‘वे कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को गैरकानूनी तरीके से उठा ले गए। ATS वाले मालेगांव ब्लास्ट नहीं, जाकिर नाईक, फेक करेंसी के रैकेट, दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ी पूछताछ करते रहे। कर्नल आर्मी इंटेलिजेंस में थे और 2005-07 के बीच उन्होंने इन सभी चीजों पर रिपोर्ट बनाई थी। ATS के लोगों ने मालेगांव ब्लास्ट के बारे में कुछ नहीं पूछा, बल्कि इन रिपोर्ट्स के सोर्स के बारे में पूछते रहे।’ कर्नल पुरोहित की पत्नी अपर्णा आज भी ये सब बताते हुए बीच-बीच में इमोशनल हो जाती हैं। वे बातचीत में दावा करती हैं कि कर्नल ने 2008 में एक सीक्रेट ऑपरेशन किया था, इसी के बाद उनके खिलाफ साजिश रची गई थी। उनके साथ थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया। मार-मारकर घुटना तोड़ दिया गया। 17 साल बाद NIA के स्पेशल कोर्ट ने कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा समेत 7 आरोपियों को मालेगांव ब्लास्ट केस से बरी कर दिया। पढ़िए, अपर्णा के साथ दैनिक भास्कर की खास बातचीत… सवाल: कर्नल पुरोहित को हिरासत में लिया गया, उस वक्त आप कहां थीं?
जवाब: शुरुआत में उन्हें कानूनी तौर पर हिरासत में नहीं लिया गया था। 29 अक्टूबर, 2008 की सुबह दिल्ली आर्मी हेडक्वार्टर से इनके एक सीनियर अधिकारी मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में हमारे घर आए थे। उन्होंने कर्नल से कहा कि कुछ पूछताछ करनी है, आपको साथ में दिल्ली चलना होगा। वे उनके साथ चले गए। उन्हें अंदाजा ही नहीं था कि उनके साथ क्या होने वाला है। इसके बाद 5 नवंबर तक मेरा उनसे कोई कॉन्टैक्ट नहीं रहा। 7 दिन तक मुझे नहीं पता था कि उनके साथ क्या हुआ। बाद में पता चला कि 29 अक्टूबर से 4 नवंबर तक यानी 7 दिन तक उन्हें इलीगल कस्टडी में रखा गया। 3 नवंबर को टीवी पर खबर आई कि एक आर्मी कर्नल को अरेस्ट किया गया है। मुझे तब भी लग रहा था कि वे हेडक्वार्टर में हैं। मैं उनके दफ्तर भी गई। पूछने पर मुझे जवाब मिला कि वे हेडक्वार्टर में सुरक्षित हैं। सवाल: आपको कर्नल की गिरफ्तारी के बारे में कब और कैसे पता चला?
जवाब: मुझे ही नहीं, कर्नल के सीनियर्स और आर्मी को भी 4 नवंबर तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। सभी को अंधेरे में रखा गया था। हमें बाद में पता चला कि 29 अक्टूबर को दिल्ली के जो सीनियर अधिकारी कर्नल श्रीवास्तव इन्हें लेकर गए थे, उन्होंने उसी दिन इन्हें महाराष्ट्र ATS को सौंप दिया था। पुरोहित को भी यही लग रहा था कि उन्हें दिल्ली ले जाया जा रहा है, लेकिन एयरपोर्ट पर अचानक उन्हें मुंबई की फ्लाइट में बैठा दिया गया। फैमिली, ऑफिस और सीनियर्स को बिना बताए उन्हें गैरकानूनी तरीके से डीटेन कर लिया गया। हेडक्वार्टर से आए अधिकारी ने हिडन मोटिव के तहत ऐसा किया था। सवाल: आपके मुताबिक उस अधिकारी का हिडन मोटिव क्या था?
जवाब: शुरुआत में हम सब अंधेरे में थे, लेकिन बाद में सभी चीजें सामने आती गईं। जांच में कर्नल के एक सीनियर ने कोर्ट से कहा- ‘मैंने दिल्ली से आए अधिकारी से कहा, आप कर्नल पुरोहित को ले जाइए और पूरी जांच कीजिए।’ उनके इस बयान से हमें समझ आया कि पचमढ़ी में आर्मी हेडक्वार्टर को ये पता था कि कर्नल को दिल्ली ले जाया जा रहा है। आर्मी में नियम होता है कि ऑन ड्यूटी अफसर, जब भी एक से दूसरे स्टेशन जाता है, तो लोकल आर्मी स्टेशन में जाकर इन्फॉर्म करता है। कर्नल को मुंबई में हेडक्वार्टर को इन्फॉर्म करने की भी अनुमति नहीं दी गई। ये सब इसलिए हुआ, क्योंकि ये हिरासत गैरकानूनी थी। ATS ऐसी पूछताछ करने वाली थी, जो गैरकानूनी थी। इसे हिडन मोटिव नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे। 2016 में डिफेंस मिनिस्ट्री की तरफ से NIA के एक सवाल के जवाब में लिखित में ये जवाब दिया गया ये 7 दिन की हिरासत पूरी तरह गैरकानूनी थी। ये डॉक्यूमेंट कोर्ट को भी नहीं दिया गया। सवाल: ATS ने आपको गिरफ्तारी के बारे में कब बताया?
