‘सरकार मंइयां योजना का प्रचार कर रही है। आप बताइए 1000 रुपए में क्या घर चल सकता है। यहां के बच्चे बेरोजगार घूम रहे हैं। कहीं कोई नौकरी नहीं है। सरकार को चाहिए कि उन्हें नौकरी दे। 5 साल से यहां कुछ नहीं हुआ। हेमंत सोरेन को लगता है कि 1000 रुपए देने से उनकी पार्टी जीत जाएगी, तो ऐसा नहीं है।’ झारखंड के आदिवासी गांव कुट्टे की रहने वाली माना देवी सरकार के काम से खुश नहीं हैं। सरकार चला रही झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए ये इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि मंइयां योजना उसकी सबसे बड़ी योजना है। इसके तहत सरकार 21 से 50 साल की महिलाओं को एक हजार रुपए महीना दे रही है। वहीं, आदिवासियों की जमीनें जाना चुनाव के बड़े मुद्दों में शामिल है। झारखंड के 26% आदिवासी वोटर्स तय करते हैं कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा। इस बार BJP ने मजबूत घेराबंदी की है। पहले BJP ने JMM से चंपाई सोरेन को तोड़ा। गठबंधन में आजसू के साथ JDU और LJP (रामविलास) को जोड़ा। 4 पूर्व CM के रिश्तेदारों को टिकट देकर ट्राइबल सीटों पर ताकत बढ़ाई। वहीं, कांग्रेस चुनाव की सबसे कमजोर कड़ी दिख रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कांग्रेस की सीटें 18 से लुढ़ककर सिंगल डिजिट में आ सकती हैं। झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में से 43 पर पहले फेज में 13 नवंबर को वोटिंग होगी। हार-जीत के लिहाज से ये फेज सबसे ज्यादा अहम है क्योंकि इसमें 20 आदिवासी सीटों पर BJP और JMM की सीधी लड़ाई है। दैनिक भास्कर ने आम लोगों, पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और सीनियर जर्नलिस्ट से बात करके पहले फेज की हवा का रुख समझा। इसमें NDA 16 से 24 सीटों पर मजबूत नजर आ रहा है। BJP 14 से 21, JDU 0-1, आजसू 0-1, LJP (रामविलास) 0-1 सीटें जीत सकती है। वहीं INDIA ब्लॉक 14 से 19 सीटों पर मजबूत है। इसमें JMM 11-15, कांग्रेस 0-4 और RJD 0-1 सीटें जीत सकती है। 4 पॉइंट्स में समझिए पहले फेज में क्या चल रहा है… 1. पहले फेज की 43 सीटों में कोल्हान प्रमंडल की 14 सीटों पर BJP का सबसे ज्यादा फोकस है। 2019 में पार्टी यहां एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। इस बार चंपाई फैक्टर की बदौलत BJP 5 से 6 सीटों पर मजबूत दिख रही है। 2. आदिवासी सीटों पर भाजपा JMM सरकार में हुए करप्शन और बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठा रही है। हालांकि आदिवासियों के बीच घुसपैठ का मुद्दा कम प्रभावी नजर आता है, लेकिन इससे BJP राज्य में हिंदुओं को एकजुट करने में कामयाब होती दिख रही है। 3. कांग्रेस INDIA ब्लॉक में सबसे कमजोर कड़ी दिख रही है। पार्टी के विधायक दल के नेता और कद्दावर मंत्री आलमगीर आलम भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद हैं। हेमंत सरकार के कार्यकाल के दौरान सबसे ज्यादा खतरा कांग्रेसी विधायकों की टूट का बना रहा। दो बार पार्टी के विधायक ब्लैकमनी के साथ पकड़े गए। जमीन पर भी कांग्रेस की कोई खास तैयारी नजर नहीं आती। 4. जीत का नैरेटिव सेट करने के मामले में हेमंत सोरेन बढ़त बनाते दिख रहे हैं। वे अपनी योजनाओं के एग्रेसिव प्रचार के साथ जनता से सीधे जुड़ रहे हैं। वोटर्स को साधने के लिए कल्पना सोरेन भी गांव-गांव कैंपेनिंग कर रही हैं। पार्टी मंइयां योजना, स्कॉलरशिप, 200 यूनिट फ्री बिजली और 25 लाख लोगों को घर जैसी स्कीम्स भुनाने की कोशिश कर रही है। पहले फेज में 333 निर्दलीय, टक्कर NDA और INDIA ब्लॉक में
