्ष में माहौल बना रही है। इसके बावजूद उसके लिए बशीरहाट सीट जीत पाना मुश्किल है। इसकी 4 वजहें दिखाई देती हैं… 1. BJP ने संदेशखाली की विक्टिम रेखा पात्रा को टिकट दिया है, उन्हें राजनीति का बिल्कुल अनुभव नहीं है। 2.TMC ने विधायक हाजी नुरुल इस्लाम को कैंडिडेट बनाया है। वे 2009 से 2014 तक बशीरहाट से सांसद रहे हैं। 3. बशीरहाट में मुस्लिम आबादी करीब 45% है और हाजी नुरुल इस्लाम की गिनती TMC के बड़े मुस्लिम चेहरों में होती है। 4. 2019 में बशीरहाट सीट TMC ने ही जीती थी, तब नुसरत ने BJP कैंडिडेट सायंतन बसु को हराया था। एक्सपर्ट मानते हैं कि ST बहुल आबादी वाले संदेशखाली के बहाने BJP ने कास्ट पॉलिटिक्स शुरू की है, जो पश्चिम बंगाल के लिए नई बात है। BJP का फोकस प्रदेश की SC-ST आबादी पर है और संदेशखाली के जरिए वो इसी को साधने में जुटी है। TMC लगातार 3 बार से यहां चुनाव जीत रही है। TMC से पहले इस सीट पर कम्युनिस्ट पार्टी का कब्जा था। लिहाजा, वो BJP और TMC की लड़ाई में अपना फायदा देख रही है। जानिए बशीरहाट इतनी अहम सीट क्यों बन गई है- बशीरहाट में विधानसभा की 7 सीटें, इनमें तीन SC-ST के लिए रिजर्व
बशीरहाट लोकसभा सीट में 7 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें मिनाखां और हिंगलगंज SC आरक्षित और संदेशखाली ST आरक्षित हैं। बदुरिया, हरोआ, बशीरहाट नॉर्थ और बशीरहाट साउथ सामान्य सीटें हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में बशीरहाट की सातों सीटों पर BJP का वोट शेयर 28.6% था। TMC को यहां 53.7% वोट मिले थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP का वोट शेयर 30.3% और TMC का 54.9% था। BJP: संदेशखाली से बंगाल के SC-ST वोटर पर नजर
संदेशखाली के जरिए BJP मिनाखां, हिंगलगंज और संदेशखाली के SC-ST वोट को अपनी तरफ करना चाहती है। पश्चिम बंगाल में PM मोदी अब तक कूचबिहार और जलपाईगुड़ी में रैली कर चुके हैं। ये दोनों SC आरक्षित सीटें हैं। 2019 में यहां से BJP के निसिथ प्रमाणिक और जयंत कुमार रॉय चुनाव जीते थे। संदेशखाली का पूरा आंदोलन SC और ST महिलाओं की लीडरशिप में आगे बढ़ा। BJP ने रणनीति के मुताबिक, रेखा पात्रा को चुनाव में इसका चेहरा बनाया। रेखा पात्रा अनुसूचित जाति के बागड़ी समुदाय से आती हैं। उनके जरिए BJP पश्चिम बंगाल में जातीय समीकरण और ध्रुवीकरण की राजनीति पर आगे बढ़ना चाहती है। रेखा चुनाव प्रचार के दौरान कहती भी हैं कि लोगों