ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 12 जनवरी, 2026 को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने नए विधानसभा भवन का शिलान्यास किया। नई बिल्डिंग बनने से विधानसभा और लोक सेवा भवन यानी सचिवालय एक जगह हो जाएंगे। 71 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस प्रोजेक्ट की लागत 3,623 करोड़ रुपए है। ये एरिया दिल्ली के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की तरह बनाया जाएगा। सरकार का दावा है कि भविष्य में परिसीमन के बाद विधायकों की संख्या बढ़ेगी, इसलिए नई बिल्डिंग अगले 50 से 100 साल के लिए तैयार की जा रही है। ओडिशा में अभी 147 विधायक हैं, लेकिन नई बिल्डिंग में 300 विधायकों के बैठने की जगह होगी। हालांकि, विपक्षी बीजू जनता दल इसे गैरजरूरी प्रोजेक्ट बता रहा है। नए विधानसभा भवन की जरूरत क्यों पड़ी
इसके पीछे सरकार की दलील है कि मौजूदा विधानसभा और सचिवालय भवन 70 साल से ज्यादा पुराने हो गए हैं। इनमें दिक्कतें भी आने लगी हैं। बिजली के तार खराब हो गए हैं, पानी के पाइप लीक होते हैं, बड़ी बात ये कि बिल्डिंग सुरक्षित नहीं हैं और इनमें बहुत कम जगह है। अगर परिसीमन के बाद विधायकों की संख्या बढ़ेगी तो बैठने की जगह नहीं बचेगी। इसके अलावा विभाग अलग-अलग बिल्डिंग में बंटे हैं, इससे काम में देरी होती है। नई बिल्डिंग बनने के बाद पुराने विधानसभा भवन को तोड़ा नहीं जाएगा। इसे म्यूजियम बनाया जा सकता है या ये भविष्य में विधान परिषद के लिए इस्तेमाल होगा। नई बिल्डिंग का काम दो फेज में होगा। पहले सचिवालय और फिर विधानसभा भवन बनेगा। इसका काम 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है। शिलान्यास के वक्त मुख्यमंत्री माझी ने कहा, ‘परिसीमन के बाद विधायकों की संख्या 147 से बढ़कर 200 तक हो सकती है। इसलिए हम 300 सीटों वाला नया विधानसभा भवन बना रहे हैं। यह भविष्य की जरूरतों के लिए है।’ आदिवासी इलाकों में सीटें बढ़ेंगी, यहां BJP मजबूत
ओडिशा में साल 1971 के बाद से 147 विधानसभा सीटें हैं। परिसीमन होने पर ये बढ़कर 190 से 200 हो सकती हैं। नई सीटें ज्यादातर आदिवासी इलाकों यानी सुंदरगढ़, मयूरभंज, कोरापुट में आएंगी। यहां BJP मजबूत हो रही है। हालांकि, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा है कि परिसीमन संविधान के हिसाब से आबादी के आधार पर होता है। विधानसभा की पुरानी बिल्डिंग अब ठीक नहीं है। नई बिल्डिंग सुरक्षित और सुंदर तो होगी ही, इससे काम भी तेज होगा। हम चाहते हैं कि विधायक और अधिकारी एक जगह काम करें, ताकि कानून बनाने और लागू करने में आसानी हो। BJD प्रवक्ता बोले- सरकार विधानसभा नहीं, अच्छे हॉस्पिटल बनाए
विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल यानी BJD आरोप लगा रही है कि 300 सीटों वाला विधानसभा भवन बनाना भविष्य की तैयारी नहीं, बल्कि आदिवासी वोटों के लिए राजनीतिक चाल है। पार्टी के एक नेता कहते हैं, ‘यह सिर्फ इमारत नहीं, 2029 चुनाव से पहले सत्ता बदलने का तरीका है।’ दैनिक भास्कर ने इन आरोपों पर BJD के प्रवक्ता लेनिन मोहंती से बात की। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: सरकार कह रही है कि विधानसभा की नई बिल्डिंग से फायदा होगा। आपको क्या लगता है, यह प्रोजेक्ट वाकई जरूरी है?
