SSC के 224 करोड़ बचे, एग्जाम में सिस्टम ठप:कमेटी ने कहा- TCS सबसे बेहतर, लेकिन विवादों में रही एजेंसी को परीक्षा का ठेका

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‘SSC में हमारा 2022 और 2024 में फाइनल सिलेक्शन नहीं हो सका। 2025 के लिए तैयारी कर रहे थे, लेकिन सब बेकार हो गया। अब सिलेक्शन के लिए होने वाले एग्जाम में इंतजाम पहले से बदतर हो गए हैं। जब तक TCS एग्जाम कराता था, तब तक सब बढ़िया था। जब से एडुक्विटी एग्जाम करा रहा है तो आप हाल देख ही रहे हैं।‘ बिहार के गया जिले के रहने वाले मंटू कुमार 2020 से SSC की तैयारी कर रहे हैं। हर साल की तरह इस साल भी एग्जाम दिया, लेकिन माउस में दिक्कत और सर्वर डाउन होने जैसी बदइंतजामी के चलते पर्चा बिगड़ गया। मंटू अकेले नहीं हैं, जो SSC और एग्जाम कराने वाले एजेंसी एडुक्विटी पर सवाल उठा रहे हैं। बिहार से लेकर दिल्ली और कर्नाटक तक स्टूडेंट यही बात दोहरा रहे हैं। SSC की पोस्ट फेज-13 भर्ती एग्जाम 24 जुलाई से 1 अगस्त के बीच हुआ। शिकायतों के बाद टीचर और स्टूडेंट्स इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। पहले SSC के एग्जाम टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) करवाती थी, लेकिन नए टेंडर एडुक्विटी को मिले हैं। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे कि एडुक्विटी जैसी कंपनी को टेंडर क्यों दिया गया, जो पहले भी एमपी पटवारी परीक्षा और कॉन्स्टेबल भर्ती समेत तमाम एग्जाम को लेकर विवादों में रही है। हालांकि इसे लेकर SSC की यही दलील है कि एडुक्विटी का टोटल स्कोर TCS से ज्यादा है इसलिए टेंडर मिला। अगर TCS कम बोली लगाती तो उसे टेंडर मिल जाता। ये सिर्फ SSC का नहीं, भारत सरकार का फॉर्मूला है। ऐसे में सवाल है कि क्या ये युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं है। विवादों में रही कंपनी को सिर्फ कम बोली लगाने पर कैसे इतनी बड़ी भर्ती परीक्षा की जिम्मेदारी सौंप दी जा रही है। दैनिक भास्कर की टीम ने एग्जाम में शामिल हुए स्टूडेंट्स, टीचर्स और डॉक्यूमेंट्स के जरिए इस विवाद और टेंडर की पूरी प्रक्रिया को समझने की कोशिश की। सबसे पहले जानिए… एडुक्विटी जब TCS से तकनीक में पीछे, फिर कैसे मिला टेंडर ऑनलाइन एग्जाम कराने वाली एजेंसी को चुनने के लिए ओपन टेंडर निकाला जाता है। SSC ने 2 नवंबर 2023 को पहली बार टेंडर का नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 18 दिसंबर 2023 को शुरू हुई। सबसे पहले कंपनियों को CBT (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) के लिए टेक्निकल प्रेजेंटेशन देना था। कुल चार कंपनियां इसके लिए आगे आईं। अहमदाबाद की एडुटेस्ट कंपनी को प्रेजेंटेशन से पहले डिस्क्वालिफाई कर दिया गया, क्योंकि कंपनी ने ब्लैकलिस्टिंग सर्टिफिकेट जमा नहीं किया था। इसके बाद तीन कंपनियों TCS, एडुक्विटी और एपटेक ने प्रेजेंटेशन दिया। अलग-अलग मापदंडों (प्रोजेक्ट को पूरा करने की क्षमता और तरीका, कंपनी की तकनीक, मैनपावर, टर्नओवर) पर मिलने वाले मार्क्स के आधार पर कंपनियों का तकनीकी