पहले फेज में 333 निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन फाइट NDA और INDIA ब्लॉक में है। कुछ सीटों पर जयराम महतो की पार्टी JLKM, लोकल पार्टियां और इंडिपेंडेंट कैंडिडेट भी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। दो सीटों विश्रामपुर और छतरपुर में कांग्रेस और RLD के बीच फ्रेंडली फाइट है। झारखंड चुनाव में BJP 68, आजसु 10, JDU 2 और LJP 1 सीट पर लड़ रही है। INDIA ब्लॉक में JMM 43, कांग्रेस 30, CPI(M) 3 और RJD 6 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बड़े चेहरे, जिनकी साख दांव पर पार्टी: BJP
लीडर: चंपाई सोरेन
जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद चंपाई सोरेन 5 महीने CM रहे। वे JMM सरकार में हेमंत सोरेन के बाद नंबर 2 पर थे। 6 बार विधायक रहे हैं। पहले फेज के इलेक्शन में वही सबसे बड़े नेता हैं। हेमंत सोरेन के जेल से आने के बाद चंपाई को CM पद से हटा दिया गया। इससे नाराज चंपाई JMM से 40 साल पुराना रिश्ता तोड़कर BJP में शामिल हो गए। कोल्हान की 14 सीटों पर उनका असर है। 2019 के चुनाव में BJP कोल्हान में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। इस बार चंपाई की बदौलत पार्टी 5-6 सीटें जीत सकती है। पार्टी: JMM
लीडर: महुआ माजी
पहले फेज में झारखंड की राजधानी रांची में BJP और JMM के बीच कांटे की टक्कर है। यहां 1997 से BJP को जीत दिला रहे रहे सीपी सिंह और JMM से राज्यसभा सांसद महुआ माजी आमने-सामने हैं। 2019 में सीपी सिंह ने महुआ को 5,904 वोट से हराया था। इसके बाद JMM ने माजी को राज्यसभा भेज दिया। महुआ झारखंड महिला आयोग की अध्यक्ष रह चुकी हैं। रांची विधानसभा सीट पर राजपूत, कायस्थ और बंगाली वोटर्स की बड़ी आबादी है। इसे देखते हुए JMM ने महुआ को मैदान में उतारा है। पार्टी: कांग्रेस
लीडर: रामेश्वर उरांव
हेमंत सरकार में वित्त मंत्री रामेश्वर ST रिजर्व सीट लोहरदगा से चुनाव लड़ रहे हैं। 2019 में लोहरदगा सीट पर उन्होंने BJP के सुखदेव भगत को 30,242 वोटों से हराया था। रामेश्वर हेमंत सरकार में सबसे अमीर नेता हैं। उनके पास 28 करोड़ रुपए की संपत्ति है। 2004 में उरांव पुलिस सर्विस से VRS लेकर पॉलिटिक्स में आए थे। कांग्रेस के टिकट पर लोहरदगा लोकसभा सीट से जीते। केंद्र में मंत्री भी रहे। 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें BJP के सुदर्शन भगत ने हरा दिया। 2019 में उरांव विधानसभा चुनाव जीत गए। उन्हें हेमंत सरकार में वित्त मंत्री बनाया गया। इस बार उनका मुकाबला फिर सुदर्शन भगत से है। पार्टी: JDU
लीडर: सरयू राय
2019 में मुख्यमंत्री रघुवर दास को हराने वाले सरयू राय इस बार JDU से जमशेदपुर पश्चिमी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 2014 में भी सरयू राय इसी सीट से जीते थे। वे 5 साल रघुवर दास सरकार में मंत्री रहे। इसके बाद BJP छोड़ दी। निर्दलीय चुनाव जीते। 2024 के विधानसभा चुनाव के पहले सरयू राय JDU में आ गए। जमशेदपुर पश्चिमी सीट पर सवर्ण वोटर्स सबसे ज्यादा हैं। इसी वजह से JDU ने सरयू राय को यहां से टिकट दिया है। उनका मुकाबला JMM सरकार में मंत्री बन्ना गुप्ता से है। कांग्रेस के खिसकते वोट बैंक पर BJP की नजर