जवाब: पहले समझना जरूरी है कि ओडिशा को इससे क्या फायदा होगा। इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि यह प्रोजेक्ट बजट के दायरे में है या नहीं। अचानक 3,623 करोड़ रुपए की घोषणा कर दी। इसकी कितनी जरूरत है, इस पर मंथन होना चाहिए था। आम लोग जिन मुद्दों पर बात कर रहे हैं, उन पर सरकार ध्यान नहीं दे रही। सरकार ने किसानों से वादा किया था कि 3100 रुपए में धान की खरीद होगी। ये अब तक पूरा नहीं हुआ। SCB मेडिकल कॉलेज को वर्ल्ड-क्लास बनाने का वादा भी अधूरा है। पहले से चल रहे कई अहम प्रोजेक्ट लगभग ठप पड़े हैं। पिछले 19 महीनों में सरकार ने करीब 91 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया है। इसमें बड़ा हिस्सा मार्केट से लिया है। ऐसे वक्त में, जब बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं, अचानक एक भव्य इमारत बनाना क्यों जरूरी है। सवाल: कानून मंत्री कह रहे हैं कि मौजूदा विधानसभा भवन पुराना हो गया है। भविष्य में सीटें बढ़कर 300 हो सकती हैं, तो क्या नई बिल्डिंग जरूरी नहीं होगी?
जवाब: कानून मंत्री ने कैसे तय कर लिया कि सीटें 300 हो जाएंगी। यह घोषणा करने का अधिकार उन्हें किसने दिया। उन्हें कैसे पता कि 300 सीटें होंगी। अब तक जनगणना ही पूरी नहीं हुई है। जनगणना पूरी होने के बाद परिसीमन आयोग बैठेगा। फिर संसद में चर्चा होगी, तब तय होगा कि सीटें बढ़ेंगी या नहीं। बिना प्रक्रिया पूरी हुए अनुमान लगाकर बयान देना ठीक नहीं है। ये भ्रम फैलाने जैसा है। सवाल: BJD 24 साल तक सरकार में रही। तब नए विधानसभा भवन के बारे में क्यों नहीं सोचा गया?
जवाब: हमें वर्ल्ड क्लास हॉस्पिटल चाहिए या सिर्फ नाम के लिए बिल्डिंग। अगर क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, तो कॉन्ट्रैक्टर को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि मजबूत प्लानिंग और जवाबदेही के साथ काम होना चाहिए। सवाल: कॉन्ट्रैक्टर को कैसे फायदा होगा, इससे लोगों को काम भी तो मिलेगा?