मूल्यांकन होता है। इनके आधार पर एपटेक को डिस्क्वालिफाई कर दिया गया। तकनीकी मूल्यांकन में TCS सबसे ऊपर थी। कंपनी को 94.22 मार्क्स मिले थे। जबकि एडुक्विटी को 87.88 मार्क्स मिले थे। सरकारी डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, 2 मार्च 2024 को SSC की एक कमेटी ने लिखा कि तीनों कंपनियों में TCS की तकनीक सबसे बेहतर है क्योंकि इसका ऑपरेटिंग सिस्टम काफी मजबूत है। कमेटी ने आगे लिखा कि एडुक्विटी के पास एनक्रिप्टेड तकनीक है, जिससे कैंडिडेट के बारे में किसी को पता नहीं चलेगा। हालांकि वे विंडो पर काम करते हैं, जो बहुत ज्यादा सेफ नहीं है। इससे सभी कैंडिडेट के सिस्टम्स को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है। हालांकि इससे बचने के लिए कंपनी फायरवॉल का इस्तेमाल कर रही है। एग्जाम के लिए एडुक्विटी ने लगाई सबसे कम बोली इसके बाद फाइनेंशियल बिडिंग का प्रोसेस शुरू हुआ। इसमें एक और ऑनलाइन एग्जाम करवाने वाली कंपनी NSEiT लिमिटेड भी शामिल हुई। इस कंपनी ने तकनीकी मूल्यांकन कब पास किया, डॉक्यूमेंट्स में इसकी जानकारी नहीं है। 2 मार्च 2024 को SSC कमेटी ने तकनीकी मूल्यांकन पर जो समरी रिपोर्ट दी, उसमें NSEiT लिमिटेड का नाम शामिल नहीं था। 20 फरवरी 2025 को एग्जाम करवाने के लिए बोली लगाई गई। सरकारी डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, एडुक्विटी ने सबसे कम 171 रुपए प्रति अभ्यर्थी एग्जाम करवाने की बोली लगाई। जबकि TCS की प्रति अभ्यर्थी एग्जाम करवाने की कीमत 311 रुपए थी। इसके अलावा NSEiT लिमिटेड ने 289 रुपए की बोली लगाई थी। इसमें एग्जाम करवाने का ऑपरेशनल और सेंटर दोनों का खर्च शामिल है। आखिरकार, सबसे कम बोली लगाने वाली एडुक्विटी करियर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को चुना गया, जिसने SSC एग्जाम करवाने के लिए कुल 273 करोड़ रुपए की बोली लगाई। TCS ने 497 करोड़ और NSEiT लिमिटेड ने 462 करोड़ की बोली लगाई थी। हालांकि जब हमने SSC के चेयरपर्सन एस गोपालकृष्णन से ये सवाल किया तो उन्होंने बताया कि NSEiT लिमिटेड भी टेक्निकल बिड में थी। गोपालकृष्णन कहते हैं कि अगर उस बिड में एक भी गलती हुई है तो उन्हें जेल भेज देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरी प्रोसेस नियम के मुताबिक हुई है। अब स्टूडेंट्स की शिकायतें… माउस खराब-सर्वर डाउन, आखिर कैसे देते एग्जाम बिहार के गया जिले में रहने वाले मंटू कुमार 5 साल से SSC की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने पोस्ट फेज-13 भर्ती परीक्षा गया के ही एक सेंटर 'मां सरस्वती आईटी सॉल्यूशन' पर दी, लेकिन इस बार उनका एग्जाम पहले की तरह सामान्य नहीं रहा। 24 जुलाई को तीसरी शिफ्ट में उन्हें परीक्षा देनी थी। मंटू बताते हैं, ‘जब पेपर देना शुरू किया, तभी से माउस में दिक्कतें आने लगीं। चार-पांच बार क्लिक करने पर एक बार सिलेक्ट हो रहा था। शिकायत करने पर कहा जा रहा था कि बिजली आने पर सब सही हो जाएगा, लेकिन बिजली आई ही नहीं। टाइम बीतता जा रहा था और पूरा एग्जाम बर्बाद हो गया।