को अपनी जाति की बेटी को वोट देना चाहिए। BJP का टारगेट हरोआ और मिनाखां से 2 लाख, संदेशखाली से 1.40 लाख और हिंगलगंज से 1.20 लाख वोटरों को अपनी तरफ लाना है। BJP प्रचार के जरिए वोटर्स में जमीन जाने का डर पैदा करने की कोशिश कर रही है। उसका कहना है कि अगर SC और ST कम्युनिटी के लोगों ने BJP को वोट नहीं दिया तो उनकी जमीन भी संदेशखाली की तरह हड़प ली जाएगी। TMC: ममता की योजनाओं के भरोसे जीत बरकरार रखने की कोशिश
बशीरहाट सीट से TMC ने फिर हाजी नुरुल इस्लाम पर भरोसा जताया है। वे 2009 में TMC के टिकट पर बशीरहाट से सांसद रह चुके हैं। अभी हरुआ विधानसभा सीट से विधायक हैं। नुरुल इस्लाम जाना-पहचाना चेहरा हैं। इसका उन्हें फायदा मिल सकता है। हालांकि हाजी नुरुल 2010 के देगंगा दंगों के मुख्य आरोपी भी हैं। उन पर आरोप है कि ये दंगे दुर्गा पूजा में अड़ंगा डालने के लिए करवाए गए थे। TMC नेता और कार्यकर्ता गांव-गांव तक जाकर लोगों को संदेशखाली के बारे में समझा रहे हैं। पार्टी उम्मीदवार हाजी नुरुल इस्लाम बताते हैं, 'जब तक ममता बनर्जी हैं, किसी को CAA से डरने की जरूरत नहीं है। संदेशखाली BJP की सोची-समझी साजिश है। हम खुद कहते हैं अगर जांच में किसी भी महिला के साथ गलत होना पाया गया तो मैं खुद उस शख्स के खिलाफ एक्शन लूंगा।’ नुरुल आगे कहते हैं, ‘ TMC का कैंपेन डेवलपमेंट और ममता बनर्जी की लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री जैसी योजनाओं पर आधारित है, जिसका फायदा हर SC और ST व्यक्ति को मिल रहा है।' CPI (M): खोई जमीन वापस पाने की कोशिश, कब्जा और रंगदारी मुद्दा
बशीरहाट में CPI (M) ने निरापद सरदार को टिकट दिया है। उन्हें भी हाजी नुरुल इस्लाम की तरह लंबा राजनीतिक अनुभव है। वे 2009-2016 तक संदेशखाली सीट पर विधायक रहे। जमीन कब्जा और जबरन वसूली उनके सबसे बड़े मुद्दे हैं। निरापद सरदार कहते हैं, 'संदेशखाली में जो हो रहा है, वो बड़ी बात नहीं है। TMC के पावर में आने के बाद से गरीबों पर अत्याचार बढ़े हैं। मैं विधायक था, तभी से जमीन विवाद और महिलाओं के मुद्दे उठाता रहा हूं, लेकिन अफसोस कोई सुनवाई नहीं होती।’ वे आगे कहते हैं, ‘हम पर कई बार TMC के गुंडों के खिलाफ कुछ न बोलने का दबाव बनाया गया है। ये गुंडे मनरेगा का पैसा रख लेते हैं। वसूली करके अमीर बन रहे हैं। महिलाओं को पार्टी ऑफिस बुलाकर उनका उत्पीड़न किया जाता था। बशीरहाट में BJP ने कैसे पैर जमाने शुरू किए?
