हरियाणा में विधानसभा चुनाव की वोटिंग खत्म हो चुकी है। 8 अक्टूबर को पता चलेगा कि BJP यहां जीत की हैट्रिक पूरी करेगी या 10 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी होगी। इन सवालों का जवाब जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर्स हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों तक पहुंचे। आम लोगों, पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और सीनियर जर्नलिस्ट से बात करके हवा का रुख समझा। इस बातचीत से समझ आया कि हरियाणा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनेगी और वह अपने बलबूते सरकार भी बना सकती है। लगातार दो बार से सरकार बना रही BJP बहुमत के लिए जरूरी 46 सीटों के आंकड़े से दूर दिख रही है। पार्टी दूसरे नंबर पर रह सकती है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि 18 सीटें ऐसी हैं, जहां दोनों के बीच कड़ा मुकाबला है। BJP-कांग्रेस के अलावा बाकी पार्टियों में इनेलो-बसपा गठबंधन, जजपा-असपा गठबंधन, आम आदमी पार्टी कोई उलटफेर करते नजर नहीं आ रहे। 4 पॉइंट्स में समझिए हरियाणा की हवा का रुख 1. कांग्रेस को 44 से 54 सीटें मिल सकती हैं। जाटलैंड और बांगर बेल्ट में कांग्रेस मजबूत दिख रही है। सीटों की संख्या के लिहाज से राज्य के 2 सबसे बड़े इलाकों बांगर बेल्ट और जीटी रोड एरिया में भी पार्टी 2019 के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।
2. BJP को 19 से 29 सीटें मिल सकती हैं। पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें जीटी रोड बेल्ट और साउथ हरियाणा से मिल सकती हैं। जाटलैंड वाले बांगर और देसवाल बेल्ट में BJP पिछड़ती नजर आ रही है।
3. हरियाणा में तीसरे नंबर पर इनेलो-बसपा गठबंधन रह सकता है। इसे 1 से 5 सीटें मिल सकती हैं।
4. निर्दलीय कैंडिडेट 4 से 9 सीटों पर जीत सकते हैं। पूर्व डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला की पार्टी जजपा और आम आदमी पार्टी मुकाबले में नहीं हैं। इन्हें 1 से 2 सीटें मिल सकती हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चुनाव की शुरुआत से ही माहौल कांग्रेस के पक्ष में रहा है। एंटी इनकम्बेंसी, किसानों, युवाओं की नाराजगी और पहलवानों के आंदोलन की वजह से BJP पिछड़ती नजर आई। बड़े नेताओं की बड़ी रैलियों के बाद थोड़ा मोमेंटम बना, लेकिन कम समय होने की वजह से उसका फायदा नहीं मिल पाया। दो वजहें, जिनसे चौंका सकती हैं कांग्रेस-BJP
पहली: अगर 22% से 25% जाट और 21% दलित आबादी लोकसभा चुनाव की तरह कांग्रेस के पक्ष में एकजुट रही और बाकी कम्युनिटी के वोट बैंक में बिखराव हुआ तो क्लीन स्वीप जैसी स्थिति रहेगी। उस सूरत में कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा 60 तक भी पहुंच सकता है। तब BJP की सीटें 20 से नीचे जा सकती हैं। दूसरी: जाट-दलित वोट बंटे और 7% से 8% ब्राह्मण, 6% से 7% वैश्य, 7% से 8% पंजाबी और 30% से 32% OBC वोटर्स को साधने में BJP कामयाब हो जाती है, तो उसकी सीटों का आंकड़ा भी 30 तक पहुंच सकता है। BJP और RSS ने इन वर्गों को साधने के लिए ग्राउंड पर काफी मेहनत की है। सीटें, जिन पर नजर रही एक्सपर्ट बोले- BJP की हैट्रिक मुश्किल, किसान आंदोलन का असर दिखा