पॉलिटिकल एनालिस्ट और जर्नलिस्ट आनंद कुमार कहते हैं, ‘पहले फेज की 43 सीटों में 18-19 सीटों पर NDA अच्छी स्थिति में लग रही है। लगभग इतनी ही सीटों पर INDIA ब्लॉक मजबूत है। एक-दो सीटें ऊपर नीचे हो सकती हैं।’ ‘हेमंत सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी नहीं दिख रही है। खासकर JMM के खिलाफ तो बिल्कुल भी नहीं। थोड़ी बहुत परेशानी कांग्रेस की तरफ नजर आती है।’ आनंद कुमार कहते हैं, ‘कांग्रेस नेता धीरज साहू के यहां 350 करोड़ रुपए मिलना हो या फिर मंत्री आलमगीर आलम के करीबियों के घरों से पैसे मिलना। ऐसे में जहां-जहां कांग्रेस लड़ रही है, वहां INDIA ब्लॉक को परेशानी हो सकती है। इसका फायदा BJP को मिलेगा।’ हेमंत का जेल जाना अब BJP को भारी पड़ रहा
आनंद आगे कहते हैं, ‘केंद्र की योजनाओं पर राज्य सरकार की मंइयां योजना भारी पड़ती दिख रही है। खासकर गरीब तबके के लोगों में, जिनके लिए 500-1000 रुपए बहुत मायने रखते हैं। इसका असर सिर्फ आदिवासियों ही नहीं, अल्पसंख्यक महिलाओं में भी है। हेमंत सोरेन पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगे। ED-CBI ने जांच की, लेकिन कुछ साबित नहीं हो पाया।’ ‘हेमंत को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि ED के पास हेमंत के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं है। कोर्ट की इस टिप्पणी को JMM भुना रही है। हेमंत के जेल में रहते हुए पार्टी को कल्पना सोरेन जैसी बड़ी लीडर मिलीं। वे 4-4 भाषाओं में भाषण देती हैं। ये JMM के लिए एक्स्ट्रा एडवांटेज है।’ 28 आदिवासी सीटें तय करेंगी कौन बनेगा CM
झारखंड में आदिवासी समुदाय (ST) के लिए 28 सीटें रिजर्व की गई हैं। इनमें से 20 पर पहले फेज में वोटिंग होगी। ये सीटें ही तय करती हैं कि CM की कुर्सी पर कौन बैठेगा। 2019 के चुनाव में BJP के गठबंधन को 28 में से 26 सीटों पर हार मिली थी। रांची के सीनियर जर्नलिस्ट शंभूनाथ चौधरी कहते हैं, ‘नैरेटिव्स की लड़ाई में हेमंत सोरेन लीड लेते दिख रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण मंइयां योजना है। जमीन पर इस योजना का असर है। सीट-दर-सीट की बात करें तो लग रहा है कि BJP पिछले बार के मुकाबले बेहतर करती दिख रही है, खासकर आदिवासी सीटों पर। पिछली बार पहले फेज में BJP ने 15 सीटें जीती थीं। इस बार वो 20-21 सीटें जीत सकती है।’ बागी बिगाड़ सकते हैं खेल
शंभूनाथ चौधरी कहते हैं, ‘बागियों ने इस बार BJP की परेशानी बढ़ाई है। जमशेदपुर पूर्व, गुमला, हुसैनाबाद में BJP के बागी नेता उसके खिलाफ लड़ रहे हैं। जयराम महतो की पार्टी JLKM, INDIA और NDA दोनों अलायंस को नुकसान पहुंचा सकती है।’ ’BJP ने कई सीटों पर पुराने कैंडिडेट्स का टिकट काटकर पूर्व मुख्यमंत्रियों के घरवालों को उतारा है। रघुबर दास की बहू पूर्णिमा दास को तो राजनीति का अनुभव भी नहीं है, इसके बावजूद उन्हें जमशेदपुर पूर्व सीट से टिकट दिया है।’ ‘अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा, चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन और मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा चुनाव लड़ रहे हैं। इन सीटों पर अब तक BJP के लिए चुनाव लड़ रहे कुछ नेता बागी हो गए हैं। इससे पार्टी के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।’ 2019 की तरह इस बार मुकाबला एकतरफा नहीं
रांची की श्यामा प्रसाद यूनिवर्सिटी में सीनियर प्रोफेसर और पॉलिटिकल एनालिस्ट डॉ. विनय भरत कहते हैं, ’अब तक के सिनैरियो को देखते हुए कहा जा सकता है कि BJP और JMM के बीच सभी सीटों पर कांटे की टक्कर है। पिछली बार की तरह इस बार एकतरफा मुकाबला नहीं रहने वाला।' 'हेमंत ये नैरेटिव सेट करने में कामयाब हुए हैं कि जो BJP के साथ गया वो बेदाग है और जो उसके खिलाफ गया उसे CBI और ED ने जेल में डाल दिया। दूसरी तरफ BJP ने सीट वाइज अच्छे कैंडिडेट खड़े किए हैं। आजसू के साथ आने से NDA मजबूत हुआ है। कांग्रेस के विधायक, नेता और कार्यकर्ता उदासीन लग रहे हैं। ’ पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रही हैं…