‘ मंटू कहते हैं कि उनके सेंटर पर करीब 400 स्टूडेंट थे और सबके सिस्टम में ऐसी गड़बड़ी हो रही थी। जिसका माउस सही चल रहा था, उसका सर्वर खराब था। तस्वीर वाले सवाल पूरी तरह लोड ही नहीं हो रहे थे। वे कहते हैं, ‘जब हमने इनविजिलेटर से शिकायत की तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। कहने लगे मेरे पास कोई समाधान नहीं है। एग्जाम शुरू होने के 10 मिनट बाद हॉल में एंट्री मिली मंटू अकेले नहीं हैं, जो SSC की इस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। एग्जाम की तैयारी कराने वाले शिक्षकों के पास स्टूडेंट्स के मैसेज आने लगे। पश्चिम बंगाल के एक स्टूडेंट ने शिकायत की कि उसने तीनों सेंटर चॉइस राज्य में ही डाले थे, लेकिन उसका सेंटर बिहार के गया में पड़ गया। कई स्टूडेंट्स के एडमिट कार्ड में सेंटर का नाम और पता ही लिखा था। मैसेज में कई स्टूडेंट्स ने तकनीकी दिक्कतों की भी शिकायत की। जतिन कुमार भी उन छात्रों में हैं, जिन्होंने SSC की हालिया परीक्षा में दिक्कतों का सामना किया। वे दिल्ली में रहकर SSC (CGL) की तैयारी कर रहे हैं। सिलेक्शन पोस्ट फेज-13 एग्जाम के लिए उनका सेंटर मेरठ में था। जतिन बताते हैं, ‘24 जुलाई को पहली शिफ्ट में एग्जाम था। ‘मैं सुबह ही सेंटर पर पहुंच गया था। 9 बजे एंट्री होनी थी, लेकिन गार्ड ने ये कहते हुए रोक दिया कि सर्वर डाउन चल रहा है। सुबह 9:30 बजे एग्जाम शुरू होना था, लेकिन मैं 9:40 बजे अंदर जा सका।’ जतिन का कहना है कि टेस्ट में पूछे गए कुछ सवाल आधे-अधूरे लग रहे थे। तकनीकी दिक्कतों पर वे कहते हैं, ’सर्वर डाउन होने की वजह से हमारा पेपर सुबह 10:30 बजे शुरू हुआ था। माउस में भी दिक्कतें आ रही थीं। सिस्टम में कैंडिडेट की फोटो भी पुरानी दिख रही थी। सेंटर में तकरीबन सभी स्टूडेंट्स के साथ कुछ न कुछ दिक्कत हो रही थी।’ हरियाणा-झारखंड के स्टूडेंट बोले… आधा वक्त सिस्टम-माउस ने बर्बाद किया, बाकी गैरअनुभवी स्टाफ ने हरियाणा की रहने वाली एक स्टूडेंट ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि उनके सेंटर पर भी कई तकनीकी दिक्कतें हुईं। उन्होंने 30 जुलाई को रोहिणी ग्लोरियस पब्लिक स्कूल में फेज-13 का एग्जाम दिया। वे बताती हैं, ’सिस्टम हैंग कर रहा था। आप वहां के किसी भी स्टूडेंट्स से पूछिएगा तो सबके साथ यही समस्या सुनने को मिलेगी।’ सेंटर पर स्टाफ ज्यादा अनुभवी नहीं था, जिसकी वजह से बायोमेट्रिक से लेकर बाकी प्रोसेस में हमारा बहुत टाइम खराब हुआ। पंखे खराब पड़े थे, जिनसे आवाजें आ रही थीं। बंद करवाया तो गर्मी लगने लगी। पेन बहुत खराब क्वालिटी के दिए गए थे। बार-बार बदलने पर समय बर्बाद हुआ। झारखंड के रहने वाले विकास (बदला हुआ नाम) दिल्ली में रहकर SSC (CGL) की तैयारी कर रहे हैं। फेज-13 का एग्जाम दिल्ली में शक्ति नगर के आरके डिजिटल स्टूडियो में दिया था। विकास बताते हैं, ‘एग्जाम के दौरान जब भी SAVE और NEXT का ऑप्शन सिलेक्ट करता था, वो होता ही नहीं था।‘ ‘आप अगर कोई सवाल छोड़कर अगला सवाल देखना चाहते हैं, तो आप ये करते रह जाओगे। माउस बिल्कुल काम नहीं कर रहा था। 