हरियाणा के पॉलिटिकल एक्सपर्ट विजय सभरवाल कहते हैं, ‘मुझे नहीं लगता BJP इस बार जीत की हैट्रिक लगा पाएगी। पहली वजह ये है कि 2014 और 2019 में PM मोदी का नाम चला था, अब ऐसा नहीं है। किसानों को 13 महीने आंदोलन पर बैठना पड़ा। इससे रूरल एरिया में पार्टी के खिलाफ माहौल बना है। वहां लोग BJP को पसंद नहीं कर रहे हैं।' ‘दूसरी वजह मनोहर लाल खट्टर है। उन्होंने 10 साल तक दूसरे नेताओं को निपटाने की राजनीति की। जाट नेता निपटा दिए, अनिल विज को किनारे कर दिया। ये चीजें मैटर करती हैं। पुराने नेताओं को खत्म करने का नुकसान हुआ। कांग्रेस से गए नेताओं की क्रेडेबिलिटी कम हो चुकी है।’ 'तीसरी वजह है नायब सैनी को आखिरी टाइम पर मुख्यमंत्री बनाना। इसका बहुत असर नहीं हुआ। उन्हें सैनी समाज का सपोर्ट जरूर है, लेकिन पूरा समाज कभी भी एक लीडर के सपोर्ट में नहीं होता। सैनी को पहले CM बना देते, तो शायद वे BJP को अच्छी स्थिति में ला सकते थे। कांग्रेस की बात करें तो कुमारी सैलजा कांग्रेस को ज्यादा डैमेज नहीं कर पाएंगी। रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी डैमेज कर सकते थे।' BJP ने अच्छा काम नहीं किया, इसलिए कांग्रेस आगे
हरियाणा के पॉलिटिकल एक्सपर्ट धर्मेंद्र कंवारी कहते हैं, ‘कांग्रेस ऐसी पार्टी नहीं, जो प्लस-माइनस पॉइंट पर चलती हो। कांग्रेस ने पिछले 10 साल में ऐसा कुछ नहीं किया कि प्रदेश के लोग उस पर मेहरबान हो जाएं।’ ‘कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति इसलिए बन रही है क्योंकि BJP ने 10 साल में अच्छा काम नहीं किया। हरियाणा के लोगों ने तो 10 साल पहले इसी कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया था। कांग्रेस को तीसरे दर्जे की पार्टी बना दिया था।’ ‘BJP के खराब काम का फायदा कांग्रेस को मिल रहा है। BJP का तो पूरा प्रचार सैलजा से शुरू होकर सैलजा पर खत्म हो गया। BJP की रणनीति थी कि एससी वोट बैंक को हिला दें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।’ ‘2019 में BJP ने 75 पार का नारा दिया था। तब लग रहा था वो सरकार बनाएगी और बनाई भी। यही माहौल कांग्रेस का है। 250 छोटे-बड़े नेता कांग्रेस में चले गए। इससे कांग्रेस अच्छी स्थिति में दिखाई दे रही है।’ ‘कांग्रेस में हुड्डा और सैलजा ऐसे फैक्टर हैं, जिनका कोई इलाज नहीं है। सैलजा के ऐसे बयान भी आए, लेकिन कांग्रेस से BJP में गए अशोक तंवर के पार्टी में आने से यह मामला थम गया।’ कंवारी आगे कहते हैं, ‘2019 से 2024 का BJP का कार्यकाल करप्शन वाला रहा। फैमिली ID और प्रॉपर्टी ID ने हरियाणा में BJP को लोगों के बीच अनपॉपुलर बना दिया। लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपना मुख्यमंत्री बदला। पंजाबी चेहरे से OBC चेहरे पर आए। नायब सिंह सैनी को अभी हरियाणा का पता नहीं है। उन्हें जीत के लिए हेमा मालिनी को लाना पड़ रहा है।’ कांग्रेस विकल्प बनी, रीजनल पार्टियां अपने लिए जगह नहीं बना पाईं
सीनियर जर्नलिस्ट कुमार मुकेश कहते हैं, ‘कांग्रेस हरियाणा में सरकार बनाते दिख रही है। इस बार BJP के लिए 2019 के मुकाबले ज्यादा एंटी इनकम्बेंसी है। किसान आंदोलन का काफी असर रहा। यही वजह है कि कांग्रेस रुझानों में आगे दिख रही है। मुझे लगता है कि रुझान सही रहने वाले हैं। ‘जहां तक रीजनल पार्टियों का सवाल है, तो मुझे लगता है जिस तरह लोकसभा चुनाव में लोगों ने BJP और कांग्रेस को ही वोट दिए, विधानसभा चुनाव में भी ऐसे ही वोटिंग हुई। रीजनल पार्टियों का असर नहीं रहा। एक बात और अहम है कि लोगों का कांग्रेस से कोई ज्यादा प्रेम नहीं है।' ‘BJP ने जरूर कुमारी सैलजा के बहाने दलितों के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश की, मगर कुमारी सैलजा बाद में एक्टिव हो गईं और कांग्रेस के लिए प्रचार किया।’ पॉलिटिकल एक्सपर्ट हेमंत अत्री कहते हैं, ‘माहौल कांग्रेस के पक्ष में इसलिए है क्योंकि 10 साल से BJP के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान है। 