हरियाणा में BJP संकट में थी, महीनेभर में बदला माहौल:RSS ने रूठे वर्कर्स को मनाया, वोटिंग से 10 घंटे पहले तक एक्टिव रहा

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'स्वयंसेवक लोगों के घरों में हैं। रात 10 बजे तक वहीं रहेंगे। एक महीने से यही रूटीन है। बीते एक हफ्ते से तो डोर टू डोर मीटिंग्स दोगुनी कर दी हैं। हम जिसके घर में रुकते हैं, वहीं का दाना-पानी लेते हैं। ये RSS की परंपरा है। सुबह का वक्त है तो चाय पिएंगे, दोपहर का वक्त है तो खाना खाएंगे।‘ 5 अक्टूबर को हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग थी। इससे एक दिन पहले 4 अक्टूबर को रात 8.30 बजे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, यानी RSS के एक वरिष्ठ स्वयंसेवक हमें अपनी प्रचार की स्ट्रैटजी बता रहे थे। उन्होंने दावे के साथ कहा कि सरकार हम ही बना रहे हैं। चुनाव में BJP की जीत ने इस दावे पर मुहर लगा दी। 48 सीटें जीतकर पार्टी सरकार बना रही है। इस जीत में RSS का अहम रोल रहा। उसके कार्यकर्ता प्रचार के आखिरी घंटे तक डोर टू डोर कैंपेन करते रहे। लोगों की नाराजगी झेली और रूठों को मनाया। BJP की जीत पक्की करने के लिए RSS ने किस प्लान पर काम किया। दैनिक भास्कर ने इसे समझने के लिए संगठन के प्रांत स्तर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बात की। घर-घर पैम्फलेट पहुंचाए, लोगों का गुस्सा खुद झेला चुनाव प्रचार में शामिल रहे RSS के एक कार्यकर्ता बताते हैं, 'हमने प्रचार के लिए अपने पैम्फलेट हर घर तक न सिर्फ पहुंचाए, बल्कि उसमें लिखे पॉइंट्स भी समझाए। ऐसा इसलिए किया, ताकि वोटिंग के लिए ज्यादा से ज्यादा लोग निकलें।’ ’हम किसी पार्टी को वोट देने से मना नहीं करते। ये जरूर बताते हैं कि लोगों को किन मुद्दों पर काम करने वाली सरकार चुननी चाहिए। यही हमने हरियाणा में किया। आखिरी के एक हफ्ते में हजारों स्वयंसेवक सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक RSS का पर्चा लेकर डोर टू डोर कैंपेनिंग में जुटे थे।' जमीन पर BJP के लिए गुस्सा था? जवाब में RSS कार्यकर्ता बोले, ’आप सड़कों पर रैलियों में थे, लेकिन हम घरों के भीतर थे। मैं मानता हूं कि वोटर गुस्सा था, लेकिन हम हर घंटे, हर दिन उसके गुस्से को शांत कर रहे थे। उसकी नाराजगी दूर कर रहे थे।’ ’उसने हम पर भी गुस्सा निकाला। वोटिंग के पहले ही वोटर कार्यकर्ताओं पर अपनी खीझ निकाल चुका था। उसका गुस्सा ठंडा हो गया था। उस गुस्से को हमने भी झेला, लेकिन परिवार की तरह। हमने उसे गुस्से में नहीं, बल्कि शांत मन से सरकार चुनने का सुझाव दिया।’ चुनावी पर्चे के पॉइंट्स, जो जीत में अहम फैक्टर बने 1. क्या मेरा वोट कॉम्पिटिशन की तैयारी कर बिना पैसा दिए नौकरी हासिल करने जा रहा है (बिना खर्ची बिना पर्ची नौकरी हरियाणा चुनाव में सबसे बड़ा स्लोगन था।) 2. क्या मेरा वोट हरियाणा में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव शुरू करने के लिए जा रहा है (ये महोत्सव कुरुक्षेत्र में मनाया जाता है। इसे BJP ने ही शुरू किया।) 3. क्या मेरा वोट बेटी को बचाने-पढ़ाने के लिए जा रहा है (ये स्लोगन BJP सरकार ने दिया है।) 