जिसने भी अंशुल कंबोज को टेस्ट डेब्यू देने का फ़ैसला किया, उसने इस युवा गेंदबाज़ के साथ अन्याय किया है. यह भारत के लिए एक ग़लत फ़ैसला साबित हुआ और इस गेंदबाज़ के ज़ख्म हमेशा के लिए गहरे हो सकते हैं. सच कहूँ तो, वह इस दौर के लिए तैयार नहीं थो और वह तीसरे तेज गेंदबाज की भूमिका के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं दिखे और बिल्कुल बेबस सा लग रहे थे. हो सकता है उसे जेट लैग हो या वह अनफ़िट हो पर उनको खिलाने की क्या जल्दी थी ये किसी को समझ नहीं आया. 125 किमी प्रति घंटे की औसत से गेंदबाज़ी करने वाला कोई भी खिलाड़ी इस स्तर पर नए गेंदबाज़ के तौर पर नहीं खेल सकता और उसके आने से भारत के गेंदबाज़ी आक्रमण का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया है.