1966 से लेकर आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि लगातार तीसरी बार कोई पार्टी सत्ता में आई हो। इतिहास और माहौल कांग्रेस की तरफ है। पिछले 10 साल में कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए कोई क्रांतिकारी काम नहीं किया है। उसे सत्ता विरोधी रुझानों का फायदा मिल रहा है।' हेमंत अत्री कहते हैं, ‘कांग्रेस के सबसे बड़ी कमजोरी गुटबाजी रही है। इस बार BJP के अंदर भी गुटबाजी दिखी। तमाम जगह उनके भी बागी खड़े हुए। कांग्रेस के पास संगठन नहीं है और ये बात माननी पड़ेगी। 10 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस ने बेहतर प्रत्याशी होते हुए भी गलत टिकट दी हैं। ऐसी ही गलती BJP ने भी की है।’ ‘BJP को ये चुनाव अपनी उपलब्धियों पर लड़ना चाहिए था। उसे अपनी नीतियां बतानी चाहिए थीं। रोड मैप और विजन बताना चाहिए था। BJP ने इनमें से किसी भी मुद्दे पर कुछ नहीं बोला। प्रधानमंत्री का ट्वीट देखिए, वे आज भी दामाद और सिंडिकेट में फंसे हैं।' हेमंत अत्री कहते हैं, आप 10 साल से केंद्र में हैं, हरियाणा में आपकी सरकार है। अगर किसी ने गलत काम किया है, तो आपने उसे सजा क्यों नहीं दिलाई। अब BJP के पास कोई एजेंडा ही नहीं रह गया है। हेमंत अत्री आगे कहते हैं, ‘रही सही कसर आज अशोक तंवर ने कांग्रेस जॉइन करके पूरी कर दी। मनोहर लाल खट्टर उन्हें BJP में लाए थे, तो उन्हें अपना भांजा बताया था। सिटिंग सांसद की टिकट काटकर अशोक तंवर को टिकट दी गई, लेकिन वे हार गए। उसके बाद भी वे टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया।’ ‘BJP बार-बार सैलजा की बात करके दलितों का मुद्दा उठा रही थी। सैलजा को कांग्रेस ने टिकट दी और वो जीतीं भी। वे उत्तराखंड की प्रभारी हैं, लेकिन BJP ने अशोक तंवर को क्या दिया। ये सवाल तो आएगा ही।’ कोई पार्टी जीत की हैट्रिक नहीं लगा पाई, क्या बनी रहेगी परंपरा
हरियाणा के इतिहास में आज तक कोई पार्टी लगातार 10 साल से ज्यादा सत्ता में नहीं रही है। पिछले 20 साल में BJP और कांग्रेस ने लगातार दो-दो बार सरकार बनाई, लेकिन तीसरी बार में बार हार मिली। कांग्रेस से 2005 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा CM बने। 2009 में भी उनके नेतृत्व में पार्टी जीती। BJP को 2014 में पहली बार हरियाणा में बहुमत मिला और मनोहर लाल खट्टर CM बने। 2019 में उनकी अगुआई में पार्टी ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। हालांकि इसके लिए उन्हें दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी से गठबंधन करना पड़ा। इस बार अगर BJP सरकार बनाने में कामयाब रहती है, तो हरियाणा के इतिहास में ऐसा करने वाली पहली पार्टी होगी। अगर सत्ता तक नहीं पहुंच पाई, तो हरियाणा की परंपरा बरकरार रहेगी जिसमें कोई पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता तक नहीं पहुंच पाई। .................................... हरियाणा इलेक्शन से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए... 1. हरियाणा की 90 सीटों की स्थिति, जाट-दलित और थर्ड प्लेयर डिसाइडिंग फैक्टर हरियाणा की 90 सीटों पर 5 अक्टूबर को वोटिंग हुई थी। पोलिंग से 2 दिन पहले तक कांग्रेस 40 से 50 और भाजपा 22 से 32 सीटों पर मजबूत दिख रही थी। BJP की सीटों का आंकड़ा बहुत हद तक इस बात पर डिपेंड रहेगा कि साइलेंट वोटर आखिरी समय में किस तरफ जाता है और जाट-दलित वोट बंटते हैं या नहीं। पढ़िए पूरी खबर... 2. हरियाणा में 50% सीटें जीतीं पार्टियां, क्या 0 पर सिमटेंगी इस चुनाव में पहली बार रीजनल पार्टियां अपना वजूद की लड़ाई लड़ रही हैं। 2018 में इंडियन नेशनल लोकदल से निकली JJP 2019 के विधानसभा चुनाव में किंगमेकर बनी थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में JJP को 1% से भी कम वोट मिले। 2000 में इनेलो ने 47 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी। अब दोनों पार्टियां अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही हैं। पढ़िए पूरी खबर...