4. क्या मेरा वोट ‘न एक जिला-न एक जाति, 36 बिरादरी अपने साथी’ के लिए जा रहा है (ये चुनाव जाट बनाम दूसरी सारी जातियों के बीच हुए।) 5. क्या मेरा वोट पढ़ी-लिखी पंचायत बनाने के लिए जा रहा है (ये पहल हरियाणा पंचायती राज एक्ट संशोधन के तहत BJP सरकार ने की है। हरियाणा में सरपंच बनने के लिए 10वीं पास होना जरूरी है।) पर्चे के बाकी सभी पॉइंट्स भी ये तय कर रहे थे कि कांग्रेस के खिलाफ माहौल बने। RSS की रणनीति थी कि इस पर्चे के जरिए 2014 से लेकर अब तक BJP की पहल और उपलब्धियां लोगों के सामने रखे। उनके दिमाग में नाराजगी के ऊपर BJP की वो पहल लाई जाएं, तो पॉजिटिव रहीं।’ ’ वोटिंग से पहले 8 दिन RSS ने तीन फैक्टर पर काम किया 1. डोर-टू डोर कैंपेनिंग RSS लगातार चौपाल और बैठकें कर रहा था। आखिरी के 8 दिन चौपालों और बैठकों से ज्यादा तरजीह डोर टू डोर कैंपेनिंग को दी गई। RSS के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं, 'हमें सरकार बनानी थी। कोशिश ये थी कि बिना जोड़-तोड़ की सरकार बने। हमारे पास प्लान B भी था। हमने पहले प्लान A पर काम किया। हमारे कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग भी लाई।' 'हम लोगों के पास गए। हमारी उपलब्धियां, जो लोगों की नाराजगी में दब गई थीं, उनके ऊपर से धूल साफ की। हमने 2014 से लेकर 2024 तक की सारी उपलब्धियां लोगों के दिमाग में ताजा कीं। ये भी बताया कि अगर गलत सरकार चुनी तो क्या होगा।' वे आगे कहते हैं, 'हरियाणा सेंसेटिव प्लेस है। मेवात इसी में आता है। यहां के दंगे सबने देखे। अगर गलत सरकार आई, तो पूरे हरियाणा में मेवातियों का शासन होगा। आंतरिक सुरक्षा को खतरा होगा इसलिए हमें राष्ट्रवादी सरकार चाहिए। हालांकि, पूरे क्षेत्र के मुद्दे अलग अलग हैं।' हमने राष्ट्रवाद के साथ लोकल मुद्दों पर काम किया। 8 दिन में वोटर्स के उस बड़े हिस्से तक पहुंच बनाई, जिसने वोटिंग के दिन घर बैठने का मन बना लिया था। 2. BJP के रूठे कार्यकर्ता आखिरी दिनों में साथ आए RSS में हमारे टॉप सोर्सेज ने बताया कि पुराने कार्यकर्ताओं के बीच लीडरशिप को लेकर नाराजगी थी। हम पिछले एक महीने से लगातार तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे थे। आखिर के 8 दिन ज्यादातर रूठे कार्यकर्ता प्रचार में लगे। उन्होंने अपने समर्थकों को मैसेज दिया कि आप वोट करें और हमारी सरकार चुनें। उनका घर से निकलना और लोगों के बीच जाना, जीत में अहम फैक्टर बना। ये कार्यकर्ता जमीनी स्तर के थे। वे निकले तो वोटर और ज्यादा एक्टिव हुए। 3. सभी को बताया- कोई सुपर CM नहीं, नायब ही मुखिया RSS के टॉप सोर्सेज ने बताया कि पूर्व CM मनोहर लाल खट्टर हटा तो दिए गए थे, लेकिन हरियाणा में ये मैसेज था कि सुपर CM वही हैं। कमान आज भी उन्हीं के हाथों में है। अगर इसका रिवर्स मैसेज नहीं आता, तो भी BJP के हाथ इतनी बड़ी जीत नहीं आती। RSS ने एक साल पहले ये सुझाव दिया था कि खट्टर हटाए जाएं, पर देर से हटे। फिर चुनाव से 15 दिन पहले RSS ने सुझाव दिया कि अगर सुपर CM का कॉन्सेप्ट लोगों के दिमाग में रहेगा, तो हो सकता है कि