जवाब: सिर्फ प्रोजेक्ट शुरू करने से रोजगार नहीं आता। अगर BJP को सच में कुछ करना है, तो पहले कटक के SCB मेडिकल कॉलेज जैसे वर्ल्ड क्लास प्रोजेक्ट को जिम्मेदारी के साथ पूरा करना होगा। AIIMS का उदाहरण सबके सामने है। हजारों पेशेंट आ रहे हैं। उनके रहने के लिए जगह और सुविधाएं नहीं हैं। सरकार को किसानों से धान की खरीद और महिला सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर फोकस करना चाहिए। यहां तो वुमेन डेस्क तक बंद कर दिया है। दुबई जैसे अहम रूट पर डायरेक्ट फ्लाइट शुरू नहीं हो पा रही है, जबकि ओडिशा से लगभग 40 हजार लोग वहां जाते हैं। पहले इन जरूरतों को प्रायोरिटी मिलनी चाहिए या विधानसभा के लिए नई बिल्डिंग को। चुनाव के वक्त ओड़िया अस्मिता का मुद्दा लाया गया, लेकिन आज ओड़िया अस्मिता कमजोर होती दिख रही है। लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति भी खराब है। लोग बोले- नई बिल्डिंग बने, लेकिन ओडिशा का डेवलपमेंट भी हो
भुवनेश्वर के रहने वाले देवाशीष दास आईटी सेक्टर में हैं। वे विधानसभा के लिए नई बिल्डिंग को जरूरी बताते हैं। देवाशीष कहते हैं कि अभी की बिल्डिंग बहुत पुरानी हो गई है। इसलिए नई बिल्डिंग तो बनानी चाहिए। इससे लोगों को काम भी मिलेगा। इसके साथ दूसरे एरिया पर भी ध्यान देना चाहिए। ओडिशा में कंपनियां लानी चाहिए। दूसरे स्टेट जितने डेवलप हो रहे हैं, उतना ही काम ओडिशा में होना चाहिए। एसआर पांडा सरकारी नौकरी से रिटायर हुए हैं। हमने उनसे पूछा कि क्या विधानसभा के लिए नई बिल्डिंग बनानी चाहिए? वे जोर देकर कहते हैं, ‘बिल्कुल। बनना ही चाहिए। मौजूदा विधानसभा भवन बना था तब ओडिशा की आबादी कितनी थी और अब कितनी है। अभी राज्य की आबादी 4 करोड़ से ज्यादा है। उसके हिसाब से परिसीमन होना चाहिए। लोगों को अच्छी सर्विस चाहिए, नए लीडर चाहिए। इसलिए मुझे लगता है नई विधानसभा बनाने का फैसला सही है।’ एक्सपर्ट की राय- नई बिल्डिंग जरूरी, लेकिन तुरंत जरूरत नहीं
ओडिशा के सीनियर जर्नलिस्ट संदीप मिश्रा भविष्य के लिहाज से इस प्रोजेक्ट को जरूरी मानते हैं। वे ये भी कहते हैं कि इसकी तुरंत जरूरत नहीं है। सवाल: नए विधानसभा भवन पर BJP और BJD की अलग-अलग राय है। नई बिल्डिंग कितनी जरूरी है?
जवाब: ये प्रोजेक्ट आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्लान किया गया है। इतना जरूर है कि ओडिशा के लिए यह प्रोजेक्ट तुरंत जरूरत का मुद्दा नहीं था। सरकार कह रही है कि यह कदम फ्यूचर रेडी गवर्नेंस की दिशा में उठाया है, जिसे अगले 50 साल के नजरिए से डिजाइन किया जा रहा है। सरकार सोच-समझकर ही प्रोजेक्ट अनाउंस करती है। बिना जरूरत के बड़ा फैसला नहीं लिया जाता। सवाल: क्या 2029 में होने वाले चुनाव पर इसका असर पड़ेगा?
जवाब: अभी परिसीमन पर कुछ साफ नहीं है। 200 सीटों तक जाने की बात हो रही है। उसका एस्टीमेट बनाया जा रहा है, उसमें भी पूरी क्लैरिटी नहीं दिखती। चीजें साफ नहीं होंगी, तब तक इस पर कोई बड़ा फैसला लेना मुश्किल है। सरकार का फोकस लंबे समय के इंफ्रास्ट्रक्चर पर होना चाहिए। आने वाले 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्लानिंग करनी होगी। ओडिशा में नए कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट तभी शुरू किए जा सकते हैं, जब 5 या 10 साल का क्लियर प्लान हो। सरकार नया प्रोजेक्ट लॉन्च करती है, तो पहले कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस करती है। यानी एक जगह पैसा लगाया जा रहा है, तो दूसरी जगह क्या इफेक्ट पड़ेगा। यह भी देखा जाता है कि प्रोजेक्ट से किस एरिया को फायदा होगा। ये देखा गया है कि गांवों में फायदा पहुंचाने वाले प्रोजेक्ट का असर ज्यादा होता है। ……………………. ये खबर भी पढ़ें
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