20-20 बार क्लिक करने पर एक बार सिलेक्ट होता था। इस वजह से मेरे आठ से 10 मिनट बर्बाद हो गए। इन दिक्कतों के बीच एग्जाम पर कैसे फोकस कर पाएंगे?‘ अब जानिए टीचर्स क्या कह रहे… मंत्री से मिलने पहुंचे टीचर्स-स्टूडेंट्स, तो पुलिस ने की FIR 31 जुलाई को इन गड़बड़ियों के खिलाफ दिल्ली में स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स भी सड़क पर उतरे। उन्होंने शिकायतों को लेकर कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्री (DoPT) जीतेंद्र सिंह से मिलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने रोक लिया। प्रदर्शन कर रहे टीचर्स को हिरासत में भी लिया गया। बाद में कई टीचर्स के खिलाफ एक केस भी दर्ज किया गया। आरोप लगा कि पुलिस के बार-बार समझाने के बावजूद उन लोगों ने वहां प्रदर्शन किया, जहां इसकी मनाही थी। FIR में लिखा गया कि इलाके में भारतीय न्याय संहिता की धारा-163 (एक साथ लोगों के इकट्ठा होने पर रोक) लागू है। इस FIR में अंग्रेजी की टीचर नीतू सिंह का नाम भी शामिल है। डिजिटल इंडिया के दौर में माउस में दिक्कतें आना, मजाक से कम नहीं नीतू ने हमें बताया, ‘हम प्रदर्शन नहीं कर रहे थे। हम तो सिर्फ मंत्री से मिलने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने हमसे पहले बहस की। फिर भारी संख्या में पुलिस ने पहुंचकर टीचर्स को पीटना शुरू कर दिया। हम सबको बस में भरा और करीब चार घंटे तक घुमाते रहे। बाद में हमें नजफगढ़ थाने में छोड़ दिया गया।‘ SSC छात्रों की शिकायत और एडुक्विटी को मिले टेंडर पर नीतू कहती हैं, ‘हर साल साढ़े चार करोड़ स्टूडेंट् SSC के तहत परीक्षा देते हैं। इसके बावजूद आयोग कहता है कि हमारे पास इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। ये शर्म की बात है। आप दशकों से एग्जाम करवा रहे हैं। आपका अपना इन्फ्रा होना चाहिए था, अपने लैब्स होने चाहिए थे।‘ जबकि आप स्टाफ चुनने के कमीशन हैं। कम से कम आप ऐसे वेंडर्स चुनिए, जिनके पास इन्फ्रास्ट्रक्चर है। आप 100 की जगह 500 रुपए ले लीजिए, लेकिन बच्चों को हजार किलोमीटर मत भेजिए। नीतू कहती हैं कि अगर डिजिटल इंडिया के दौर में हम माउस की दिक्कतें बता रहे हैं तो ये मजाक उड़ाने जैसी बातें हैं।‘ प्राइवेट कंपनियों को स्टूडेंट के भविष्य नहीं, सिर्फ अपने फायदे से मतलब प्रोटेस्ट में शामिल हुए एक और टीचर राजेश शुक्ला कहते हैं कि किसी भी एजेंसी को अगर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी दी जाती है, तो उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। वे कहते हैं, ‘अगर कोई गड़बड़ी होती है तो आयोग उस पर कार्रवाई करे। परीक्षा अगर सही से नहीं हो तो रद्द होनी चाहिए। सवाल ये है कि जब पहले भी दिक्कतें और गलती सामने आ चुकी हैं फिर क्या मंशा है कि उसी वेंडर को चुना गया। देश के लिए दुर्भाग्य की बात है कि आजादी के 78 साल बाद भी हम एक एग्जाम प्रोसेस नहीं बना पा रहे हैं।