बशीरहाट लोकसभा सीट पर SC-ST वोटरों की अच्छी-खासी आबादी है। इसलिए BJP ने यहां अपना संगठन मजबूत करना शुरू कर दिया। डॉ. अर्चना मजूमदार BJP की बशीरहाट इंचार्ज हैं। संदेशखाली आंदोलन खड़ा करने में उनकी अहम भूमिका रही है। अर्चना कहती हैं, ‘पश्चिम बंगाल में ताकतवर लीडर गरीब और आम जनता की जमीन हड़पते हैं। पार्टी स्टेट प्रेसिडेंट शुभेंदु अधिकारी ने 2021 में मुझे बशीरहाट लोकसभा सीट की जिम्मेदारी सौंपी थी। मैंने संदेशखाली में देखा कि लोगों की जमीन पर मछली पालन किया जा रहा है। महिलाओं के पति और भाइयों को डराया जाता था। गांवों को खाली करा दिया गया।’ वे आगे कहती हैं, ‘TMC के गुंडे औरतों को साथ ले जाते थे। 2-3 दिन तक पार्टी ऑफिस में रखते और उनके साथ गलत हरकतें करते थे। महिलाएं वापस आकर थाने में FIR लिखवाने जातीं तो उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी जाती थी। ये सब कई साल से चला आ रहा था। 2021 में चुनाव के बाद हुई हिंसा में रेप की 16 FIR दर्ज हुईं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।' महिलाओं को एक साथ जोड़ने के लिए अर्चना ने लॉयर प्रियंका टिबरेवाल के साथ कैंप लगाए। इसके बाद प्रियंका ने कोलकाता हाईकोर्ट में PIL भी दाखिल की थी। TMC नेता कुछ और ही कहानी बता रहे हैं…
सुयक्त दास संदेशखाली में रहते हैं और TMC से जुड़े हैं। उन्होंने शेख शाहजहां के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व भी किया। सुयक्त बताते हैं कि उन्होंने शेख शाहजहां और उसके गुंडों के जबरदस्ती जमीन हथियाने को लेकर आंदोलन शुरू किया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद BJP के लोगों ने आंदोलन को पॉलिटिकल बना दिया। दास बताते हैं, 'हमने शेख शाहजहां, शिबू हाजरा और उत्तम सरदार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। हमारी लड़ाई तीन मांगों को लेकर थी। पहली जमीन की लूट रुके, दूसरी लोगों से अत्याचार और मारपीट बंद हो और तीसरी गुंडाराज से आजादी मिले।’ ‘ये आंदोलन किसी पार्टी के बैनर तले नहीं हुआ था। इसे पॉलिटिकल मूवमेंट बनाने वाली BJP है। वो अपना एजेंडा लेकर आई है। आंदोलन की वजह से 8 फरवरी को मुझे दो साथियों के साथ अरेस्ट कर लिया गया। 15 फरवरी को बेल लेकर हम बाहर आए, तब तक मामला ही बदल चुका था।' क्या संदेशखाली बशीरहाट के लोगों के लिए मुद्दा है?
बशीरहाट के लोग संदेशखाली के मुद्दे से कितना प्रभावित हैं और चुनाव में इसका कितना फर्क पड़ने वाला है, ये जानने के लिए हम नदी पार कर संदेशखाली के उस टापू पर पहुंचे जहां से आंदोलन शुरू हुआ था। यहां हमें शत्रु सिंह मिले। रेखा पात्रा उनके गांव की हैं, इसलिए वे BJP का सपोर्ट कर रहे हैं। शत्रु सिंह कहते हैं, 'शेख शाहजहां ने सभी को परेशान कर रखा था। लोग उसके खिलाफ आंदोलन कर रहे थे, उसी दौरान मेरे पिता का देहांत हुआ था। उनकी छठी का श्राद्ध हो रहा था। तभी उसके लोग आए और हमें मारने लगे। मेरी मां के सिर पर चोट आई।' संदेशखाली में ही हिंदू बस्ती में सीमा सिंह मिली। सीमा शेख शाहजहां के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल थीं। हालांकि इसके बाद से उनके खाते में लक्ष्मी भंडार का पैसा आना बंद हो गया। सीमा कहती हैं, 'शेख शाहजहां और शीबू हाजरा ने मिलकर गांव के लोगों की जमीन छीन ली।’ ‘शेख शाहजहां देर रात तक मीटिंग करता था, जिसमें वो औरतों को भी बुलाता था। मुझे भी जाना पड़ता था। शेख और उसके गुंडे लड़कियों के साथ गलत हरकतें करते थे। TMC के लोग हमारी कोई शिकायत और बात नहीं सुनते थे। हम इस बार BJP को ही समर्थन देंगे।' संदेशखाली में मुसलमानों का अलग रुख