हमारे वोटर घर से निकले हीं नहीं। प्रचार के आखिरी दिनों में BJP के केंद्रीय नेतृत्व ने ये मैसेज दिया कि नायब ही हरियाणा के मुखिया हैं। पोस्टर्स से खट्टर हटाए गए। मंच पर उन्हें हरियाणा के सुपर CM की तरह नहीं, बल्कि एक नेता की तरह तवज्जो दी गई। जमीन पर स्वयंसेवक भी लोगों को बता रहे थे कि नायब ही उनके नायक हैं। पदाधिकारी बोले- हमने सरकार बनवा दी, अब BJP की जिम्मेदारी RSS के सीनियर वर्कर कहते हैं, ‘आगे जो करना है, वो BJP को करना है। हमारे कार्यकर्ताओं ने सरकार बनवा दी। हालांकि, इस बार BJP ने लोकसभा चुनाव की तरह RSS को इग्नोर करने की गलती नहीं की, तो उसका नतीजा सामने है। टिकट बंटवारे से लेकर चुनावी मुद्दे तय करने तक RSS की सुनी गई।‘ खट्टर क्या आगे भी हरियाणा से दूर ही रहेंगे। जवाब मिला, 'अब तो पूर्ण बहुमत की सरकार है। यहां खट्टर की वापसी नहीं होगी।' वे आगे कहते हैं, 'हरियाणा अब दूसरा गुजरात बन गया है। यहां कम से कम अब अगले 15-20 साल तो दूसरे दल की सरकार नहीं आएगी।' तो क्या नायब ही CM रहेंगे। वे हंसते हुए कहते हैं, 'नहीं, CM तो बदलते रहेंगे।' क्या इस सरकार को कुछ सुझाव दिए जाएंगे? वे कहते हैं, 'हां, ये हमारा काम है। सुझाव तो देंगे, लेकिन सरकार चलाने में दखलंदाजी नहीं होगी।' RSS पिछले एक महीने से इन 5 मोर्चों पर रहा एक्टिव 1. पार्टी के लिए जनाधार वाले उम्मीदवार तलाशे RSS में हमारे सोर्स ने बताया कि हमारा सुझाव था कि चाहे कांग्रेस का हो या फिर JJP का, जनाधार वाले लीडर का स्वागत करना चाहिए। टिकट बंटवारे में उस कैंडिडेट को तवज्जो दी गई। जनता BJP नेताओं से नाराज थी, अगर वही वोट मांगने गए तो हार पक्की थी। इसलिए JJP के करीब 4 नेता RSS के सुझाव से पार्टी में जुड़े। 2. पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल टॉप सोर्सेज के मुताबिक, RSS का असली काम तालमेल बिठाना है। BJP के लिए हम सीधे काम नहीं करते, लेकिन वो भी हमारा ही संगठन है। इसलिए उसके पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल बिठाने का जिम्मा हमारा है। अगर पुराने नेता रूठे रहते, तो फिर नए नेताओं के खिलाफ दुष्प्रचार करते। उनके अपने कार्यकर्ता और वोटर घर में बैठे रहते और वोट नहीं डालते। ऐसे में नए नेताओं ने विनम्रता दिखाई। पुराने और नए नेताओं ने एक दूसरे के साथ बात की। इसकी पहल नए नेताओं ने की। वे पुराने नेताओं को फोन करते, अपने कार्यालय या घर बुलाते। ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर साथ में करते। अगर पुराने नेता चाहते, तो वो उसे अपने दफ्तर बुलाकर कार्यकर्ताओं के बीच बैठाते। इसके कार्यकर्ताओं में मैसेज गया कि नया नेता सीनियर को तवज्जो देता है। 3. अग्निपथ से नाराज युवाओं के बीच बिना खर्ची, बिना पर्ची का स्लोगन लाए सोर्स ने बताया, ‘ये बात सच है कि लोगों के बीच कई योजनाओं को लेकर नाराजगी थी, जैसे अग्निपथ योजना। ये भी सच है कि योजना बुरी नहीं है। बस उसे लोगों तक ठीक से पहुंचाया नहीं गया। इसकी वजह सरकार के साथ कर रहे अफसर थे, जिन्होंने योजना का मकसद और फायदे जनता को नहीं बताए।’ 