जवाब: 4 नवंबर की सुबह एक फोन आया कि कर्नल पुरोहित को हिरासत में ले लिया गया है। आप नासिक कोर्ट आ जाइए। सोचिए, मुझसे कहा गया कि फौरन आ जाइए। क्या ये पॉसिबल था कि मैं पचमढ़ी से नासिक कोर्ट तुरंत पहुंच जाऊं। मैं उनसे उस दिन भी नहीं मिल पाई। जो भी हो रहा था, वो बेहद हैरान करने वाला था। सवाल: ऐसी खबरें आईं कि मालेगांव ब्लास्ट के आरोपियों को पुलिस ने टॉर्चर किया। क्या कर्नल पुरोहित के साथ भी ऐसा हुआ था?
जवाब: ये थर्ड डिग्री टॉर्चर था। अभी मैं बोल भी नहीं पाऊंगी कि उन्हें क्या-क्या और कैसे टॉर्चर किया गया। इनका घुटना पहले से टूटा था। बहुत ट्रीटमेंट के बाद वो ठीक हुआ था। मार-मारकर वही घुटना फिर से तोड़ दिया गया। मैं अभी नहीं दोहरा सकती। हमने ह्यूमन राइट्स में इसकी शिकायत भी दी थी। सवाल: कर्नल पुरोहित से किस बारे में पूछताछ हो रही थी?
जवाब: कर्नल ने मुझे बताया कि पूछताछ मालेगांव ब्लास्ट के बारे में नहीं हो रही थी। उन पर दबाव बनाया जा रहा था कि ब्लास्ट की साजिश में शामिल हो, ये कबूल कर लो। बाकी पूछताछ इनके सोर्सेज के बारे में हो रही थी। सवाल: कौन से सोर्सेज?
जवाब: मैंने आपको पहले ही बताया कि कर्नल आर्मी इंटेलिजेंस में थे। इन्होंने फेक करेंसी, ISI, जाकिर नाइक और नक्सलवाद पर रिपोर्ट्स तैयार की थी। इन रिपोर्ट्स और सोर्सेज के बारे में ही पूछताछ कर रहे थे। सवाल: ये कौन सी रिपोर्ट्स हैं, आप जिनका बार-बार जिक्र कर रही हैं?
जवाब: फेक करेंसी वाली रिपोर्ट तो अब पब्लिक डोमेन में है। 2007 में जो रिपोर्ट इन्होंने सौंपी थी, 2013 में वो सार्वजनिक हो गई थी। अब तो डिमॉनेटाइजेशन भी हो गया है। फेक करेंसी रैकेट के अलावा एक और कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट थी। उसके बारे में मैं आपको ज्यादा नहीं बता सकती। 2005-07 तक कर्नल ने ये सारी रिपोर्ट सौंपीं थीं। उन्होंने जो ऑपरेशन चलाए थे, उसी से जुड़ी जानकारी को लेकर पूछताछ हो रही थी। ठीक इन ऑपरेशन के बाद इन्हें फंसाया गया। सवाल: कर्नल पुरोहित 9 साल जेल में रहे, इस दौरान आप उनसे मिलने जाती थीं?
जवाब: पुलिस कस्टडी में टॉर्चर हुआ। राहत ये थी कि ज्यूडिशियल कस्टडी में जाने के बाद ये टॉर्चर बंद हो गया। फिर भी वो आजाद तो नहीं ही थे। दूसरी तरफ घर में भी एक जंग चल रही थी। बहुत मुश्किल होता था, बच्चों के सवालों के जवाब देना। मेरा छोटा बेटा 4 साल का और बड़ी बेटी 9 साल की थी। सवाल: बच्चों को समझाना काफी मुश्किल रहा होगा?