संदेशखाली में ध्रुवीकरण के माहौल के बीच मुसलमानों ने खुद को अलग कर लिया है। हमने रेखा पात्रा के घर के पास रहने वाले चीना गाजी और बाकी के 10 परिवारों से बात की। 65 साल के चीना गाजी कहते हैं, 'हमें CAA का डर दिखाया जा रहा है। हमें बांग्लादेशी बोलते हैं। मैं पिछले 25 साल से यहां रह रहा हूं। शेख शाहजहां के खिलाफ आंदोलन हुआ है, तब से हम हिंदू पाड़ा की तरफ नहीं जाते। वे अपने लोग थे, लेकिन अब हमें बांग्लादेशी की तरह देखते हैं। ऐसा माहौल पहले नहीं था।' रेखा पात्रा के इलाके में रहने वाली मोमिना गाजी कहती हैं, ‘मैं भी शेख शाहजहां और उसके लोगों के खिलाफ आंदोलन में गई थीं। उत्तम सरदार और शीबू हाजरा ने यहां के लोगों को परेशान कर दिया है।’ हमने उनसे पूछा कि कुछ महिलाएं सामने निकलकर आई हैं कि शेख शाहजहां के लोग उनसे बदसलूकी करते हैं। इस पर मोमीना कहती हैं, ‘इसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता। अब हमने उनकी तरफ जाना भी छोड़ दिया है।' आस-पास के लोग संदेशखाली के बारे में नहीं जानते, CAA का ज्यादा डर
पश्चिम बंगाल के चुनाव में BJP संदेशखाली को महिला अस्मिता से जोड़कर देख रही है। बशीरहाट इसीलिए चर्चित सीट बनी हुई है, लेकिन संदेशखाली के बाहर बशीरहाट के बाकी हिस्सों में लोग इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते। न ही उनके लिए ये चुनावी मुद्दा है। हिंगलगंज में महिलाएं नहीं जानतीं कि संदेशखाली में क्या हुआ
संदेशखाली से हिंगलगंज की तरफ जाते हुए हमें महिलाओं का एक ग्रुप दिखा। इसी में शामिल सरस्वती सरदार कहती हैं, 'संदेशखाली के बारे में बस दूसरी महिलाओं से सुना है। वहां शेख शाहजहां की गिरफ्तारी हुई और इससे ज्यादा नहीं पता।’ ‘हमारे गांव में पहले से काफी सुधार है। ममता सरकार की योजनाओं का हमें फायदा मिल रहा है। अब हम अपने बच्चों को भी पढ़ा पा रहे हैं। राम मंदिर बनवाया, अच्छी बात है, लेकिन फिर CAA भी ले आए। सरकार ऐसी होनी चाहिए, जो सबको साथ लेकर चले।’ संदेशखाली के पास हरोआ में रहने वाली सरस्वती कहती हैं, 'मोदी सरकार संदेशखाली की घटना को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बता रही है। मैं संदेशखाली के बारे में जो भी जानती हूं, सब टीवी पर देखा है। संदेशखाली में शेख शाहजहां गिरफ्तार हुआ है, ये नहीं पता कि क्यों हुआ है। यहीं की सतरूपा की अपनी अलग परेशानियां हैं। वो आगे कहती हैं, 'हमारे गांव में सड़क आ गई, लेकिन पानी की समस्या खत्म नहीं हुई है। 2020 में आमफन तूफान ने तबाही मचाई थी, तब उसमें मेरा घर भी टूट गया था। घर के लिए कई बार मांग की, लेकिन अब तक पूरी नहीं हुई।' हरोआ में रहने वाले अजीउल गाजी CAA से डरे हुए हैं। कहते हैं, ‘मेरे पास TMC को वोट देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी। हम बांग्लादेशी हैं और बाहर से आए हैं। वे लोग हिंदू और मुसलमानों में दंगा कराते हैं।’ ‘ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी CAA-NRC नहीं आने देंगे। BJP बशीरहाट को बांटने पर तुली हुई है। वे चाहते हैं बशीरहाट बांग्लादेश के पास चला जाए। TMC के अलावा मुसलमानों के पास और कोई विकल्प नहीं है।’ अजीउल गाजी आगे कहते हैं, ‘रही बात संदेशखाली में हुई घटना की, तो BJP को तिल का ताड़ बनाने की आदत है। मीडिया ने इसे और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।' पलायन और जमीन सबसे बड़े मुद्दे