‘ दिल्ली में SSC की तैयारी करवाने वाले टीचर जीत राणा कहते हैं कि एडुक्विटी को टेंडर मिलना चौंकाने वाला था, क्योंकि इसका इतिहास सही नहीं था। राणा कहते हैं, ‘पूरे एग्जाम मैनेजमेंट में बदलाव की जरूरत है। सबसे कम बिडिंग लगाने वाले को आप जिम्मेदारी दे रहे हैं। सिर्फ पैसों के लिए ऐसा नहीं होना चाहिए। सबकुछ देखना चाहिए। इससे बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘सरकार को ग्राउंड स्तर पर देखने की जरूरत है, तब कमियां नजर आएंगी। सिर्फ वैकेंसी या बिड को मंजूरी देने से काम नहीं चलेगा। 15-20 सालों से ऑनलाइन एग्जाम हो रहे हैं। इसके बावजूद सही से एक एग्जाम नहीं हो पा रहा है। जब तक प्राइवेट कंपनियां बीच में आती रहेंगी, वो अपना निजी फायदा जरूर सोचेंगी। उन्हें अपने फायदे से मतलब है, स्टूडेंट्स से नहींं इसलिए इस प्रोसेस में सुधार करने के लिए सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।‘ SSC चेयरपर्सन ने बताया… एडुक्विटी का टोटल स्कोर TCS से ज्यादा, इसलिए मिला टेंडर इस पूरे विवाद पर हमने SSC के चेयरपर्सन एस गोपालकृष्णन से बात की। उन्होंने एडुक्विटी का बचाव करते हुए कहा, ‘ये नया वेंडर है, इसलिए दिक्कतें आ रही हैं। पहले एग्जाम में सेंटर्स की कमी थी, इसलिए स्टूडेंट्स को थोड़ी दूर जाना पड़ा। हालांकि ये अस्थायी समस्या है। आगे ये समस्या नहीं आएगी। बेवजह स्टूडेंट को परेशान करना हमारा काम नहीं है। एक हफ्ते जो परीक्षा हुई, उसमें आखिरी के तीन दिनों में कोई दिक्कत सामने नहीं आई।’ तकनीक में बेहतर पाए जाने के बावजूद TCS को क्यों नहीं रखा गया? उन्होंने जवाब में कहा, ‘हर सरकारी टेंडर QCBS (क्वालिटी एंड कॉस्ट बेस्ड सिलेक्शन) फॉर्मूले से ही पूरा होता है। सिर्फ तकनीकी आधार पर किसी को नहीं चुना जाता है। उन्होंने बताया, ‘टेक्निकल और फाइनेंस वेटेज अलग-अलग हैं। सिर्फ टेक्निकल स्कोर सही रहने से नहीं होता है। पूरा स्कोर देखा जाता है।‘ SSC के नोटिफिकेशन के मुताबिक, किसी भी एजेंसी को चुनने के लिए तकनीकी मूल्यांकन को 70% और खर्च की बिडिंग को 30% प्राथमिकता दी जाती है। कुछ सेंटर पर परीक्षा कैंसिल होने के सवाल पर गोपाल​कृष्णन ने बताया कि निष्पक्ष परीक्षा कराने के लिए ऐसा करना पड़ा, लेकिन तुरंत ही उसी शहर में दोबारा टेस्ट लिया गया। उन्होंने कहा कि आयोग पूरी कोशिश कर रहा है कि आगे ऐसी दिक्कत न हो। हमने एडुक्विटी से भी संपर्क करने की कोशिश की। संपर्क न होने पर हमने ईमेल के जरिए कंपनी को स्टूडेंट्स की समस्याओं पर कुछ सवाल भेजे हैं। जवाब आने पर रिपोर्ट में अपडेट करेंगे। ................................. ये खबर भी पढ़ें... 'मजदूरी करें या बच्चे को 2 किमी दूर स्कूल छोड़ें' 'गांव का स्कूल बंद कर रहे हैं। अब बिटिया को पढ़ने के लिए दो किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। वहां तक जाने के लिए रास्ता भी नहीं है, सिर्फ पगडंडी है। 5-6 साल के बच्चे वहां कैसे पढ़ने जा पाएंगे। हम अपने गांव का स्कूल बंद नहीं होने देंगे।' अलीगढ़ के दौलताबाद गांव में रहने वाले बृजमोहन भतीजी की पढ़ाई को लेकर परेशान हैं। गांव का अकेला प्राइमरी स्कूल बंद होने वाला है। पढ़िए पूरी खबर...
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