JMM: झारखंड की 57 लाख महिलाएं हमारे साथ, कहीं एंटी इनकम्बेंसी नहीं
JMM के महासचिव और स्पोक्सपर्सन मनोज पांडे कहते हैं, ‘हम अपने काम के आधार पर जनता के बीच में जा रहे हैं। JMM की अबुआ आवास और मंइयां योजनाओं का असर दिख रहा है। राज्य में पौने 2 करोड़ लोग योजनाओं का फायदा ले रहे हैं। 57 लाख महिलाओं के खाते में 1 हजार रुपए जा रहे हैं। 40 लाख घरों का बिजली का बिल माफ हुआ है। राज्य में कहीं भी चले जाइए, हमारे खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी नहीं है।’ BJP: 35 आदिवासी महिलाओं को डायन बताकर मारा गया, JMM एक शब्द नहीं बोली
BJP के स्पोक्सपर्सन अविनेश कुमार सिंह का मानना है कि पार्टी 51 सीटें जीत रही है। वे कहते हैं, ‘झारखंड BJP और अटल बिहारी वाजपेयी के संकल्पों के कारण बना था। उस राज्य की आज दुर्गति हो गई है। नौजवान भटक रहे हैं, किसान बेहाल हैं। महिलाओं से रेप की 16 हजार से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं।’ ‘हेमंत सोरेन जेल में थे, तब उनकी पत्नी हेलिकॉप्टर से घूम-घूम कर उनके लिए न्याय मांग रही थीं। एक आदिवासी लड़की संध्या को पशु तस्करों ने गाड़ी से कुचल दिया, संथाल परगना में पहाड़िया जनजाति की बहन को टुकड़ों में काट कर फेंक दिया गया, मगर उनसे एक शब्द नहीं बोला गया।’ ‘झारखंड में 35 आदिवासी महिलाओं को डायन बताकर मार डाला गया। 21वीं सदी में यहां का ये हाल है। जिस प्रदेश को BJP ने बड़ी मशक्कत से गढ़ा, उसे JMM ने भ्रष्टाचार के दलदल में डाल दिया है।’ कांग्रेस: 30 में से 30 सीटें जीतेंगे
झारखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सीनियर लीडर राजेश ठाकुर कहते हैं, ‘कांग्रेस 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और सभी सीटों पर हम जीतते दिख रहे हैं। कितना समर्थन मिलता है, यह वक्त बताएगा।’ गठबंधन को कितनी सीटें मिल सकती हैं? राजेश जवाब देते हैं, ‘हमारा गठबंधन 61 सीटें जीत रहा है। पहले फेज में विश्रामपुर और छतरपुर सीट पर कांग्रेस, JMM और RJD की फ्रेंडली फाइट है। हर स्थिति में हमारे विधायक ही चुनकर आएंगे।’ अब पढ़िए वोटर क्या कह रहे हैं स्टोरी में सहयोग: विश्वास शर्मा, भास्कर फेलो
................................. झारखंड इलेक्शन से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए...
1. हेमंत जिस जमीन के कारण जेल गए, वहां सिर्फ घास, केयरटेकर बोली- CM यहां कभी नहीं आए रांची शहर के बीचोंबीच 31 करोड़ कीमत वाली 8.5 एकड़ जमीन है। इसी जमीन की वजह से CM हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि इस जमीन पर कब्जे की कोशिश की गई और मास्टरमाइंड हेमंत सोरेन हैं। क्रिकेट स्टेडियम के बराबर इस जमीन पर हर तरफ घास उगी है। एक छोर पर मकान और दूसरे छोर पर पहाड़ी है। क्या है जमीन की कहानी, पढ़िए पूरी खबर... 2. 34% आदिवासी वोटर्स वाली सरायकेला सीट पर JMM का किला ढहाएंगे चंपाई 81 सीटों वाले झारखंड में 13 नवंबर को पहले फेज की वोटिंग होनी है। इस फेज में सरायकेला विधानसभा हॉट सीट बनी हुई है। BJP ने यहां 'कोल्हान टाइगर' कहे जाने वाले चंपाई सोरेन को टिकट दिया है। उनके खिलाफ JMM ने BJP के पुराने नेता गणेश महली को उतारा है। यहां सीधा मुकाबला दो बागियों के बीच है। सरायकेला में कौन मजबूत? पढ़िए पूरी रिपोर्ट...