काम की तलाश में बशीरहाट से 2000 से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। चुनाव तक इनके लौटने की उम्मीद भी नहीं है। संदेशखाली में जमीन वापसी के लिए आंदोलन कर रही एक्टिविस्ट अनुराधा कहती हैं, 'संदेशखाली बशीरहाट सीट के लिए बड़ा मुद्दा है। इसे अलग तरीके से देखना होगा। संदेशखाली में मुद्दा जमीन हड़पने, मजदूरी के पैसे न देने और रोजगार न होने से पलायन बढ़ने का है।’ ‘संदेशखाली में महिलाओं का मुद्दा BJP और सोशल मीडिया का खड़ा किया हुआ है। यहां असली लड़ाई जमीन की है, जिसके लिए लोगों ने आंदोलन किया। संदेशखाली में मनरेगा से ज्यादा काम खेती से मिलता था। अब यहां रोजगार खत्म हो गया है। एक एकड़ जमीन पर खेती हाेने से 30 से 35 लोगों को रोजगार मिलता था।’ अनुराधा आगे कहती हैं, ’संदेशखाली में 100 एकड़ से भी ज्यादा खेती की जमीन हड़पकर जबरन मछली पालन के लिए तालाब बना दिए गए हैं। खारे पानी की वजह से जमीन बंजर हो गई है। 3000 से ज्यादा लोगों का रोजगार खत्म हो गया। इतने ही लोग पलायन कर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और हैदराबाद चले गए। बशीरहाट से लोग पलायन नहीं करते थे क्योंकि खेती से लोगों को रोजगार मिल जाता था। अब लोग काम के लिए पलायन कर रहे हैं।' रेखा पात्रा के चुनाव लड़ने को लेकर अनुराधा कहती हैं, 'रेखा पात्रा को टिकट देने से BJP को जरूर फायदा होगा क्योंकि लोगों में उसके लिए सहानुभूति है। हालांकि महिलाएं ममता बनर्जी से ज्यादा कनेक्टेड हैं। ज्यादातर महिला वोट ममता दीदी को ही जाएंगे। कुछ SC वोट का फायदा जरूर BJP को हो सकता है।' एक्सपर्ट बोले: बशीरहाट में सिर्फ विनिंग मार्जिन कम होगा
पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुमन भट्टाचार्य कहते हैं, 'रेखा पात्रा अनुसूचित जाति के बागड़ी समुदाय से आती हैं। दास, राजबंशी, खान, मंडल, प्रमाणिक, सरदार और पात्रा SC समुदाय से हैं। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में बागड़ी समाज की सबसे ज्यादा आबादी रहती है। संदेशखाली SC वोटर को एक करने की कोशिश का अगला कदम है। इससे पहले BJP ने अनंत राय महाराज को राज्यसभा का टिकट दिया था। वे राजबंशियों के सम्मानित नेता हैं और हमेशा से उनकी राजनीति कूचबिहार को अलग राज्य बनाने के इर्द-गिर्द रही है।' सुमन आगे कहते हैं, 'ममता बनर्जी के पास मुस्लिम वोट बैंक के अलावा महिलाओं के वोट हैं। महिला वोटर लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं से खुश हैं। BJP संदेशखाली के जरिए सीधे इस वोट बैंक को काटने की कोशिश कर रही है। ये पैंतरा सिर्फ SC और ST सीट पर चलेगा।' सीनियर जर्नलिस्ट प्रभाकर मणि तिवारी कहते हैं, 'BJP संदेशखाली के मुद्दे को आक्रामक होकर भुनाने की कोशिश कर रही है। बशीरहाट अल्पसंख्यक बहुल सीट है। उसमें संदेशखाली समेत 7 विधानसभा सीटें हैं।' प्रभाकर आगे कहते हैं, 'सिर्फ इतना हो सकता है कि TMC और BJP के बीच विनिंग मार्जिन कम हो जाए।' ................................................... स्टोरी में सहयोग: गौरव शर्मा, भास्कर फेलो
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