'लोग अग्निपथ से नाराज हैं। बेरोजगारी भी मुद्दा रहा। इसलिए हमने कैंपेन लिस्ट में उन योजनाओं को सबसे ऊपर रखा, जिनका पॉजिटिव इंपैक्ट रहा। हमने सुझाव दिया कि खट्टर राज में सबसे ज्यादा कमीशनखोरी में कमी आई। इसे लोगों ने माना भी था। हमने प्रचार की लिस्ट में इसे सबसे ऊपर रखा।' स्लोगन दिया 'बिना खर्ची, बिना पर्ची वाली सरकार। यानी बिना कमीशन, बिना सिफारिश के काम करने वाली सरकार। इसी तरह केंद्र की अग्निपथ योजना को सटीक मकसद और फायदों के साथ जनता तक पहुंचाया गया। ये काम मोहल्लों में हो रही बैठकों में किया गया।' 4. नायब सिंह पारंपरिक वोटरों के बीच पहुंचे सोर्स के मुताबिक, ‘हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी लोगों के बीच पहुंचे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और विधायकों से मुलाकात की। हालांकि, उन्हें काम का बहुत कम वक्त मिला। नायब सिंह सैनी को सलाह दी गई थी कि वो उन क्षेत्रों में जाएं, जहां हमारा वोटर है। जैसे अहीरवाल क्षेत्र, जिसमें दक्षिण हरियाणा आता है। सबसे ज्यादा यहीं से युवा फौज में जाते हैं।‘ ‘फौज में एक तिहाई लोग सिर्फ हरियाणा से ही हैं। सोचिए आर्मी इन लोगों के लिए कितनी अहम है। इस क्षेत्र में सैनी की कई रैलियां और बैठकें कराई गईं।‘ 5. अफसरों से नाराज जमीनी कार्यकर्ताओं को नए CM ने मनाया सोर्स बताते हैं, ‘खट्टर से पार्टी कार्यकर्ता टाइम मांगते रह जाते थे, उनका नंबर ही नहीं आता था। नायब सिंह सैनी लगातार पुराने कार्यकर्ताओं से मिले, उनके घर गए। हमारे सोर्स एक विधायक के बारे में बताते हैं। विधायक खट्टर से नाराज थे। वे उनसे मिलना चाहते थे, लेकिन तीन महीने बाद का वक्त मिला। गुस्से में उन्होंने मिलने से ही मना कर दिया और लोकसभा चुनाव में घर बैठ गए।' 'खट्टर के मुख्यमंत्री रहते हुए छोटे कार्यकर्ताओं की तो CM हाउस में एंट्री ही नहीं थी। नायब सिंह सैनी के आने से लोगों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम हुई है। खट्टर के आस-पास तैनात अफसरों ने एक लेयर बना दी थी। इससे जमीनी कार्यकर्ता तक खट्टर की पहुंच ही न रहे।' सोर्स के मुताबिक, अब इन कार्यकर्ताओं के बीच RSS ने बैठकें कीं। उनके घर गए। इनमें से ज्यादातर तो RSS के कार्यकर्ता हैं। इन घरों में कोई न कोई कार्यकर्ता जरूर है। हमने बात बनाने की पूरी कोशिश की। हर जिले में 150 प्रमुख कार्यकर्ता उतारे हरियाणा के हर जिले में जिला स्तर के तीन प्रमुख कार्यकर्ता एक्टिव रहे। उनके नीचे मंडल स्तर पर 3-3 कार्यकर्ता और फिर इन कार्यकर्ताओं के नीचे 10-10 या 12-12 लोगों की टीम ने काम किया। फिर इस टीम के हर सदस्य के नीचे और 10-10 लोगों की टीम रही। ऐसे हर जिले में 150-180 लोग एक्टिव रहे। यहां तक तो टीम के लोगों की गिनती है। अब इनके नीचे पंचायत, गांव, मोहल्ला स्तर पर 5-5, 10-10 लोगों की टीमें तैनात रहीं। ऐसे हजारों कार्यकर्ता ग्राउंड लेवल पर चौपाल और बैठकें करते रहे। ............................................... हरियाणा विधानसभा चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें... 1. 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