जवाब: बच्चे एक ही सवाल पूछते थे कि पापा घर क्यों नहीं आते। बच्चों को कैसे समझाएं कि उन पर इतने गंभीर आरोप लगे थे कि वे घर नहीं लौट सकते। काफी साल तक छोटे बेटे को ये पता ही नहीं था कि पापा जेल में हैं। उसे पता चला तो उसे बड़ा धक्का लगा। मुझे उसकी काउंसलिंग करनी पड़ी, उसे बहुत दुख हुआ था। सवाल: कर्नल पुरोहित पर मालेगांव ब्लास्ट के लिए RDX इकट्ठा करने का आरोप था। कोर्ट में ये आरोप कैसे गलत साबित हुआ?
जवाब: जांच के दौरान एक कर्नल और सूबेदार ने गवाही दी कि शेखर बागड़े नाम के एक ATS अधिकारी को उन्होंने RDX प्लांट करते देखा था। सूबेदार और कर्नल ड्यूटी के दौरान इलाके का चक्कर लगा रहे थे। तब उन्होंने शेखर बागड़े को ऐसा करते देखा था। NIA जांच रिपोर्ट में इन दोनों का स्टेटमेंट है। RDX वाला आरोप रद्द करने में ये गवाही बहुत मददगार रही। सवाल: क्या जांच में ये सामने आया कि शेखर बागड़े ने ये सब किसके कहने पर किया?
जवाब: उनके खिलाफ जांच होनी चाहिए थी। ये पता लगाना जरूरी था कि ये सब क्यों किया गया। मुझे ये नहीं पता कि उनकी जांच हुई या नहीं। सवाल: कर्नल पुरोहित ने आपको कभी बताया कि उनके खिलाफ ये साजिश क्यों और किसने की?
जवाब: हां, वे हमेशा यही कहते थे कि उन्होंने जो रिपोर्ट्स तैयार कीं, उसी की वजह से उनके खिलाफ साजिश रची गई। उन्होंने 2008 में सीक्रेट ऑपरेशन चलाए थे, उन्हीं की वजह से कर्नल को निशाना बनाया गया। सवाल: 17 साल बाद रिहा होने पर कर्नल पुरोहित का पहला रिएक्शन क्या था?
जवाब: ये सब बहुत मुश्किल था। अब तो बस इतना सोचते हैं कि कुछ और न हो, बहुत हो गया। हमारी शादी को 28 साल हो गए हैं, मैं उनके साथ मुश्किल से 7 साल रह पाई। पहले इनकी पोस्टिंग अलग-अलग रही। बाद में 8 साल 10 महीने जेल में बीत गए। चलते-चलते हमारी मुलाकात कर्नल पुरोहित से भी हुई। इस केस के बारे में उन्होंने कुछ भी बोलने से विनम्रता के साथ मना कर दिया। हालांकि आतंकवाद के आरोप से मुक्ति की राहत उनके चेहरे पर नजर आ रही थी। मालेगांव ब्लास्ट केस, जिसमें 6 जानें गईं
17 साल बाद 2008 के मालेगांव बम ब्लास्ट मामले का फैसला 31 जुलाई 2025 को आया। मुंबई की विशेष NIA अदालत ने इस मामले में मुख्य आरोपी रहीं BJP की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित समेत 7 लोगों को बरी कर दिया। स्पेशल कोर्ट के जज एके लाहोटी ने सभी आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए कहा, ‘यह अत्यंत गंभीर मामला है, जिसमें आम नागरिकों की जान गईं, लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए निर्णायक सबूत पेश नहीं कर पाया।’ इस ब्लास्ट में 6 लोगों की जान गई थी और 93 लोग जख्मी हुए थे। कर्नल पुरोहित पर RDX का इंतजाम करने का आरोप था। जांच के दौरान इस आरोप के पक्ष में कोई सबूत नहीं मिला। आरोप को गलत ठहराने वाले दो गवाहों ने अपना स्टेटमेंट दिया। .............................. मालेगांव ब्लास्ट पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए...
विक्टिम बोले- बम फटा, बेटा मरा, नहीं पता गुनहगार कौन मालेगांव के सैयद निसार का बेटा अजहर नमाज पढ़ने निकला था। शाम को लौटते वक्त भीकू चौक पहुंचा। अजहर एक बाइक के बगल से गुजर रहा था, तभी ब्लास्ट हो गया। 19 साल के अजहर के अलावा 5 और लोग मारे गए। उस दिन तारीख थी 29 सितंबर 2008, इसके 17 साल बाद सभी आरोपी बरी हो गए। निसार का सवाल है कि अगर ये आरोपी बेगुनाह हैं, तो उनके बेटे को किसने मारा। पढ़िए पूरी खबर...